The 10X Rule: The Only Difference Between Success and Failure Book Review in Hindi (Complete)

The 10X Rule: The Only Difference Between Success and Failure Book Review in Hindi

Hello दोस्तों, ये है ग्रांट कार्डोंन की बेस्ट सेलर बुक “The 10X Rule Difference Between Success and Failure” की Review. इसमें आपको कुछ बेहद इम्पोर्टेन्ट टिप्स मिलेंगे सक्सेस को अचीव करने के लिए, आप इस बुक Review को अच्छे से पढ़े क्यूंकि ये बहुत interesting है।

The 10X Rule: The Only Difference Between Success and Failure Book Review in Hindi (Complete)

The 10X Rule Difference Between Success and Failure Book Review in Hindi


परिचय

क्या कभी आपकी लाइफ में ऐसा हुआ कि आप सेंटर ऑफ़ अटेंशन पाने के लिए मरे जा रहे थे ? हो सकता है हाई स्कूल टाइम में ऐसा हुआ हो या कॉलेज या कोई स्पोर्ट्स खेलते टाइम या फिर बिजनेस वर्ल्ड में।

क्या आपको लगा कि उस टाइम जो भी बंदा आपको देखे बस आपका दीवाना हो जाये ? इसका जवाब शायद यही होगा कि आपमें से बहुत से लोगो ने ये चीज़ अपनी लाइफ में कभी ना कभी एक्सपेरिएंस की होगी,


लेकिन असली सवाल ये है कि: क्या आप सच में स्टार अट्रेक्शन बन पाए ? क्या आप लाखो दिलो की धडकन बने या फिर किसी एक भी बन्दे का दिल जीत पाए ?


अगर नहीं तो कोई बात नहीं क्योंकि मै आपको बताता हूँ कि अभी कुछ ख़ास देर नहीं हुई है। लेकिन अगर आपका ज़वाब है हां तो मै दावे से बोल सकता हूँ कि आप इससे बढ़िया कर सकते थे।


मुझे याद है अपने बचपन में ही मैंने ये ठान ली थी कि बड़ा होके जब मै कॉलेज जाऊँगा तो अपने सारे दोस्तों में सबसे बेस्ट बनके दिखाऊंगा। मैंने कसम खा ली थी कि अगली बार जब कोई रीयूनियन होगा तो गेम्स में सबसे बढ़िया मै ही करूँगा।


बेशक ये मेरी दिली तम्मना थी, फिर भी जो सोचा था मै उसका हाफ़ भी अचीव नहीं कर पाया। सच्ची बात तो ये है कि अगली बार जब रीयूनियन हुआ तो मै खुद पर और अपनी अचीवमेंट्स पर इतना शर्मिंदा था कि क्या बोलू।


मैं खुद से पूछता रहा कि मुझमें कहाँ कमी रह गयी, मगर मेरे पास इसका कोई ज़वाब नहीं था। जब तक कि मेरे हाथ ग्रांट कार्डोंन की ये बुक नहीं लग गयी जिसका नाम है: “10X रूल: द ओनली डिफ़रेंस बिटवीन सक्सेस एंड फेलर”


इस बुक का ऐम आपकी हेल्प करना है और मैं इसे पढ़कर बैटर अचीव करता हूँ जोकि हम सबके के लिए हमारा सबसे बड़ा डर है। ये बुक हमारे अन्दर दसगुना ज्यादा डिस्प्लीन, फोकस और हार्ड वर्क की आदत इन्स्टिल करके हमें एक एवरेज पर्सन की पोजीशन से उठाकर आगे ले जाती है।


मेरे साथ एंड तक रहे, मै आपको बुक के बारे में और बताता रहूगा ताकि आपको इसके बारे में एक जर्नल और एडिकेट आईडिया मिल सके कि आखिर ये है क्या।



हमारी सोसाइटी और इसकी स्क्रिप्ट: डीफिलिंग द ऑड्स

वो चीज़े जो हम इस दुनिया में सबसे पहले आकर सीखते है, इस सोसाइटी ने पहले ही प्रेडिक्ट की होती है। जब आप माँ के पेट से इस दुनिया में आते तो आपका माइंड किसी ताबुला रासा की तरह होता है बिलकुल कोरा।

जो कुछ भी आज आपकी नॉलेज है वो इस सोसाइटी और असोसिएशन की देन है। अब जैसे मेल डोमिनेशन और फिमेल सबमिशन यानी मर्दों का बोलबाला और औरतो को दबाकर रखना, ये चीज़े हमारी सोसाइटी ने पहली ही डिसाइड कर ली थी। हम तो बस उसको आगे फॉलो कर रहे है।


दूसरा मिथ जो हमें सोसाइटी से सीखने को मिला वो ये कि मीडियोकोर बने रहने में कोई बुराई नहीं है, और अनलकीली हम भी इसे मानकर फॉलो करने लगते है।


कार्डोंन के हिसाब से ये सबसे बड़ा झूठ है जो सोसाइटी ने हमे सिखाया। अगर सोसाइटी को आपका मीडियोकोर बनना पसंद है तो ये उसके लिए अच्छा है नाकि आपके लिए। आपको तो सक्सेसफुल बनने के लिए इस जिंक्स को तोडना ही होगा। मै बचपन से ही अपने डैड को हर रोज़ सेम चीज़ करते हुए देखते रही। वो सालो तक एक ही जॉब करते रहे, सेम स्टेटस और वो ऐसे ही खुश भी थे। हालांकि उन्होंने मुझे और मेरे भाई को स्कूल भेजा मगर खुद वे अपने स्टेटस से कभी आगे नहीं बड पाए।


