Complete Book Summary in Hindi - Duct Tape Marketing | Thoughtinhindi.com

Complete Book Summary - Duct Tape Marketing: The World's Most Practical Small Business Marketing Guide. Hello दोस्तों ये है John Jantsch की बेस्ट सेल्लिंग बुक Duct Tape Marketing की Summaryक्या आप अपनी मार्केटिंग किसी डक्ट टेप जैसी चिपकू बनाने का तरीका जानना चाहते है? आपका छोटा सा बिजनेस खूब बड़ा हो जाए, क्या इसके बारे में जानना चाहेंगे ?

 जॉन जेंस्च के हिसाब से मार्केटिंग एक सिस्टम है और आपको भी अपनी मार्केटिंग इफेक्टिव बनाने के लिए इसका सिस्टम फोलो करना पड़ेगा. इस बुक में हम आपको कुछ ऐसी ही स्ट्रेटीजीज़ बताने जा रहे है जो आप अपने बिजनेस मार्केटिंग में अप्लाई कर सकते है.

 मार्केटिंग का मेन गोल लोगो को ये बताना है कि “नो, लाइक एंड ट्रस्ट यू”. अगर आप के पास डक्ट टेप मार्केटिंग है तो आप भी उन्हें “ट्राई, बाई, रीपीट एंड रेफर” के लिए लीड कर सकते है.

 एक छोटे बिजनेस में मार्केटिंग पर ज्यादा स्पेंड करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी क्योंकि कुछ ऐसे सिंपल लेकिन इफेक्टिव तरीके है जिससे आप स्टिक मार्केटिंग कर सकते है. इनमे से कुछ है मार्केटिंग आवरग्लास, क्लाइंट स्टेजेस, और कोंटेंट ड्राइवन साइटवगैरह, इन कॉन्सेप्ट्स के बारे में आप बाद में सीखेंगे.


Book Review in Hindi - Duct Tape Marketing

Book Summary in Hindi - Duct Tape Marketing



स्ट्रेटेजी बिफोर टैक्टिस

 मार्केटिंग स्ट्रेटेज़ी और मार्केटिंग टैक्टिस के बीच एक डिफ़रेंस है. स्ट्रेटेज़ी, टैक्टिस के पीछे की अंडरलायिंग प्रिंसिपल्स को रेफर करती है. किसी भी बिजनेस टैक्टिक पर काम करने से पहले आपको अपनी स्ट्रेटेजी बनानी पड़ेगी.

 मार्केटिंग स्ट्रेटेज़ी क्या है ? ये सिर्फ एक सेट ऑफ़ गोल्स या लिस्ट ऑफ़ ओब्जेक्टिव्स नहीं है. आप अपने गोल्स कैसे अचीव करने वाले है, ये आपकी स्ट्रेटेजी डिसाइड करती है. एक तरह से बोले तो उन ओब्जेक्टिव्स को पाने के लिए एक प्रीसाइज़ प्लान ही स्ट्रेटेजी कहलायेगा.

 अगर आपका बिजनेस है तो मार्किट को डोमिनेट करना और अपने कस्टमर्स को सर्व करना ही आपका गोल होगा. आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी एक प्लान है कि आप कैसे अपने लिए सेट गोल्स अचीव करने वाले है. यहाँ हम आपको मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के कुछ एक्जाम्पल देते है.

 अगर आपको मार्किट में एक लीड ब्रांड बनना है तो इसके लिए सबसे पहले तो आपको अपना एक स्पेसिफिक मार्किट निचे चूज़ करना होगा. ये आपकी स्ट्रेटेजी है किस तरह के कस्टमर्स आपको चाहिए और किस टाइप की वैल्यू आप उन्हें देना चाहते है, ये सब भी फिगर आउट कर ले. इसमें आपको बड़ा स्पेसिफिक होना पड़ेगा.

 अगर आप और ज्यादा नए कस्टमर बनाना चाहते है तो आपको रेफ्रेल्स चाहिए. इसके लिए एक ऐसा सिस्टम सेट अप करे जहाँ आपके लॉयल कस्टमर्स ही आपके लिए मार्केटिंग करे. अपने ट्रस्टेड सोर्स से रेफरल्स पाना भी आपकी स्ट्रेटेजी का एक पार्ट होगा. इन स्ट्रेटेजी की हेल्प से आप अपना एक्जेक्ट टैक्टिस पा सकते है.

