The $100 Startup Book Summary in Hindi | कम पैसों से स्टार्टअप कैसे करें ?

The $100 Startup – Hello दोस्तों, 100 डॉलर स्टार्टअप बुक आपको सिखाएगी कि एक एडवेंचरफुल, मीनिंगफुल और पर्पजफुल लाइफ कैसे जी सकते है इस बुक के ऑथर 175 से भी ज्यादा कंट्रीज घूम चुके है। वैसे उनकी कभी कोई रियल जॉब नहीं रही फिर भी उन्हें रेगुलर पे चेक मिलते है क्योंकि उनके पास अपने आईडियाज को इनकम में टर्न करने का जो टेलेंट है वो इस बुक को पढ़ने के बाद आप भी सीख सकते है।

आज हम सीखेंगे कि पैसा कमाना बड़े सब्र का काम है, एक दिन में कोई रिच नहीं बन जाता। ये बुक आपको बताएगी कि कम पैसे में एक छोटा बिजनेस शुरू करके कैसे उसे धीरे-धीरे बड़ा बनाया जा सकता है, और इसके लिए आपको किसी एक्सपर्ट एडवाईज नहीं लेनी पड़ेगी, बस इस बुक में दिए आईडियाज को रियल लाइफ में अप्लाई करके आप भी एक सक्सेसफुल बिजनेस चला सकते हैं।

हर वो इंसान जो पैसे कमाने के साथ-साथ एक क्वालिटी लाइफ जीने की चाह रखता है उसे ये बुक एक बार ज़रूर पढनी चाहिए। ये बुक आपको सिखायेगी कि कैसे आपका बिजनेस आपके लिए पैसे कमा सकता है ताकि आप वो सब कर सके जो आप हमेशा से करना चाहते थे।

 

लेखक

100 डॉलर स्टार्ट अप बुक के राइटर क्रिस गुलीब्यू एक अमेरिकन ऑथर, ब्लॉगर और स्पीकर है। उनका ब्लॉग “द आर्ट ऑफ़ नॉन- कांफोर्मेटी” काफी फेमस रहा है।

उन्होंने अनकन्वेशनल गाइड के अंडर कई सारी ट्रेवल और स्माल बिजनेस रिलेटेड बुक्स लिखी है। हर साल पोर्टलैंड, ऑरेगोन में वो अपना एनुअल वर्ल्ड डोमिनेशन समिट ओर्गेनाईज करते है। वो 4 अप्रैल, 1978 यू. एस. ए में पैदा हुए थे।

 

 

The $100 Startup Book Summary in Hindi (द $100 स्टार्टअप बुक समरी) (PART – 1)

 

 

मुझे ये बुक क्यों पढना चाहिए?

 

सोचो कि आप एक ऐसी लाइफ जी रहे है जहाँ आप जो मन में आये वो करे, जो आपको पसंद हो वो करे, और उसके लिए आपको पे भी किया जा रहा हो।

ज़रा इमेजिन कीजिये कि आपको किताबो से प्यार है और आप किसी बुक पर काम कर रहे है या फिर उस प्रोजेक्ट पर जिस पर आप हमेशा ही काम करना चाहते थे।

दूसरो के लिए काम करने और उन्हें खूब सारा प्रॉफिट देने के बजाये आप अपने लिए, अपने प्रॉफिट के लिए काम कर रहे हो। कैसा लगता है सुनकर ? परफेक्ट ना?

अगर आप भी ऐसा ही कुछ सोचते है तो ये बुक आपके लिए ही लिखी गयी है।

हालांकि इस बुक में आपको ऐसा कोई भी शोर्ट कट नहीं मिलने वाला जो आपको फटाफट पैसे कमाने का ईजी तरीका बताये क्योंकि ऐसा कोई तरीका होता ही नहीं है, और आप भी अगर ऐसा कोई तरीका ढूढ़ रहे है तो प्लीज ये बुक मत पढ़िए।

तो चलिए शुरू करते हैं –

 

 

मेरे पास तो कोई स्किल ही नहीं है तो मै भला पैसे कैसे कमा सकता हूँ?