ऐसा लगता था कि यही उनकी किस्मत में लिखा है क्योंकि वो इसमें कोम्फर्टबल हो चुके थे। उनके लिए तो यही बहुत था कि उनके बच्चे लाइफ में तरक्की करे। मगर ये गलत सोच है ! अगर मुझे उस टाइम थोड़ी समझ होती तो शायद मै अपने डैड को समझाती।


एवरेज वर्ड का मतलब ही आर्डिनरी है। मेरा ट्रस्ट करो, ये वो चीज़ नहीं है जिसकी आपको ज़रुरत है। अब जैसे मान लो अगर आपके स्कूल, ऑफिस या बाकी जगहों में जितने लोग है सभी बेस्ट बनना चाहते है तो आपको ट्राई करना पड़ेगा कि आप उन सबसे आगे हो।


आपकी डीजायर होनी चाहिए कि आप अपनी कम्युनिटी, डिस्ट्रिक्ट यहाँ तक कि अपनी कंट्री में भी बेस्ट हो। अपना बेस्ट अचीव करने के लिए आपका ऐम एवरेज से हायर होना चाहिए।


इमेजिन करे कि आप उन लोगो के कम्पेयर में कहाँ पहुँच जायेंगे जो खुद को स्कूल, वर्कप्लेस या किसी भी जगह में लिमिट में रखते है – आप उन लोगो को उनकी डीजायर में मात देकर हर जगह ऑटोमेटीकली बेस्ट होंगे, तो इस बात को और अच्छे से समझने के लिए चलो सक्सेस पर एक नजर डालते है।






सक्सेस आखिर है क्या ?

ग्रांट के हिसाब से सक्सेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए आपको पहले ये तीन चीज़े समझनी पड़ेगी:


1. सक्सेस के बिना आप अधूरे है

ये बात सिम्पल और क्लियर है! जब तक आपको सक्सेस नहीं मिल जाती हमेशा अधूरेपन का एहसास रहेगा। मुझे यकीन है आपने कई ऐसे बुजुर्गो को ये रिग्रेट करते हुए सुना होगा कि - ''जब टाइम था तब मुझे ये चीज़ करनी थी मगर नहीं कर पाया।''

ऐसे लोग हमेशा हाथ मलते रहते है क्योंकि उन्हें लाइफ में वो फुलफिलमेंट वाली फीलिंग नहीं आ पाती, और अगर आपको अब तक कोई ऐसा बंदा नहीं मिला तो मेरे डैड की स्टोरी ले लीजिये जो इसका परफेक्ट एक्जाम्पल है।


आज तक मेरे डैड रोते रहते है कि मैंने कैसे अपनी सारी जवानी ऐसे ही वेस्ट कर दी। यही होती है अनफुलफिलमेंट की फीलिंग – रीग्रेट्स से भरी हुई लाइफ;



2. सक्सेसफुल बनना आपकी ड्यूटी है

मुझे कुछ ऐसे भी लोग मिले जिन्हें लगता है कि उनकी सक्सेस का ठेका उनके पेरेंट्स ने ले रखा है। कुछ दिन पहले एक अमीर आदमी के बेटे ने अपने फ्रेंड्स को ये कहा कि उसके पापा उसे सक्सेसफुल बनाने के लिए मेहनत कर रहे है। अब ये कोई अच्छी बात थोड़े ही है। आपकी सक्सेस आपके हाथ में है और इसे हासिल करने के लिए जो करना है आपको करना है।



3. सक्सेस इतनी भी मुश्किल चीज़ नहीं

ये बहुत पॉपुलर थिंकिंग है कि सक्सेस मुश्किल से हाथ आती है और इसे पाना बहुत मुश्किल काम है। सच तो ये है कि ऐसा बिलकुल नहीं है। इसी रोंग माइंडसेट के चलते कई सारे लोग अपना बेस्ट अचीव करने से रह गए। इसी रोंग माइंडसेट ने कई लोगो को इतना ज्यादा हैण्डीकैप बना दिया कि सक्सेस पाने के लिए उन्होंने उलटे-सीधे रस्ते तक अपनाए।

एक कहावत है कि “आसमान इतना बड़ा है कि इसमें हर चिड़िया एक दुसरे को टच किये बगैर बड़े आराम से उड़ान भर सकती है” ये बात काफी हद तक सही है क्योंकि आप भी किसी और का बुरा किये बगैर अपने हिस्से की सक्सेस पा सकते है।


मैंने कई ऐसे किस्से सुने है जहाँ लोग सक्सेस पाने के लिए ऐसे लोगो को सीड़ी बना लेते है जो उनके जैसे प्रीविलेज्ड नहीं है। मेरे एक फ्रेंड ने बताया था कि अफ्रीका में किसी जगह कुछ ऐसे नौजवान भी है जो अमीर और सक्सेसफुल बनने के लिए लोगो का इस्तेमाल करके तंत्र-मंत्र करते है। नहीं, आप तो ऐसा सोचिये भी मत! ऐसा करने से आज तक कोई सक्सेसफुल नहीं हुआ है।