 लेकिन आप मार्केटिंग स्ट्रेटेजी कैसे डेवलप करेंगे? थ्री स्टेप्स है जिन्हें आप फोलो कर सकते है जिसमे से फर्स्ट स्टेप है “डिसाइड हु मैटर्स”. डिसाइड हु मैटर्स का मतलब है ये चीज़ पिन पॉइंट कर लेना कि एक्जेक्टली कौन आपके आइडियल कस्टमर होंगे. ये फर्स्ट स्टेप आपकी स्ट्रेटेजी पर फोकस करता है.

 और अगर आप अपने आइडियल कस्टमर्स के बारे में जानते है तो उन्हें अट्रेक्ट करने का और सर्व करने का बैटर रास्ता आपको मालूम होगा. सेकंड स्टेप है “बी डिफरेंट”. आप अपने आइडियल कस्टमर्स को कैसे अपील करेंगे ? कैसे उन्हें लुभायेंगे? इसके लिए आपको उन्हें अपनी यूनीक सर्विस, प्रोडक्ट या अप्रोच देनी होगी जोकि बाकी ब्रांड्स से डिफरेंट हो.

 प्राइम्रली आपको वो चीज़ डिफाइन करनी होगी जो मार्किट में कस्टमर्स को फ्रस्ट्रेट करती है. और अगर आपके कॉम्पटीटर्स भी सेम मिस्टेक कर रहे है तो आपको उनसे कुछ हटकर करना होगा. थर्ड स्टेप जो मार्केटिंग स्ट्रेटेजी डेवलप करेगा, वो है “कनेक्ट द डॉट्स”. ये ज़रूरी है कि इस स्टेज में आप कांसेप्ट ऑफ़ आइडियल क्लाइंट और कोर डिफरेंस को कम्बाइन करे.

 जैसे एक्जाम्पल के लिए डक्ट टेप मार्केटिंग के पीछे की स्ट्रेटेजी है “टू क्रियेट अ रेकोगनाइज़ेबल स्माल बिजनेस मार्केटिंग ब्रांड बाई टर्निंग मार्केटिंग फॉर स्माल बिजनेसेस इन्टू अ सिस्टम एंड प्रोडक्ट”. यहाँ पर आइडियल क्लाइंट है स्माल बिजनेस. और कोर डिफ़रेंस है कि डक्ट टेप मार्केटिंग को एक सिस्टम की तरह देखता है.

 सन जू ने आर्ट ऑफ़ वार में कहा था “आल मेन केन सी दीज़ टैक्टिस वियरबाई आई कोंकर, बट व्हट नन केन सी इज़ द स्ट्रेटेजी आउट ऑफ़ व्हिच विक्ट्री इज़ एवोल्वड”. तो क्या आपके पास भी कोई मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है ? क्या इसमें थ्री स्टेप्स इन्वोल्व है ? क्या ये आपके आइडियल क्लाइंट और कोर डिफ़रेंस को डिफाइन करती है? आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी आपका फाउन्डेशन है. तो इसलिए इसे लाइटली मत लो.


आइडेंटीफाई योर आइडियल क्लाइंट (अपने आइडियल क्लाइंट पहचान ले)

 जब आप अपने क्लाइंट्स को प्रोपेर्ली टारगेट करेंगे तो फिर सिरफिरे क्लाइंट्स के साथ आपको दिमाग खपाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. स्माल बिजनेस ओनर्स को जॉन जेंस्च यही बात समझाते है कि आप में वो एबिलिटी होनी चाहिए कि आप अपने क्लाइंट्स खुद चूज़ कर सके. क्योंकि यही लोग आपके प्रोडक्ट की वैल्यू समझेंगे. और यही लोग आपको सक्सेसफुल होता हुआ भी देखना चाहेंगे.

 सिर्फ कस्टमर्स की नीड्स ही नहीं बल्कि आपके बिजनेस की नीड्स भी सेटिसफाई होनी चाहिए. ये आइडियल तभी होगा जब दोनों पार्टीज़ बिजनेस इंटरएक्शन से सेटिसफाई होंगी. अपना बिजनेस ग्रो करने के लिए आप कस्टमर्स के साथ एक हेल्दी रिलेशनशिप रखे.

 लेकिन ये अचीव कैसे करे ? सबसे पहले तो अपने आइडियल कस्टमर डिफाइन कर ले. लेकिन इसका ये मतलब बिलकुल नहीं है कि आप बाकि के कस्टमर्स को भगा दे. आइडियल कस्टमर बनाकर आप अपने बिजनेस को बनाये रखेंगे. आपका बिजनेस सर्वाइव करता रहेगा.

