10 अकबर-बीरबल की कहानी इन हिंदी

10 अकबर-बीरबल की कहानी इन हिंदी – Hello दोस्तों, अकबर-बीरबल की कहानी मुझे इतना अच्छा लगता है की मैं मतलब इन से बहुत कुछ सीखता हूँ, मैंने सोचा की मैं जो अकबर-बीरबल की कहानी पढ़ा रहा हूँ उसको आपके साथ साझा करूँ तो कल मैंने 5 अकबर बीरबल की कहानी आपके साथ शेयर किया और आज 10 कहानी एक साथ।

 

आपको भी ये अकबर-बीरबल की स्टोरी अच्छा लगा होगा, क्यूंकि हर स्टोरी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है की लोगो से बुद्धि से बात कैसे करना है, किसी भी बुरी परिस्थिति से बाहर कैसे निकलना है etc. तो मुझे ऐसी लाइफ एडवेंचर टाइप की कहानी बहुत अच्छा लगता है, उम्मीद करता हूँ आपको भी लगेगा, कमेंट में मुझे बताइयेगा जरूर।

 

तो चलिए शुरू करते हैं –

 

10 अकबर-बीरबल की कहानी इन हिंदी

 

कवि और धनवान आदमी

 

एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

 

‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

 

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

 

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

 

“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।

 

धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”

 

“खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।” जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”

 

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”

 

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।

 

 

चोर की दाढ़ी में तिनका

 

बादशाह अकबर बीरबल से अकसर अजीब सवाल तो पूछते ही थे लेकिन एक दिन उन्होंने बीरबल को छकाने की एक तरकीब खोज निकाली।

 

उन्होंने अपनी बेशकीमती अंगूठी छिपाकर एक सरदार को दे दी और उससे बात छुपाकर रखने के लिए कहा। जब बीरबल उनके पास आए तो बादशाह ने कहा, “आज हमारी अंगूठी खो गई है। सुबह तो वह हमारे पास ही थी। शौच जाते वक्त मेंने उतार कर रखदी और जब वापस लौटा तो देखा कि अंगूठी गायब है”, बीरबल चुपचाप सुनते रहे।

 

बादशाह ने आगे कहा, मुझे यकीन है कि यह काम महल के ही किसी व्यक्ति का है। बाहरी आदमी ऐसी हिम्मत नहीं कर सकता। बीरबल! तुम ज्योतिषशास्त्र बखूबी जानते हो अतः चोर का पता लगाओ।

 

बीरबल ने उस जगह का पता पूछा जहां उन्होंने शौच जाने से पहले अंगूठी रखी थी।

 

बादशाह अकबर ने एक अलमारी की ओर इशारा किया। बीरबल ने उस अलमारी के पास जाकर उससे कान लगाकर कुछ देर बाद हटा लेने का नाटक किया। देखने से यह लगता था जैसे वह कोई बात सुनने की कोशिश कर रहा है।

 

कुछ देर बाद बीरबल ने बादशाह की तरफ देखकर कहा, अलमारी साफ़ बताती है कि जिसके पास अंगूठी है, उसकी दाढी में तिनका है। बीरबल की बात को जब पास ही बैठे सरदार ने सुना, जिसको बादशाह ने अंगूठी दी थी, तो यह घबराकर अपना मुंह और दाढ़ी टटोलने लगा। बीरबल पहले से ही चौकन्ने थे। सरदार की हरकत उनसे छिपी नहीं रह सकी। फौरन ही बीरबल ने उस सरदार को पकडकर बादशाह के सामने पेश किया और कहा, जहांपनाह, आपकी अंगूठी के चोर यही हैं यह बात बादशाह पहले से ही जानते थे। वह बीरबल की इस चतुराई से बेहद खुश हुए।

 

 

कौन गधा तम्बाकू खाता है

 

बीरबल तम्बाकू खाया करते थे, मगर अकबर बादशाह नहीं खाते थे। एक दिन अकबर बादशाह को लज्जित करने के लिए सैर का बहाना करके तम्बाकू के खेत में ले गए। वहां जाकर उन्होंने एक गधा खेत में चरने के लिए छुड़वा दिया। जब गधे ने तम्बाकू नहीं खाई तो अकबर बादशाह बोले- “बीरबल! देखो, तम्बाकू कैसी बुरी चीज है। इसे गधा तक नहीं खाता।”

“हां जहांपनाह! यह सच है, गधे तम्बाकू नहीं खाते, इंसान ही खाते हैं”, बीरबल ने जवाब दिया।

बीरबल का यह कटाक्ष सुनकर बादशाह अकबर शर्म से पानी-पानी हो गए।

 