और दूसरी बात सक्सेस आपके लिए एक आल्टरनेटिव नहीं बल्कि एक ज़रूरत की तरह होनी चाहिए। ये आपके लिए कोई एक चॉइस नहीं होनी चाहिए बल्कि आपकी यही एक चॉइस होनी चाहिए।


बेसलाइन ये है कि खुद को कभी भी लिमिट में ना रखे। बस सोचते रहे कि आप क्या-क्या अचीव कर सकते है और आपकी ये अचीवमेंट दुनिया की नजरो मे क्या मायने रखेगी।


एक्स्ट्राआर्डिनरी सक्सेस इतनी भी इज़ी बात नहीं है। इसके लिए आपको उतनी ही एक्स्ट्रा मेहनत और एक्स्ट्रा एफोर्ट करने होंगे। जैसे मैंने पहले कहा था, बेस्ट इन द कंट्री बनने के लिए सिर्फ सोचने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए आपको बाकियों से कुछ ज्यादा एफोर्ट लगाने होंगे– अब ये थोडा मेहनत का काम तो है ही।


कई सारे लोग चाहते तो है कि वे सक्सेसफुल बने लेकिन इम्प्लीमैंटेशन और एक्चुयलाइजेशन के बगैर कहीं भी नहीं पहुँच पाते। ऐसा हाई स्कूल के दिनों मेरे साथ ना जाने कितनी ही बार हुआ है। मै हर टर्म में रेजोल्यूशन लेती थी कि इस बार क्लास में फर्स्ट आके दिखाउंगी मगर मै बस सोचती रह जाती थी।


मैंने कभी भी उतना एफोर्ट नहीं किया और इसलिए मै कभी भी क्लास में बेस्ट नहीं बन पाई। टॉप में पहुंचने के लिए आपको दुसरो से काफी ज्यादा कोशिश करनी पड़ेगी। यही है 10X रुल!


हालांकि मै आपको बता दूँ कि अपने साथ वाले लोगो से 10 गुना ज्यादा स्ट्राइव का मतलब होगा कि आपको बहुत सारे चैलेंजेस लेने होंगे। मान लो जैसे आपको बोला गया कि अपनी कंट्री के लिए ओलम्पिक्स में 100 मीटर की रेस करनी है जो कि आपका भी ड्रीम रहा है, तो आप दुगनी-तिगुनी मेहनत करेंगे ये रेस जीतने के लिए।


नहीं करेंगे क्या ? अब 10X रुल कहता है आपको दस दूना बड़ा एफोर्ट करना है तब जाकर आपको फर्स्ट प्लेस मिलेगा। अगर इसके लिए प्लान ये है कि हर रोज़ एक घंटा प्रेक्टिस करनी है तो 10X रूल के हिसाब से आपको दस घंटे की प्रेक्टिस करनी होगी।


अब ये हुई ना काम की बात, राईट? इस सबमें कुछ चैलेजेस तो आएंगे ही जैसे चक्कर आना या कोई फ्रेक्चर वगैरह। आपको ये सारे चैलेजंस एक्स्पेट करने ही होंगे अगर ओलम्पिक्स में बेस्ट बनना चाहते है तो। सच बोले तो इन चैलेंजेस के बगैर सक्सेस मिलना मुश्किल होगा क्योंकि ये चैलेंजेस हमे ज्यादा टफ और स्ट्रोंग बनाते है।




अपने ओब्जेक्टिव्स डीफ़ाईन करके माइंड कंडिशन करना

अपना ड्रीम अचीव करने के लिए सबसे पहले तो क्लियर कर ले कि आप जा किस तरफ रहे है, क्योंकि आँखों पे पट्टी बाँध के तो आप कोई रेस नहीं जीत सकते! बिना क्लियर विजन के आप बेस्ट नहीं बन सकते।

इसके अलावा अगर आपको लम्बी रेस का घोडा बनना है तो सिम्पल गोल सेट करने से काम नहीं चलेगा। इमेजिन आपको ट्रेक पर सबसे बेस्ट बनना है और आप रोज़ बस एक घंटे की प्रेक्टिस ही कर रहे है।


तो ऐसे कैसे आप बेस्ट बन जायेंगे? सक्सेस पानी है तो आसान रास्ता छोड़ना पड़ेगा। सच तो ये है कि सक्सेस के लिए कोई ईजी रास्ता है ही नहीं। ये बस एक चाल है। एक्स्ट्राआर्डिनरी के लिए जो भी रास्ता है वो चैलेंजिंग, डिमांडिंग और टाईरिंग है।


अगर आपको कोई ईजी रास्ता ही चाहिए तो ये जगह आपके लिए नहीं है। यहाँ हम सक्सेस अचीव करने के लिए जो चाहिए या उससे भी ज्यादा मेहनत करते है। इसका बेसिक प्रिंसिपल यही है कि अपना गोल अचीव करना है तो उसे दस से मल्टीप्लाई कर दो।


आपका ऑब्जेक्टिव दस गुना बड़ा होना चाहिए तब जाकर आप इसे अचीव कंसीडर करे। मै आपको बता दूँ सक्सेस पाने का मतलब है कुछ इम्पोसिबल अचीव करना और ये आपकी सोल रिसपोंसेबिलिटी है। आपने रीस्पोंसेबिलिटी ले ली है कि चाहे कुछ भी हो जाये आप वो हासिल करके ही रहेंगे जो आपके माइंड में है।


