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Expert Blogging Tips in Hindi - नया ब्लॉगर ये 5 बातें जरूर ध्यान रखें

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Expert Blogging Tips in Hindi. Hello दोस्तों, आज मैं आपको 5 ऐसी Best Blogging टिप्स बताऊंगा, जब Keywords research आप करते हैं आप ढूंढ लेते हैं Low Competition कौनसा हैं, High CPC किसका हैं और किससे आपको Traffic अच्छा मिलेगा,

 फिर भी कुछ न कुछ ऐसे Points रह जाते हैं, जो हम ध्यान ही नहीं देते है और जिसके वजह से हमारे Post, Google के अंदर Post Rank तो करती हैं, but वो First Page में नहीं आती या Top 3, 2, 1 पे नहीं आती।

तो कौनसी ऐसी Tips हैं जिसका आपको ध्यान रखना चाहिए वो सारा Points मैं आपको Details में बताऊंगा, की Low Competition Keywords ढूंढने के बाद भी आपकी Post Rank क्यों नहीं करती, कौनसी ऐसी चीज है जिसको हम बार बार करते है। तो चलिए वो Tips जान लेते हैं -




Expert Blogging Tips in Hindi - नया ब्लॉगर ये 5 बातें जरूर ध्यान रखें

#1 High Authority Websiteजब भी आप कोई Low competition, High CPC keywords research करते है और उसके ऊपर आप कोई Article या Post लिखते हैं, तो आपको गूगल के अंदर जरूर Search करना चाहिए की उसके ऊपर कोई High Authority Website already Rank तो नहीं हैं।


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गूगल Searc…

Complete Book Summary in Hindi - The Compound Effect | Thoughtinhindi.com

Complete Book Summary in Hindi - The Compound Effect. Hello दोस्तों, ये है Darren Hardy की best selling बुक The Compound Effect बुक की summary review. इस बुक में आपको बताया गया है compound effect के बारे में। अगर आपको compound effect और money making model के बारे में detail में जानना है तो आप ये article आगे पढ़ सकते है।


Book Summary in Hindi - The Compound Effect

Book Summary in Hindi - The Compound Effect


 समरी से पहले ये जान लेना ज़रूरी है कि डारेन हार्डी ने कम्पाउंड इफेक्ट किसे बोला है. तो इसे एक्सप्लेन करने के लिए इस बुक का एक एक्जाम्पल देख लेते है. अगर आपको दो पोसिबल ऑप्शन दिए जाए कि या तो आप 3 मिलियन डॉलर कैश ले जाए या फिर एक पेनी जो 31 दिनों तक हर रोज़ डबल होती रहे तो आप इसमें से कौन सा वाला ऑप्शन चूज़ करेंगे? ज़ाहिर है कि कोई भी इतना ज्यादा नहीं सोचेगा और नीचे दिए गए इन फैक्ट्स को कंसीडर करते हुए फर्स्ट वाला ऑप्शन ही चूज़ करेगा.

 क्योंकि दुसरे वाले ऑप्शन के कंपेयर में ये ज्यादा पैसा लग रहा है.
इसमें टाइम नहीं लगेगा क्योंकि आपको सारा पैसा एक साथ मिल रहा है.
ये पैसा कैश में है.

 हालांकि अगर हम इन दोनों ओपेशंस को थोडा बेसिक मैथमेटिक्स यूज़ करके गौर से समझने की कोशिश करे तो पता चलेगा कि ऐसी पैनी जो 31 दिनों तक हर रोज़ डबल होती है, असल में उसकी वैल्यू 11 मिलियन यूएसडी के बराबर होगी. हैं ना ये सरप्राइजिंग बात? इसका मतलब है कि अगर आप एक पैनी पर डे का ऑप्शन चूज़ करते है तो आपके पास 7 मिलियन यूएसडी ज्यादा होंगे उस इंसान से जो पहले वाला ऑप्शन यानि 3 मिलियन कैश का ऑप्शन चूज़ करेगा. तो देखा आपने एक छोटी सी पैनी की वैल्यू में हर रोज़ चेंज आने से इतना फर्क पड़ जाता है. और यही कम्पाउंडिंग इफेक्ट है.