 सोचो अगर कस्टमर्स आपको टाइम पे पैसा नहीं दे रहे या आपके प्रोडक्ट की वैल्यू पर सवाल उठा रहे हो तो क्या होगा ? सिंपल सी बात है कि ये आपके बिजनेस को अफेक्ट करेगा. इसलिए ये बात माइंड में रख ले कि आपके कस्टमर्स इल मैनेर्ड बिलकुल ना हो.

 अब सवाल है कि आइडियल कस्टमर्स ढूंढें कैसे जाए ? इसके लिए हम आपको 5 स्टेप्स बताते है.

फर्स्ट स्टेप है “बी प्रोफिटेबल फर्स्ट”. अपने कस्टमर्स की एक लिस्ट बना लो और इसमें ये भी लिखो कि हर किसी से आपको कितना प्रॉफिट मिल रहा है और उन्हें किस टाइप का ट्रांजेशन चाहिए. फिर उन्हें मोस्ट प्रॉफिटेबल से लीस्ट प्रोफिटेबल की रैंक में रखे. जो लीस्ट प्रोफिटेबल है उनसे अगर छुटकारा मिल जाए तो भी आपके बिजनेस को कोई नुक्सान नहीं है. इससे आप ज्यादा प्रॉफिट देने वालो पर और भी फोकस कर पायेंगे. क्या आप अपने मोस्ट प्रोफिटेबल बिजनेस ट्रांजिक्शन्स को एन्जॉय करते है ?

 सेकंड स्टेप है “एड्स रेफरल्स”. आपके प्रॉफिटेबल क्लाइंट्स की लिस्ट में ऐसे कौन है जो अपने फ्रेंड्स या फेमिली को आपका रेफरेंस देते है? और जो बाकि दुसरे लोगो को भी आपका रेफरेंस देते है ऐसे क्लाइंट्स आपके लिए मोस्ट वैल्यूएबल है. उन्हें आपकी सर्विस पसंद है तभी तो वे आपको रेफेर करते है. आपके बिजनेस के लिए ऐसे क्लाइंट परफेक्ट मैच है.

अब थर्ड स्टेप है “ स्टडी द डेमोग्राफिक्स”. इन प्रोफिटेबल और रेफ्रिंग क्लाइंट्स के फिजिकल केरेक्टरस्टिक्स क्या है ? इनमे क्या चीज़ कॉमन है? ये जानने के लिए आपको बेसिक डेमोग्राफिक्स जैसे इनकम, एज और लोकेशन से आगे जाना पड़ेगा.

फोर्थ स्टेप है” रिसर्च क्लाइंट बिहेवियर”. आपके इन आइडियल क्लाइंट्स को क्या चीज़ टिक करती है, ये आपको जानना पड़ेगा, उनका बिहेवियर स्टडी करना पड़ेगा. आप चाहे तो उन्हें क्लोजली स्टडी करने के लिए उन प्लेसेस में जा सकते है जहाँ ये लोग फ्रीक्वेंटली जाते है जैसे सेमिनार्स या बाकी दुसरे इवेंट्स.

इसमें फिफ्थ और फ़ाइनल स्टेप है “क्रियेट द बायोग्राफिकल स्केच” इस स्टेप में आके आपको इतनी इन्फोर्मेशन मिल गयी होगी कि आपके सामने अपने आइडियल कस्टमर का क्लियर इमेज आ जायेगा. जब वो आपके सामने होंगे तो आप उन्हें ईजीली स्पॉट कर सकते है.

अब उनके इस बायोग्राफिकल स्केच को एक नाम देना चाहिए. इसलिए खुद से ही क्वेश्चन करो “क्या मैरी को ये पसंद आएगा?” या जो भी कोई और नाम जो आपको पंसद हो. ये सवाल आपकी डिसीजन मेकिंग में काफी हेल्प करेगा. आपका गोल बस ये हो कि आपके हर क्लाइंट को लगे कि आपकी सर्विस या प्रोडक्ट खास उसके लिए ही बनाया गया है. और इस तरह से आप उन्हें अपने प्रीमियम ऑफर्स भी बेच सकेंगे.


डिस्कवर योर कोर मार्केटिंग मैसेज (अपनी कोर मार्केटिंग मैसेज डिस्कवर करे.)