अपने ऑब्जेक्टिव डिफाइन करते टाइम हम में से कई लोग गलत तरीका चुनते है। मुझे याद है एक यंग और एस्पाइरिंग एंट्रप्रेंन्योर को मै जानती थी जो एक ऐसा प्रोडक्ट बनाना चाहता था जो दुनिया में बड़ा चेंज लाये।


मुझे याद नहीं आ रहा कि वो क्या प्रोडक्ट था मगर वो हमेशा इसी बारे में बात करता रहता था। हां, उसका आईडिया बेशक अच्छा था लेकिन उसकी अप्रोच रोंग थी। जब उसने लास्ट में वो प्रोडक्ट बनाया तो ये बस उसके अपने घर और उसके कुछ फ्रेंड्स के घर में ही यूज़ हुआ बाकी लोगो को इसके बारे में पता तक नहीं चला।


तो गलती कहाँ थी? गलती ये थी कि उसने इसे मार्केटिंग स्टेज तक नहीं पहुँचाया। उसने प्रोडक्ट तो अच्छा बनाया मगर किसके लिए बनाया ये उसे पता ही नहीं था।


लोग अपना ऑब्जेक्टिव डिफाइन करते वक्त कुछ ऐसी मोस्ट कॉमन गलतियाँ करते है जो नीचे दी गई है :



1. रोंग टारगेट सेट करना

अगर आप ईजी गोल सेट करेंगे तो ज़ाहिर है आपका टारगेट ही गलत होगा। आपको डेयरिंग और चैलेंजिंग गोल सेलेक्ट करने पड़ेंगे। यहाँ रोंग टारगेट, रोंग फोकस हो ये ज़रूरी नहीं बल्कि एवरेज टारगेट है।

अब अगर जैसे आप बस अपनी क्लास में ही फर्स्ट आना चाहते है तो ये एक रोंग टारगेट होगा। ये इसलिए रोंग टारगेट नहीं कि क्लास में बेस्ट होना रोंग है बल्कि इसलिए क्योंकि ये बड़ा ही एवरेज सा टारगेट है जो कोई भी अचीव कर सकता है। जब आपका टारगेट ही रोंग होगा तो डेफिनेटली आपका ओब्जेक्टिव भी गलत हो जाएगा।




2. कोम्प्लेक्सीटी का ध्यान ना रखना

आपके ऑब्जेक्टिव तब भी रोंग होंगे अगर आपने ये जानने की कोशिश नहीं की कि आपका गोल किस हद तक कोम्प्लेक्स है। आप अगर 10X के रुल से चलते है तो ऑटोमेटिकली कोम्प्लेक्सीटीज़ आनी है।

आपको एक प्लान बनाना चाहिए, बड़े डिटेल्स के साथ, जो किसी भी तरह की कोम्प्लेक्सीटी का ध्यान रखेगा। मै हाई स्कूल में कभी भी बेस्ट नहीं थी इसका एक रीजन ये भी था कि मैंने कभी भी कोम्प्ल्कसीटी का ध्यान नहीं रखा।


मै बस सपने देखती रही लेकिन मैंने कभी भी एक डिटेल्ड प्लान नहीं बनाया। सीधी सी बात है कि मेरा सपना कभी पूरा नहीं हुआ। किसी भी उस स्टेप, एनर्जी या रीसोर्सेस को अंडरएस्टीमेट ना करे जो आपके गोल को पूरा करने में मदद करे।




3. कोम्पटीशन पर बहुत ज्यादा ध्यान देना

“जहाँ तक कोम्प्टीशन की बात है, वे कोई स्टैण्डर्ड नहीं होते” आजकल जिसे देखो यही बोलता है ऐसा कुछ करो जो तुम्हारे कॉम्पीटीटर्स नहीं कर रहे है”. इस तरह की स्टेटमेंट लोगो को बड़ा लिमिटेड सोचने पर मजबूर कर देती है और अक्सर वे अपने कोम्प्टीटर्स के लेवल तक या उससे भी कम तक ही पहुँच पाते है। ये 10X रूल एवरेज पर प्रीमियम नहीं लगाता है।

अगर आप किसी चीज़ के लिए मार्किट में उतर रहे है तो आपका ऐम सिर्फ अपने कोम्प्टीटर्स को हराना नहीं होना चाहिए। आपका ऐम ये होना चाहिए कि आप उस चीज़ को डोमिनेट कर ले और सबके लिए स्टैण्डर्ड बन जाये।


मेरे एक फ्रेंड ने कुछ टाइम पहले एक बिजनेस स्टार्ट किया। उसने अपना प्लान भी मेरे साथ डिस्कस किया था। लेकिन उसका मकसद सिर्फ यही था कि अपने साथ कोम्प्टीशन करने वाले लोगो को वो पीछे छोड़ दे।


उसका बिजनेस कैसे लोगो को अफेक्ट करेगा या उसके टारगेट आडीयंश कौन होगे, इससे उसे कोई लेना देना नहीं था। अब उसका धंधा लंबे टाइम तक क्यों नहीं चल पाया, ये आप समझ ही सकते है। आपका फोकस कुछ एक्स्ट्राआर्डिनरी बनाने पर होना चाहिए ना कि आपके कोम्प्टीटर्स पर।




