Complete Book Review in Hindi - Copycat Marketing 101 | Thoughtinhindi.com

Complete Book Review in Hindi - Copycat Marketing 101. Hello दोस्तों, ये है Author Burke Hedges के द्वारा लिखी गयी बेस्ट सेल्लिंग बुक Copycat Marketing 101 Book की Review. आप इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़े, इसमें author Burke Hedges ने बिज़नेस और मार्केटिंग के बारे में बहुत कुछ बताया है,

 अगर आप एक नया बिज़नेस शुरू करने वाले है या फिर आप already एक बिज़नेस man है तो ये article आपको जरूर पढ़नी चाहिए। और इस आर्टिकल के लास्ट में इस बुक full audio book दिया है मैंने वो भी जरूर सुने।
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Copycat Marketing 101 Book Review in Hindi


 ये वो स्टोरी है जो मुझे हमेशा से ही पंसद है. तो स्टोरी कुछ इस तरह है कि एक बार एक बिजनेस मैनेजर होता है जिसकी उम्र कोई 40 के करीब थी.


 उसे पैसे की हमेशा बड़ी तंगी रहती थी इसलिए वो एक फाइनेंशियल एडवाईज़र से मिलने के लिए अपोइन्टमेंट लेता है ताकि उसे फाईनेंस से रिलेटेड कुछ एडवाइस मिल सके.


 तो अब होता ये है कि अपोइंटमेंट वाले दिन वो उस फाईनेंशियल एडवाईजर से मिलने उसके ऑफिस पहुँचता है.


 उस ऑफिस के बाहर दो दरवाज़े थे जिसमे से एक दरवाज़े पर “एम्प्लोयड” लिखा हुआ था और दुसरे दरवाज़े पर “सेल्फ- एम्प्लोयेड” लिखा था.


 वो आदमी “एम्प्लोयेड” लिखा हुआ दरवाज़ा खोलता है क्योकि वो खुद एक एम्प्लोयी था, और जब वो उस दरवाज़े को खोलकर अंदर जाता है तो उसे फिर से दो दरवाज़े मिलते है.


 उनमें से एक दरवाजे में लिखा था “एक साल में 40,000$ से कम कमाई और दुसरे में लिखा था एक साल में 40,000$ से ज्यादा कमाई”.


 अब उस मैनेजर की कमाई सालाना 40,000$ से कम थी तो इसलिए वो पहला दरवाजा खोलता है.


 अंदर जाने पर उसे फिर से दो दरवाजे मिलते है जिसमे एक पर लिखा था “एक साल में 2,000$ से ज्यादा सेविंग” और दुसरे में लिखा था एक साल में 2,000$ से कम सेविंग”.


 अब क्योकि उस आदमी के सेविंग अकाउंट में बस 1,000$ ही थे इसलिए वो दूसरा दरवाज़ा खोलकर अंदर चला जाता है और क्या देखता है कि वो उसी जगह पर वापस आ गया है जहाँ से वो फर्स्ट टाइम ऑफिस के अंदर गया था.


 दरअसल बात ये है कि अगर आप सेम चॉइस चूज़ करते है तो आप कहीं नहीं पहुँचते बल्कि वही रहते है जहाँ से आपने स्टार्ट किया था. आप हमेशा वही वापस आयेंगे जहाँ से आप चले थे.


 क्योंकि आगे बढने के लिए आपको डिफरेंट डोर्स खोलने होंगे ताकि आपको डिफरेंट रिजल्ट्स मिल सके.


 लेकिन ये रिजल्ट्स मिलेंगे कैसे ? अगर आपको ये जानना है कि आगे बढ़ने के लिया क्या करना होगा तो ये समरी पढ़िए.



