You Can and You Will Book Summary in Hindi

Hello दोस्तों, आज मैं आपको बताऊंगा You Can and You Will बुक की summaryइस किताब में 8 सूत्र (Principles) है जो आपके भीतर के विजेता को बाहर लाने में मदद करेंगे। इन सूत्रों को पढ़िए और फिर उन्हें अपने जीवन में इस्तेमाल कीजिये,

 और फिर तैयार हो जाइए क्योंकि आप वो जीत हासिल करने वाले है जो आजतक आपने कभी सोची भी नहीं होगीआप कर सकते है और आप करेंगे!! तो ये बुक summary ध्यान से पढ़े और इस बुक को खरीदके पूरा पढ़े।


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You Can and You Will Book Summary in Hindi




CHAPTER 1 : अपना लक्ष्य अपने सामने रखे


 ये बात अध्ययन (studies) में सामने आई है कि जब आप किसी चीज़ को बार-बार देखते है तो वो चीज़ आपके अवचेतन (subconscious) मन में गहराई से बैठ जाती है। ये एक जानी मानी तकनीक है अपने सपनो तक पहुचने की,


 मगर कई बार ऐसा भी होता है कि आप अपनी पूरी काबिलियत नहीं दिखा पाते। ऐसा इसलिए नहीं कि आप काबिल नहीं है या उतने स्मार्ट नहीं है बल्कि इसलिए क्योंकि आपने अपनी आंखो के सामने गलत चीज़ रखी है।

 कुछ ऐसा चुनिए जो आपके सपने से मेलखाता हो, उदाहरण के लिए अगर आप एक मेडिकल स्टूडेंट है तो अपनी मेज पर एक प्लास्टिक की खोपड़ी (skull) रखे और जब भी आप पढने के लिए बैठेंगे तो आपके सामने वो प्लास्टिक की खोपड़ी होगी जो आपको आपके लक्ष्य की याद दिलाती रहेगी और आपको ये याद रहेगा कि आपको जिंदगी में क्या हासिल करना है। इसका आपकी पढ़ाई पर एक सकारात्मक असर पड़ेगा क्योंकि ये आपको हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

 मान लीजिये कि आप शादी करना चाहते है, तो अपने घर को खाली चित्रों से भर दे। अब जहाँ कहीं भी आप जायेंगे उन खाली चित्रों पर नजर पड़ते ही आपका शादी करने का इरादा और भी मज़बूत होता जाएगा, और अगर कोई आपसे पूछे “ये खाली चित्र किसलिए है ?” तो कहिये कि “उस पत्नी के लिए जो मेरे जीवन में आने वाली है”


 अगर आप ये सोच रहे है कि आप छोटे सपने देख रहे है ना कि बड़े, क्योंकि आप भगवान् को तकलीफ नही देना चाहते ताकि उपरवाले को आसानी हो आपके छोटे सपने पूरा करने में। तो यकीन मानिए ये सच नहीं है। बल्कि ये इसके एकदम उलट है।


 जब आप बड़े सपने देखते है तो उपरवाला खुश होता है। सारे बंधन तोड़ दीजिये और कहिये मै अभी नहीं जानता कि ये कैसे होगा भगवान, मगर मै ये जानता हूँ कि ये जब भी होगा तुम्हारी मदद से होगा” भगवान् पर असीमित विश्वास रखकर ही आप उसे प्रसन्न कर सकते है।

 चाहे परिस्थितिया कितनी भी अजीब लगे, खुद को विश्वास दिलाये कि सब ठीक है। क्योंकि भगवान् की शक्ति अपरम्पार है। हमारे साधन, परिस्थिया या शिक्षा कोई मायने नहीं रखती जब भगवान् हमारी इच्छा पूरी करना चाहे।


 जो हम मांगते है, प्रभु उससे बढकर ही हमें देता है बस अगर आपका उस पर पक्का विश्वास हो तो, और अपने सपनो को कभी मत भूलिए, हार कभी भी मत मानिए।

 भगवान का आशीर्वाद सदा आपके साथ रहेगा इस बात की अगर आप कल्पना भी नहीं कर सकते तो मत कीजिये। अगर आप अपने लक्ष्य को अपने सामने नहीं रखेंगे और पूरी शिद्दत से उसका यकीन नहीं करेंगे तो आप कभी भी उसे हासिल नहीं कर सकते।


 हिल्टन होटल्स के फाउन्डर कोंनार्ड हिल्टन एक दिन एक लेख पढ़ रहे थे जो न्यूयॉर्क के वाल्डरोफ एस्टोरिया होटल के बारे में था। वो इस बात से बेहद प्रभावित हुए कि वो होटल कितना बड़ा और शानदार था।


 कितना सुन्दर है वो होटल, वो एक दिन उस होटल का मालिक बनने के सपने देखने लगे। अगर वो इस बात को सीधे सीधे सोचते तो ऐसा हो पाना नामुमकिन लगता, मगर उन्होंने इसको कुछ अलग तरीके से सोचा, उपरवाले की मर्ज़ी से सोचा।

 उन्होंने उस लेख में से होटल की तस्वीरे काटकर अपने सामने लगा दी। वो उन तस्वीरो को बार-बार देखते रहते जब तक कि उनका ये सपना पूरा नहीं हो गया और उनकी कम्पनी ने उस होटल के लगभग 250,000 शेयर्स नहीं खरीद लिए।

 नकारात्मक विचारों को (negative thinking) कभी भी खुद पर हावी मत होने दीजिये। हो सकता है किसी दिन आप एक बहुत ही तंदुरुस्त व्यक्ति को देखे और खुद से कहे कि “मै तो ऐसा कभी भी नहीं बन सकता” या फिर आप एक बड़ा सा शानदार मकान देखकर अपने से कही कि मै कभी भी ऐसा कुछ नहीं खरीद सकता”.