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4. कोई बैकअप प्लान ना होना

ये 10X रुल हमेशा ही चैलेन्जेस के साथ आता है। किसी भी टाइम अगर आपका प्लान फेल हो जाए तो पहले से ही उसके लिए रेडी रहे। जैसे कि कोई बैकअप प्लान ज़रूर रखे कि किसी भी मिसगिविंग में काम आ सके।

बेस्ट की उम्मीद रखे लेकिन साथ ही किसी भी फेलर के लिए रेडी रहे। मेरा वो फ्रेंड जो अपने कोम्प्टीटर्स को पछाड़ना चाहता था, फिर से बिजनेस में कम बैक कर सकता था अगर उसके पास कोई धाँसू सा बैक अप प्लान होता तो।




मैसिव एक्शन क्या है ये समझना

अब तक आप समझ गए होंगे कि डेयरिंग गोल्स पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है मगर बात यही पर खत्म नहीं होती। सच तो ये है कि डेयरिंग गोल्स होने के बावजूद भी ऐसा हो सकता है कि आप कुछ भी अचीव ना कर पाए अगर आप लेवल ऑफ़ एक्टिविटी और लेवल ऑफ़ ओपरेशन को कंसीडर नहीं करते है। इस बात से मेरा मतलब है कि गोल्स अचीव करने के लिए जो एक्शन होंगे, वो आपको पता होने चाहिए।

जैसे कि आप तब तक वर्ल्ड के बेस्ट मेथमेटीशियन नहीं बन सकते जब तक कि इसके लिए क्या करना है, ये बात आपको पता न हो। याद है मेरी स्टोरी जो मैंने सुनाई थी, अपने हाई स्कूल के दिनों की। जब मै पूरी क्लास में टॉप करना चाहती थी। याद है मैंने आपको कहा था कि मै ये गोल कभी अचीव नहीं कर पाई क्योंकि मैंने इसके लिए कोई बड़ा एक्शन नहीं लिया था।


अब यहाँ पर बेस्ट स्टूडेंट बनना गोल तो है मगर अभी आप बेस्ट स्टूडेंट बने नहीं है, सिर्फ आपने गोल सेट किया है। इसके लिए किस लेवल का एक्शन चाहिए, पहले इस बात को समझना ज़रूरी है। मुझे लगता है आप मेरी बात समझ रहे होंगे।


हमारा 10X रूल हमसे काफी हाई लेवल के ओपरेशन की डिमांड करता है ताकि हम अपना गोल, अपने ड्रीम अचीव कर पाए। अगर आपने कभी भी कोई सपना देखा है तो उसे पूरा करने के लिए आपको एक मैसिव एक्शन की जरूरत है।


ग्रांट के हिसाब से एक्शन के 4 लेवेल्स होते है जो नीचे दिए गए है:



1. कुछ भी ना करना लेवल

आप इसके नाम से ही समझ गए होंगे, डूइंग नथिंग मतलब कुछ नहीं करना। ये खुद में ही बड़ा मस्त रहने वाला लेवल है क्योंकि इसमें बंदा खुद से कुछ एफोर्ट नहीं करता बल्कि जो लाइफ ऑफर करे वही करता है।

इस लेवल पर लोग शायद ही कभी सक्सेस के लिए कंसर्न रहते हो, उन्हें तो बस जो मिल जाय उसी में खुश रहते है। ऐसे लोगो का मेन केरेक्टरस्टिक होता है कि ये ज़रा भी मेहनत नहीं करते। जो जैसा चल रहा है, चलने देते है।


जैसे आपको एक एक्जाम्पल देते है। एक आदमी एक गरीब घर में पैदा हुआ। वो मरते दम तक गरीब ही रहा क्योंकि उसने अपनी सिचुएशन को बदलने के लिए कोई एफर्ट नहीं किया, कोई पेन नहीं लिया। तो देखा जाये तो इस तरह के लोग डू नथिंग लेवल में आते है।




2. हाइडिंग लेवल

हाइडिंग लेवल के लोग सक्सेस से डरते है। जब सक्सेस की ओर सही स्टेप बढाने का टाइम आता है तो ये लोग पीछे हट जाते है।

सक्सेस की रोड पे चलते हुए एक चीज़ तो पक्का मिलेगी और वो है क्रीटीज्म! हाइडिंग लेवल के लोग इसी क्रीटीज्म को अवॉयड करना चाहते है। क्या आपने कभी ऐसी सिचुएशन फेस की है कि कोई चीज़ पाने के लिए आपने अपना बेस्ट दे दिया हो और लोगो ने उस पर ही सबसे ज्यादा क्रीटीज्म किया हो? जी हाँ, यही सक्सेस है क्योंकि इसमें ही सबसे ज्यादा क्रीटीज्म मिलता है और इसीलिए लोग इस लेवल पर सबसे ज्यादा घबराते है।




3. नार्मल लेवल

ये हर किसी के लिए एक्स्पेक्टेड लेवल होता है। यही वो लेवल है जहाँ ये सोसाइटी हमें देखना चाहती है। इस लेवल पर आप वही कर रहे होते है जो बाकी लोग करते है। अगर मै दो घंटे ट्रेनिंग कर रहा हूँ तो इसका मतलब है हर कोई दो घंटे ही ट्रेनिंग कर रहा होगा।