 कुल मिलाकर कम्पाउंडिंग इफेक्ट से मतलब है कि स्माल स्टेप्स या एक्शन से स्टार्ट करके सक्सेस के रास्ते पर आगे बड़ा जाए. ऊपर वाले एक्जाम्पल में पर डे 31 डेज़ के लिए एक पैनी का स्टाईपेंड लेना एक स्माल स्टेप या एक्शन होगा क्योंकि इसमें पहले वाले ऑप्शन के मुकाबले आपको 7 मिलियन यूएसडी ज्यादा अमीर होने का चांस मिल रहा है.

 अच्छा चलो एक और एक्जाम्पल लेते है. मान लो आप वेट लोस के केम्पेन पर है तो आप डिसाइड करते है कि आज से आप शुगर कम लेंगे, आप हर टाइप के जंक से दूर रहेंगे. और इस तरह बाद में जब आप अपना वेट चेक करते है तो वो 80 केजी निकलता है जोकि पहले 150 केजी था. तो आखिर ये हुआ कैसे? आपके सिर्फ एक डिसीजन ने कि आप एक परटीक्यूलर टाइम तक जंक फ़ूड से दूर रहेंगे, आपमें इतना बड़ा चेंज लाया. आपका जंक फ़ूड और शुगर कट करने का डिसीजन स्टार्टिंग में भले ही इन्सिग्निफिकेंट लग रहा हो, इनफैक्ट आपको कोई डिफ़रेंस भी नजर नहीं आ रहा हो मगर जैसे-जैसे टाइम गुजरता जाता , रिजल्ट खुद आपके सामने आता है- पूरे 70 केजी जोकि आपने लोस किया. तो समझे आप! इसी को कम्पाउंडिंग इफेक्ट बोलते है.

 और कम्पाउंडिंग इफ्केट के बारे में एक अच्छी बात ये है कि इसे आप कहीं भी यूज़ कर सकते है. इस बुक को पढने से पहले मुझे याद है कि अपनी यंग एज में जब मैं अपना पहला मोबाइल फोन परचेज़ करना चाहता था तो उसके लिए पैसे सेव करने के चक्कर में मैंने कितना स्ट्रगल किया था. आपको ये मज़ाक लग रहा होगा ? है ना? लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि आपमें से कई सारे लोग सेम सिचुएशन से गुज़रे होंगे जब कोई चीज़ लेने के लिए आपने भी पैसे सेव किये होंगे क्योंकि किसी और ने आपको वो चीज़ लाकर नहीं दी. मेरे केस में मुझे पूरे साल भर तक अपनी पॉकेट मनी का 70% बचाकर रखना पड़ता था जिसका मतलब था कि मै अपने पैसे से पूरा एन्जॉय नहीं कर पा रहा था. कोई पार्टी नहीं, कोई नए जूते नही, कपडे नहीं (वैसे आपको बता दूँ कि मै एक शू फ्रीक हूँ) बाहर खाना सब बंद. मगर मैंने अपना गोल अचीव करने के लिए ये सब कुछ मैनेज किया. आखिर इतना तो वर्थ करता था अपने फेवरेट फ़ोन के लिए. और आख़िरकार जब मैंने वो फ़ोन खरीदा तो अपने दोस्तों में मै पहला था जिसके पास खुद का एक फ़ोन था. आपको शायद मेरी स्टोरी थोड़ी फनी लग रही होगी लेकिन अपना गोल अचीव करने के लिए मैंने सिम्पली कम्पाउंड इफेक्ट लॉ अप्लाई किया था. मैंने एक बड़े गोल (फ़ोन के लिए) बिट्स में पैसे बचाए. आपने क्या खरीदने के लिए पैसे बचाए थे? फोन, लेपटॉप, कार, कोई प्रॉपर्टी या कोई बिजनेस स्टार्ट करने के लिए? चाहे आपने जिस भी चीज़ के लिए पैसे बचाए हो, यहाँ आपने कम्पाउंडिंग इफेक्ट का लॉ अप्लाई किया है.