चैप्टर 1: वी लिव इन अ वर्ल्ड ऑफ़ कॉपी केट्स (हम कॉपी केट्स की दुनिया में रहते है) :

 अगर कोई एक चीज़ है जिसमे हम सब अच्छे है तो वो है कॉपी केटिंग. लेकिन क्वेश्चन ये है कि क्योंकि हम ऑलमोस्ट सारी चीज़े कॉपी केट करते है तो हमने अब तक वेल्थ क्रियेट करने का कोई तरीका क्यों नहीं कॉपी केट किया ?

 हमारे पैदा होने के दिन से हमारी कॉपी केटिंग स्टार्ट हो जाती है. हम अपने पेरेंट्स की लेंगुएज कॉपी केट करते है हम उनके मूव्स कॉपी केट करते है, उनकी लाइफ स्टाइल कॉपी केट करते है.


 स्कूल में हम लेटर्स कॉपी केट करके लिखना सीखते है, फिर हम ड्राइव करना सीखते है, हम इंस्ट्रक्टर को इस बात के पैसे देते है कि वो हमे खुद को कॉपी केट करना सिखाये. और हम जितना बैटर उसे कॉपी केट करते है उतना ही बैटर ड्राइविंग करना सीखते है.


 हालाँकि लाइफ में हर चीज़ की तरह कॉपी केट करने के भी डाउनसाइड है. सिर्फ इसलिए कि हम सब कुछ ना कुछ कॉपी केट करते रहते है तो इसका ये मीनिंग बिलकुल नहीं है कि ये एक अच्छी चीज़ है.


 अब इस बात को ही कंसीडर कर लो कि जब आप कोई बेड हैबिट कॉपी केट करते है. क्योंकि जिसे आप कॉपी केट कर रहे है वो राईट हो ये ज़रूरी तो नहीं है ना ?


 जैसे एक्जाम्पल के लिए इस स्टोरी को ही ले लो जिसमे एक आदमी की क्लोक्स की शॉप होती है. हर रोज़ एक बूढा आदमी उस आदमी की शॉप के पास से गुजरता था और घड़ियों को देखता था.


 वो अपनी पॉकेट वाच निकाल कर कुछ देखता और अपने रास्ते चला जाता. उस बूढ़े आदमी की इस आदत को देखकर स्टोर ओनर को बड़ी हैरानी होती थी.


 तो एक दिन उसने अपनी शॉप से बाहर आके उस बूढ़े से पुछा कि वो क्या कर रहा है जिस पर उस बूढ़े ने जवाब दिया कि “मै हर रोज़ 5 बजे मै व्हिसल बजाता हूँ इसलिए यहाँ से गुजरते हुए इन इन घड़ियों को देखकर मै एक्जेक्ट टाइम श्योर कर लेता हूँ”


 बूढ़े की बात सुनकर वो शॉप ओनर जोर से हंसा और बोला और मै हर रोज़ आपकी व्हिसल की आवाज़ सुनकर अपनी घड़ियों का टाइम सेट करता हूँ”


 दरअसल वो दोनों ही एक दुसरे को कॉपी केट कर रहे थे, और दोनों ही सोचते थे कि दूसरा पर्सन राईट है, लेकिन वे बस अज्यूम करते थे और रोंग थे.


 तो “हमने वेल्थ क्रियेट करने का कोई कॉपी केट क्यों नहीं ढूँढा?” इस क्वेश्चन का जवाब होगा कि हम जॉब ट्रेक का तरीका कॉपी केट करते है नाकि वेल्थ क्रिएशन का ट्रेक. तो ऐसा क्यों है भला ?


 दरअसल ऐसा इसलिए है क्योंकि ज्यादातर लोग यही सोचते है कि अपने फाइनेंशियल ड्रीम्स पूरे करने के लिए सिर्फ जॉब ही एक तरीका है।


 तो आप भी अब सोच समझ कर चूज़ करे, उन 95% लोगो की तरह जो जॉब ट्रेक पर है, और शायद 65 की ऐज तक जिनका दिवालिया निकल चूका होगा,क्या आप भी यही चीज़ कॉपी केट करेंगे. या फिर 5% लोगो को कॉपी केट करना पसंद करेंगे जो वेल्थ क्रिएशन ट्रेक पर है और जो 65 की ऐज से पहले ही फाइनेंशियेली इंडीपेंडेट या शायद वेल्थी भी बन चुके होंगे.



