भगवान विष्णु के 10 अवतार कौन-कौन सी है ? – The 10 Incarnations of Lord Vishnu

भगवान विष्णु के 10 अवतार – Hello दोस्तों, हिन्दू शास्त्रों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि की रचना ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों भगवान ने मिलकर की है। जहां भगवान ब्रह्मा को सृष्टि का रचनाकार और भगवान विष्णु को पालनहार माना जाता है तो वहीं भगवान शंकर को दुष्टों का संहारकर्ता कहा गया है। ऐसे में जिस भी युग में धरती पर बुराई ने आतंक मचाया, तब भगवान ने पृथ्वी लोक पर विभिन्न अवतार लिए और अधर्म का नाश किया।

 

अवतार का सरल अर्थ क्या है ?

अवतार संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका तात्पर्य है भगवान द्वारा धरती पर जन्म लेना।

 

हंस: कूर्मश्च मत्स्यश्च प्रादुर्भावा द्विजोत्तम,
वराहो नरसिंहश्च वामनो राम एव च,
रामो दाशरथिश्चैव सात्वत: कल्किरेव च।।

 

हिंदु धर्म के पवित्र ग्रंथ महाभारत के मुताबिक, सृष्टि पर धर्म के उत्थान के लिए भगवान विष्णु ने अब तक 24 अवतार लिए हैं। जिनमें से भगवान श्री राम, कृष्ण, नरसिंह, बुद्ध, कल्कि, कूर्म, वराह, वामन, परशुराम, मत्स्य आदि भगवान विष्णु के 10 प्रमुख अवतार हैं।

 

 

भगवान विष्णु के 10 अवतार कौन कौन सी है ? – The 10 Incarnations of Lord Vishnu

 

 

1. भगवान विष्णु का कूर्म (कछुआ) अवतार

एक धार्मिक कहानी के अनुसार, महर्षि दुर्वासा ने किसी कारणवश इंद्र देवता को श्राप दे दिया था। उसी समय देवता और दैत्य मिलकर समुन्द्र मंथन करने जा रहे थे। ऐसे में श्रापयुक्त होने के कारण इंद्र देवता ने भगवान विष्णु से समुन्द्र मंथन के लिए मदद मांगी। जिस पर भगवान विष्णु ने समुन्द्र मंथन के समय देवताओं और दैत्यों की मदद की थी। समुन्द्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को मथानी और नागराज वासुकि को नेती का दर्जा दिया गया था।

 

दूसरी ओर, जब देवता और दैत्यों ने मिलकर मंदराचल पर्वत को साथ ले जाने की कोशिश की तो वह उसे अधिक दूर तक संभाल ना सके और नीचे कोई ठोस आधार ना होने के कारण मंदराचल पर्वत डूबने लगा। जिस पर भगवान विष्णु ने कूर्म (कछुआ) का अवतार ले लिया और अपनी पीठ को आधार बनाकर मंदराचल पर्वत को डूबने से बचा लिया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने समुन्द्र मंथन के समय कूर्म का अवतार लिया था। जिसे कच्छप अवतार भी कहा जाता है।

 

 

2. भगवान विष्णु का मत्स्य (मछली) अवतार

पुराणों में वर्णित एक धार्मिक कथा के अनुसार, कृतयुग के प्रारंभ में एक राजा सत्यव्रत हुआ करते थे। जोकि एक बार नदी में स्नान करने गए थे। उसी समय जलांजलि के दौरान उन्हें एक छोटी सी मछली मिलीं। जिसे उन्होंने पुनः नदी में डालने की सोची लेकिन तभी उस छोटी मछली ने राजा से विनती की। राजा उसे दुबारा नदी में नहीं डालें अन्यथा बड़ी मछलियां उसे खा जाएंगी।

 

जिसके बाद राजा सत्यव्रत ने उस छोटी मछली को अपने कमंडल में सुरक्षित रख लिया। फिर कुछ दिनों बाद जब मछली बड़ी हो गई। तब राजा ने उसे अपने राजमहल के सरोवर में डाल दिया। देखते देखते मछली अपने आकार से बड़ी होने लगी। जिस पर राजा सत्यव्रत को थोड़ा आश्चर्य होने लगा और फिर उन्हें समझ आ गया कि यह कोई साधारण मछली नहीं है।