द बिग आईडिया ऑफ़ कम्पाउंडिंग इफेक्ट

 हो सकता है कि कम्पाउंडिंग इफेक्ट आपको थोड़ी टेक्नीकल चीज़ लग रही हो तो इसलिए हम इसे थोडा ब्रेक करके समझने की कोशिश करेंगे कि इसके पीछे एक्स्जेक्टली क्या है. तो हम बताते है कि इसके पीछे बेसिक आईडिया ये है कि कुछ स्माल मगर स्मार्ट डिसीजन जो हम एक पीरियड तक लेते रहते है, वो दरअसल लार्ज और शोर्ट चेंजेस से ज्यादा सब्सटेनियल होते है. अब हम इसका एक एकाज़म्प्ल लेके देखते है. मान लो तीन फ्रेंड्स है. फ्रेंड ए, फ्रेंड बी और फ्रेंड सी. वे तीनी इतने क्लोज है कि आलमोस्ट सारी चीज़े साथ ही करते है. उनको पार्टीज़ वगैरह अटेंड करने का शौक है क्योंकि उनके पेरेंट्स काफी रिच है इसलिए वो तीनो यंग और रेकलेस भी है. हालांकि एक पॉइंट ऐसा भी आता है जब उनकी लाइफ में ड्रास्टिक चेंज आता है.

• फ्रेंड ए डिसाइड करता है कि वो अब ऐसी लाइफ नहीं जियेगा. पर डे 100 कैलोरी लूज़ करने के साथ-साथ वो मंथ में चार बुक्स तो कम से कम पढ़ेगा ही पढ़ेगा.

• फ्रेंड बी ने डिसाइड किया कि वो अब सारी पार्टीज़ और ऐसी रेकलेस लाइफ जीना छोड़ देगा लेकिन हाँ क्लब जाने के बदले वो घर पे बैठ के टीवी और फिल्मे देखेगा और बस एक बियर पिया करेगा.  

• फ्रेंड सी ने कोई एफर्ट नहीं किया, वो जैसी लाइफ जी रहा था वैसे ही जीता रहा.

 तीन साल बाद एक प्लेन क्रैश में तीनो के पेरेंट्स मारे जाते है. अब तीनो फ्रेंड्स एकदम अकेले रह गए. बाद में उन्हें रियेलाईज़ होता है कि उनके पेरेंट्स ने बिजनेस में इन्वेस्ट करने के लिए कुछ लोन्स ले रखे थे जो अभी चुकता नहीं हुए थे. इसलिए इनवेस्टर्स अपना पैसा वसूल करने के लिए उन तीनो की सारी प्रॉपर्टी बेच देते है अब ना तो उनके पास पैसा रहा और ना ही पेरेंट्स जो उनके खर्चे पूरे करते थे. अब आप बताओ कि इन तीनो में से कौन है जो सर्वाइव करेगा?

 वो होगा फ्रेंड ए, क्योंकि उसने इतनी सारी कैलोरीज लॉस्ट की है तो अब तक वो काफी फिट हो गया होगा और तीन सालो से वो हर मंथ चार बुक्स पढता रहा है तो तो उसके पास अब नॉलेज भी ज्यादा होगी. फ्रेंड बी फेंस पे होगा क्योंकि तीन साल तक टीवी और फिल्मे देख-देख के शायद उसने कुछ तो सीखा होगा कि हार्ड टाइम में कैसे सर्वाइव करे लेकिन ये हम ये पक्के से नहीं कह सकते. मगर इतना पक्का है कि फ्रेंड सी की हालत सबसे खराब होगी क्योंकि वेट डबल होने से वो काफी स्लगिश हो गया होगा और उसके माइंड में कोई आईडिया भी नही होगा कि कैसे इस प्रॉब्लम से निकला जाए. ऐसी हालत में वो हेल्प के लिए अपने बाकी दोनों फ्रेंड्स या किसी और फ्रेंड के पास ही जाएगा.

तो यहाँ पर हुआ क्या ? जब फ्रेंड बी और सी एन्जॉय कर रहे थे तो फ्रेंड ए अपनी डेवलपमेंट में लगा था. उसे काफी टाइम लगा इसमें लेकिन जब टेस्टिंग टाइम आया तो वो ही अकेला था जिसने सर्वाइव किया. उसने खुद को बैटर बनाने के लिए अपना टाइम, एन्जॉयमेंट, पेरेंट्स का पैसा सब सेक्रीफाईज किया. और फिनेंशियल एस्पेक्ट के अलावा उसकी हेल्थ भी बाकी दोनों से बैटर थी.