 इन नकारात्मक विचारों का आपकी सफलता पर गहरा असर पड़ता है क्योंकि वो आपको आगे बढ़ने से रोकती है, आपके नज़रिए को सिमित कर देती है इसलिए आपको अपना नजरिया बदलना पड़ेगा।

 एक बार एक आदमी था जो हमेशा से ही एक कलाकर बनने के सपने देखता था मगर वो अन्दर से टूटा और बेमकसद था। उसका परिवार इतना गरीब था कि वो लोग वैन में रह रहे थे।


 एक दिन वो इतना निराश हुआ कि वो अपनी पुरानी गाडी से एक पहाड़ की चोटी पर पंहुचा और नीचे झाँक कर देखा। उसने कुछ ऐसा किया जिसके बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था वो गाडी से उतरा और खुद के लिए एक दस मिलियन डॉलर का चेक लिखा, अपनी “अभिनय सेवा” के लिए. बारह साल बाद वो नौजवान जिम कैरी, अपनी हर फिल्म के लिए पंद्रह से पच्चीस मिलियन डॉलर के लगभग पैसा कमा रहा था।



Chapter 2: अपनी रेस खुद दौड़ो



 आपकी रोज़मर्रा की जिंदगी में ऐसे कई लोग होंगे जो आपकी जिंदगी को नियंत्रित करने की कोशश करते होंगे। उनका इरादा नेक हो सकता है मगर अपनी जिंदगी को नियंत्रित करने वाले सिर्फ आप होने चाहिए। आपको अपनी रेस खुद ही दौड़नी पड़ेगी।


 अगर आप अपनी सफलता की कहानी नहीं लिखेंगे तो कोई दूसरा लिख लेगा और फिर आपके लिए कुछ नहीं बचेगा। सबको खुश रखना नामुमकिन है, चाहे आप जो मर्ज़ी कर लीजिये, आप सबको खुश नहीं रख सकते।

 इस कोशिश में आप खुद को वो काम करते हुए पाएंगे जो आप नहीं करना चाहते या आपको नहीं करने चाहिए। अगर हर बार कोई ना कोई आपके काम में इतनी नुक्ताचीनी करने लगे कि आप वो काम करना ही छोड़ दो तो आप कभी भी कुछ नहीं कर पाओगे।

 क्योंकि हर कोई आपको उसकी जगह पर रखकर देखने की कोशिश करेगा मगर आप अपनी जगह पर कायम रहे क्योंकि अगर आप उनके हिसाब से चलना शुरू भी कर दे तो वही लोग फिर भी कुछ न कुछ कमी निकाल ही लेंगे।

 किसी ने एक बार कहा था कि जब आप 20 के होते हो तो आपको ये फ़िक्र रहती है कि सब आपके बारे में क्या सोचते है मगर 40 में आप ये परवाह करना छोड़ देते तो और 60 में आपको पता चलता है कि कोई आपके बारे में तो सोच ही नहीं रहा था।


 तो खुद को लोगो की राय से मुक्त रखिये तभी आप सही मायनों में पूरी तरह से आज़ाद हो सकेंगे।

 हमेशा अपनी जिंदगी का एक लक्ष्य रखिये। इस बात के लिए तैयार रहे कि हो सकता है कि इस लक्ष्य को पूरा करने की यात्रा में भले ही कुछ लोग आपका साथ ना दे, आपसे दूर हो जाए तो भी परवाह मत कीजिये।


 जो रास्ता आपने चुना है वो भगवान् ने आपके लिए पहले से ही निर्धारित किया है। लोगो से ज्यादा आपको उपरवाले की मंज़ूरी की ज़रुरत है क्योंकि लोगो की राय हमेशा आपको उलझन में डाल देगी और आप कभी भी स्पष्ट नहीं सोच पायेंगे।

 तो औरो की बिन मांगी राय पर आपको ये कहना सीखना ही पड़ेगा कि आपका शुक्रिया, मगर मुझे इसकी ज़रुरत नहीं है”

 जिनकी बार-बार खुशामद करनी पड़े, ऐसे लोगो से ज़रा बचके रहे क्योंकि यही वो लोग होते है जिनके लिए चाहे कितना भी कुछ क्यों ना किया जाए आप उन्हें कभी संतुष्ट नहीं कर सकते।


 हर बार वो कुछ ना कुछ कमी निकालते ही रहेंगे। आप ज़रा सा चुके नहीं कि ऐसे लोग आपकी जिंदगी की बागडोर अपने हाथ में लेने की कोशिश करने लग जाते है।

 इन लोगो को खुश करना लगभग नामुमकिन है क्योंकि ये आपसे कभी खुश नहीं होते और ना ही कभी तारीफ़ के दो बोल बोलते है। अगर आपका कोई दोस्त सिर्फ अपने मतलब के लिए दोस्ती निभा रहा है तो ऐसे लोगो से दूरी बना लेना ही बेहतर होगा। अगर वो आपकी जिंदगी से जाते है तो चले जाए।


Story -



 एक बहुत पुरानी कहानी है, एक दादा और पोते की। एक बार एक दादा अपने पोते को अपने गधे पर बैठाकर कहीं ले जा रहा था। कुछ दूर जाने पर लोग उन्हें देखते है, तो कहते है कि देखो! ये पोता कितना स्वार्थी है, खुद तो गधे के ऊपर बैठा है और अपने बूढ़े दादा को पैदल चलने पर मजबूर कर रहा है। लोगो की बाते सुनकर दादा परेशान हो जाता है।


 वो अब पोते को उतार कर खुद गधे की सवारी करने लगता है। मगर कुछ आगे जाने पर फिर से कुछ लोग उन्हें देखकर कहते है “अरे! दादा तो बड़ा मतलबी है जो खुद अकेले गधे की सवारी कर रहा है और बेचारे पोते को पैदल चला रहा है।

 लोगो की बातो से परेशान होकर दादा इस बार पोते को भी अपने साथ गधे पर बैठा लेता है। मगर इस भी बार लोग उन दोनों को भला बुरा बोलने लगते है कि दादा-पोता कितने निर्दयी है जो दोनों उस गधे पर बैठकर उस पर अपना सारा बोझ डाले हुए है।

 इस कहानी का सार ये है कि आप चाहे जो भी कर ले फिर भी सबको एक साथ खुश नहीं रख सकते। कुछ लोग फिर भी आपकी आलोचना करते रहेंगे। तो बजाये सबकी परवाह करने के अपना एक लक्ष्य खुद ही चुनिए और उस पर डटे रहिये जब तक सफलता नहीं मिल जाती।




Chapter 3: अपने जीवन में अच्छी चीजों की उम्मीद कीजिये



 ये एक नियम है कि जब आप अपने लिए बेहतर चीजों की आशा करते है तो वो बेहतर चीज़े खुद-ब-खुद आपको मिलती है। लेकिन जब आप बार-बार निराशाजनक बाते सोचेंगे तो क्या होगा ?? ज़ाहिर है वही निराशा आपके जीवन में आएगी। क्योंकि आप जो सोचते है वही आपके साथ होता है। भगवान् हमेशा आपको वही देता है जिसका ख्याल आपके दिल में बना रहता है।


 हर सुबह ये सोच कर उठिए कि आज आपका दिन बहुत ही शानदार गुजरने वाला है। इस सोच के साथ दिन की शुरुवात करेंगे तो पायेंगे कि जो आपने सोचा था वही आपको मिल रहा है। अगर आप किसी परीक्षा के लिए जा रहे है तो उम्मीद कीजिये कि आप उसमे बहुत अच्छा करने वाले है।