 लोग अक्सर जॉन जेंस्च से पूछते है कि बेस्ट मार्केटिंग स्ट्रेटेजी क्या है. तो उनका जवाब होता है “रेफेरेल्स, वेबसाईट, डायरेक्ट मेल या एडवरटाईजिंग वगैरह कुछ भी नहीं, इन सब के बारे में सोचने से पहले ये सोचे कि ऐसा क्या है जो आपको अपने कॉम्पटीटर्स से डिफरेंट बनाता है?”

 चाहे जो भी आपकी मार्किट हो, आपको भीड़ से अलग दिखना ही पड़ेगा. खुद को कमोडिटी बिजनेस से दूर रखो. कमोडिटी बिजनेस क्या होता है? ऐसा तब होता है, जब आपके पोटेंशियल बायर्स आपके और बाकी ब्रांड्स के बीच डिफरेंशियेट नहीं कर पाते. और तब वे प्राइस पर आते है ताकि आपके प्रोडक्ट को दुसरे प्रोडक्ट से कम्पेयर कर सके. अब जैसे माना सिरियल्स आपका प्रोडक्ट है.

 अब इमेजिन करो कि आपका प्रोस्पेक्टिव कस्टमर ग्रोसरी स्टोर में खड़ा है और उसके सामने ढेर सारे सिरियल्स के बोक्स रखे है. अब अगर आपका सिरियल ब्रांड बाकियों से डिफरेंट नहीं हुआ तो कस्टमर सबसे चीप वाला ब्रांड चूज़ करेगा. अब आप सबसे चीप सिरियल बेचने का कॉम्पटीशन तो नहीं कर सकते ना. ऐसे तो आपका बिजनेस ही डूब जाएगा.

 तो ऐसा क्या है जो आपके ब्रांड को बाकियों से अलग बनाता है? कस्टमर क्यों आपका ब्रांड चूज़ करेगा ? क्या डिफरेंट है ? अगर आपने वो डिफ़रेंस ढूढ़ लिया तो उसे एम्ब्रास कर लो. हर तरीके से इसे लोगो तक पहुँचाने की कोशिश करे. आप ये नहीं बोल सकते कि आपका ब्रांड हाई क्वालिटी का है या फेयर प्राइस में मिलता है या फिर आपकी सर्विस अच्छी है.

 ये चीज़े तो पहले ही आपसे एक्स्पेक्टेड है. ये बेसिक चीज़े तो आपको हमेशा ही डिलीवर करनी है. लेकिन इसके अलावा ऐसा क्या है जो आपके बिजनेस को औरो से डिफरेंट बनाता है. क्या ये आपके प्रोडक्ट बेचने का डिफरेंट तरीका है या आपकी पैकेजिंग डिफरेंट है. ऐसा क्या है जो आप अपने कस्टमर्स को एक्स्पिरियेंश कराते है जिसकी वजह से आप भीड़ से अलग है और उनकी लाइफ बैटर बनाते है..

 एक बार ऐसे ही एक होम रीमोडलिंग बिजनेस था जिन्हें हाई पेईंग क्लाइंट्स नहीं मिल रहे थे. ये कंपनी हाई एंड सर्विस प्रोवाइड कराती थी लेकिन साथ ही छोटा मोटा काम भी करती थी, तो इसलिए लोग उन्हें “डिजाईन ऑफ़ ओरिएंटेड रीमोडलिंग बिजनेस” के बजाये एक कंस्ट्रक्शन ब्रांड की तरह लेते थे.

 तो उस कंपनी के ओनर ने क्या किया कि उसने हाई एंड क्लाइंट्स को अट्रेक्ट करने के लिए ब्रांड नेम ही चेंज कर दिया. और फिर उनकी कंपनी ने हेंडी मेन टाइप की सर्विसेज देना बंद कर दिया. और फिर एक साल बाद ही लोगो का उनकी कंपनी के लिए नज़रिया बदल गया और उन्हें अब हाई एंड कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने लगे थे.

 तो इसलिए लोगो को अपने ब्रांड की वैल्यू बताना बहुत ज़रूरी है ताकि वे आपकी सर्विस या प्रोडक्ट के प्राइस पर कोई क्वेशचन ना करे. एक और तरीका है जिससे आप डिफरेंट बन सकते है और वो है” एक एश्टोनोशिंग गारंटी ऑफर करना”. जैसे एक्जाम्पल के लिए आप अपने कस्टमर्स से पूछ सकते है कि “अगर आप हमारी 90 डेज की ट्रायल सर्विस से खुश नहीं हुए तो हम आपको डबल पैसे वापस करेंगे” इससे बेशक लोग आपको अटेंशन देंगे. तो आपको कोई ऐसा तरीका ढूढना है जो आपके कस्टमर्स को हमेशा खुश रखे जिससे कि आपको उनके पैसे रीटर्न ना करने पड़े.


