स्वस्थ रहने के 70 नियम – Health Tips in Hindi

स्वस्थ रहने के नियम (Daily Health Tips in Hindi) – Hello दोस्तों, आजकल सभी लोग अपने और अपने परिवार के स्वस्थ के प्रति बहुत सजग हो रहे हैं, लेकिन फिर भी उनको ये नहीं पता होता है की स्वस्थ रहे तो रहे कैसे ? बाजार में तो स्वस्थ रहने के कोई भी चीज नहीं मिलता है, 90% चीजें तो हमारी बॉडी को बीमार करने के लिए लगी पड़ी हैं।

 

तो आज मैं आपके लिए बहुत ही रिसर्च करने के बाद एक ऑथेंटिक सोर्स से कुछ नियम जो आपको डेली लाइफ में फॉलो करना चाहिए उसको लेके आया हूँ, अगर आप इन सारे चीजों को अपने डेली रूटीन में अपना हैबिट जैसा बना लें तो आप 100 साल तक स्वस्थ शरीर के साथ खुश रह पाएंगे।

 

तो चलिए शुरू करते हैं –

 

स्वस्थ रहने के 70 नियम Health Tips in Hindi

 

अपने या अपने परिवार में स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रखने हेतु सभी सदस्य को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, जो आपको नीचे बताया गया है।

 

लेकिन एक बात ध्यान रहे की ये जो नियम है ये सिर्फ स्वस्थ व्यक्तियों के लिए ही बनाये गए हैं जिससे उनका स्वस्थ्य अक्षुण्ण बना रहे। रोग की परिस्थिति में इन नियमों का यथासम्भव बदलाव किया जा सकता है, और हो सके तो रोग ठीक होने के बाद ही इसे try करें –

 

1. सुबह जल्दी उठो और 2 – 3 मील (2 – 3 किलोमीटर) रोज टहलो। संभव हो तो शाम को भी थोड़ा टहलो।

2. भोजन के साथ पानी कम से कम पीओ। दोपहर के भोजन के घंटे भर बाद पानी पियें। भोजन यदि कड़ा और रूखा हो तो 2 – 4 घूंट पानी अवश्य पियें।

3. रात्रि जागरण से वात की वृद्धि होती है, जिससे शरीर रुक्ष होता है। बैठे बैठे थोड़ी झपकी लेना स्वास्थ के लिए अच्छा है।

4. दिन में 2 बार मुँह में जल भरकर, नैत्रों को शीतल जल से धोना नेत्र दृष्टि के लिए लाभकारी है।

5. नहाने से पूर्व, सोने से पूर्व एवं भोजन के पश्चात् मूत्र त्याग अवश्य करना चाहिए। यह आदत आपको कमर दर्द, पथरी तथा मूत्र सम्बन्धी बीमारियों से बचाती है।

6. भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

7. स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति को मूत्र, मल, शुक्र, अपानवायु, वमन, छींक, डकार, जंभाई, प्यास, आँसू, नींद और परिश्रमजन्य श्वास के वेगों को उत्पन्न होने के साथ ही शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए।

8. कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।

9. हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।

10. दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है।

11. सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि व्यायाम को मौजमस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।

12. अगर बाहर जाकर व्यायाम करना संभव न हो तो संगीत की धुन पर 10 मिनट डांस करिए।

13. प्रातः उठते ही खूब पानी पीओ। दोपहर भोजन के थोड़ी देर बाद छाछ और रात को सोने के पहले उष्ण दूध अमृत समान है।

14. बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।

15. ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।

16. व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।

17. सुबह का नास्ता सुपाच्य और पौष्टिक होना चाहिए। सुबह में नास्ते की आदत अवश्य डाले।

18. भोजन करने से पूर्व हाथ की अच्छी तरह से साफ कर लेना नितांत आवश्यक है। वैसे भी कोरोना से बचना ही है ना!