 ऐसा सोचने से ना सिर्फ आपका हौसला बढेगा बल्कि आपमें एक नए उत्साह का संचार भी होगा जो आज से पहले कभी नहीं था। कुछ लोग हमेशा ही निराशा से घिरे रहते है। वे अपने बारे में कभी कुछ अच्छा सोच ही नहीं पाते।

 “मै कभी वजन कम नहीं कर सकता, उस पार्टी में मुझे कोई पसंद नहीं करेगा, मुझे कभी किसी का सच्चा प्यार नहीं मिल सकता”. ऐसे लोगो को लगता है कि उनके ऐसा सोचने से काम आसान हो जाएगा क्योंकि अगर उनके साथ कुछ अच्छा नहीं हुआ तो वो बोलेंगे देखा मैंने तो पहले ही कहा था, और अगर कुछ अच्छा हो गया तो वे बहुत हैरान रह जायेंगे कि आखिर उनके साथ ये कैसे हो गया। हालांकि निराशावादी लोगो के साथ कभी कुछ अच्छा नहीं होता।


 अब अगर आशा करने के बावजूद आपके साथ ऐसा नहीं हुआ जो आप चाहते थे तो भी निराश ना हो। फिर से कोशिश कीजिये और तब तक करते रहिये जब तक सफलता आपके हाथ नही लग जाती। ज़रुरत है तो बस यही कि हर उस बाधा को अपने रास्ते से हटा दीजिये जो आपको आपकी मंजिल तक पहुचने से रोक रही है।

 अनेक अध्ययनों से (Studies) ये सामने आया है कि आशावादी और निराशावादी विचार दोनों हमारे दिमाग के दो अलग-अलग हिस्सों की देन है। आशावादी विचारों की तुलना में निराशावादी विचारो को प्रोसेस होने में ज्यादा वक्त लगता है और शायद यही वजह है कि निराशावादी विचार हमारे दिमाग में लम्बे समय तक रहते है।


 उदाहरण के लिए आप इस बात को कभी भूल नहीं पायेंगे कि आप परीक्षा में फेल हुए थे बजाये इसके कि कभी आप पास भी हुए होंगे। इस तरह नकरातमक विचारों का हमारे दिमाग में गहरा असर पड़ता है।


 किसी ने आपके लिए कभी कुछ ऐसा किया था जिससे आपके दिल को बेहद ख़ुशी हुई। ये बात आपको अचानक एक दिन अपने काम के दौरान याद आती है।


 उस घटना को याद करके आप मुस्कुरा उठते है और एक बार फिर से उसे अपने जेहन में उस पूरी घटना का चित्रण करने लगते है। आप दुगने जोश से भरकर अपने काम में जुट जाते है क्योंकि आपका मूड अच्छा हो गया।

 तो देखा आपने कि कैसे ये आशावादी विचार आपको और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करते है, और ये भी मुमकिन है कि बीते हुई कडवी यादे आपको और भी उदास कर दे, और फिर होगा ये कि उसका असर आपकी क्षमता और काबिलियत पर पड़ेगा।

 अपने दिमाग को आप एक टीवी सेट की तरह समझिये जिसमे बहुत से चैनल है। कुछ चैनल आपकी मधुर यादो से जुड़े है तो कुछ कडवी यादो से। अब इस टीवी का रिमोट अपने हाथ में रखिये।


 जो यादे आपको ख़ुशी और उत्साह से भर देती है केवल उन्ही यादो का चैनल अपने दिमाग में चलने दे। इन मीठी यादो को बार बार याद कीजिये। ठीक वैसे ही जैसे आप सिनेमा हाल में मज़े से बैठकर पॉपकॉर्न और सोडा के साथ अपनी मनपसंद फिल्म देखते है।

 वो वक्त याद कीजिये जब आपको लगता था कि आपके साथ सब कुछ गलत ही गलत हो रहा है और फिर उसके कुछ दिनों बाद या महीनो बाद या कहिये सालभर बाद ही अचानक आपकी स्तिथि में सुधार होने लगता है।

 आप ये सोच कर हैरान हो जाते है कि किस तरह से उपरवाले ने आपके लिए कठिन स्तिथि में भी रास्ता ढूंढ ही निकाला है। याद कीजिये ऐसे कई निराशा भरे पल जब आप खुद से ही ये कहते है - मै कभी भी इस मुसीबत से नहीं निकल पाऊंगा।

 आप बस इसी दुःख में रहते है और फिर आप उस मुश्किल हालात को ऐसे पार कर लेते है जैसे कि वो कोई बड़ी बात थी ही नहीं।

 आकर्षक व्यक्तित्व वाली रचेल (Rachael Smith) स्मिथ नाम की महिला उस कार्य के लिए समर्पित थी जो विकासशील देशो के बच्चो की भलाई से सम्बंधित था।


 ये साल 2007 की बात है जब उन्होंने मिस यूनीवर्स प्रतियोगिता में भाग लिया था। प्रतियोगिता के दौरान स्टेज पर चलते उनका संतुलन बिगड़ा और वे अपने पीठ के बल गिर पड़ी।

 ये उनकी जिंदगी का एक बेहद शर्मनाक पल था। वहां उपस्थित लोगो की भीड़ उनपर हंसने लगी और गिरने का मज़ाक उड़ाने लगी। हालांकि वो तुरन्त उठकर खडी भी हो गयी और उन्होंने अपने रेम्प वाक भी पूरी की।

 उन्होंने वहां रखे सवालों के बक्से से अपने लिए एक पर्ची चुनी जिस पर लिखा था “अगर आपको अपना मनपंसद पल फिर से जीने को मिले तो वो क्या होगा?” बिना किसी झिझक के उन्होंने ज़वाब दिया कि वो साउथ अफ्रीका में बिताये अपने उन पलो को फिर से जीना चाहेंगी जब उनकी कोशिश से ज़रूरतमंद बच्चो के चेहरे पर मुस्कान आई थी।

 उस मुस्कान को दुबारा देखने के लिए ही वो उस वक्त में वापस जाना चाहेंगी बजाये इसके कि वो एक बार फिर से स्टेज पर बिना गिरे वाक पूरी करे। उन्होंने उस कडवी याद को तुरंत ही अपने दिमाग से भुला दिया था और उन पलो को याद रखा था जिनसे उन्हें ख़ुशी मिली।



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Chapter 4: हमेशा एक सकारातमक (positive) सोच रखे



 एक विजेता की सबसे बड़ी खूबी होती है उसकी सकारात्मक सोच। ऐसे लोग जब सुबह उठते है तो उम्मीद से भरे एक खुशनुमा दिन की कल्पना करते है।


 अपने हर सफल कार्य के पीछे उपरवाले का शुक्रिया अदा करना नहीं भूलते ऐसे लोग, और उनका यही आशावादी रवैया उनके हर दिन को बेहतर बनाता है।

 अब ज़रा कल्पना कीजिये कि आप एक गाडी चला रहे है जिसका सारा नियंत्रण आपके हाथो में है। आप चाहे तो उसे आगे ले जाए या पीछे मगर उसके लिए ताकत बराबर ही लगेगी। है ना??