वेक अप द सेंसेस विथ एन इमेज टू मैंच योर मैसेज

 जब आपको पता होगा क्या चीज़ आपको अपने कॉम्पीटीटर्स से डिफरेंट बनाती है तो फिर आप ईजीली अपने ब्रांड की एक आइडेंटिटी क्रियेट कर सकते है. अपनी आइडेंटिटी की क्लियर पिक्चर आपके माइंड में होनी चाहिए. इसके लिए आपको किसी इमेज कंसलटेंट की ज़रूरत नहीं है.

 ऐसी बहुत सी चीज़े है जिनसे आप अपने स्माल बिजनेस की भी एक आइडेंटिटी क्रियेट कर सकते है. फर्स्ट इम्प्रेशन बहुत पॉवरफुल होता है. आपके ब्रांड का फर्स्ट इम्प्रेशन मार्किट में स्टिक हो जायेगा इसलिए डीपली सोचे कि क्या करना है. क्योंकि लोगो के सामने आपका ब्रांड एकदम नया है तो इसे ऐसा दिखना चाहिए कि ये अपीलिंग लगे. जो दीखता है उसी के बेस पर लोग आपको जज करेंगे.

 अपनी आइडेंटिटी क्रियेट करने के लिए आप क्या एलेमेंट्स यूज़ करेगे? इनमे ब्रांड का लोगो और नाम मेजर फैक्टर होते है लेकिन इसके अलावा और भी चीज़े है जो मेटर करती है. जैसे कि आपका बिजनेस कार्ड, स्टाफ यूनिफोर्म, इनवॉइस, इ मेल्स सिग्नेचर, डिलीवरी व्हीकल, सिग्नेज और फेस बुक फेन पेज. ये सारे एलेमेंट्स मिलकर आपके ब्रांड की आइडेंटिटी कम्यूनिकेट करते है.

 कुछ और एलेमेंट्स भी है जैसे आपका फैक्स कवर, न्यूज़लैटर्स, एडवरटाईजिंग, इ मेल फोर्मेट, वेबसाईट, कस्टमर सर्विस, सेल्सपीपल, और एम्प्लोयीज़ का एटीट्यूड. ये सब काफी सारा काम लगता है मगर यही तो सारे सक्सेसफुल ब्रांड करते है. वो अपनी आइडेंटिटी के हिसाब से ही अपने एम्प्लोयी भी हायर करते है. उनकी यूनीक स्टाइल पर ही उनका कम्यूनिकेशन बेस्ड होता है. ये सारे ऊपर बताये गए एलेमेंट्स मिलकर वो टोटल एक्स्पिरियेंश बनाते है जो आपके कस्टमर को आपके ब्रांड से मिलेगा.

 बिजनेस लोगो और नेम चूज़ करने के लिए यहाँ हम आपको कुछ टिप्स दे रहे है. आपका लोगो सिर्फ एक ट्रेंड ना फोलो करे, अगर इसमें लास्टिंग वैल्यू भी हो तो अच्छा है. सेकंड, ये डिसटीन्क्ट होना चाहिए.  थर्ड बात, ये आपके आइडियल क्लाइंट्स को अपीलिंग लगना चाहिए.

 फोर्थ बात, आपके ब्रांड के कोर मैसेज से ये मैच होना ज़रूरी है. और लास्ट बात कि ये रीडेबल होना चाहिए. ऐसे फोंट्स या इमेजेस मत चूज़ करो जो लोग पढ़ ना सके. इस सबके बीच इस बात का भी ख्याल रखो कि आपके बिजनेस नेम से लोगो को आईडिया हो जाए कि आप क्या सर्विस या प्रोडक्ट ऑफर कर रहे है.

 जैसे एक्जाम्पल के लिए अगर आप नाम चूज़ करे तो“बॉब’स इलेक्ट्रिक” के बजाये चूज़ करे “बॉब’स इलेक्ट्रिकल रिपेयर” क्योंकि पहले वाले नाम से लोगो को पता नहीं चलेगा कि आप इलेक्ट्रिकल रिपेयर करते है या इलेक्ट्रिक गिटार बेचते है. और साथ ही नाम ऐसा चूज़ करे जो सबसे डिफरेंट लगे, जो एकदम नया लगे.