19. ठूस ठूस कर खाने से बचना चाहिए। हमेश भोजन भूख से कम ही करना बेहतर है।

20. भोजन हमेशा शांतचित होकर करना चाहिये। प्रत्येक निवाला को खूब चबा चबाकर खाना चाहिए।

21. भोजन करने के क्रम में बार बार पानी नही पीनी चाहिये। आवश्यकता के अनुसार दो-चार घूंट पी सकते हैं। भोजन करने के लगभग 45 मिनट बाद ही पानी पीनी चाहिये। एक बात और भोजन से पहले भी पानी का सेवन न करे,नही तो जठराग्नि मंद पड़ जाती है।

22. सुलभता के अनुसार भोजन में सलाद, हरी साग-सब्जी, और मौसमी फलो का सेवन करना चाहिए।

23. भोजन के अंत में मठ्ठा का सेवन भी पाचन के लिए लाभप्रद है।

24. भोजन के बाद हाथ और दाँतों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिये। भोजन के बाद लघुशंका कर थोड़ी देर टहलना भी चाहिए।

25. भोजन करते समय ढीले ढाले वस्त्रों को ही धारण करना चाहिए।

26. तनावमुक्त होकर तथा मन व शरीर शांत रखकर व्यायाम करें।

27. इस हकीकत को स्वीकारें कि हमेशा युवा नहीं रह सकतीं। चाहे दिन रात व्यायाम करें। बढ़ती उम्र को गर्व से स्वीकार करें।

28. अच्छे स्वास्थ्य और लंबी जिंदगी के लिए योगाभ्यास तो जरूरी है ही पर इसके अतिरिक्त कुछ सामान्य नियमों और सावधानियों का पालन भी आवश्यक है। इन नियमों-सावधानियों व जानकारियों के पालन से दिनचर्या व्यवस्थित होने लगती है और हम लंबे समय तक युवा बने रह सकते हैं।

29. प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठने का नियम बनाएं। इसके लिए रात में जल्दी सोने की आदत डालें। सुबह उठने के बाद शौचादि से निवृत्त होकर ऊषापान करें। ऊषापान के लिए रात में पानी तांबे के बर्तन में भर कर रख दें और सुबह उसमें से लगभग दो गिलास पानी खाली पेट पीएं। सर्दी के मौसम में पानी थोड़ा गुनगुना कर लें।

30. सूर्योदय से पहले ही नित्यकर्म से निवृत्त होकर खुले वातावरण में जाकर योगाभ्यास करें।

31. अपनी दिनचर्या में शारीरिक श्रम को महत्व दें। कई रोग इसीलिए पैदा होते हैं, क्योंकि हम दिमाग से अधिक और शरीर से कम काम लेते हैं। आलस्य त्यागकर पैदल चलने, खेलने, सीढ़ी चढ़ने, व्यायाम करने, घर के कामों में हाथ बंटाने आदि शारीरिक श्रम वाली गतिविधियों में लगें।

32. दिन में कम से कम दो लीटर पानी अवश्य पीओ।

33. भूख लगने पर ही भोजन करें। जितनी भूख हो, उससे थोड़ा कम खाएं। अच्छी तरह चबा कर खाएं। दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने का स्वभाव छोड़ दें। दूध, छाछ, सूप, जूस, पानी आदि तरल पदार्थों का अधिकाधिक सेवन करें।

34. प्रकृति के नियमों के अनुरूप चलें, क्योंकि ‘कुदरत से कुश्ती’ करके कोई निरोगी नहीं हो सकता।

35. प्रतिदिन योगाभ्यास का नियम बनाएं।

36. भोजन पौष्टिक हो और सभी आवश्यक तत्वों से भरपूर होना चाहिए।

37. मिष्ठान, पकवान, चिकनाई व अधिक मसालों के इस्तेमाल से परहेज करें।

38. सोने, जागने व भोजन का समय निश्चित करें और साफ-सफाई का हर हाल में ध्यान रखें।

39. बढ़ती उम्र के साथ यदि यह भाव मन में घर कर गया कि मैं बूढ़ा हो रहा हूं, तो व्यक्ति अपने इसी मंतव्य के कारण जल्दी बूढ़ा होने लग जाता है।