 

राजा सत्यव्रत ने उस मछली से विनती की। वह अपने वास्तविक रूप में आ जाएं। तब वहां मछली की जगह भगवान विष्णु प्रकट हो गए। तब उन्होंने राजा सत्यव्रत से कहा कि मैंने धरती को प्रलय से बचाने के लिए मत्स्य का अवतार लिया है। ऐसे में सात दिन बाद प्रलय के समय तुम सप्त ऋषियों, औषधियों, बीजों और प्राणियों के सूक्ष्म शरीर के साथ मेरी नाव में बैठ जाना और नाव को वासुकि नाग की सहायता से मेरे सींग में बांध देना।

 

फिर तुम मुझसे कोई प्रश्न करना और मेरे उत्तर देते ही मेरी महिमा तुम्हारे हृदय में प्रकट होने लगेगी। इस प्रकार भगवान विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए मत्स्य का रूप धारण किया था। इनके उपरोक्त अवतरण पर मत्स्य पुराण भी लिखा गया है।

 

 

3. भगवान विष्णु का वराह अवतार

हिंदू शास्त्रों में वर्णित एक धार्मिक कहानी के अनुसार, प्राचीन समय में हिरण्याक्ष नाम के दानव ने पृथ्वी को समुद्र में ले जाकर छुपा दिया था। जिसके बाद भगवान ब्रह्मा की नाक से भगवान विष्णु ने वराह का अवतार लिया और अपनी थूथनी के माध्यम से पृथ्वी की खोज शुरू कर दी।

 

फिर भगवान विष्णु के वामन अवतार ने समुन्द्र से पृथ्वी को ढूंढकर उसे अपने दांतों से बाहर निकाल लिया। जिसके बाद राक्षस हिरण्याक्ष और भगवान विष्णु के वराह अवतार के मध्य भीषण युद्ध हुआ।

 

जिसके अंत में भगवान विष्णु ने दानव हिरण्याक्ष का वध कर दिया और अपने खुरों से जल को भेदकर पृथ्वी को उस पर स्थापित कर दिया। कहते है भगवान विष्णु के वराह अवतार की स्तुति देवतागण भी करते हैं। इस प्रकार पृथ्वी को दानव के चंगुल से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वराह रूप धारण किया।

 

 

4. भगवान विष्णु का नृसिंह अवतार

धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार एक राक्षसी राजा हिरण्यकशिपु था। जिसे अमरत्व का वरदान मिला था। ऐसे में उसे ना तो भगवान का भय था और ना ही ईश्वरीय ताकतों का। इतना ही नहीं उसके राज्य में जो भी भक्त भगवान विष्णु की पूजा करता था वह उसे दंडित करता था।

 

राजा हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था लेकिन जब राजा हिरण्यकशिपु को इस बात की भनक लगी तो उसने अपने पुत्र को भी मृत्युदंड दे दिया।

 

ऐसे में राजा हिरण्यकशिपु की बहन होलिका जिसे अग्नि से ना जलने का वरदान मिला हुआ था। वह राजा के पुत्र प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई। भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद तो बच गया लेकिन होलिका आग में जलकर राख हो गई।

 

गुस्से में राजा हिरण्यकशिपु जब अपने पुत्र प्रहलाद को मारने के लिए आगे बढ़े कि तभी भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लेकर प्रहलाद के प्राणों की रक्षा की। भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लेकर राजा हिरण्यकशिपु का भी वध कर दिया। इस प्रकार धरती पर अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह का अवतार लिया था।

 

 

5. भगवान विष्णु का वामन अवतार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार स्वर्गलोक पर प्रहलाद के पौत्र दैत्यराज बलि ने अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया था। जिस पर स्वर्गलोक के सभी देवता भगवान विष्णु के पास उपरोक्त समस्या का समाधान मांगने पहुंचे।

 