 लॉ फर्म अक्सर ऐसे नाम यूज़ करती है”स्मिथ, जोन्स एंड विलियम्स” लेकिन अगर उनका नाम “ट्रैफिक वायोलेशन बस्टर्स” हो तो ? आपको क्या लगता है कौन सा नाम सही सूट करता है ?


क्रियेट प्रोडक्ट्स एंड सर्विसेस फॉर एवरी स्टेज ऑफ़ क्लाइंट डेवलपमेंट

 इस चैप्टर में आपको दो इम्पोर्टेन्ट कॉन्सेप्ट्स के बारे में बताया जाएगा. ये क्लाइंट डेवलपमेंट और मार्केटिंग आवरग्लास के स्टेजेस है. तो चलो पहले क्लाइंट स्टेजेस से स्टार्ट करते है. आप बस एक ही टाइप का प्रोडक्ट या सर्विस नहीं दे सकते क्योंकि ये अप्रोच आपको आल या नथिंग वाली सिचुएशन में लाकर खड़ा कर देगी और आपके बिजनेस को लिमिट कर देगी.

 इसलिए आपके पास अपने क्लाइंट्स के लिए ऑफर्स की सिरीज़ होनी चाहिए. मार्केटिंग करना ऐसे ही है जैसे आप किसी को डेट कर रहे हो. आप अपने आइडियल गर्ल या बॉय के बारे में सोचते है और जब आपको एक परफेक्ट मैच मिल जाता है तो आप शादी के सपने देखने लगते है, फिर घर परिवार और बच्चो के भी.

 लेकिन अपने रिलेशनशिप में लाइफटाइम कमिटमेंट से पहले आपको कुछ स्टेजेस से गुज़रना पड़ेगा. सेम यही चेज़ मार्केटिंग के साथ भी अप्लाई होती है. तो क्लाइंट डेवलपमेंट के स्टेजेस क्या है ? ये स्टेजेस है ससपेक्ट्स, प्रोसपेक्ट्स, क्लाइंट्स, रिपीट क्लाइंट्स और चैंपियंस. अपने आइडियल क्लाइंट के बारे में सोचना आपका फर्स्ट स्टेज है.

 फिर आपके ससपेक्ट्स वो लोग है जो आपके आइडियल क्लाइंट प्रोफाइल में फिट होंगे. और आपके इनिशियल ऑफर पर रीस्पोंड करके वो आपके प्रोस्पेक्टस भी बन जायेंगे. क्लाइंट्स वो लोग होते है जिन्होंने आपका प्रोडक्ट खरीदा और ट्राई किया है. और जब वो लौटकर आपके पास आते है तो आप उन्हें अपना रीपीट क्लाइंट बोल सकते है. फाइनली चैपियंस वो होते है जो ज्यादा से ज्यादा आपके एक्स्पेंसिव लेकिन वैल्यूबल प्रोडक्ट्स खरीदेंगे. सबसे इम्पोर्टेन्ट बात है कि ये चैपियंस आपका बिजनेस बाकि लोगो को भी रेफेर करेंगे.

 आप अपनी मार्केटिंग स्ट्रेटीज़ी का यूज़ लोगो को ससपेक्ट्स स्टेज से चैपियंस स्टेज तक लाने में करेंगे. इस प्रोसेस में आप अपने क्लाइंट्स और बिजनेस रिलेशनशिप में ट्रस्ट और लोयेलिटी बिल्ड करेंगे. तो आप ये ट्रस्ट कैसे बिल्ड करेंगे? ज़ाहिर है आप ये ट्रस्ट अपने हाई क्वालिटी प्रोडक्ट्स या सर्विस देकर बिल्ड करेगे. और ये चीज़ हमें मार्केटिंग आवरग्लास के कांसेप्ट पर लेकर आती है. क्या आप मार्केटिंग फनल से फेमिलियर है?

 अपने माइंड में एक किचन फनल की पिक्चर ट्राई करो. मार्केटिंग फनल का आईडिया है कि लोगो को हाई प्राइस में आपके ज्यादा वैल्यूएबल ऑफर के बारे में गाइड किया जाए. इसके डीपेस्ट लेवल पर आपके हाई एंड क्लाइंट होते है जो आपके प्रीमियम ऑफर्स के लिए स्बसक्राइब करेंगे. मार्केटिंग फनल यहाँ पर खत्म होती है.