चैप्टर 2: व्हट इज़ ट्रू वेल्थ ? ट्रू वेल्थ क्या है ?

 ट्रू वेल्थ का मीनिंग सिर्फ यही नहीं होता कि आप चीज़े खरीद सके, बल्कि ट्रू वेल्थ फ्री होने की एबिलिटी देता है, जिसका मतलब है कि आपके पास इतना पैसा है, इतना टाइम है कि आप जो चाहे वो करे, जब चाहे तब करे.

 और यहाँ ये चीज़ ध्यान रखे कि इनफ मनी होना कभी भी इनफ नहीं होता. आपके पास इनफ टाइम भी होना चाहिए क्योंकि खोया हुआ टाइम कभी वापस नही आता.


 आपको ऐसे कई हाई पेड डॉक्टर्स या इंजीनियर्स मिल जायेगे लेकिन अगर आप उनसे पूछे कि क्या वो ट्रूली फ्री है तो उनका आंसर होगा नहीं! क्योंकि वो लोग सच में फ्री नही है.


 अगर उनके साथ कभी कुछ भी होता है और उन्हें क्विट करना पड़े तो वो सेम लाइफ स्टाइल के बिना सर्वाइव नहीं कर पायेंगे जिसकी उन्हें आदत है.


 इसे इनकम क्रिएशन बोलते है जिसका मतलब है कि आप अपने टाइम को मनी के बदले ट्रेड करते है. और आप इसमें कुछ भी अर्न नहीं करते है जब तक कि आप पर्सनली कुछ ना करे.


 ये एक तरह का ट्रेप है या फिर जैसा हमारे ऑथर इसे कहना पसंद करते है “टाइम-फॉर-मनी-ट्रेप”. इनकम क्रिएशन टेम्पोरेरी होती है, ये लॉन्ग लास्टिंग नहीं है,


 एक बार अगर आपने किसी कॉज के लिए काम करना बंद कर दिया जैसे कि मान लो किसी बिमारी के चलते आप काम नहीं कर पा रहे तो ज़रा बताओ कि फिर आप कैसे अफोर्ड करोगे ? नहीं है ना इस बात का कोई ज़वाब आपके पास.


 वेल तो फिर आप एक लक्जूरियस लाइफ कैसे अफोर्ड करेंगे जो आपके काम करने या ना करने पर डिपेंड ना हो ?


 लेकिन ऐसा हो सकता है जब आपकी रेसीड्यूअल इनकम हो. रेसीड्यूअल इनकम बेसिकली आपके लिए पैसा अर्न करती रहती है चाहे आप काम पे जाए या नहीं. ये सुनने में थोडा ड्रीम जैसा लगता है ना ?


 वेल, खुशकिस्मती से ये फिक्शनल नहीं है. ये कोई सपना नहीं है. चलो एक फिक्शनल केरेक्टर बनाते है जिसे हम कहेंगे जॉन.


 जॉन 40 सालो से अपनी इनकम का 10% सेव करता आ रहा है और इस पैसे को उसने बड़ी वाइज़ली इन्वेस्ट किया है. और जब वो रिटायर हुआ तो उसके पास एक मिलियन डॉलर से भी ज्यादा पैसा इन्वेस्ट था जिसका उसे 10% हर साल मिलता था और ये रकम 100,000$ के बराबर है. तो एक तरह से ये पैसा वो बगैर कोई काम किये बैठे बैठे कमा रहा है और यही उसकी एक्चुअल वेल्थ है.