 ठीक उसी तरह हमारी जिंदगी की गाडी भी चलती है। अब ये आपके हाथ में है कि आप उसे अपने सकारातमक विचारों से आगे बढाए या फिर नकारात्मक विचारों से भर कर कामयाबी की दौड़ में बहुत पीछे रह जाए।

 हम में से बहुत से लोग ऐसे है जो अपनी हर असफलता का दोष परिस्तिथियों पर डाल देते है। आप उन्हें अक्सर ये कहते हुए सुन सकते है कि “मेरा बचपन बहुत अभावो में बीता इसलिए मै ये नहीं कर पाया” या फिर “उनकी बीमारी ने उन्हें चिडचिडा बना दिया है ”.


 मगर ये सारे बहाने है सफलता हासिल ना कर पाने के। आपको ऐसे कई लोगो के उदाहरण मिल जायेंगे जिन्होंने गरीबी और अभावो में पैदा होकर भी अपनी सफलता के झंडे गाड़े है।


 आप लोगो के दो समूह लीजिये। उनमे से एक समूह के लोग आशावादी है और दुसरा समूह निराशावादी लोगो का है। अब परिस्तिथि चाहे जो भी हो उन दोनों समूह के लोगो के सामने एक जैसी ही चुनौतियां रखे।


 अब आप जब परिणाम देखेंगे तो हैरान रह जायेंगे। आशावादी लोगो के समूह ने उन चुनौतियों से निपटने का कोई न कोई रास्ता निकाल लिया होगा मगर निराशावादी अपने स्वभाव के अनुसार यूँ ही हाथ पर हाथ धरे बैठे होंगे। तो ज़ाहिर है कि ये सभी बाते आपकी पूर्वनिर्धारित सोच का परिणाम है।

आप खुश रहेंगे या दुखी, ये निर्भर करता है परिस्तिथियों से निबटने की आपकी सोच पर। परिस्तिथिया कभी भी मुख्य कारण नहीं होती, कारण बनते है हमारे अपने विचार।


 ये आप पर निर्भर है कि आप अपने दिन की शुरुवात किस तरह करना चाहते है। एक व्यक्ति सुबह उठकर कहता है “सुप्रभात, शुक्रिया भगवान् आज के दिन के लिए” वही दूसरा यक्ति बोलता है “ओह नहीं ! सुबह हो गयी”.


 अब आप खुद चुनिए कि आप इनमे से कौन सा व्यक्ति बनना चाहते है। जो बाते आपके नियंत्रण से बाहर है उन्हें कभी भी अपनी खुशियों या नाखुशी की वजह मत बनने दीजिये और ना ही इस बात को कि लोग आपके साथ कैसा व्यवहार करते है, या फिर सड़क पर ट्रेफिक जैसे मामूली बातो पर विचार कीजिये।

 जो चीज़े आपके वश में नहीं है उन्हें स्वीकार करना सीख लीजिये। कुछ बाते, परिस्तिथिया कभी नहीं बदलती... तो बेहतर है उनके बारे में परेशान होना छोड़ दिया जाए। बेहतर है कि आप पहले से ही सोच लीजिये कि हर हाल में आज आपका दिन बहुत अच्छा गुजरने वाला है।

 जीतना आपके खून में शामिल है क्योंकि उपरवाले ने आपको जीतने के लिए ही बनाया है ना कि एक मामूली जिंदगी जीने के लिए। अगर भगवान आपको पहले से ही आपकी जीत का रास्ता दिखा दे या वो मौके आपके सामने खोल दे जो आपको कामयाबी तक ले जाए तो ज़ाहिर है कि आप अपनी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त रहेंगे और हर पल उत्साह के साथ बिताएंगे।


 मगर ये असल जिंदगी में कहाँ होता है ? भविष्य में क्या होने वाला है ये तो कोई भी नहीं जानता। लेकिन फिर भी इस बात पर पूरा यकीन करते है कि उपरवाले ने आपके लिए कुछ बेहतर ही सोचा होगा।

 अब अगर इसके बावजूद भी किसी कारण आप मनचाहा प्राप्त नहीं कर पाते तो भी निराश मत होइए और ये कहना शुरू मत कीजिये कि “मुझे तो पहली ही पता था कि कामयाबी मेरे नसीब में नहीं है” बजाये इसके आप ये कहिये “शायद भगवान् की कुछ और इच्छा होगी, शायद उसने मेरे लिए कुछ बेहतर सोचा होगा”.

 हमेशा अपने विचारों पर ध्यान दीजिये कि वो किस ओर जा रहे है। हार और असफलता के बारे में सोचना आपको हार का मुंह ही दिखायेगा। हो सकता है कि आपकी यही निराशावादी सोच आपके जीवन में सच्चे प्यार को आने ही ना दे रही हो।


 नकरात्मक विचार आपके उत्साह को कम कर देते है और आपके भीतर रोगों से लड़ने की क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है जिससे अनेक रोग आपको घेर लेते है।


 केंसर के मरीजो के इलाज में एक बहुत महतवपूर्ण हिस्सा इलाज के प्रति उनका रवैया भी है। उनके इस खतरनाक बिमारी से लड़ने का ज़ज्बा भी कहीं न कहीं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाने में मदद करता है।

 ऐसे लोगो के जीने की संभावना बड जाती है जो केंसर की घातक बिमारी को हराकर एक स्वस्थ जीवन जीने की कल्पना करते है। अगर कोई कैंसर रोगी अपनी बिमारी से घबराकर जीने की आशा ही छोड़ दे तो उसका प्रभाव ज़रूर उसके इलाज़ पर भी पड़ता है। मरने से पहले ही जिंदगी से हार मान लेना समस्या का समाधान नहीं है।

 एक वैज्ञानिक प्रयोग के लिए डॉक्टर्स ने रोगियों को दो समूहों में बाँट दिया. दोनों समूहो के रोगियों के घुटने ज़वाब दे चुके थे जिन्हें सर्ज़री की ज़रुरत थी।


 डॉक्टर्स ने सर्जेरी केवल पहले समूह पर की और दुसरे समूह के लोगो को बेहोश करके उनके घुटनों पर कुछ ऐसे कट के निशान लगाए जिनसे उन्हें सर्ज़री हो जाने का यकीन हो।