 

वेल, सच कहे तो कमा भी नहीं सकते। क्योंकि अगर आपके पास कोई भी स्किल नहीं है तो आप लाइफ में कभी पैसा नहीं कमा पायेंगे।

लेकिन बात ये है कि आप कमा लेते है, बल्कि हर कोई कमाता है क्योंकि हर कोई इस दुनिया में किसी ना किसी हुनर के साथ पैदा हुआ है।

लेकिन आपकी प्रॉब्लम इतनी सी है कि आपको ये पता ही नहीं है। इसलिए मै बताता हूँ कि कैसे इसे ढूँढा जाए।

एक दिन माइकल सूट पहन कर तैयार होकर ऑफिस के लिए निकला।

जब पूरा दिन रोज़ की तरह नार्मल गुज़र गया तो इवनिंग में उसके बॉस ने उसे अपने ऑफिस में बुलाया। उसने माइकल को कहा कि इकोनोमिक क्राइसिस की वजह से उसे काम से हटाया जा रहा है।

माइकल ये सुनकर शोक्ड रह गया वो ये एकदम होपलेस हो गया। वो कैसे अपनी वाइफ और बच्चो को बताएगा कि उसकी जॉब अब नहीं रही।

कुछ टाइम बाद माइकल उस शॉक से बाहर निकला और उसने एक नयी जॉब ढूढनी स्टार्ट कर दी।

हालांकि वो एक स्किल्ल्ड पर्सन था, लेकिन उसके जैसे बाकि और भी थे। उसे कोई भी ढंग की जॉब नहीं मिल रही थी तो एक दिन उसके एक फ्रेंड ने जिसका फर्नीचर का स्टोर था, उसे कहा कि उसके पास कुछ बेकार मेट्रेसेस पड़े हए है जिनका कोई यूज़ नहीं है।

तो उसने माइकल को ऑफर दिया कि वो ये मेट्रेसेस उससे खरीद ले और उन्हें बेच दे हो सकता है कि उसे कुछ पैसे की कमाई हो जाए।

माइकल ने डिसाइड किया कि चलो ठीक है, वो ये रिस्क लेगा लेकिन सबसे पहले उसे एक जगह की ज़रुरत थी जहाँ वो ये मेट्रेसेस रख सके।

तो उसने रेंट पर एक जगह ली और अपना बिजनेस स्टार्ट कर दिया। शुरू के बिजनेस अच्छा चला लेकिन फिर उसे प्रॉब्लम आने लगी क्योंकि क्लाइंट्स जब उससे पूछते कि उन्हें किस टाइप का मेट्रेसेस खरीदना चाहिए तो वो कुछ ज़वाब नहीं दे पाता था क्योंकि उसे कोई नॉलेज नहीं थी कि वो किस टाइप के मेट्रेसेस बेच रहा है।

तो अब उसने डिसाइड किया कि पहले वो इस बारे में सब कुछ सीखेगा, उसने एक बिजनेस प्लान भी बनाया कि वो एक ऐसा स्टोर खोलेगा जहाँ बाइसाइकिल से मेट्रेसेस की डिलीवरी की जायेगी। और जो कस्टमर अपनी बाइसाइकिल साथ लायेंगे उन्हें फ्री डिलीवरी दी जाएगी।

ये मार्केटिंग का अच्छा तरीका था, उसे यूट्यूब विडीयो से कई सारे कस्टमर मिले जो बाइसाइकिल से मेट्रेसेस ले जाते हुए अपनी वीडियोज़ बनाते थे। और इस तरह उसका बिजनेस चल पड़ा जो उसके लिए सबसे ज्यादा ख़ुशी की बात थी।

इसे माइक्रोबिजनेस बोलते है जिसमे ऑलमोस्ट कोई भी स्टार्टअप कोस्ट नहीं लगती और मोस्ट ऑफ़ टाइम इसमें सक्सेस गारंटी से मिलती है।

 

 

थ्री इम्पोर्टेन्ट लेसंस

 

1) कन्वेर्जेस

इसका सिंपली मीनिंग है कि ये बिलकुल ज़रूरी नहीं है कि आपका जो पैसन हो वो दूसरो को भी इंट्रेस्टिंग लगे। मगर क्या आपने इन दो सर्कल के बीच का छोटा सा ओवरलेप देखा? यही आपकी अपोरच्यूनिटी है माइक्रोबिजनेस के लिए।

 

2) स्किल ट्रांसफॉरमेशन

किसी पर्टिक्यूलर बिजनेस को स्टार्ट करने के लिए आपके पास कोई ख़ास स्किल हो ये ज़रूरी नहीं है। अगर आपके पास कोई रिलेटेड स्किल है तो भी आपका काम चल जाएगा। अब जैसे कि टीचर्स टीचिंग में माहिर होते है लेकिन उनकी कम्यूनिकेशन भी बढ़िया होती है।