चैप्टर 3: लीनियर ग्रोथ - ट्रेडइंग योर टाइम फॉर मनी (टाइम को पैसे के बदले ट्रेड करना):

 आजकल हमारे 50/50 प्लान है, हम 50 साल तक हर साल वीकली 50 घंटे काम करते है और जब रिटायर होते है तो हमे अपनी लाइफ टाइम कमाई का बस 50% ही मिलता है,

 और प्रोब्लम ये है कि जो हम पहले कमाते थे तो वो तब भी इनफ नहीं होता था, तो इमेजिन करो कि जब हमे इसका बस 50% ही मिलेगा तो रिटायरमेंट के बाद कैसे हमारा गुज़ारा चलेगा ? ये लीनियर ग्रोथ का एक बेसिक एक्जाम्पल है. लीनियर ग्रोथ को सिंपली केलकुलेट करने के लिए हम नीचे दी गयी ये इक्वेशन यूज़ करते है:


एच H (आवरली वेज) x  एन N (नम्बर्स ऑफ़ आवर वर्कड) = आई I (इनकम)


 इसका सिंपली ये मतलब है कि आप जो देते है वही आपको एक्चुअल में मिलता है और जब आप उतना नहीं दे पाते तो आपको भला ज्यादा कैसे मिल सकता है.


 लीनियर ग्रोथ की लिमिटेशन एक्सप्लेन करने के लिए हम इसे एक एक्जाम्पल से समझते है.


 दो लोग है जो दो डिफरेंट जॉब करते है. चलो पहले वाले का नाम हम जॉन रख देते है. अब जॉन एक जगह पे फ्लावर बेचने का काम करता है.


 इस काम से वो हर घंटे 10$ कमाता है और अगर वो इस में से घर से काम तक का ट्रांसपोर्टशन निकाल ले और डेली घंटे, वीकली 6 दिन भी काम करता है तो per वीक उसकी 600$ की कमाई होती है. और अगर वो हर साल 50 वीक्स काम करे तो वो 30,000$ पर इयर कमाएगा.


 देखा जाए तो ये इतनी कम रकम भी नहीं है क्योंकि बहुत से लोग तो बस ड्रीम ही देख पाते है कि काश वो इतना कमा सके.


 हालांकि हर साल ये 30,000$ जॉन की मेक्सीमम इनकम है वो इससे ज्यादा कभी कमा ही नहीं सकता. और वो अपनी फेमिली के साथ ज्यादा टाइम भी स्पेंड नहीं कर पाता और ना ही कभी वो ब्रेक लेता है.


 उसकी इनकम उसकी लीनियर ग्रोथ पर बेस्ड है. उसे बस एक बार ही पेमेंट मिलती है और एक बार पेमेंट मिलने के बाद उसे फिर से रेस लगानी पड़ती है.


 इस तरह से वो अपना टाइम मनी के बदले में ट्रेड कर रहा है. अब हम सेकंड केरेक्टर को लेते है.


 ये है मार्क जो मेडिसिन लाइन में एक जेर्नल प्रेक्टिशनर है. वो पर इयर 150,000$ कमाता है जोकि अच्छी-खासी रकम है.


 हालांकि तब भी उसे पर डे 10 घंटे और वीकली 6 डेज़ काम करना पड़ता है तो इस तरह वो अपने काम का गुलाम है.


 वो काम से थका हारा घर लौटता है, अपने बच्चो के साथ टाइम स्पेंड नहीं कर पाता है. वो ऐसी लाइफ नहीं जी रहा है जैसी उसने सोची थी.


 और असली प्रॉब्लम तो यही है कि आप चाहे अभी साल के 30,000$ कमाए या 150,000$ एक बार अगर जॉब छोड़ दे तो आपकी अर्निंग जीरो है.


 एक कंपनी का सीईओ काफी पैसा अर्न करता है. शायद 3 मिलियन डॉलर पर इयर या उससे भी ज्यादा जबकि उसका एम्प्लोयी साल के सिर्फ 20,000 डॉलर्स कमाता है तो ऐसा क्यों है ?