इस लेवल में जब तक आप सोसाइटी के हिसाब से चलते रहते है आपके अंदर एक्स्ट्राआर्डिनरी बनने के लिए कोई जील नहीं आ सकती, और आपको सक्सेस चाहिए तो डेफिनेटली ये लेवल आपके लिए नहीं है। मेरे डैड इसी केटेगरी के लोगो में आते है।


आपको याद होगा मैंने उनकी स्टोरी आपको सुनाई थी कि वो अपने प्रेजेंट पोजीशन से कितने सेटिसफाइड रहा करते थे और रिटायर होने तक एक ही टाइप की लाइफ जीते रहे, रोज़ सेम काम करते हुए। ये मेरे डैड थे अपने नार्मल लेवल में ओपरेट करते हुए –  उन्होंने सारी लाइफ वही किया जो बाकी सब करते थे और उनसे भी करने की एक्स्पेक्ट रखते थे।




4. मैसिव एक्शन लेवल

ये वो लेवल है जहाँ चीज़े अचीव होती है ! अगर आप इस लेवल पर नहीं है तो डेफिनेटली आप सक्सेस के रूट पर नहीं चल रहे। यहाँ हम वो नहीं करते तो हर कोई करता है, बल्कि वो करते है जो हमें हमारा गोल हासिल कराये।

पहले का एक्जाम्पल लेते है। आपको मैथमेटिकल का बेस्ट स्टूडेंट बनना है। तो आपको पूरा-पूरा दिन बैठकर मैथ के क्वेश्चन सोल्व करने होंगे। अब अगर आपके सामने कोई डिफिकल्ट क्वेश्चन आ भी जाए तो आप उसे सोल्व किये बिना मानेंगे नहीं।


यही पर मैं फेल हो गयी थी जब मुझे हाई स्कूल में अपनी क्लास का बेस्ट स्टूडेंट बनने की डिजायर थी। अब एक और एक्जाम्पल लेते है। एक बार एक लेडी थी जो हमेशा स्नैक टाइम में खाते-खाते पढ़ती रहती थी। फ्री टाइम में भी वो हमेशा लाइब्रेरी में किताबो के साथ होती थी।


अब ये मुझे समझ नहीं आता था! मै तो ऐसा बिलकुल नहीं कर सकती! सारा दिन बस पढना! मै तो फ्रेंड्स के साथ घूमना चाहती थी, उनके साथ सोक्कर खेलना चाहती थी, गप्पे मारना चाहती थी और फिर भी बेस्ट स्टूडेंट बनू, यही चाहती थी।


लेकिन मै बेस्ट नहीं बन पाई क्योंकि इसके लिए जो चाहिए वो तो मै करती ही नहीं थी, और इसी बीच वो अपना काम करती रही। फिर हमारा रिजल्ट आया तो सब कुछ साफ हो गया। वो क्लास में बेस्ट थी और हमेशा रही, मगर मै चाह कर भी बेस्ट नहीं बन पाई, बेस्ट तो दूर उसके आस-पास तक नहीं थी।


जब तक आप मैसिव एक्शन नहीं लेते कुछ नही होने वाला। बेस्ट बनना है तो जितने एक्शन पोसिबल हो उतने करे। इसका मतलब होगा कि आप दुसरो से ज्यादा कर रहे है। दुसरो से 10 गुना ज्यादा! जितना कोई सोच भी नहीं सकता।


ये ऐसे इम्प्लाई होता है जैसे कोई एक बुक एक मन्थ में पढता है, तो आप एक मन्थ में 10 किताबे पढेंगे। मैसिव एक्शन आपसे डिमांड करता है कि आप 10 गुना ज्यादा एफर्ट करे। मै आपको एंश्योर कर सकती हूँ कि आप अपना गोल अचीव करने के एक स्टेप और क्लोज आ जायेंगे।


मै जानती हूँ इस टाइम आप ये सोच रहे होंगे कि भला दुसरो से 10 गुना ज्यादा करना कैसे पोसिबल है, यही सोच रहे है ना? लेकिन हाँ ये एकदम मुमकिन है। आप जितना सोचते है उससे कहीं ज्यादा करने के काबिल है। यहाँ हम लक या अपोर्च्युनिटी जैसे कोंसेप्ट की बात नहीं कर रहे, बल्कि मैसिव एक्शन से सक्सेस अचीव करने पर जोर दे रहे है।




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एक्सेप्शनल रिजल्ट कैसे पाए

 कई बार हम अक्सर क्विक रिजल्ट्स के पीछे भागते है और इस चक्कर में ना तो कोई प्लान बनाते है और ना ही सोचते है कि हम अपना गोल या ऑब्जेक्टिव कैसे पाएंगे।

 रिजल्ट पाने के लिए जो चीजे आपको करनी चाहिए या करनी पड़ेगी उन्हें अच्छे से समझना ज़रूरी है। इस किताब को लिखने से पहले मै खुद एक ऐसी इंसान थी जो प्रेजेंट मोमेंट पर क्या करना बस इसी पर फोकस करती थी, जबकि मुझे लॉन्ग रन के लिए प्लैनिंग करनी चाहिए थी। इससे मेरा कभी होई फायदा नहीं हुआ बल्कि मै हमेशा एवरेज ही रह गयी।