वैसे दोस्तों मैं आपको तम्बाकू खाने की सलाह कभी नहीं देता। मत खाइये तम्बाकू। बहुत ही हानिकारक चीज है।

 

 

खाने के बाद लेटना

 

किसी समय बीरबल ने अकबर को यह कहावत सुनाई थी कि खाकर लेट जा और मारकर भाग जा – यह सयानें लोगों की पहचान है। जो लोग ऐसा करते हैं, जिन्दगी में उन्हें किसी भी प्रकार का दुख नहीं उठाना पड़ता।

 

एक दिन अकबर को अचानक ही बीरबल की यह कहावत याद आ गई।

 

दोपहर का समय था। उन्होंने सोचा, बीरबल अवश्य ही खाना खाने के बाद लेटता होगा। आज हम उसकी इस बात को गलत सिद्ध कर देंगे। उन्होंने एक नौकर को अपने पास बुलाकर पूरी बात समझाई और बीरबल के पास भेज दिया।

 

नौकर ने अकबर का आदेश बीरबल को सुना दिया।

 

बीरबल बुद्धिमान तो थे ही, उन्होंने समझ लिया कि बादशाह ने उसे क्यों तुरन्त आने के लिए कहा है। इसलिए बीरबल ने भोजन करके नौकर से कहा – “ठहरो, मैं कपड़े बदलकर तुम्हारे साथ ही चल रहा हूं।”

 

उस दिन बीरबल ने पहनने के लिए चुस्त पाजामा चुना। पाजामे को पहनने के लिए वह कुछ देर के लिए बिस्तर पर लेट गए। पाजामा पहनने के बहाने वे काफी देर बिस्तर पर लेटे रहे। फिर नौकर के साथ चल दिए।

 

जब बीरबल दरबार में पहुंचे तो अकबर ने कहा –  “कहो बीरबल, खाना खाने के बाद आज भी लेटे या नहीं?” “बिल्कुल लेटा था जहांपनाह।”

 

बीरबल की बात सुनकर अकबर ने क्रोधित स्वर में कहा – “इसका मतलब, तुमने हमारे हुक्म की अवहेलना की है। हम तुम्हें हुक्म उदूली करने की सजा देंगे। जब हमने खाना खाकर तुरन्त बुलाया था, फिर तुम लेटे क्यों?”

 

“बादशाह सलामत! मैंने आपके हुक्म की अवहेलना कहां की है। मैं तो खाना खाने के बाद कपड़े पहनकर सीधा आपके पास ही आ रहा हूं। आप तो पैगाम ले जाने वाले से पूछ सकते हैं। अब ये अलग बात है कि ये चुस्त पाजामा पहनने के लिए ही मुझे लेटना पड़ा था।” बीरबल ने सहज भाव से उत्तर दिया।

 

अकबर बादशाह बीरबल की चतुरता को समझ गए और मुस्करा पड़े।

 

 

छोटा बांस, बड़ा बांस

 

एक दिन अकबर व बीरबल बाग में सैर कर रहे थे। बीरबल लतीफा सुना रहा था और अकबर उसका मजा ले रहे थे। तभी अकबर को नीचे घास पर पड़ा बांस का एक टुकड़ा दिखाई दिया। उन्हें बीरबल की परीक्षा लेने की सूझी।

 

बीरबल को बांस का टुकड़ा दिखाते हुए वह बोले, “क्या तुम इस बांस के टुकड़े को बिना काटे छोटा कर सकते हो ?” बीरबल लतीफा सुनाता-सुनाता रुक गया और अकबर की आंखों में झांका।

 

अकबर कुटिलता से मुस्कराए, बीरबल समझ गया कि बादशाह सलामत उससे मजाक करने के मूड में हैं।

 

अब जैसा बेसिर-पैर का सवाल था तो जवाब भी कुछ वैसा ही होना चाहिए था।

 

बीरबल ने इधर-उधर देखा, एक माली हाथ में लंबा बांस लेकर जा रहा था।

 

उसके पास जाकर बीरबल ने वह बांस अपने दाएं हाथ में ले लिया और बादशाह का दिया छोटा बांस का टुकड़ा बाएं हाथ में।

 

बीरबल बोला, “हुजूर, अब देखें इस टुकड़े को, हो गया न बिना काटे ही छोटा।”

 

बड़े बांस के सामने वह टुकड़ा छोटा तो दिखना ही था।

 

निरुत्तर बादशाह अकबर मुस्करा उठे बीरबल की चतुराई देखकर।

 

 

किसकी नेमत

 