वे किसी भी सर्कमस्टेसेन्स में एडाप्ट हो सकते है और साथ ही वे डिफरेंट इंटरेस्ट वाले ज्यादा से ज्यादा लोगो को कोर्डिनेट और ओर्गेनाइज़ भी कर सकते है।

तो आप ये रियेलाईज़ करे कि आप में एक से ज्यादा स्किल्स है। केयरफुली सोच कर देखे कि ऐसी कौन सी सिक्लस है आपके पास जिसे आप दूसरी स्किल्स में ट्रांसफॉर्म कर सके। ताकि उस स्पेशेफिक स्किल से आप अपना माइकोबिजनेस स्टार्ट कर पाए।

 

3) द मैजिक फार्मूला

हम दो प्रीवियस लेसंस को यूज़ करके एक इक्वेशन बना सकते है।

एक ऐसा फार्मूला जो आपको सक्सेस दिलाएगा: पैशन या स्किल + यूज़फुलनेस = सक्सेस

 

 

हैप्पीनेस को बोक्स में बंद करके बेचने का तरीका !

 

इमेजिन करो आप एक रेस्ट्रोरेन्ट में है और आपने एक प्लेट साल्मन आर्डर की। तभी शेफ आपके पास आकर बोलता है “साल्मन बनाना थोडा ट्रिकी है, क्या आपने कभी इसे बनाया है ?”

इससे पहले कि आप कुछ कहे शेफ फिर बोलता है “मै जाकर आयल गर्म करता हूँ तब तक तुम जाकर हाथ धोके आओ और मुझे किचन में मिलो” अब ये बात कितनी वीयर्ड लगती है ना?

शायद ये आपके साथ कभी नहीं हुआ होगा। होगा भी कैसे ? कौन शेफ आपसे आपका ही खाना प्रीपेयर करने के लिए बोलता है ? जब आप पैसे खर्च करके रेस्ट्रोरेन्ट में खाने जा रहे है और खाना भी खुद ही बनाना पड़े तो इससे अच्छा घर पे बैठकर ना खा ले? आप इसलिए रेस्ट्रोरेन्ट में जाते है क्योंकि आप सर्विस और एटमोस्फेयर के पैसे दे रहे है।

लेकिन इस सब का भला माइक्रोबिजनेस से क्या लेना-देना है ? मै बताता हूँ। ज्यादातर ओनर्स कस्टमर से एक्स्पेट करते है कि वे अपना खाना खुद प्रीपेयर करे, उन्हें लगता है कि कस्टमर को ये पसंद है।

वे इस कहावत में बिलीव करते है “आदमी को एक फिश दो तो वो उसे एक दिन में खायेगा लेकिन उसे फिशिंग सिखाओ तो वो लाइफ टाइम फिश खाता रहेगा” लेकिन बात ये है कि ज्यादातर कस्टमर्स फिशिंग नहीं सीखना चाहते। हमें तो अपनी फिश प्लेट में सर्व चाहिए। अब इतनी मेहनत के बाद इतना तो बनता है कि हम खुद को ट्रीट करे तो इसीलिए जो कस्टमर मांगता है उसे वो मिलना चाहिए।

 

 

आपका बिजनेस

 

ये माइक्रोबिजनेस का आईडिया आता कहाँ से है ?

 

1. मार्किट में इनएफिशियेंशी: जब कोई सर्टेन प्रोडक्ट अपनी एफिशियेंशी लूज़ करता है तो उसकी जगह कोई नया प्रोडक्ट रिप्लेसमेंट के लिए आ जाता है, तो फिर वो नया प्रोडक्ट आप क्यों नहीं बना सकते?

 

2. न्यू टेकनॉलोजी: स्मार्ट फ़ोन जब नए-नए आये थे तो पूरी मार्किट ही चेंज हो गयी थी। एप डेवलपर्स जैसी कई सारी न्यू जॉब्स भी निकली थी तो मार्किट में उन लोगो की बड़ी डिमांड थी जिनके पास ये स्किल थी।

दूसरी ओर न्यूज़पेपर का आईडिया भी काफी ब्लूम हुआ क्योंकि हर चीज़ इलेक्ट्रोनिक हो जाए, ये बात कुछ लोगो को हज़म नहीं हो रही थी।

3. ए स्लाइड प्रोजेक्ट: खुद को एक माइक्रोबिजनेस तक लिमिट ना रखे, इनफैकट जब आप देखेंगे कि आपका बिजनेस बढ़िया चल रहा है तो आप इनकम बढाने के लिए दुसरे साइड प्रोजेक्ट्स के बारे में सोचेंगे।

 

4. बट आई स्टिल वांट टू मेक मनी डूइंग व्हट आई लव, व्हट शुड आई डू?