 करीब दो साल बाद ये चौकाने वाली बात सामने आई कि पहले समूह के रोगियों की तरह दुसरे समूह के रोगियों ने भी अपने घुटनों की तकलीफ से निजात पाने की जानकरी दी।

 हालांकि उनके घुटनों की सर्ज़री तो कभी हुई ही नहीं थी, और उससे बढकर हैरानी की बात ये थी कि जांच करने पर उनके घुटने पहले से बेहतर स्तिथि में मिले. और ये सब इसलिए हुआ क्योंकि उन्हें अपने स्वस्थ हो जाने का विश्वास हो गया था।



अध्याय 5: अपना बेहतरीन देने की कोशिश करे



 एक एवरेज इंसान बनकर रहने के बजाये सबसे बेहतर बनने का प्रयास करे। एक आम इंसान बनकर रहना भूल जाए। आप आम जिंदगी जीने के लिए पैदा नहीं हुए है। हमेशा कोशिश करे कि आप अपना बेहतरीन दे।


 ये ज़रूरी नहीं कि हर बार अपने मकसद में आप सफल रहे फिर भी आपको तस्सली होगी कि आपने बेहतरीन करने की कोशिश की। अगर आपको एक मील दूर जाना है तो दो मील चलिए।

 जो आपसे उम्मीद है उससे बढ़कर कीजिये। इसके लिए आप अपने लक्ष्य को अपने सामने रख सकते है और फिर एक सकारात्मक रवैये के साथ अपनी जीत का विश्वास कीजिये।

 लेकिन जीत की दिशा में ये आपका पहला कदम ही होगा। आपका असली मकसद तो उसके बाद शुरू होगा। उन बातो को अमल में लाये जो आपको मंजिल तक पहुचने में मदद करेंगी।

 कोशिश कीजिये अपने रोजाना समय से 10 मिनट पहले उठने की, काम पर 5 मिनट पहले पहुचिये। 30 मिनट काम करने के बाद काम से थककर ना बैठे।

 सफलता और काम में तरक्की हासिल करने का यही एक रास्ता है। आज जिस दौर में हम रह रहे है वहां प्रतिस्पर्धा इतनी अधिक है कि अगर हम कड़ी मेहनत नहीं करेंगे, नयी चीज़े नहीं सीखेंगे, खुद में सुधार नहीं लायेंगे तो सफलता की इस दौड़ में बहुत पीछे रह जायेंगे।


 हर रोज़ सोने से पहले अपने पूरे दिनभर को याद कीजिये। खुद से सवाल करे “क्या मै साधारण हूँ या कुछ बेहतर करने की कोशिश कर रहा हूँ”.

 कुछ ऐसी जगहों में जहाँ पीने का पानी बिलकुल भी उपलब्ध नहीं है वहां पर भी लोगो ने उस जगह को बिलकुल साफ़ सुथरा बना कर रखा है। ऐसा क्यों ? क्योंकि हालात चाहे कैसे भी क्यों न हो वे लोग भगवान् की दी हुई चीज़ का पूरा सम्मान कर रहे है।


 उपरवाले की दी हुई हर चीज़ की कद्र करे फिर चाहे वो आपका पुराना घर ही क्यों न हो क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते है तो उससे और ज्यादा की उम्मीद कैसे कर सकते है ? ज़रूरी नहीं कि करोडो रूपये अपने पुराने घर में खर्च करे या खुद पर।

 चाहे कम में ही सही मगर उसका ध्यान रखे। आप चाहे जो भी करे पूरे दिल से करे जिससे भीड़ में आपकी सबसे अलग पहचान बने। चाहे आपके आसपास कितने ही काबिल लोग क्यों न हो, उनके जैसा बनने के बजाये अपनी अलग छवि बनाये।

 ये कभी ना सोचे कि “अगर ये उन्हें नहीं आता तो भला मुझे कैसे आएगा”. इतनी मेहनत करे कि सफलता सिर्फ आपके कदम चूमे।

 अपनी एक आदत बना ले कि आप जो काम भी हाथ में ले उसे बेहतर से बेहतरीन करने की कोशिश करे फिर चाहे वो काम कितना भी छोटा क्यों न हो।


 मान लीजिये किसी स्टोर में गलती से आपसे कुछ सामान नीचे गिर जाता है तो आपको चाहिए कि खुद उसे साफ़ करे, ये उम्मीद ना करे कि कोई और आकर उसे साफ़ कर देगा। जो आपसे गिरा है उसे उठाकर उसकी जगह पर वापस तरीके से रख दीजिये।


 हर सुबह जब आप उठे तो नहाने के बाद साफ़ सुथरे कपडे पहने। अपने बाल सँवारे। भगवान को प्रसन्न करने का ये भी एक तरीका है क्योंकि ऐसा करके आप अपने बनाने वाले के प्रति आभार व्यक्त करते है।


 फिर भले ही आप गरीब हो या अमीर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। जितना आपसे हो सकता है आप उतने अच्छे दिखने की कोशिश तो कर ही सकते है।

 जब आप कुछ नेक काम करते है तो ये सोच के मत कीजिये कि ऐसा करना आपकी मजबूरी है या फिर कोई आपको देख रहा है बल्कि उसे दिल से चाहते हुए कीजिये। कुछ ऐसे काम जो आपके ना चाहते हुए करने पड़ते है उन्हें भी ये सोच कर कीजिये कि भगवान् के नाम पर आप वो कर रहे है। यकीन मानिए एक न एक दिन भगवान् आपको इसका ईनाम ज़रूर देगा।

 जोल, इस किताब के लेखक, पहले एक चर्च में पेस्टर हुआ करते थे। एक दिन जब वो पार्किंग लोट में अपनी कार पार्क कर रहे थे तब कार का दरवाजा खोलते वक्त उसमे रखा कचरे का डब्बा नीचे गिर पड़ा।


 उन्होंने वो डब्बा उठा तो लिया मगर हवा के कारण सारा का सारा कचरा पार्किंग लोट में इधर-उधर बिखर गया। अब जोल ने सोचा, चूँकि कूड़ा बीनना उनका काम नहीं है और उन्हें देर भी हो रही थी तो इसे ऐसे ही रहने दिया जाए।

 मगर तभी उन्हें उपरवाले का ध्यान आया और उन्होंने फैसला किया कि वो सारा कचरा बीन कर वापस उस डब्बे में डालेंगे। जब उनका काम ख़त्म हुआ तो उन्होंने देखा वहां गाडी में बैठे एक दम्पति जोल को ही देख रहे थे।

 उन्होंने गाडी की खिड़की खोली और जोल को बताया कि वो जोल को चर्च में देख चुके है और आज वे जोल को इस स्तिथि में देखकर जानने चाहते थे कि आखिर जोल करते क्या है? कहना ना होगा कि जोल ने भगवान् का शुक्रिया अदा किया जो उसने उन्हें शर्मिंदा होने से बचा लिया। तो इस तरह भगवान् ने उन्हें उनकी नेकी का फल दिया।