अब अपने स्टेटमेंट पर वापस आते है. इस स्टोरी के हिसाब से एक स्माल और स्मार्ट चॉइस होगी, 100 कैलोरीज़ पर डे लूज़ करना और मंथ में एट लीस्ट चार बुक्स पढना. और तीन साल बाद जो रिजल्ट मिलता है, वो प्रूफ है इस डिसीजन की सक्सेस का. ठीक यही चीज़ हम अपनी डेली लाइफ इम्प्लाई कर सकते है, स्माल स्टेप्स लेकर जिसका इफ्केट हमारे फ्यूचर पर काफी पोज़ीटीव वे में पड़ेगा.

ऊपर वाले एक्जाम्पल से सीख लेकर जैसा डारेंन हार्डी ने किया था, हम भी फार्मूला प्रोपाउंड कर सकते है:

योर डिसीज़न ऑर चॉइस + योर एक्शन ऑर बिहेवियर + रिपिटेड एक्शन + टाइम = सक्सेस

चलो अब इसके हर कंपोनेंट को रेलेवेंट एक्जाम्पल से समझते है.


चॉइस /डिसीज़न

 हार्डी के हिसाब से किसी गरीब, अनहेल्दी और डिप्रेस्ड और अमीर, हेल्दी और अनडीप्रेस्ड के बीच बस एक चॉइस का ही फर्क है. जो आज हमारा प्रेजेंट स्टेट है वो हमारे बीते कल के डिसीज़न्स की वजह से है. जैसे मान लो आप अगर आज एक डॉक्टर, इंजिनियर या बिजनेसमेन बने है तो इसीलिए बने है क्योंकि ये चॉइस आपकी थी कि आप बड़े होकर क्या बनेगे. कुल मिलकर अगर कहे तो हमारी लाइफ हमारी चॉइस का ही एक रिफ्लेक्शन होती है. अब जैसे मान लो आज आप थोडा वेट लूज करने का डिसीज़न लेते है तो आपके फ्यूचर में यही रिफ्लेक्ट होगा कि आपने वेट लूज़ किया है और लोग आपसे इस तरह के सवाल पूछेंगे:

"अरे! आप तो स्लिम लग रहे है, क्या वेट लूज़ किया है ?”

"वाओ! अब आप पहले से ज्यादा स्लिमर लग रहे है.”

 अब भला उन्हें कैसे पता होगा कि वेट लूज़ करने का डिसीज़न आपने बहुत पहले ही ले लिया था? उन्हें तो बस आपका प्रेजेंट दिखेगा क्योंकि आप अपने चॉइस के फिजिकल रिप्रेजेंटेशन बने है. 

 एक कहावत है कि आपकी सक्सेस उन बहुत सारे गुड डिसीज़न्स का प्रोडक्ट है जो आपने लिए थे जबकि फेलियर उन गुड डिसीज़न्स का प्रोडक्ट है जो आप ले नहीं पाए थे. अपनी लाइफ को इम्प्रूव करने के लिए आपकी डिसीज़न मेकिंग में भी इम्प्रूवमेंट होना बहुत ज़रूरी है और मै तो एक गुड डिसीज़न तभी ले पाता हूँ जब मै कोंशेस और क्रिटिकल थिंकिंग करता हूँ. मुझे नहीं पता ये आपके साथ होता है या नहीं मगर मुझे याद है कि बचपन में मैंने कुछ चीज़े ऐसी की थी जिनके बारे में सोच कर ही मुझे अजीब लगता है. मै सोचता हूँ कि मैंने ऐसा कर कैसे लिया था? क्या आप कुछ रिलेट कर पा रहे है? एक बार मैंने एक बच्चे पर पत्थर उठाकर फेंक दिया था क्योंकि वो मुझे चिढ़ा रहा था, लेकिन उस बच्चे पर लगने के बजाये वो पत्थर एक कार की स्क्रीन पर जाके लगा. मुझे पता था कि वहां पर कई सारी कार खड़ी थी लेकिन पत्थर फेंकने से पहले मैंने ये सोचा तक नहीं, कि इसका अंजाम क्या होगा. मेरे गुस्से में लिए गये इस डिसीज़न से उस दिन मुझे काफी प्रॉब्लम भी फेस करनी पड़ी.