 खुद से ही पूछिए कि 10X रिजल्ट पाने के लिए आपको क्या करना होगा? एक्सेप्शनल रिजल्ट की डिमांड क्या है ये बात आपको क्लियर होनी चाहिए। कमिटमेंट और डीसीप्लिन दो क्रूशियल वेल्यूज़ है, जिन्हें सीखने के बहुत ज़रुरत है और आपको अपने प्लान में पूरी तरह से कमिटेड रहना पड़ेगा और प्लान पर काम करते हुए पूरे डीसीप्लिन से चलना होगा।


 याद रखे कि सक्सेस इतनी मुश्किल चीज़ भी नहीं है कि आपके हाथ ना लगे, बल्कि आप बेशुमार सक्सेस पा सकते है। पर आपका ऐम परफेक्ट होना चाहिए। इस रास्ते पर चलते हुए आपको 10X रुल की अप्रोच के साथ हर स्टेप लेना होगा।


 बस ऐसा समझे कि जैसे आपकी लाइफ इसी पर डिपेंड है। अपना हर स्टेप एक इम्पोर्टेंट स्टेप की तरह ले।


 अगर आप ये सारे पॉइंट ध्यान में रखेंगे तो डेफिनेटली आपका रिजल्ट भी एक्सेप्शनल हो आएगा।





डर से मुकाबला (डीलिंग विथ फियर)

 क्या कभी कोई मुश्किल काम करते वक्त आपको डर वाली फीलिंग आई है ? मुझे याद है कॉलेज टाइम में जब भी मेरे एक्जाम होते थे तो डर के मारे मेरी हालत खराब हो जाती थी। ऐसा नहीं था कि मै एक्जाम के लिए प्रीपेयर नहीं थी बल्कि मुझे लगता है कि हर कोई इंसान जो सक्सेस चाहता है वो थोडा बहुत डरता ज़रूर है। मतलब कि ये एक नार्मल बात है अगर आप भी सक्सेस के रास्ते पर चलते हुए फियरफुल फील करे लेकिन इस डर से निपटने का तरीका आपको सीखना होगा। नहीं तो आप नार्मल से आगे नहीं बड पाएंगे।

 ग्रांट के हिसाब से डर का फंडामेंटल रीज़न है टाइम। कोई भी गोल अचीव करते वक्त जो टाइम लगता है वो आपके लिए बड़ा मुश्किल हो सकता है।


 अब जैसे कि मान लो एक हफ्ते में आपका कोई कोम्प्टीशन होने वाला है तो आप ये सोच कर डरने लगते है कि टाइम कम बचा है, पता नहीं मै कर भी पाउँगा कि नहीं, पता नहीं मै प्रीपेयर्ड हूँ भी या नहीं?


 ऐसे सवाल आपके दिमाग में घूमने लगते है। क्या कभी टॉयलेट यूज़ करने से पहले आपने इतना प्रेशर फील किया है कि घर पहुचंते ही बाथरूम में घुसने से पहले ही आपको लगता है कि कहीं आप वही पर पू ना कर दे ?


 ठीक यही होता है जब आप गोल अचीव करने की कोशिश करते है। लेकिन ध्यान से ! कहीं ये डर आपके सर ना चढ़ जाए। इसे खुद पर हावी ना होने दे। एक मोमेंट के लिए भी ना रुके।


 जिस मोमेंट आप अपने डर की वजह से रुक जायंगे फिर चाहे कितनी कोशिश कर ले वो आपके माइंड से जाएगा नहीं। आपको आगे ना बढ़ने के एक हज़ार बहाने मिल जायेंगे। क्योंकि बिना एक्शन के सिर्फ बहाने ही होते है !


 इसलिए बेस्ट तरीका यही है कि एक्सक्यूज़ से बचे और मैसिव एक्शन ले! ऐसे स्टेटमेंट ना दे कि - ''पहले थोडा रेस्ट कर लू फिर करता हूँ''.


 गोल अचीव करने तक कोई रेस्ट नहीं करना है क्योंकि दुसरो से बैटर करना है तो यही एक तरीका है।




अपना मार्किट डोमिनेट करे (डोमिनेट योर मार्किट)

 क्या आप किसी ऐसे फील्ड में है जहाँ कोम्प्टीशन बहुत ज्यादा है। इसके चलते आप खुद को इस लेवल पर नहीं देखते कि सबसे बेस्ट बन सके, क्योंकि आपको ये लगता है कि आपसे ज्यादा जीनियस लोग मार्किट में पहले से ही है ?

 सच तो ये है कि ऐसा कुछ भी नहीं है बस आपका डर आप पर हावी हो रहा है। आपको ये सोच ही खत्म करनी होगी। हां, कोम्प्टीशन का डर मन से हटा दे। ये सब आपके माइंड में है रियल में नहीं। आप अपनी मेंटलिटी बदल कर देखो, ये चीज़ माइंड से खुद गायब हो जाएगी।


 बस आपको ज्यादा एफर्ट करके अपने फील्ड में बेस्ट बनना है। जो भी आपके कोम्प्टीटर्स कर रहे है आपको उससे 10 गुना ज्यादा करना है। ज़्यादातर कंपनीज़ ऐसा कुछ खास नहीं करती जो उन्हें सबसे सक्सेसफुल बना सके। ये सब की सब सोसाइटी के लेवल तक ही ओपरेट करती है।


 मगर आपको बेस्ट बनना है इसलिए आप 10X रुल फॉलो करते रहे। परसिस्टेंन्शी, कोन्सिसटेंशी और हिम्मत ये आपके हथियार है जो आपको बेस्ट बनने में हेल्प करेंगे। तो क्या आपके पास ये सब है ?