 अब एक आवरग्लास इमेजिन करो. मार्केटिंग आवरग्लास में प्रोसेस चलता रहता है. आपके करंट एक्जिस्टिंग क्लाइंट्स आपका बिजनेस अपनी जान पहचान के लोगो को रेफेर करेगे. और वो रेफरल्स आपके ससपेक्ट्स बनेंगे और फिर यही प्रोसेस चलता रहेगा. मार्केटिंग आवरग्लास अप्रोच यूज़ करके आप वाकई में आपका बिजनेस एक्सपेंड कर सकते है. आपके पास चैपियंस है जो आपके प्रीमियम प्रोडक्ट्स खरीदते रहेंगे और ज्यादा से ज्यादा पोटेंशियल बायर्स को भी आपका रेफरेंस देते रहेंगे. यही डक्ट टेप मार्केटिंग का एशेन्स है आप लोगो को “नो, लाइक और ट्रस्ट यू” के कांसेप्ट के साथ अप्रोच करते है. और फिर वो आपके लिए “ट्राई, बाय, और रीपीट और रेफेर” का काम करते है.


प्रोड्यूस मार्केटिंग कंटेंट देट एजुकेट्स

 आज लोग किसी भी प्रॉब्लम या क्वेश्चन का आंसर गूगल में सर्च करते है. किसी को भी अगर किसी कंपनी, प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में जानना हो तो बस उसे ऑनलाइन सर्च कर लो. इसलिए आपके लिए कंटेंट प्रोड्यूस करना बहुत इम्पोर्टेन्ट है. अगर आप लोगो को गूगल पर नहीं मिलते तो समझो आपका स्माल बिजनेस डूब गया. इसलिए कंटेंट प्रोडक्शन आपकी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी का एक पार्ट होना चाहिए.

 आपका कंटेंट दो इम्पोर्टेन्ट चीजों पर फोकस करना चाहिए जोकि है लोगो का ट्रस्ट बिल्ड करना और उनको अपने बिजनेस के बारे में एजुकेट करना. जो कंटेंट आप यूज़ कर सकते है उनके एक्जाम्पल है ब्लोग्स, सोशल मिडिया, रिव्यूज़, इ-बुक्स और सेमिनार्स.. सबसे पहले तो आपको अपना बिजनेस ब्लॉग क्रियेट करना पड़ेगा. क्योंकि इसकी हेल्प से आप और ज्यादा कंटेंट प्रोड्यूस करके उन्हें ईजिली शेयर कर पायेंगे.

 आपके ब्लॉग कंटेंट आर्टीक्लस, वर्क शॉप्स मेटीरियल्स या ई-बुक्स के तौर पर भी एडाप्ट हो सकती है. नेक्स्ट चीज़ जो आपके कंटेंट में होगी वो है सोशल मिडिया. इसमें से ज़्यादातर फ्री होता है तो आप इस अपोरच्यूनिटी को यूज़ कर सकते है. फेसबुक और लिंकेडीन जैसी साइट्स पर अपना प्रोफाइल क्रियेट करे. साथ ही कुछ मैगेजीन साइट्स जैसे इंक, बिजनेसवीक और एंटप्रेन्योर भी ज्वाइन कर ले.

 अपने प्रोफाइल्स में कुछ वैल्यूएबल इन्फोर्मेशन डाले. कुछ इमेजेस और वीडियोज भी अपलोड करे. सबसे इम्पोर्टेन्ट बात कि अपनी कंपनी के वेबसाईट का लिंक इन्क्ल्यूड करे. साथ ही कुछ रीव्यूज़ साइट्स भी ज्वाइन कर ले जैसे येल्प, सिटीसर्च या फिर मर्चेंटसर्कल. यूजर्स इन साइट्स में अपने कॉमेंट्स और रेटिंग्स शेयर करते है.

 अब लोग आपके बिजनेस के बारे में क्या कमेन्ट देंगे, ये तो आपके हाथ में नहीं है लेकिन आप उन्हें क्लोजली मोनिटर कर सकते है. गूगल इन रिव्यूज़ साइट्स को हाईलाईट करता है इसलिए कस्टमर्स का पोजिटिव फीडबैक बहुत ज़रूरी है. एक ई-बुक क्रियेट करने का एड्वांटेज ये है कि आप इसमें बहुत सी इन्फोर्मेशन इन्क्ल्यूड कर सकते है.