 

ये हार्ड नही है, इनफैकट उस काम को करने से कई ज्यादा ईजी है जो आप नहीं करना चाहते। हालांकि ऐसा करने के लिए आपको अपना फेवरेट काम लोगो की नीड या ज़रुरत से कनेक्ट करना पड़ेगा।

ऑथर का एक फ्रेंड था जोकि एक साइड बिजनेस चलाता था और ये काम कुछ ऐसा था जोकि उसे करना पसंद था। लेकिन उसकी स्टोरी सुनाने से पहले मैं आपको कुछ एक्सप्लेन करना चाहूँगा।

अक्सर लोग जब फर्स्ट टाइम किसी एयरलाइन्स से ट्रेवल करते है तो एयरलाइन्स वाले उन्हें फ्लायर माइल्स ऑफर करते है जोकि बेसिकली एक सर्टेन अमाउंट ऑफ़ माइल्स होता है जो आप तब अर्न करते है जब आप सेम उसी एयरलाइन्स से दुबारा ट्रेवल करते है। और कुछ फ्लाइट्स के बाद ही आपके इतने माइल्स बन जाते है कि आपको फिर एक फ्लाइट फ्री मिल जाती है।

अब चलो अपनी स्टोरी पे वापस चलते है। गैरी ने ये फ्लाईर माइल्स अपने बेनिफिट में यूज़ किये। कई बार लोग ये माइल्स अर्न कर लेते है लेकिन उनके पास ये जानने का टाइम नही होता कि इन माइल्स को यूज़ कैसे किया जाए।

उन्हें लर्न करने या इसमें क्या हार्डशिप आएगी ये सब चीज़े सॉर्ट आउट करने का टाइम नहीं होता। इसलिए गैरी ने अपना साइड बिजनेस खोला जहाँ वो अपने कस्टमर्स को उनके फ्लाईर माइल्स को ओर्गेनाइज़ करके उन्हें ट्रिप बनाकर देता है और हर ट्रिप के लिए वो 250$ चार्ज करता है अब आप पूछेंगे कि कोई भी उस काम के 250$ क्यों देगा जो वो खुद फ्री में कर सकता है ?

तो इसका आंसर है कि 250$ कुछ भी नहीं है 5000$ के कम्पेयर में जो लोगो को बिना फ्लाइयर माइल्स यूज़ किये किसी ट्रिप के लिए खर्च करने पड़ते है। और गैरी लोगो को बेस्ट ओर्गेनाइज़ ट्रिप बनाकर देता है, और अगर ऐसा नहीं होता तो लोग क्यों उसे पे करते ?

यहाँ हम देख सकते है कि गैरी ने एक ऐसा बिजनेस ओपन किया जो उसके पैसन से इनडाईरेक्टली रिलेटेड है – एक कंसल्टेंट – जोकि असल में उसका पैसन नहीं है तो इस तरह उसने अपनी फेवरेट काम को लोगो की ज़रूरत से जोड़ा। और उसका फेवरेट काम था लोगो को उनकी प्रॉब्लम का सोल्यूशन बताना।

 

PART – 2

 

Recommended Books –

 

 

 

Conclusion

 

दोस्तों आपको आज क्या सीखने को मिला ?

क्या आपने इसका दूसरा पार्ट पढ़ा है ?

क्या आपको इन सारी बातों से ऐसा लगा है कि आप भी बहुत Smartly एक स्टार्टअप कर सकते हैं?

मेरा एक सलाह ये है कि अगर आप आज के टाइम में कोई भी स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं या बिज़नेस कर रहे हैं तो आपको उसको Online ले जाना ही पड़ेगा, नहीं आपका बिज़नेस आगे चलकर कुछ सालों में बंद हो जायेगा।

क्या आप भी बिज़नेस करना चाहते हैं ? अगर यहाँ तक पढ़ा है तो सच में आपके अंदर एक Entrepreneur ही है।

आपको आज का यह The $100 Startup Book Summary in Hindi कैसा लगा ?

अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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