 ऐसा इसलिए है क्योंकि सीईओ जानता है कि मनी कैसे लेवरेज किया जाए. उसके एम्प्लोयीज़ उसके लेवरेज है इसलिए वो अपने एफोर्ट के 100% के बजाये अपने 100 एम्प्लोयीज़ के एफोर्ट का 1% अर्न करता है. और यही चीज़ लेवरेज है.


 हलांकि सिर्फ लेवरेज होना काफी नहीं है, आपको ये भी मालूम होना चाहिए कि उसे यूज़ कैसे करे वर्ना ये आपके लिए यूजलेस है. इस नेक्स्ट चैप्टर में हम आपको यही चीज़ समझाने वाले है.



चैप्टर 4: leveraged ग्रोथ - वर्क स्मार्टर नोट हार्डर (स्मार्ट वर्क करे हार्ड नहीं)

 चलो, 1888 के अगस्त के टाइम में चलते है. असा केंडलर ने 2,300$ में कोका कोला नाम के एक कार्बोनेटेड फाउन्टेन ऑफ़ ड्रिंक के एक्सक्ल्यूसिव राइट्स खरीद लिए थे.

 ये एक बड़ी सक्सेस थी क्योंकि उस टाइम में ऑलमोस्ट हर ड्रग स्टोर में इस ड्रिंक का एक फाउन्टेन हुआ करता था जहाँ पर आके लोग 5 सेंट्स में कोका कोला पी सकते थे.


 हालांकि एक दिन केंडलर ने एक ऐसा डिसीज़न लिया जिसने वाकई में हिस्ट्री चेंज कर दी थी. एक दिन केंडलर का एक फ्रेंड उसके ऑफिस में आया और एक स्माल फी के बदले में उसे एक एडवाइस की.


 कुछ देर आराम से सोचने के बाद केंडलर ने उसे फी पे कर दी. उसका दोस्त ने उसके पास आकर धीरे से कहा बोटेल इट”. बस फिर क्या था,


 कोका कोला की बोटेल आने से पहले लोगो को इसे पीने ड्रग स्टोर जाना पड़ता था. इसलिए कंपनी का सारा प्रॉफिट इस बात पे डिपेंड था कि कितने लोग कोका कोला ड्रिंक पीने के लिए एफर्ट लगाकर ड्रग स्टोर तक जायेंगे.


 लेकिन ड्रिंक को बोटेलिंग करने से लेवरेज क्रियेट की गयी. कंपनी ने अपने प्रोडक्ट को बोटेल में डालकर टाइम, एफर्ट, और लोकेशन को लेवरेज बना दिया था. और अब जबकि उनका प्रोडक्ट बोटेल में बिक रहा था तो कोई भी जैसे मान लो कोका कोला के 6 पैक का एक फाउन्टेन अपने घर में एन्जॉय कर सकता था!


 तो ये होता है लेवरेज, जिससे आप अपना काम हार्डेर के बजाये एक स्मार्टर तरीके से कर सकते है या दुसरे वर्ड्स में कहे तो ये एक तरीका है कि कम टाइम में ज्यादा पैसा कमाने का.



लेवरेजिंग योर वे थ्रू फ्रेंचाइज़ी (फ्रेंचाईज़ी के थ्रू लेवराइज़िन्ग)


 आजकल फ्रेंचाइजिंग बिजनेस खूब ट्रेंड में है. अमेरिका का ऑलमोस्ट 60% सामान फ्रेंचाइज़ी के थ्रू सप्लाई होता है.

 ये एक अच्छा बिजनेस है लेकिन इसका एक बहुत बड़ा डाउन साइड भी है और वो है इसका स्टार्ट अप कोस्ट.


 अब जैसे एक्जाम्पल के लिए हर कोई इतना रिच नहीं होता कि 1 मिलियन डॉलर खर्च करके मेक्डोनाल्ड की फ्रेंचाईज़ी ले सके.


