बादल की गड़गड़ाहट

बादल की गड़गड़ाहट

 

धूल भरी आंधी, गर्मी, ज्यादा ठंड ऐसे अनेक प्राकृतिक वातावरण हमें पर्यावरण में देखने को मिलते हैं, लेकिन सावन ! बारिश का एक अनोखा ही आनंद प्रदान करता है।

 

बारिश होने के कुछ क्षण पहले सोंधी की खुशबू जिंदगी में नई जान डाल देती हैं किसानों के मुख पर खुशहाली बच्चों की किलकारियां जोर जोर से बोलता हुआ मोर मानो बारिश का आह्वान कर रहा हो,

आसमान में बड़ी-बड़ी चट्टानों की भांति बादल अलग-अलग आकृति बनाते हुए मानो नाट्य कला का प्रदर्शन कर रहा है लोग इस मौसम का आनंद इस कदर उठाने लगते हैं कि मानो बादलों में से कोई राजकुमार आएगा और खुशियां बरसा के जाएगा।

 

धीरे-धीरे बादल बादल नजदीक आते हैं सोंधी की खुशबू चारों तरफ पैर पसार चुकी होती है आनंद की अनुभूति चरम सीमा पर होती हैं तभी बादल की गड़गड़ाहट शुरू हो जाती है।

 

भयंकर गड़गड़ाहट और बिजली की गिरने की आवाज से बच्चे सहम जाते हैं महिलाएं कपड़ा, चारपाई आदि घर में ले जाती है बारिश की कुछ बूंदों के नीचे मोर की आवाज दब सी जाती हैं।

 

बारिश होने लगती हैं बच्चे दौड़ कर बाहर बारिश में नहाने जाते हैं थोड़ी देर पानी में दौड़ते हैं और फिर बादल की गड़गड़ाहट समझो रास्ते के बीच कोई पत्थर गिर गया हो।

 

बादलों की तेज गड़गड़ाहट बच्चों को पानी में खेलने से इस कदर रोक देती है जैसे कैदी को सैनिक रोक लेते हैं लगभग 2 घंटे तक रिमझिम रिमझिम बारिश चलती रहती है,

और फिर एकाएक बादल बिखरने लगते हैं अब बाकी सारी आवाज बंद हो गई और मेंढक की टर् र् र् र् की आवाज कानों में गूंजने लगती है बच्चों के मन में वही सवाल बारिश के बेहतरीन मौसम के बीच बादल की गड़गड़ाहट जरूरी है क्या ?

 

संजय डारा बिश्नोई पता सांचौर जालोर राजस्थान

 

Conclusion

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