Chapter 6: अपनी मजिल की तरफ बढ़ते रहे



 आप चाहे कितने भी माहिर और अनुभवी क्यों ना हो सीखना कभी मत छोडिये, क्योंकि सीखने का कोई अंत नहीं है। जीवन में इतना कुछ है सीखने के लिए कि आप जिंदगी भर भी सीखे तो कम है।


 कई लोग सोचते है कि एक बार स्कूल या कालेज की पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद उन्हें कुछ और सीखने की आवश्यकता नहीं है, कुछ नया पढने की ज़रुरत नहीं है।

 तो क्या आप जो कुछ भी सीखते है क्या वो सिर्फ स्कूल तक ही सिमित है ? नहीं ! बिलकुल नहीं. क्योंकि सीखना कभी ख़त्म नहीं होता। ऐसी कई चीज़े होंगी जो आपने अब तक नहीं सीखी होंगी।

 अगर आपमें कोई हुनर है तो उसे अभ्यास से और निखारिये। क्योंकि जब आप सीखना छोड़ देते है तो आप अपने हुनर को खोने लगते है जो भगवान् ने आपको आशीर्वाद स्वरूप दिया है।

 जीवन में हर चीज़ अभ्यास से ही सीखी जाती है। बार-बार अभ्यास कीजिये मगर रुकिए नहीं। अगर आपने अभ्यास करना छोड़ दिया तो जहाँ आप आज है अगले साल भी बस वही के वही रह जायंगे।

 आप नहीं तो कोई और आप से आगे निकल जाएगा और आपको पूरे एक साल के लिए पछाड़ देगा। आप चाहे जो भी हो, एक अध्यापक, डॉक्टर, इंजीनियर, या फिर कोई मामूली कामगार या फिर एक विद्यार्थी ही क्यों न हो, खुद को आगे बढ़ने से कभी रोकिये मत।


 क्योंकि आपकी ज़िमेदारी ना सिर्फ अपने और अपने परिवार के प्रति बल्कि उस उपरवाले के प्रति भी एक जिम्मेदारी है। दुनिया तेज़ी से बदल रही है और आपको इसके साथ कदम मिलाकर चलना ही पड़ेगा।

 जब भगवान् ने अपने बन्दे चुने तो उसने उनके सामने कठिन चुनौतिया रखी। वो चुनौतिया थी सीखने की, ज्ञान अर्जित करने की। ना कि यूँ ही खाली बैठने की। यही बात हम पर भी लागू होती है कि हम जीवन में कुछ ना कुछ सीखते रहे, नया करते है, और जिंदगी का भी यही उसूल है।

 आप हमेशा एक शिशु बनकर नहीं रहते, आप बड़े होते हो, आपके शरीर की बनावट बदलती है और धीरे धीरे वक्त के साथ आपकी दिमागी क्षमता भी बड़ती जाती है।

 यदि आप अपने काम से ये सोच कर खुश नहीं है कि इससे आपको कुछ सीखने को नहीं मिलेगा। आप वो नौकरी छोड़ने की सोच रहे हो मगर ऐसा कर नहीं पाते हो तो यकीन मानिए आप जिंदगी में कभी आगे नहीं बड सकते। आप वही के वही रह जायेंगे,


 और अगर जॉब नहीं छोड़ सकते तो मत छोड़िए मगर साथ साथ आप वो कीजिये जो आप करना चाहते है। अपनी काबिलियत को निखारिये। बेहतर से बेहतरीन करते जाइये।

 जिंदगी में नए अनुभवो से गुज़ारिए, अपना वजन कम करना चाहते है तो कीजिये। कुछ भी कीजिये मगर कोशिश करना मत छोडिये। आपकी काबिलियत उपरवाला जानता है इसलिए वो आपके सामने नयी चुनौतियाँ भी खड़ी करेगा और तरक्की के नए दरवाजे भी खोलेगा।

 कभी मत सोचिये कि आप अपना वक्त बर्बाद कर रहे है या बस समय गुज़ार रहे है। बस जो भी करे पूरे दिल से करे, और अगर वो करना आपकी मजबूरी है तो भी उसे बेहतर बनाये।

 क्योंकि आप कभी नहीं जान सकते कि उपरवाला आपको कब बेहतर मौके दे दे। दिन के 24 घंटो में से बस 2 घंटे अपने लिए निकालिए। इस वक्त में आप नयी चीज़े सीखे, अपने हुनर को निखारे।

 मान लीजिये आप डॉक्टर है तो अपने पेशे से सम्बंधित आलेख पढ़े। इलाज के अलग-अलग तरीको का अभ्यास करे। खतरे मोल लेने से डरे नहीं क्योंकि आपके पास खोने के लिए सिर्फ डर है और अगर सफल हुए तो कामयाबी आपके साथ होगी। याद रखिये जो खतरे मोल लेता है वही खुद को बेहतर बना सकता है।

 अब माना आप किसी दफ्तर के कर्मचारी है और आप एक लम्बी छुट्टी पर जाते है। अब अगर आपके ना रहने पर भी दफ्तर का कामकाज सुचारू रूप से चल रहा है तो ये बात बेशक दफ्तर के लिए तो अच्छी है पर ये आपके लिए बिलकुल भी अच्छी नहीं होगी।


 ये एक तरह के खतरे की घंटी है आपके लिए, क्योंकि आपके बिना भी अगर उनका काम चलता है तो उन्हें कभी भी आपको नौकरी से निकालने में हिचकिचाहट नहीं होगी।

 जब दुनिया को आपके होने ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता तो आप में कोई भी काबिलियत नहीं है। आप कुछ भी ऐसा नहीं कर रहे जिसका असर लोगो पर पड़ता हो।

 अब अपने आप से पूछे कि आप क्या हो ? समस्या का समाधान निकालने वाले या फिर समस्या सुनाने वाले। क्या आप अपने बॉस के पास जाकर उन्हें बस अपनी समस्याए बता कर चले आते है ? या फिर आप जाकर उन्हें कोई समस्या बताते है और उसका समाधान भी सुझाते है ?