बादशाह अकबर प्राय: भेष बदलकर सैर के लिए निकला करते थे। एक दिन वह बीरबल के साथ भेष बदलकर शहर से बाहर एक गांव में पहुंचे। वहां बादशाह ने। देखा कि एक कुत्ता रोटी के टुकड़े को, जो कई दिनों की हो जाने की वजह से सूख कर काली पड़ गई थी, चबा-चबाकर खा रहा था। अचानक बादशाह को दिल्लगी करने की सूझी। वह बोले, “बीरबल! देखा, वह कुत्ता काली को खा रहा है।”

 

‘काली’ बीरबल की मां का नाम था। वह समझ गये कि आलमपनाह दिल्लगी कर रहे हैं। किन्तु इस भावना को दबाकर वे तुरन्त बोले, “आलमपनाह, उनके लिए वही जिन्दगी और नेमत हैं”

 

नेमत बादशाह की मां का नाम था। बीरबल के जवाब को सुनकर बादशाह को चुप हो जाना पड़ा।

 

 

किसकी दाढ़ी की आग

 

बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”

 

“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।

 

मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”

 

बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले – “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”

 

 

किसका पानी अच्छा

 

एक बार अकबर ने भरे दरबार में अपने दरबारियो से पूछा, “बताओ किस नदी का पानी सबसे अच्छा है?”

 

सभी दरबारियो ने एकमत से उत्तर दिया, “गंगा का पानी सबसे अच्छा होता है”

 

लेकिन बादशाह के प्रश्न का उत्तर बीरबल ने नही दिया उसे मौन देखकर बादशाह बोले, “बीरबल तुम चुप क्यो हो?”

 

बीरबल बोले, “बादशाह हुजूर पानी सबसे अच्छा यमुना नदी का होता है”

 

बीरबल का यह उत्तर सुनकर बादशाह को बड़ी हैरानी हुई और बोले, “तुमने ऐसा किस आधार पर कहा है जबकि तुम्हारे धर्मग्रंथो में गंगा नदी के पानी को सबसे शुद्ध व पवित्र बताया गया है और तुम कह रहे हो कि यमुना नदी का पानी सबसे अच्छा होता है”

 

बीरबल ने कहा, “हुजूर मै भला पानी की तुलना अमृत के साथ कैसे कर सकता हूँ। गंगा में बहने वाला पानी केवल पानी नही बल्कि अमृत है इसीलिए मैंने कहा था कि पानी यमुना का सबसे अच्छा है” बादशाह और सभी दरबारी निरुत्तर हो गए और उन्हें मानना पड़ा कि बीरबल सही कह रहे है।

 

 

किसका अफसर

 

एक बार वजीर अबुल फ़जल ने अकबर बादशाह के सामने बीरबल से कहा, “बीरबल, तुम्हें अकबर बादशाह ने सुअर और कुत्तों का अफसर नियुक्त किया है।”

 

इस पर बीरबल ने कहा, “बहुत खूब, तब तो आपको भी मेरी आज्ञा में रहना पड़ेगा।”

 

यह सुनते ही अकबर बादशाह हंस पड़े और वजीर अबुल फ़जल ने लज्जित होकर अपना सिर सुका लिया।

 

 

किसका नौकर कौन

 

जब कभी दरबार में अकबर और बीरबल अकेले होते थे तो किसी न किसी बात पर बहस छिड़ जाती थी। एक दिन बादशाह अकबर बैंगन की सब्जी की खूब तारीफ कर रहे थे।

 

बीरबल भी बादशाह की हां में हां मिला रहे थे। इतना ही नहीं, वह अपनी तरफ से भी दो-चार वाक्य बैंगन की तारीफ में कह देते थे।

 

अचानक बादशाह अकबर के दिल में आया कि देखें बीरबल अपनी बात को कहां तक निभाते हैं। यह सोचकर बादशाह बीरबल के सामने बैंगन की बुराई करने लगे। बीरबल भी उनकी हां में हां मिलाने लगे कि बैंगन खाने से शारीरिक बीमारियाँ हो जाती हैं इत्यादि।

 

बीरबल की बात सुनकर बादशाह अकबर हैरान हो गए और बोले – “बीरबल! तुम्हारी इस बात का यकीन नहीं किया जा सकता। कभी तुम बैंगन की तारीफ करते हो और कभी बुराई करते हो। जब हमने इसकी तारीफ की तो तुमने भी इसकी तारीफ की और जब हमने इसकी बुराई की तो तुमने। भी इसकी बुराई की, आखिर ऐसा क्यों?”

बीरबल ने नरम लहजे में कहा – “बादशाह सलामत! मैं तो आपका नौकर हूं बैंगन का नौकर नहीं”

 

 

Conclusion

 

तो दोस्तों देखा आपने बीरबल कैसी बुद्धि की मालिक थी।

 

क्या आप किसी से बुद्धि के साथ बात करते हैं या लड़ने-झगरते हैं।

 

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आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

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