तब भगवान विष्णु ने सभी देवताओं से कहा कि वह देवमाता अदिति के गर्भ से वामन का अवतार लेकर स्वर्गलोक को दैत्यराज बलि के चंगुल से आजाद कराएंगे। जिसके बाद भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया।

 

एक बार जब दैत्यराज बलि यज्ञ कर रहा था कि तभी भगवान विष्णु ने वामन अवतार में बलि से तीन पग धरती दान में मांग ली। हालांकि दैत्यराज बलि के गुरु शुक्राचार्य भगवान विष्णु को पहचान गए थे लेकिन बलि ने फिर भी भगवान विष्णु के आग्रह करने पर उन्हें तीन पग धरती दान में दे दी।

 

जिस पर भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर अपना पहला पग धरती पर, दूसरा स्वर्गलोक और तीसरा पग दैत्यराज बलि के सिर पर रख दिया। जिससे दैत्यराज बलि सुतललोक पहुंच गया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने स्वर्गलोक को बचाने के लिए वामन अवतार लिया और दैत्यराज बलि की दानवीरता से प्रसन्न होकर उसे सुतल लोक का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

 

 

6. भगवान विष्णु का श्री राम अवतार

धार्मिक स्रोतों के अनुसार, भगवान विष्णु ने त्रेतायुग में लंकापति नरेश रावण का वध करने के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का अवतार लिया था। जहां अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में भगवान विष्णु ने श्री राम के रूप में जन्म लिया था और पिता की आज्ञानुसार 14 वर्षों का वनवास काटा था।

 

इसी दौरान अपनी पत्नी माता सीता के हरण के पश्चात् श्री राम, लक्ष्मण, हनुमान और वानरों की सेना के साथ लंका गए थे और वहां जाकर उन्होंने भगवान शंकर के परम भक्त रावण को मारकर धरती से बुराई का अंत किया था।

 

भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के वनवास से लौटने के बाद अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में दीए जलाए थे तभी से भारतवर्ष में हर वर्ष दीवाली का त्योहार भी मनाया जाता है। दीवाली के दिन भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री राम की पूजा की जाती है।

 

 

7. भगवान विष्णु का श्री कृष्ण का अवतार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,
द्वापरयुग में भगवान विष्णु ने कंस का वध करने के लिए श्री कृष्ण का अवतार लिया था। श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में देवकी और वासुदेव के यहां हुआ था लेकिन श्री कृष्ण की परवरिश गोकुल में यसोधा माता ने की थी।

 

जहां बचपन में ही भगवान श्री कृष्ण ने अपनी चमत्कारी शक्तियों से कई सारे राक्षसों का वध कर दिया था। इस प्रकार कंस जैसे ताकतवर राक्षस को मारने के लिए भगवान विष्णु ने श्री कृष्ण का अवतार लिया था। दूसरी ओर महाभारत के युद्ध में धर्म की लड़ाई के लिए भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने पांडव अर्जुन का सारथी बनकर युद्ध में प्रतिभाग किया था।

 

 

8. भगवान विष्णु का परशुराम अवतार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,
प्राचीन समय में महिष्मति पर हैययवंशी क्षत्रिय कार्तवीर्य अर्जुन का अधिकार हुआ करता था। जोकि बहुत अभिमानी और अत्याचारी शासक हुआ करता था। एक बार अग्निदेवता ने क्षत्रिय राजा से भोजन का निवेदन किया।

 

जिस पर क्षत्रिय राजा ने अग्निदेव से कहा कि चहुं ओर मेरा ही शासन है। आप जिधर चाहे वहां से भोजन ग्रहण करें। जिसपर अग्नि देवता ने वनों को जलाना शुरू कर दिया। इसी दौरान ऋषि अपाव का आश्रम भी जलकर राख हो गया।

 

तब क्रोधित ऋषि ने क्षत्रिय राजा को श्राप दिया कि उसका वध भगवान विष्णु के अवतार परशुराम के द्वारा होगा। इतना ही नहीं ऋषि अपाव ने समस्त क्षत्रिय वंश के सर्वनाश का ऐलान कर दिया था। इस प्रकार क्षत्रिय राजा के अभिमान को चूर चूर करने के लिए भगवान विष्णु ने भार्गव कुल में महर्षि जमदग्रि के पुत्र के रूप में धरती पर जन्म लिया।