 मै जिस बात को एम्फेसाइज़ करना चाहता हूँ वो ये है कि कोई भी गुड डिसीज़न या चॉइस बनाने से पहले थोडा टाइम निकाल कर उसके बारे में अच्छे से सोच विचार कर ले तो बैटर होगा. एनालाइज़ करे कि उसके एडवांटेजेस और डिसएडवांटेजेस क्या होंगे? अगर मैं ये स्टेप लेता हूँ तो क्या ये मेरे फेवर में होगा? ऐसे कई क्वेश्कचंस आपके माइंड में आयेंगे जिनका ज़वाब आपको देना है. खुद से ही सवाल करे और खुद ही ज़वाब ढूंढें. सच तो ये है कि बहुत सारे लोग आज अगर किसी बुरी हालत में है तो अपने रोंग डिसीज़न की वजह से ही है जो उन्होंने बगैर सोचे समझे, जल्दबाजी में आकर लिए थे. आप चाहे तो एक सर्वे कर ले. कुछ लोगो को चूज़ करे, उनसे पूछे कि आज वो लाइफ के जिस स्टेज़ में है, वहां क्यों है? आप नोटिस करेगे कि उनमे से ज्यादातर लोग पुरानी बातो को याद करेंगे. वे आपको अपने पास्ट की बाते बताएँगे. जो रिच और हेल्दी है, वो बताएँगे कि उनकी किस चॉइस की वजह से उनकी लाइफ में रिमार्केबल चेंज आया है जबकि गरीब लोग बोलेंगे उन्होंने कौन सा डिसीज़न नहीं लिया जो आज उनकी लाइफ को बैटर बना सकता था और क्यों आज वे एक पथेटिक लाइफ जीने को मजबूर है.

फिर आप देख सकते है कि कैसे हम सबकी लाइफ हमारे ही चॉइसेस का रिफ्लेक्शन है.

मैंने ऐसे भी लोग देखे है जो क्लेम करते है कि वो कोई चॉइस नहीं बनाते मगर मुझे नहीं लगता कि ये पोसिबल है . आपका डिसीज़न ना लेना भी एक डिसीज़न ही तो है.


एक्शन /बिहेवियर्स

 वीकली एक बुक पढना, कुछ केजी वेट लूज़ करना, जिम जाना, पैसा सेव करना, ये सब चॉइसेस बनाने के बाद अगर आप कोई एक्शन करते है तो ये सिर्फ एम्प्टी थोट बनकर रह जायेंगे. आपने जो चॉइस बनाई है उस पर आपका बिहेवियर क्या होगा, बस यही चीज़ है जो कम्पाउंड इफेक्ट में मेटर करती है. जिस बन्दे ने पर मन्थ चार बुक्स पढने का मन बनाया था उसकी ये चॉइस सिर्फ चॉइस रह जाती जब तक कि वो सच में पढना नहीं शुरू कर देता. अगर आप वेट लूज़ करना चाहते है तो जब तक उसके लिए ज़रूरी स्टेप जैसे डाईट कंट्रोल, एक्सरसाइजिंग वगैरह नहीं करेंगे तो काम कैसे चलेगा. जब आप रियल में स्टेप उठाते है तब जाकर वो चॉइस एक्शन बनती है !


• रीपीटेड एक्शन / हैबिट्स

टाइम के साथ जब आपके एक्शन रिपीट होते है तो ये हैबिट बन जाते है. अब जैसे आपने पैसे सेव करने का डिसीज़न लिया तो अब आपका माइंड भी डेली कुछ सेविंग करने के बारे में सोचेगा, भले ही छोटी सी हो. और जब आप डेली सेविंग करने लग जायेंगे तो ये आपको इसकी इतनी आदत हो जायेगी कि आप बिना सोचे समझे ऑटोमेटिकली पैसे सेव करने लगेगे. क्योंकि अब ये आपकी आदत बन चुकी होगी. कम्पाउंड इफेक्ट बनाने के लिए आपको वो चीज़ बार बार करनी पड़ेगी जो आपकी लाइफ में चेंज लाये. इसके लिए आपको रूटीन बनाना पड़ेगा जो आपकी हैबिट बने जिससे कि आप अपना गोल् अचीव कर पाए. रूटीन से मेरा मतलब है जो आप डेली करे, आपको एक भी दिन मिस नहीं करना है जैसे आप रोज़ ब्रश करते है, नहाते है तो ये आपकी अनकोंशेस हैबिट है. डारेन के फार्मूला का कंपोनेंट समझने के बाद अब चलो पहले वाले एक्जाम्पल पे जाते है जो मैंने इस पीस में मेंशन किया था.

