मंत्र विज्ञान | Science Behind Mantras

मंत्र विज्ञान – Hello दोस्तों, आपमें से ज्यादातर लोग प्राचीन विज्ञान को अति उन्नत मानते होंगे, लेकिन आपको ये पता नहीं होगा कि हम उसे उन्नत कैसे मानते हैं। देवताओं की कहानियां या प्राचीन अस्त्र आखिर वो क्या रहश्य है जो इसे इतना एडवांस बनाती है। तो आपको मैं बता दूँ कि उस समय में यूनिवर्स और मटेरियल की जानकारी शायद आज से ज्यादा थी।

 

आज हम भले ही इतनी ही जानकारी रखते हैं कि सनातन धर्म का अर्थ है हमारी संस्कृति और हमारा भगवान का मानने को तरीका। लेकिन मैं इस आर्टिकल के लास्ट तक आपको गलत साबित कर दूंगा और आपकी सनातन धर्म की समझ बदल दूंगा। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

मंत्र विज्ञान

 

आपको पता ही होगा कि इस समय दुनिया के बड़े बड़े रिसर्च इंस्टीटूट मॉडर्न टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। और आप यही सोचते होंगे कि यही भविष्य है। एडवांस टेक्नोलॉजी को दुनिया के सामने लाके।

 

लेकिन आपको ये जानकारी नहीं होगी की दुनिया में ब्रेन रिसर्च इंस्टीटूट कितनी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं, जिसमें इस बात पर रिसर्च हो रही है कि हमारा दिमाग कैसे काम करता है और हम इसकी क्षमता को कैसे और ज्यादा बढ़ा सकते हैं।

 

ये बिलकुल उसी तरह है जैसे आज हम कंप्यूटर में एडवांस प्रोसेसर का यूज़ करते हैं, तभी वो इतना फ़ास्ट हुआ है।

 

हम भी अपने दिमाग को ज्यादा तेज करके ही एडवांस इन्वेंशंस कर सकते हैं।

 

अगर हमारे साइंटिस्ट का दिमाग तेज ना हो तो हम भी नई इन्वेंशंस नहीं कर पाएंगे।

 

आज मॉडर्न रिसर्च में ये माना जाता है की हमारा ब्रह्माण्ड फ्रीक्वेंसी जेनेरेट करता है। इसमें बनी हर चीज एक अलग वेव्स छोड़ती है।

 

हमारे कानों की क्षमता कुछ वेव्स को ही सुनने की है। हर वक़्त हर समय यही वेव्स प्रोड्युस होती हैं।

 

हमारी पृथ्वी भी वेव्स प्रोड्युस करती हैं जो हमे कम्फर्टेबल रखती हैं, तभी अंतरिक्ष यात्री धरती ऑर्बिट के बाहर अजीब महसूस करते हैं।

 

हम इस समय दुनिया के सबसे कॉम्प्लेक्स मकानिस्म को जानते हैं तो वो है हमारा ब्रेन। जो 5 तरह की वेव्स प्रोड्युस करता है –

 

  1. गामा वेव्स
  2. बीटा वेव्स
  3. अल्फा वेव्स
  4. थीटा वेव्स
  5. डेल्टा वेव्स

 

इसी 5 वेव्स के जरिये हमारा दिमाग प्रोसेसिंग करता है।

 

 

बीटा वेव्स

 

हमारा दिमाग ज्यादा समय बीटा स्टेट में रहता है, जिसमें हमारे दिमाग में 24 घंटे में 72 हज़ार थॉट्स आती हैं यानी हमारा दिमाग चलता ही रहता है और हम इसका बेस्ट यूज़ नहीं कर पाते।

 

आप खुद ही सोचिये हर वक़्त आप अपने दिमाग में कुछ न कुछ सोचते ही रहते होंगे, जो आपको परेशान करता होगा। यही कारण होता है डिप्रेशन और एंग्जायटी का।

 

यही वर्थिंकिंग हमे स्लो कर देती है। और हम कंसन्ट्रेट नहीं कर पाते।

 

 

अल्फा वेव्स

 

इसके बाद होती है अल्फा वेव्स – ये तब प्रोड्युस होती हैं जब हम पूरी तरह से कंसन्ट्रेटेड होते हैं। इस स्टेट में हमारे दिमाग में 24 घंटे में 30 – 40 हज़ार थॉट्स आते हैं।

 

इसका मतलब अपना दिमाग डबल हो जाना है।

 