40. शरीर का वजन न बढ़ने दें। इसके लिए अधिक भोजन से बचे और योग जरूर करें।

41. क्रोध, चिंता, तनाव, भय, घबराहट, चिड़चिड़ापन, ईर्ष्या आदि भाव बुढ़ापे को न्यौता देने वाले कारक हैं। हमेशा प्रसन्नचित्त रहने का प्रयास करें। उत्साह, संयम, संतुलन, समता, संतुष्टि व प्रेम का मानसिक भाव हर पल बना रहना चाहिए।

42. मन में रोग का भाव बीमारियों में बढ़ोत्तरी ही करता है। स्वास्थ्य का भाव सेहत में वृद्धि करता है इसलिए दिन भर इस भाव में रहें कि “मैं स्वस्थ हूं”। मन में यह शंका न लाएं कि भविष्य में मुझे कोई रोग होगा। अगर आप बीमार भी हो तो भी मन में हर पल बोलो “मैं स्वस्थ हूं”

43. धूम्रपान, मादक पेय – पदार्थ (जरदा, गुटखा, सॉफ्ट ड्रिंक जैसे कोकाकोला, पेप्सी इत्यादि एवं शराब आदि) सर्वथा छोड़ दो।

44. जीभ पर नियंत्रण रखें, क्योंकि जीभ के दो ही कार्य होते हैं – बोलना और स्वाद लेना। अतः अधिक बोलने से बचें। आचार्य चाणक्य जी भी यही बात बोलते हैं।

45. आधि – मन का रोग, व्याधि – तन का रोग और उपाधि – मद, ये तीनों यौवन के भयंकर शत्रु हैं। इनसे दूर रहें।

46. प्रायः देखा जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ व्यक्ति पढ़ना-लिखना छोड़ देता है। इससे उसके मस्तिष्क के तंतु निष्क्रिय होने लगते हैं और नाड़ी तंत्र भी मंद पड़ने लगता है। इसका असर शरीर की समस्त क्रियाओं पर पड़ता है। व्यक्ति जल्दी बूढ़ा होने लगता है। अतः बढ़ती आयु के साथ स्वाध्याय और आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि होती रहनी चाहिए।

47. बीड़ी-सिगरेट जैसे नशीले व हानिकारक पदार्थों से बचें, क्योंकि ये सभी बुढ़ापे की ओर ले जाते हैं।

48. चाय- कॉफी आदि के स्थान पर सादा ठंडा या गुनगुना पानी, नींबू पानी, छाछ, गाजर, पालक चुकन्दर, लौकी, टमाटर इत्यादि सब्जियों का एवं मौसम्मी या संतरा, पपीता इत्यादि फलों के रस का उपयोग लाभकारी होता है।

49. डाइबीटीज के रोगी को शक्कर या उससे बने पदार्थों से पूर्ण परहेज करना चाहिए। फलों में अधिक मीठे फल का सेवन कम करें। फल के रस के बजाय फल खायें।

50. मेथीदाना और करेला डाइबीटीज की रामबाण दवा हैं। इनका रोज उपयोग करें। मेथीदाना रोज 18/24 घंटे के लिए पानी में भिगो के रखें, जहां तक संभव हो सके मिट्टी के बर्तन में भिगोयें। दूसरे दिन सुबह नाश्ते के पहले या बाद में दानामेथी का पानी पी लें। मेथीदाना अंकुरित कर सलाद में या नमक, नींबू लगाकर भी खा सकते हैं।

51. भोजन में स्वाद बढ़ाने वाली चीजें जैसे मिर्च, प्याज, लहसुन, खटाई इत्यादि का प्रयोग कम से कम करें, हो सके तो छोड़ दें।

52. रोज शाम निवृत्त हो जाने के बाद, दिनभर में अपने पुरूषार्थ से किये काम – काजों की सफलता अथवा असफलता प्रभु को समर्पित कर, निश्चिंत होकर, जल्दी सोंये ताकि सुबह भोर में उठ सकें।

53. प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व अवश्य उठें। उठने का समय 5 बजे के आस-पास होना चाहिए। लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए की उठते ही आपको नींद आने लग जाये, तब तो कोई फायदा नहीं, आप जल्दी सोये और तभी आप जल्दी उठ पाएंगे, क्यूंकि नेचर के साथ चलना हमारे लिए ही अच्छा है।