अगर आपको दो पोसिबल ऑप्शन दिए जाए: 3 मिलियन डॉलर कैश में या एक सेंट जो हर रोज़ 31 डेज़ तक डबल होता रहेगा, तो आप कौन सा ऑप्शन चूज़ करेंगे?

चलो साथ मिलकर इसे ऐनालाइज़ करते है.

 अज़्यूम करो कि आप एक पैनी पर डे पेमेंट करते है और मेरा एट वंस 3 मिलियन डॉलर का पेमेंट है तो नेक्स्ट डे आपके पास 2 सेंट्स होगे जबकि मेरे पैसे 3 मिलियन से कम होंगे क्योंकि मैंने उसमे से कुछ खर्च कर लिए है.  और अगर मै महाकंजूस निकला तो 20वे दिन भी मेरे 3 मिलियन डॉलर है जबकि आपके पास अब तक 5 थाउज़ेंद डॉलर हो गए होंगे. 31वे दिन आपका एक सेंट अब 1O मिलियन डॉलर तक पहुँच चूका होगा जबकि मेरे पास 3 मिलियन से बचा पैसा होगा.

पॉइंट की बात तो ये है कि हम दोनों ने ही अपनी-अपनी चॉइस रखी( ऑप्शन जो हमने चूज़ किया) और एक्शन लिया. आपको पर डे पेमेंट मिल रही है और मुझे मेरी पेमेंट एक बार में ही मिल गयी. आपको हर दिन एक सेंट लेने की हैबिट हो गयी होगी जबकि मै अपने 3 मिलियन रोज़ खर्च करता जा रहा था. आपकी चॉइस का कम्पाउंड इफेक्ट उससे कहीं ज्यादा है जो मुझे एक बार में ही मिल गया. अगर ये एक्जाम्पल हम प्रैक्टिकल लाइफ में अप्लाई करके देखे तो पता चलेगा कि जो मैंने एट वंस पाया, वो हमारी लाइफ में उस ग्रेटीफिकेशन या प्लेज़र वाली चीजों की तरह है जो इंस्टेंट ख़ुशी देती है. जैसे ओवरइटिंग ऑफ़ शुगर, जब हम ज्यादा मीठा खाने लगते है, सारे दिन बिस्तर पे पड़े रहना, खूब ड्रिंक करना और खूब सारा पैसा खर्च करना वगैरह- वगैरह. जबकि एक सेंट पर डे वाला ऑप्शन हमारे स्माल चॉइसेस जैसा है जब हम आलस छोड़कर रोज़ ज़िम जाते है, अपना शुगर इनटेक कम करते है, वीकली एक बुक खत्म करते है, लॉन्ग बोरिंग कोर्सेस ज्वाइन करते है और ऐसे ही कई छोटे-छोटे एफर्ट जो हम करते है. ये स्माल चॉइसेस हमारी लाइफ में क्या कमाल कर सकते है ये आप इमेजिन भी नहीं कर सकते. ठीक वैसे है जैसे हर रोज़ एक सेंट मिलने से एक दिन आपके पास 10 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा पैसे आ सकते है.


पेशन्स इन कम्पाउंड इफेक्ट

 पेशन्स वो चीज़ है जिससे आप कम्पाउंड इफेक्ट का रिजल्ट हासिल कर सकते है और अपनी डिजायरेबल चीज़ पाने के लिए लम्बे टाइम तक वेट कर सकते है. इसलिए आपमें पेशन्स होना बहुत ज़रूरी है. जिस इंसान ने वन सेंट पर डे वाला ऑप्शन चुना, उसे ये सारा पैसा एक दिन में नहीं मिला बल्कि उसे लम्बा वेट करना पड़ा. यही बात हमारी लाइफ की ज़्यादातर चीजों पर भी अप्लाई होती है. जो भी एक्शन आप लेते है, उससे रातो रात चेंजेस नहीं आ जाते. आपको वेट करना पड़ता है. अब जैसे अगर आप 100 कैलोरीज़ पर डे लूज़ करने के लिए डिसाइड करते है तो इसका इफेक्ट तुरंत नहीं होगा बल्कि काफी टाइम बाद आपको डिफ़रेंस पता चलेगा. और एक ही दिन में आप मसल्स बिल्ड भी नही कर सकते. आपको डीसीप्लीन में रहने के बाद ही कुछ टाइम बाद रिजेल्ट दिखेगा. डारेन ने अपनी बुक में बताया है कि कम्पाउंड इफेक्ट के साथ बिल्ड-अप स्टेज उनके लिए मोस्ट इम्पोर्टेन्ट पार्ट है. अपनी हेल्थ, फाइनेन्स या रिलेशनशिप को इम्प्रूव करने की तरफ आपका एक स्माल स्टेप आपके लिए कितना जॉयफुल होगा, ये बस आप ही फील कर सकते है.