 

 

9. भगवान विष्णु का बुद्ध अवतार

हिन्दू धर्म में वर्णित शास्त्रों के अनुसार, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक गौतम बुद्ध भी भगवान विष्णु का ही अवतार माने जाते हैं। दूसरी ओर, एक धार्मिक कहानी के मुताबिक, जब स्वर्गलोक से लेकर धरती लोक पर राक्षसों का आतंक बढ़ गया था तब देवताओं ने इंद्र देव से अपना साम्राज्य बचाने के लिए मदद मांगी।

 

जिस पर इंद्र देव ने देवतागणों को यज्ञ करने और वेद विदित आचरण का पालन करने की बात कही। तत्पश्चात सारे देवतागणों ने इंद्र देवता की आज्ञा का पालन किया और स्वयं की शक्ति को बढ़ा लिया।

 

इसके बाद सभी देवता भगवान विष्णु की शरण में पहुंचे। जहां भगवान विष्णु ने राक्षसों से देवताओं की रक्षा के लिए बुद्ध का अवतार लिया। इस दौरान उनके हाथ में मर्जनी थी।

 

भगवान विष्णु ने बुद्ध का अवतार लेकर दैत्यों को बताया कि यज्ञ करने से जीव हिंसा को बढ़ावा मिलता है और इसमें मौजूद अग्नि के संपर्क में आने से लाखों सूक्ष्म जीवों की हत्या होती है। बुद्ध की बातों से प्रभित होकर दैत्यों ने यज्ञ करना छोड़ दिया और इससे उनकी शक्ति क्षीण होने लगी। इस प्रकार देवताओं को दानवों के संहार से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने बुद्ध का अवतार लिया।

 

 

10. भगवान विष्णु का कल्कि अवतार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु कलियुग के अंत और सतयुग के प्रारंभ में 64 कलाओं से युक्त कल्कि का अवतार लेंगे। धार्मिक स्रोतों की मानें तो भगवान विष्णु कल्कि का अवतार उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के संभल में विष्णुयशा नामक तपस्वी के घर में लेंगे। तत्पश्चात् भगवान विष्णु के अवतार कल्कि देवदत्त नामक घोड़े पर बैठकर कलियुग का विनाश करेंगे और धर्म की स्थापना करते हुए सतयुग की नींव डालेंगे।

 

 

Conclusion –

 

इस प्रकार भगवान विष्णु ने तीनों लोकों में बुराई का सर्वनाश करने के लिए समय समय पर विभिन्न अवतार लिए।

 

हिन्दु धर्म के पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भागवत गीता के अध्याय चार के 7 एवं 8 श्लोकानुसार:-

 

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे।।

 

भावार्थ –

पृथ्वी लोक पर जब जब धर्म पर संकट गहराता है, तब मैं (भगवान विष्णु ) धर्म की पुनः स्थापना के लिए, दुष्टों का संहार करने और सज्जन लोगों के जीवन की रक्षा करने के लिए धरती पर अवतरित होता हूं।

 

 

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*Author Note –

दोस्तों ये जो भगवान विष्णु के 10 अवतार के आपने पढ़ा है, इसको हमारे एक दोस्त ने लिखा है जो Gurukul99.com के टीम मेंबर है जिसका नाम है अंशिका जौहरी और वे अपने ब्लॉग में अपने साथीओ के साथ बहुत ही यूनिक स्पिरिचुअल, धर्म और मोटिवेशनल टॉपिक के ऊपर लिखते हैं। ये आर्टिकल इतना अच्छा एक्सप्लेनेशन के साथ उन्होंने ही हमारे रीडर्स के लिए भेजा है मतलब आपके लिए। उनको हमारी थॉटइनहिंदी फॅमिली की तरफ से शुभकामनाएं और धन्यवाद देते हैं, और दोस्तों एक बार आप भी उनके ब्लॉग जरूर विजिट करें।

 

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