 याद रखे समस्या का रोना रोने के बजाये हमेशा उसका कोई समाधान ढूढने की कोशिश करे। जो कुछ भी आप करे उसके लिए एक प्लान दिमाग में सोच कर रखे।

 सपने देखना अच्छा है मगर इतना ही काफी नहीं है उसके लिए मेहनत भी करे।

 मान लीजिये आप पतला होना चाहते है और अपने को 10 किलो कम देखने की आप कल्पना भी करते है। मै पौष्टिक खाना खाऊंगा, हफ्ते में तीन दिन जिम जाऊँगा सिर्फ ये सोचे नहीं बल्कि उस जिम में जाना शुरू कर दीजिये, पौष्टिक खाना शुरू कर दीजिये, और हर रोज़ अपनी कल्पना में खुद को सेहतमंद और तंदुरुस्त देखते रहिये।

 उपरवाला हमारे सामने ऐसे कामयाब लोगो का उदाहरण रखता है जिनसे हम कुछ सीख सके। तो उन सुनहरे मौको को हाथ से जाने मत दीजिये, उन्हें लपक लीजिये। अगर आपको समझ नहीं आ रहा तो पूछिए कि ये कैसे होता है। सफल लोगो को अपने जीवन का हीरो बनाईये, उनसे मित्रता बढाईये।

 पाब्लो कासल्स (Pablo Casals) महान (cellists) चेलो वादकों में से एक थे। 12 साल की उम्र से ही उन्होंने चेलो बजाना शुरू कर दिया था और इस कला में माहिर बन गए मगर फिर भी 85 साल की उम्र तक भी उन्होंने इसे सीखना नहीं छोड़ा था, वे हर रोज़ इसका अभ्यास किया करते थे।




अध्याय 7: सेवा करे



 यदि आप नाखुश है तो कुछ अलग करने का प्रयास करे। हम नाखुश तभी होते है जब हमारा सारा ध्यान खुद पर और अपनी ज़रूरतों पर होता है। सिर्फ अपने पर फोकस करने केबजाये दुसरो की ज़रुरतो के बारे में भी सोचना चाहिए।


 हम सिर्फ लेने के लिए नहीं बल्कि देने के लिए भी बने है.. कभी ऐसा भी होता है कि आपका कोई जानने वाला जिसकी सालो से आपसे बात नहीं हुई, एक दिन अचानक फोन पर आपसे मदद मांगता है।

 “तुम्हे तो बस ज़रुरत के वक्त ही मेरी याद आती है” ऐसा कहने के बजाये ख़ुशी से अपने दोस्त की मदद करे। इसे उपरवाले की मर्जी समझिये कि आप दुसरो के काम आ रहे है।

 अब अगर भले ही बदले में आपको कुछ ना मिले, एक शुक्रिया तक नहीं तो निराश ना हो। वो कहावत तो आपने सुनी ही होगी “नेकी कर और दरिया में डाल दे”.

 क्या आपने कभी महसूस किया है कि आप किसी के लिए कुछ करने गए जिसमे आपको बहुत दिक्कते आई, काम बहुत मुश्किल लगा मगर उसके बाद बजाये बुरी तरह थक जाने के, आपने खुद को जोश से भरा महसूस किया।

 जैसे कि कहीं से ताकत और उत्साह का एक पुंज आपके भीतर समां गया हो। यही तो दुसरो की सेवा करने का प्रभाव है। ये आपकामूल स्वभाव है कि आप दुसरो की सेवा के लिए ही बने है।

 खुद के लिए कुछ हासिल करना बुरी बात नहीं है, अपने लिए बड़ा घर, एशो आराम की चीज़े खरीदे मगर साथ ही सेवाभावी बनकर औरो की मदद भी करे।

 अगर आप थके हुए या उदास है तो औरो को कुछ ऐसा बोलिए जो उन्हें अच्छा लगे, उन्हें प्रेरित कीजिये। उन्हें कहिये कि “वे बहुत अच्छे लग रहे है या फिर जो उन्होंने किया वो बेहद प्रभावशाली था”. उन्हें सराहिये, उन्हें अच्छा लगेगा लेकिन साथ ही इसका असर आपकी आत्मा पर भी गहरे रूप से पड़ेगा।


 सेवा करने से मतलब सिर्फ आपके दोस्त या सहयोगी ही नहीं है बल्कि वो तमाम लोग है जो आपकी जिंदगी में शामिल है। जैसे कभी अपनी पत्नी की घर साफ़ करने में मदद कीजिये, उसके लिए बर्तन साफ़ कर दीजिये, कपडे धोकर सुखाइए, बिल भर दीजिये, लॉन की सफाई कर दीजिये।


 क्योंकि वो आपकी पत्नी है तो आपका फ़र्ज़ है उसे सहयोग दीजिये। अगर आप ये सोचते है कि घर का काम सिर्फ पत्नी करेगी और इसलिए ही शादी की जाती है, तो आपको पत्नी की नहीं एक नौकरानी की ज़रुरत है।

 आप काम के लिए तो किसी को भी पैसे देकर रख सकते है मगर अपनी जिंदगी के सुख दुःख बाँटने के लिए आपको एक जीवनसाथी चाहिए। किसी दिन सुबह उससे पहले उठकर उसके लिए नाश्ता बना दीजिये, उसकी तारीफ़ कीजिये कि वो कितनी मेहनत करती है, उसे बताईये कि आप उसे कितना प्यार करते है। यकीन मानिए वो ख़ुशी से झूम उठेगी और बदले में आपको भी ढेर सारी खुशियाँ देगी।

 गरीबो और बेसहारो की मदद करने वाले लोग भगवान् के बहुत प्रिय होते है। जब आप किसी अनाथ को भोजन देते है तो उसके चेहरे की मुकुराहट आप कभी नहीं भूल सकते।


 अपने दिन की शुरुवात अगर लोगो की मदद से करेगे तो आपका पूरा दिन सुकून से बीतेगा। आप औरो को खुश करके खुद की परेशानिया भूल जाते है। किसी की मदद करने से जो तस्सली दिल को मिलती है उसका तो कहना ही क्या !

 एक बूड़े दम्पति हमेशा दुसरो की मदद को तैयार रहते है। एक बार ऐसा ही एक नेक काम करने के बाद वे दम्पति साउथ अफ्रीका से लौट रहे थे। जिस जहाज में वे लोग सफ़र कर रहे थे उस में प्रेजिडेंट टेडी रूजवेल्ट भी थे जो अफ्रीका में अपने शिकार के दौरे से लौट रहे थे।


 जब जहाज बंदरगाह में रुका तो वहां लोगो की भीड़ प्रेजिडेंट रूजवेल्ट का स्वागत करने के लिए खड़ी थी। सब उनके लिए नारे लगा रहे थे। इन बूड़े दम्पति को इस बात का बहुत बुरा लगा।

 वे सोचने लगे कि लोगो की भलाई करने के बाद भी कोई उनकी तारीफ़ नहीं कर रहा, उनका स्वागत नहीं किया गया। लोग उनके नेक काम को और उन्हें भूल जायेंगे।

 मगर सच तो ये है कि भले ही लोगो ने उन्हें भुला दिया मगर भगवान् की अदालत में उन्हें कभी भुलाया नहीं जायेगे। उन्हें उनकी नेकी का इनाम उपरवाला स्वर्ग में ज़रूर देगा।



Chapter 8: Passionate रहे



 खुद से एक सवाल कीजिये “क्या मै जीवित हूँ?” इस बात का मतलब सिर्फ जिंदा रहने और खाना खाने से नहीं है। इस बात को गहरे से सोच कर देखिये. आपके क्या लक्ष्य है ? आपने अब तक क्या हासिल किया ? जीवन के प्रति आपका क्या नजरिया है ? क्योंकि इन्ही सब बातो से निर्धारित होगा कि सही अर्थो में जिंदगी के मायने आखिर क्या है ?