बड़े बड़े साइंटिस्ट आइन्स्टीन, निकोला टेस्ला जैसे इंसान स्टेट में पहुँच जाते हैं। जिसमें हमारी क्षमता अपार हो जाती है। इस स्टेट में दिमाग इतना कंसन्ट्रेटेड हो जाता है की आपको कोई रोक नहीं सकता।

 

एक योगी जो बहुत ज्यादा मैडिटेशन करता हो वो अल्फा या उसके कम की फ्रीक्वेंसी में रहता है।

 

 

थीटा वेव्स

 

थीटा वेव्स में हमारी थॉट्स हमारी ही कण्ट्रोल में होते हैं। यानी थॉटलेस स्टेट में पहुँच जाना। यही पर हम अपने दिमाग को पॉज या प्ले कर सकते हैं।

 

ये सुपर कॉन्ससियसनेस्स का गेटवे होता है। यानी अनंत ज्ञानमय महसूस होना।

 

 

डेल्टा वेव्स

 

ये ब्रेन वेव्स तब प्रोड्युस होती है जब हम सो रहे होते हैं। इसमें हमारी चेतना नहीं होती। अगर हम डीप मैडिटेशन करके इस स्टेट को हासिल कर लें तो हम समाधी में चले जाते हैं।

 

सोते वक़्त हम बाहरी दुनिया से अवेयर नहीं होते, जब कि समाधी में हम ब्रह्माण्ड के हर तत्त्व से अवेयर होते हैं।

 

श्रीमद भागवद गीता में श्री कृष्ण ने कहा है की माया से ज्ञान की आंखे बंद होते हैं, लेकिन ये खुलने पर हमे सच का पता लग ही जाता है। यानी हम खुद को ब्रह्माण्ड का छोटा सा भाग समझते हैं।

 

लेकिन हर भाग एक दूसरे से जुड़ा है। हमारा ब्रह्माण्ड अगर बड़े स्तर पर देखें तो उसकी संरचना हमारे दिमाग जैसी ही है।

 

जैसे हमारे दिमाग में ब्रेन वेव्स होती हैं, ब्रह्माण्ड में भी ऐसा ही होता है। जैसे दिमाग का एक छोटा भाग भी काम ना करे तो पूरा दिमाग बंद पर जाता है, वैसे ही हम ब्रह्माण्ड का छोटा सा भाग होते हुए भी जरुरी भाग हैं।

 

इसी समाधी में हम इस हायर कॉन्ससियसनेस्स स्टेट में पहुँच जाते हैं। हम ब्रह्माण्ड से संवाद कर पाते हैं।

 

सही फ्रीक्वेंसी की साउंड वेव्स दिमाग को हिट करने पर हम इसका फायदा पा सकते हैं। ये होती है binaural बीट्स।

 

 

सनातन धर्म

 

अब बात करता हूँ सनातन धर्म की – तो जिस कॉन्सेंट्रेशन को बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक मैडिटेशन के ऊपर ज्यादा काम कर रहे हैं वो सनातन धर्म की देन है।

 

इसमें अलग अलग देव-देवीयों के बारे में बताये गए हैं यानी शक्ति के देवी दुर्गा माँ, ज्ञान के लिए देवी सरस्वती माँ, धन के लिए देवी लक्ष्मी माँ।

 

लेकिन हम सोचते हैं कि उनसे बात कैसे करें ! उन तक कैसे पहुंचे ! तो इसका जवाब पूजा-पाठ से नहीं बल्कि मंत्रों से मिलता है।

 

जिसकी साउंड वेव्स दिमाग को अलग हिट करती है। इसी कारण वेदों में कहा गया है हम ब्रह्माण्ड से जो मांगते हैं हमें वही मिलता है।

 

इन मंत्रो का सही उच्चारण दिमाग को हायर कॉन्ससियसनेस्स से उसी जरुरत के लिए जोड़ता है, यही है सनातन धर्म, यानी सिर्फ हमारा भगवान मानने का अलग तरीका हमे ये बनाता बल्कि हमारा प्राचीन ज्ञान और उससे मानना हमे सनातनी बनाता है।

 

 

Conclusion

 

दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको मंत्र विज्ञानं के बारे पता चल गया होगा। कि मंत्र कैसे हमारे दिमाग में काम करता है और कैसे मंत्र हमे हमारी भगवान से मिलाते हैं।

आपको आज का यह आर्टिकल कैसा लगा ?

अगर आपके मन में कुछ भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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