 और सबसे बुरी बात तो ये है कि सिर्फ एक फ्रेंचाईज़ी से आप अमीर नहीं बनने वाले, इसके लिए आपको मल्टीपल शॉप्स लेनी पड़ेगी.


 लेकिन गुड न्यूज़ ये है कि एक दूसरा आल्टरनेटिव फ्रेंचाईजी सिस्टम भी है जिसकी स्टार्ट अप कोस्ट इतना कम है कि ये 500$ में भी शुरू हो सकता है. 


 जो काम आप सिर्फ एक बार करेंगे उसके लिए आप 1,000 बार पेड हो सकते है. अब आप पूछेंगे कि कैसे ? चलो इसका आंसर नेक्स्ट चैप्टर में देखते है.



चैप्टर 5: एक्सपोनेंशियल ग्रोथ

 ओसियोला मैकार्टी 88 साल की बूढी थी जो काफी टफ लाइफ जी रही थी. रोज़ी-रोटी के लिए वो पड़ोसियों के कपड़े धोने और आईरन करने का काम करती थी जिसके लिए वो पर बंडल 2$ चार्ज किया करती थी.

 और वर्ल्ड वार सेकंड के बाद उसने अपना प्राइस बढ़ाकर 10$ per बंडल कर दिया था। इतने सब के बावजूद वो सिर्फ 9,000$ ही कमा पाती थी.


 जब वो 40 की थी तो उसने थोड़े पैसे सेव करने स्टार्ट किये थे. ये सेविंग टाइम के साथ इनक्रीज होती गयी. और 1995 के समर के टाइम में उसने अपनी सेविंग में से 150,000$ एक चैरिटी में डोनेट किये.


 अब सवाल ये है कि एक ऐसी औरत जिसकी इनकम एवरेज से भी नीचे है, वो इतनी बड़ी रकम भला कैसे डोनेट कर पाई ? वो अपनी सेविंग का कुछ परसेंट हर साल किसी चीज़ में इन्वेस्ट कर देती थी.


 वो पैसा खर्च करने के बजाये उसे इन्वेस्ट करती थी. और इस चीज़ को हम कम्पाउंडिंग” कहते है. इसे और एक्सप्लेन करने के लिए बताते है.


 मान लो कि आपने 25 साल पहले 10,000$ ज़ेरोक्स में इन्वेस्ट किये तो आज आपके 10,000$, 40 मिलियन डॉलर में बदल जायेंगे. ये है फ्रेंचाइजिंग का आल्टरनेटिव तरीका.


 फ्रेंचाइजिंग बेशक एक अच्छी बात है लेकिन इसे स्टार्ट करने के लिए आपके पास काफी बड़ी रकम होनी चाहिए, लेकिन कम्पाउंडिंग में ऐसा नहीं है. आप कम पैसे से भी स्टार्ट करके कुछ टाइम बाद एक बड़ा प्रॉफिट कमा सकते है.


 तो अब आप एक छोटे अमाउंट से बड़ा प्रॉफिट कैसे कमा सकते है वो भी बगैर किसी लॉन्ग टाइम वेट के ? तो इसका आंसर है नेटवर्क मार्केटिंग. और इसके बारे में हम नेक्स्ट चैप्टर में सिनेर्जिस्म के बाद पढेंगे।



चैप्टर 6: सिनेर्जिस्म: मैरिजेस

 1905 के वर्ल्ड फेयर में एर्न्स्ट हेम्वी अपने वैफ्ल्स बेचने की पूरी कोशिश में जुटा था. वो इसकी प्रोमोटिंग करता रहा फिर भी किसी ने उसके वेफ्ल्स नहीं खरीदे. और उससे भी बुरी बात उसके साथ ये हुई कि उसके बिलकुल नेक्स्ट वाले स्टोर के बाहर लोगो की लाइन लगी हुई थी जहाँ आइस क्रीम बिक रही थी.