 भगवान् ने आखिर कुछ सोच कर ही हमें इस धरती पर भेजा है कि हम अपने जीवन में कुछ अर्थपूर्ण करे और तरक्की की राह में आगे बढे।


 अध्ययन से पता चला है कि जोशीले लोग हमेशा बेहतर कार्य करते है, औरो की तुलना में उनकी तरक्की भी जल्दी होती है और ज़्यादातर वो खुशहाल जीवन जीते है।


 आपको अपने जीवन में एक जोश की ज़रुरत है जो आगे बढ़ने के लिए बहुत ज़रूरी है। अगर आपके पास बहुत अधिक नहीं है तो भी उपरवाले का धन्यवाद करते हुए हर पल को जोश के साथ जिए।

 आप जिंदा है, बिना तकलीफ आपकी साँसे चल रही है, आप चल सकते है, देख सकते है, सोच सकते है और तंदुरुस्त है, तो क्या ये सब काफी नहीं है उपरवाले का शुक्रिया अदा करने के लिए ? मान लीजिये कि आप कभी सड़क दुर्घटना के शिकार हो जाते है।

 आपकी गाड़ी बुरी तरह पिचक कर कबाड़ बन गई मगर आप बच गए। आपको बस मामूली चोट आई। तो इस बात का शुक्र मनाईये कि उपरवाले की मेहरबानी आप पर थी जो आप बाल-बाल बचे।

 गाडी गयी तो गई मगर जान तो बची। भगवान् की दी हुई हर चीज़ को नेमत मानिए, उसकी कद्र कीजिये। जब भगवान् ने आपको एक पत्नी दी आप ख़ुश थे कि भगवान् की कृपा आप पर हुई।

 तो अब उसी पत्नी का सम्मान कीजिये, उसका ध्यान रखिये क्योंकि वो आपको भगवान् का दिया हुआ तोहफा है। अगर पत्नी की कोई बात पसंद ना आये तो ये मत सोचे कि भगवान् ने मुझे ऐसी पत्नी क्यों दी बल्कि शुक्र मनाये कि आपकी पत्नी आपके लिए इतना कुछ करती है। आपके सुख दुख में साथ देती है। जब आप बीमार पड़ते है तो वही आपकी सेवा करती है।

 जो कुछ भी आप करे उसे 100% दिल से करे। कमियाँ ढूढने के बजाए अपने इरादों पर कायम रहे। जो आपको करना अच्छा नहीं लगता मसलन कपडे धोना या कोई और काम, तो उसे दुखी मन से ना करे बल्कि भगवान् के लिए पूरे मन से करे।

 मैंने एक बार एक पोलिस ऑफिसर को देखा जो शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर ट्रेफिक नियंत्रित कर रहा था। मैंने देखा उसके हाथ हवा में लहरा रहे थे और वाहनों को निर्देश देते हुए वो एक तरह से नाच ही रहा था।

 उसके काम करने का ढंग इतना निराला था कि कुछ गाड़ीवाले उसे सड़क के किनारे रुक कर उसे ही देखने लगे। उसने एक तरह से वहां मनोरंजन का माहौल पैदा कर दिया था। ट्रेफिक नियंत्रण जैसे उबाऊ काम को भी वो दिलचस्प तरीके से कर रहा था।

 कभी दुसरो जैसा बनने की मत सोचिये। जो आप है उसी में बेहतरी लाइए। इस बात को मानिये कि भगवान् ने आपको निराला बनाया है। हो सकता है कि आपमें कोई ऐसे खासियत हो जिसके लिए लोग तरसते है, और सबसे बड़ी बात.. सार्थक करिए, उपयोगी बनिये।


 क्योंकि कुछ ऐसा करना जिसका कोई उपयोग हो आपको जोशीला बनाए रखेगा। आखिरकार सबको एक दिन इस दुनिया से जाना है। मगर जो लोग अपनी जिंदगी का उपयोग नहीं जानते, जीते जी मर जाते है। ना तो वो अपना भला कर पाते है और ना ही दुसरो के काम आ पाते है।

 जो मौके आपने गँवाए है उन्हें भूल जाईये। जिंदगी आपको और कई मौके देगी। आप पीछे देखकर गाड़ी नहीं चला सकते तो उसी तरह बीते वक्त को याद करते रहने से आप आगे नहीं बड सकते।

 हम सभी अपने जीवन में कभी ना कभी पछतावे और नाकामयाबी के दौर से गुज़रते है। मगर उन बीती बातो पर धूल डालकर आगे की ओर देखे।

 एक 40 वर्षीया महिला की ओपन हार्ट सर्जरी हुई। ये एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया होती है फिर भी हर साल 230,000 से भी ज्यादा ओपन हार्ट सर्ज़री होती है।


 सर्ज़री हो जाने के बाद उस महिला का दिल नहीं धड़का। यहाँ तक कि ख़ास दवाईयों का भी असर नहीं हुआ। सर्जन ने हरसम्भव कोशिश की मगर वो दिल को दुबारा धडकाने में असफल रहा। वो इसे मरीज़ का भाग्य समझकर हार मानने ही वाला था कि उसने एक अंतिम बार कोशिश की।

 वो उस महिला के कानो में फुसफुसाया “मै तुम्हारे लिए वो सब कुछ कर चूका हूँ जो मेरे हाथ में था। अब मै चाहता हूँ कि तुम अपने दिल को धडकने के लिए बोलो”.

 सर्जन के ऐसा कहते ही अचानक जैसे एक चमत्कार हुआ। महिला के दिल ने धडकना शुरू कर दिया। ये उस महिला के विश्वास की ही शक्ति थी जिसने उसे दुबारा जीवन दिया।


 दोस्तों ये बुक JOEL OSTEEN ने लेखी है और इसे PUBLISH किया है “FathWords” ने। ये सारा Credit उन्ही को जाता है।



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 तो दोस्तों आपको आज का हमारा ये You Can and You Will Book Summary in Hindi कैसी लगी नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस बुक समरी को अपने दोस्तों के शेयर करे।


आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद।

Wish You All The Very Best.

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