54. टहलते समय नाक से लम्बी – लम्बी सांसें लो तथा यह भावना करो कि टहलने से आप अपने स्वास्थ्य को संवार रहे हैं।

55. सूर्योदय से पूर्व शीतल जल से स्नान करें। इससे शरीर को बल मिलता है व पाचन उत्तम बनता है।

56. आटा मोटा पिसवाया जाए व ग्रीष्म ऋतू में जौ तथा वर्षा तथा शीत ऋतू में चना मिलवाकर पिसवाए।

57. जितना सम्भव हो जीवित आहार लें। अधिक तला भुना पदार्थ व जंक फूड मृत आहारों की श्रेणी में आते हैं।

58. तीन सफेद विषों का प्रयोग कम से कम करें – सफेद नमक, सफेद चीनी व सफेद मैदा।

59. प्रतिदिन कुछ न कुछ शारीरिक श्रम, व्यायाम अथवा खेलकूद अवश्य करें। इससे मासपेशिया मजबूती बनी रहती है। हृदय तथा आतों की मासपेशिया सुचारु रूप् से काम करती हैं।

60. घर में फ्रिज में कम से कम सामान रखने का प्रयास करें। पुराना बारीक आटा व सब्जी का प्रयोग जोड़ों के दर्द को आमन्त्रित करता है।

61. हफ्ते में एक दिन नमक/चीनी छोड़कर अस्वाद व्रत करें।

62. नींबू की खटाई उपयोगी रहती है। नींबू पानी का सेवन से शरीर स्वस्थ बना रहता है।

63. फल सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होते हैं। इनका प्रयोग लाभप्रद रहता है।

64. कभी-कभी बादाम व अखरोट को भिगोकर सेवन करते रहें। इससे जोड़ों की ग्रीस अर्थात् ताकत बनी रहती है, अखरोट सेहत के लिए जरुरी है।

65. टहलने के अलावा, दौड़ना, साइकिल चलाना, घुड़सवारी, तैरना या कोई भी खेलकूद, व्यायाम के अच्छे लाभ हैं। स्त्रियां चक्की पीसना, बिलौना बिलोना, रस्सीकूदना, पानी भरना, झाड़ू- पोछा लगाना आदि घर के कामों में भी अच्छा व्यायाम कर सकती हैं। रोज थोड़े समय छोटे बच्चों के साथ खेलना, 10 – 15 मिनट खुलकर हंसना भी अच्छे व्यायाम के अंग हैं।

66. घर में अथवा आस-पास नीम चढ़ी गिलोय उगाकर रखें व हफ्ते पन्द्रह दिन एक-दो बार प्रातःकाल उबालकर पीते रहें। गिलोय से शरीर स्वस्थ व निरोग रहता है। लीवर सुचारू रूप् से काम करता है।

67. गेहू, चावल थोड़ा पुराना प्रयोग करें।

68. मल-मूत्र का त्याग बैठकर करें व उस समय दात भींचकर रखें।

69. वस्त्र सदा ढीलें पहने। नाड़े वाले कुर्ते-पजामे सर्वोतम वेश हैं। कसी जीन्स आदि बहुत घातक होती हैं।

70. भूख से थोड़ा कम खाए।

 

Conclusion

 

तो दोस्तों अगर आप इन सारे 70 नियमों को अपने डेली हैबिट में अपनाते हैं तो आपको स्वस्थ रहने से कोई रोक नहीं सकता।

 

इनके आलावा भी इसके पार्ट – 2 में मैंने और भी 63 पॉइंट्स बताये हैं उसको मिस मत करें।

 

तो आपको आज का यह पोस्ट “स्वस्थ रहने के नियम – Health Tips in Hindi” कैसा लगा ?

 

क्या आप ऐसे नियम पहले से अपने हैबिट में डाल दिए हैं या नहीं ?

 

क्या आप इस प्रकार के नियम अपने डेली हैबिट में अपनाना चाहेंगे ?

 

आपका कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

इस पोस्ट “स्वस्थ रहने के नियम – Health Tips in Hindi” को अपने दोस्तों के साथ साझा करना ना भूलना दोस्तों।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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