 फिर एक दिन आइसक्रीम बेचने वाले के पास प्लेट्स खत्म हो गयी तो उसने एर्न्स्ट से कुछ प्लेट्स उधार मांगी. एर्न्स्ट के पास प्लेट्स तो नहीं थी लेकिन उसने सोचा क्यों ना वेफ्ल्स को ऐसे रोल किया जाये कि उसमे आईस क्रीम होल्ड की जा सके.


 और इस तरह आईस क्रीम कोन बनी जो लोगो को बड़ी पसंद आई, और फिर दुनियाभर में आईस क्रीम कोन फेमस हो गए और आज भी ये सबका फेवरेट स्नैक है।


 ये आईस क्रीम और वेफ्ल्स की स्टोरी सिनेर्जिस्म का एक परफेक्ट एक्जाम्पल है. दो अच्छे प्रोडक्ट्स या कांसेप्ट्स जो एक दुसरे से एकदम अलग है फिर भी जब कम्बाइन होते है तो एक नया ग्रेट प्रोडक्ट या कांसेप्ट क्रियेट होता है.


 अब इमेजिन करो कि आपने वेल्थ क्रिएशन के एक परफेक्ट सिनेर्जिस्म क्रियेट करने का चार्ज लिया है. एक ऐसा पॉवरफुल सिनेर्जिस्म जो इस प्लानेट पर हर किसी की लाइफ टच करे जो अफोर्डेबल हो और एक डुप्लीकेटेबल सिनेर्जिस्म हर किसी को अवलेबल हो सके.


 वेल, ये बिलकुल सिंपल है और मै इसे फ्रेंचाईजिंग और एक्सपोनेंशियल ग्रोथ की शादी कहना पसंद करूंगा. तो आखिर उनकी मैरिज का रिजल्ट क्या होगा ? नेटवर्क मार्केटिंग, द अल्टीमेट सिनेर्जिस्म.



चैप्टर 7: नेटवर्क मार्केटिंग

 डुप्लीकेशन वो तरीका है जिससे फ्रेंचाईजिंग को सक्सेसफुल बनाया जा सकता है. और कम्पाउंडिंग ट्रू वेल्थ क्रियेट करने का वे है. तो इन दोनों को अगर हम कम्बाइन करे तो नेटवर्क मार्केटिंग बनती है.

 नेटवर्क मार्केटिंग के लिए सिंपली किसी ऐसी कंपनी को ज्वाइन करना होता है जो पहले से ही इस सिस्टम को इम्प्लीमेंट कर रही हो.


 एक्जाम्प्ल के लिए वे आपको एक प्रोडक्ट देंगे जो आपको सेल करना है और जब आप इसे बेचते है तो आपको 25% कमीशन मिलता है.


 हो सकता है कि ये ज्यादा बड़ी रकम ना लगे, लेकिन अगर आप हर मन्थ एक आदमी को भी ये सिखा देते है तो मुबारक हो, आपका कमिशन बढ़ गया, क्योंकि वो आदमी जब आगे सेल करेगा तो उसमे से भी आपको कमीशन मिलेगा, और जब वो आदमी किसी और को ये सिखाएगा तो आपका कमीशन और बढ़ जायेगा. ये एक पीरामीडियल स्ट्रक्चर है.


 जितने ज्यादा लोग इन्वोल्व होंगे उतना ज्यादा आपका कमीशन बनेगा. और मेरे डियर, वेल्थ क्रियेट के कॉपी केट का बस यही तरीका है. ये बिलकुल फ्रेंचाजिंग की तरह है लेकिन फर्क बस ये है कि इसमें आपको स्टार्ट अप के लिए मिलियन डॉलर खर्च नहीं करने पड़ते बल्कि आपको काफी कम पैसे खर्च करने पड़ेंगे और डेली ऑफिस जाने के बजाये आप घर बैठे काम कर सकते है.



Recommended Book (Hindi) -

Copycat Marketing 101 by Burke Hedges Full Hindi Audiobook





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