 कुल मिलकर ऐसा कोई भी स्टंट नहीं है जो किसी को भी रातो रात सक्सेस दिला दे. इसका सिम्पल आंसर है कंसिसटेंसी और पेशन्स. और सबसे बेस्ट बात ये है कि ये लाइफ के हर पार्ट पर अप्लाई की जा सकती है. और साथ ही ये अपोज़िट डायरेक्शन में भी काम कर सकती है. जिसका मतलब होगा कि अगर कम्पाउंड इफेक्ट किसी भी सिचुएशन में काम करती है तो इसे हम फेलर अचीव करने भी यूज़ कर सकते है. मतलब कि अगर आपके डिसीज़न ही गलत होंगे तो सक्सेस के बदले तो आपको फेलर ही मिलेगी. हम इसे ऐसे समझने की कोशिश करते है जैसे आप और आपका फ्रेंड डेली 100 कैलोरी लूज़ करने का डिसीज़न लेते है. आप दोनों ही इस पर एक साथ एक्शन लेते है लेकिन एक दिन में ही आपका फ्रेंड बोर हो जाता है और अगले ही दिन से वो फिर वही फास्ट फ़ूड खाना शुरू कर देता है. मगर आप अपने इरादे पर डटे रहते है और अपनी एक्सरसाइज़ वगैरह कंटीन्यूरखते है. तो इस तरह कुछ ही दिनों में आप अपना गोल् अचीव कर लेते है. आप पहले से काफी स्लिम और फिट दिख होंगे जबकि आपका फ्रेंड जैसा था वैसा होगा या हो सकता है कि और मोटा हो गया हो. तो देखा आपने! सेम कम्पाउंड इफेक्ट, सेम चॉइस मगर डिफरेंट एक्शन और डिफरेंट हैबिट्स.


कम्पाउंड इफेक्ट इन हेल्थ

 एक हेल्दी और परफेक्ट लाइफ के लिए कम्पाउंड इफेक्ट एम्प्लोय किया जा सकता है. अगर आप एक मोटे इंसान है तो डेली कुछ कैलोरीज़ कट करने का डिसीज़न ले सकते है. जैसे कि अपनी डाईट में से एक्स्ट्रा फैट हटाकर आप ना सिर्फ डाईबिटीज़ से बचेंगे बल्कि एक हेल्दी लाइफ भी एन्जॉय कर पायेंगे. नीचे कुछ और एक्जाम्पल है कि कैसे आप हेल्थ में कम्पाउंड इफ्केट का यूज़ कर सकते है.

• अपने रोजाना के टाइम से 30 मिनट पहले सोने की कोशिश करे.

• मीठे का मन हो तो चोकलेट के बजाये कोई फ्रूट चूज़ करे

• ज़िम जाना शुरू करे, घर में बैठकर खाते रहने से अच्छा है कि कुछ मसल्स बनाई जाए.

• एल्कोहल के बदले पानी पीने की आदत डाले.

• हो सके तो ड्राइविंग के बदले पैदल चलने की आदत डाले, ऐसे ही कई सारे और एक्जाम्पल है जहाँ एक अच्छी हेल्थ के लिए कम्पाउंड इफ्केट यूज़ कर सकते है.