 आपको वो करना है जिसे करने से बाकी लोग बचते है। गोल हासिल करने के लिए घिसे पिटे और आसान तरीके काम नहीं आते है क्योंकि आराम करने से कभी कोई इन्वेंशन नहीं हुई है। अगर आपको आउट ऑफ़ बोक्स चीज़े करनी है तो अपनी क्रियेटिविटी का भरपूर यूज़ करे।


 अपने दिमाग के घोड़े खुले छोड़ दे। तभी कुछ बात बनेगी। क्या आपको हेयर(खरगोश) और टोरटोइज़ वाली स्टोरी याद है ? कैसे टोरटोइज़ रेस जीता था इतना स्लो और स्टीडी चलने के बावजूद? बेशक, इस स्टोरी से हम सबने ये सीखा है कि स्लो और स्टीडी ही बेस्ट तरीका है मगर रियल में आपको स्मार्ट भी बनना पड़ता है।


 खरगोश तेज़ तो था मगर स्मार्ट नहीं था इसलिए टोरटोइज़ रेस जीत गया। नॉर्मली उसे जीतना नहीं चाहिए था क्योंकि उसने ऐसा कुछ ख़ास नहीं किया था। मगर आपको तो स्मार्ट बनना ही पड़ेगा अगर आपको अपनी रेस जीतनी है तो।


 तो आगे बढिए और जो ज़रूरी है वो करे! जो भी करे स्मार्ट तरीके से करे! इसके लिए जो बन पड़े वो करे! कोम्प्टीशन के बीच में सबकी नज़र में आना (गेटिंग नोटीस्ड इन द मिद्स्ट ऑफ़ कोम्प्टीशन) अपनी फिल्ड का हीरो बनना है तो आपको लोगो की नजर में आना पड़ेगा।


 अगर आप लोगो की नजरो में नहीं आये तो आप क्या करते है इस बात से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। आपको अँधेरे से बाहर निकलकर लाइट में आना होगा और आपकी विजिबिलिटी 10 गुना ज्यादा होनी चाहिए। हर तरफ सिर्फ आप ही आप छा जाये इसके लिए कुछ तैयारी तो करनी होगी।


 आप जहाँ भी जाए अपनी सुपीरियरटी दिखाए। इसके अलावा फ़ास्ट होने के साथ-साथ परसिस्टेंट रहे। ऐसे कई केसेस है जहाँ लोगो ने रेगुलर चीज़ को छोड़कर एक्स्ट्राआर्डिनरी अचीव करने का गोल सेट किया और अचीव भी किया है। भले ही उन्हें कई सारे चैलेंजेस फेस करने पड़े। आपको फुल फ़ोर्स से इसी स्पिरिट से आगे बढना है। तभी लोग भी आपको नोटिस करेंगे।




सक्सेसफुल लोग कैसे होते है (व्हट स्कसेसफुल पीपल लुक लाइक)


• सक्सेसफुल लोग इस मेंटलिटी के साथ जीते है कि कुछ भी इम्पोसिबल नहीं है।

• वे अपलेबल अपोरच्यूनिटी पर फोकस करते है।
• सक्सेसफुल लोग अनबिलीवेबल पर बिलीव करते है।
• वे अपने साथ साथ दुसरो की डेवलपमेंट चाहते है।
• सक्सेसफुल लोग अपने गोल्स अचीव करने के लिए मैसिव एक्शन लेते है।
• वे बीच रास्ते पर कभी नहीं छोड़ते।
• ऐसे लोग़ जो हिम्मत के साथ आगे बढ़कर चेंज लाते वही सक्सेसफुल कहलाते है।
• वे हाइली मोटीवेटेड रहते है और अपने गोल पर पूरी नजर रखते है।
• उन्हें कम्फर्ट ज़ोन कभी पसंद नहीं आता।
• वे टीम प्लेयर्स होते है।



कन्क्ल्यूजन

 इसमें कोई डाउट नहीं कि अब आप समझ ही गए होंगे कि किसी भी फील्ड में बेस्ट बनने के लिए आपको 10 गुना ज्यादा एफर्ट करना है। ग्रांट के हिसाब से मैसिव सक्सेस इतनी भी आसान चीज़ नहीं है जो हासिल हो जाए। सक्सेस पानी है तो सोसाइटी के रूल्स भूल जाए। आपको मीडियोक्रीटी और एवरेज से ऊपर उठना होगा, और साथ ही अपना कम्फर्ट ज़ोन भी छोड़ना पड़ेगा अगर सच में आपको सक्सेस चाहिए तो।

 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह The 10X Rule Difference Between Success and Failure Book Review in Hindi कैसा लगा नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस बुक Review को अपने दोस्तों के साथ भी शेयर जरूर करे।



आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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