कम्पाउंड इफ्केट इन फाईनेन्स

 अपनी फाईनेन्स बिल्ड करने का एक तरीका ये भी है कि आप कम्पाउंड इफेक्ट यूज़ करे. जो भी लोग आज अमीर है उनसे पूछे तो पता चलेगा कि उन सबमे एक चीज़ कॉमन है कि उन सबने स्माल लेकिन स्मार्ट चॉइस ली थी इनमे ज़्यादातर लोगो ने बड़े स्टेप नही उठाये. ये लोग छोटे-छोटे इफेक्टिव स्टेप लेते गए जब तक कि उन्होंने काफी बड़ा मुकाम हासिल नहीं कर लिया.आप भी अपनी फाईनेन्स बिल्ड कर सकते है ये स्टेप लेकर:

• एक करंट एकाउंट खोले, अपनी इनकम के हिसाब से हर डे या हर वीक कुछ सर्टेन अमाउंट उसमे डालते रहे

• हमेशा कोस्टली आइटम के बजाये कभी चीपर चीज़े भी ले, इससे आपका पैसा बचेगा.

• आप चाहे तो हर सुबह फास्टिंग कर सकते है जिससे आपके ब्रेकफास्ट का पैसा बच सके.


कम्पाउंड इफेक्ट इन सेल्फ डेवलपमेंट

 ये वो एरिया है जहाँ कम्पाउंड इफ्केट सबसे ज्यादा रिजल्ट प्रोड्यूस करता है. अपनी सेल्फ कंसीडर को डेवलप करने के लिए सेल्फ लर्निंग सबसे बढ़िया तरीका है जिससे आप सेल्फ मोटिवेट रहे ये जानने के लिए कि आपका इंटरेस्ट किसमें है. यहाँ जो आप कर सकते है वो है:

• अपने शेड्यूल के हिसाब से हर रोज़ कम से कम 2 घंटे ज़रूर पढ़े या वीकली एक बुक खत्म करने की कोशिश करे.

• आप डेली कुछ ना कुछ ज़रुर लिखे, कुछ भी फिक्शन या नॉन फिक्शन.

• आप रोज़ का एक घंटा निकाल कर कोई कोर्स ज्वाइन कर सकते है.

• ऑडियो बुक्स सुने या पोडकास्ट करे अगर आपको पढना पसंद नही है तो.


कम्पाउंड इफेक्ट इन बिजनेस

 आप कम्पाउंड इफेक्ट यूज़ करके अपने बिजनेस को नयी ऊंचाईयों पे ले जा सकते है. ज्यादातर लोगो को लगता है कि बिजनेस में स्कसेस एक वन टाइम थिंग है. लेकिन ये बात झूठ है ! ज़रा वारेन बफे से पूछो, वो अपनी लाइफ में काफी देर के बाद ही सक्सेसफुल बन पाया था. सबसे बेस्ट तरीका है कि अपने बिजनेस को छोटे मगर स्ट्रोंग लेवल से स्टार्ट किया जाए. इसके लिए आप :


  •  कोई बिजनेस का कोर्स कर सकते है
  •  लेक्चर अटेंड कर सकते है या ट्रेनिंग ले सकते है
  •  बुक्स पढ़े
  •  अपने लिए माइलस्टोन सेट करे
  •  खुद को प्रोफेशनल्स के साथ रिलेट कर सकते है



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  1. F. U. Money Book Review in Hindi
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  3. Financial Planning For Beginners in Hindi


कनक्ल्यूजन

 कम्पाउंड इफेक्ट की कोई लिमिट नहीं है जब तक कि आप इसमें पूरी ऑनेस्टी दिखाए.

 मुझे पूरा यकीन है कि आप इससे जो बनना चाहे वो बन सकते है मगर उसके लिए आपको आज से ही स्टार्ट करना होगा.

 कई मगर सारे लोग इसलिए फेल होते है क्योंकि वे बीच में छोड़ देते है.

 उन्हें लगता है कि उन्हें अपनी कनवीनियेंट के हिसाब से चलना चाहिए मगर ऐसा नहीं है.

 दुःख की बात तो ये है कि लोग समझ ही नहीं पाते कि कम्पाउंड इफ्केट ऐसे काम नहीं करता है.

 रिजल्ट पाने के लिए आपको अपने आराम की कुर्बानी देनी होगी, आपको पेशन्स रखना होगा और लगातार अपने इरादों में डटे रहना पड़ेगा.

 तो अब जो भी आपकी स्टोरी हो, मुझे बताये, मुझे अच्छा लगेगा.




 तो दोस्तों आपको आज का हमारा ये Complete Book Summary in Hindi - The Compound Effect कैसा लगा नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस Complete Book Summary in Hindi - The Compound Effect को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे।

आपका बहुमूल्य समय देने  लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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