 आप उस बारे में लिख सकते है जो आपकी कंपनी को डिफरेंट बनाती है और जो आपकी सक्सेस का सीक्रेट है, अपनी इमेजिनेशन यूज़ करे.एक और कंटेंट जो आप प्रोड्यूस कर सकते है वो है सेमिनार्स. या ऑनलाइन भी हो सकता है या ऑफ लाइन भी. एक 45 मिनट्स का सेशन काफी होगा अपनी वैल्यूएबल इन्फोर्मेशन देने के लिए. अपने पोटेंशियल बायर्स को एजुकेट करने के अलावा आप उनसे इंटरएक्टिंग करके भी लर्न कर सकते है. अपने सेमिनार्स के लिए अपनी ईबुक कंटेंट को बेस बना सकते है.


अ वेब प्रेजेंस देट वर्क्स डे एंड नाईट

 आज के टाइम में किसी भी स्माल बिजनेस के लिए अपनी ऑनलाइन प्रेजेंस बनाना बहुत इम्पोर्टेन्ट है. अगर आपने ऐसा नहीं किया आप एक तरह से एक्जिस्ट ही नहीं करते. इन्टरनेट एक बड़ा कन्विनीएंट तरीका है लोगो तक पहुँचने का और कस्टमर्स ढूढने का. ऑनलाइन होने का मतलब है ज्यादा सेल के चांसेस. इसलिए अपनी ऑनलाइन एक्टिविटीज़ को सीरियसली ले. यहाँ हम कुछ टिप्स दे रहे है जिससे आप अपनी कंपनी वेबसाईट को इम्प्रूव कर सकते है.

· आपकी वेबसाईट की डिजाइनिंग अट्रेक्टिव होनी ज़रूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा इम्पोर्टेन्टली इसमें गुड क्वालिटी ऑफ़ कंटेंट होना चाहिए.

· जो भी टर्म्स आप यूज़ करे, सिंपल होने चाहिए, जारगन्स का यूज़ ना करे, लोग आपका बिजनेस सर्च करने के लिए जो की वर्ड्स टाइप करते है, उन्हें जानना ज़रूरी है.

· सिंगल कांटेक्ट इन्फोर्मेशन पेज के बजाये अपनी कॉन्टेक्ट इन्फोर्मेशन साईट के हर पेज में रखे ताकि कस्टमर ईजीली आप से कांटेक्ट कर सके.

· अपने ब्लॉग पोस्ट और सोशल मिडिया में भी अपनी वेबसाईट की लिंक्स इन्क्ल्यूड करना ना भूले.

· सीईओ या सर्च इंजन ऑप्टीमाईजेशन पर ज्यादा रिले ना करे. आपके पास कुछ पे पर क्लिक एड्स भी होने चाहिए जो लोगो को आपकी साइट्स तक लेकर आये. 

 ये बहुत ज़रूरी है कि आपके सारे ऑनलाइन कंटेंट लोगो को आपकी मेन वेबसाईट तक लीड करे. जब लोग आपकी वेबसाईट पर आये तो ये ओनलाइन ट्रैफिक आपके गुड क्वालिटी कंटेंट को देख पाए. उन्हें आपके प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में इन्फोर्मेशन मिलनी चाहिए. अगर लोग कन्फ्यूज़ होंगे कि वो क्या पढ़ रहे है तो उन्हें कुछ समझ नहीं आएगा और वो आपकी वेबसाईट से एक्जिट कर लेंगे.

 एक “कंटेंट ड्राइवन साईट” के एडवांटेजेस क्या है? आपके बिजनेस के बारे में जब लोग अच्छे से जान लेंगे तो आप पर उनका ट्रस्ट ईजिली बिल्ड हो जाएगा. आप उनसे बात करे, इससे पहले ही वो लोग आपके प्रोडक्ट खरीद लेंगे. दूसरा एडवांटेज है कि ये रेफेरिंग को आसान बना देता है. मान लो अगर उनके फ्रेंड्स को भी वही प्रोडक्ट लेना है तो आपके क्लाइंट उन्हें आपकी साईट के बारे में बता देंगे. 


कनक्ल्यूजन

 आपने यहाँ मार्केटिंग स्ट्रेटेजी के बारे में जाना. आपने अपने आइडियल क्लाइंट्स सर्च करने और कोर डिफ़रेंस के बारे में भी जाना. ऐसा क्या है जो आपको बाकी ब्रांड्स से अलग करता है? इस थॉट पर ही अपनी कंपनी की इमेज बिल्ड करे.

 आपने मार्केटिंग आवरग्लास और क्लाइंट डेवलपमेंट के स्टेजेस के बारे में भी जाना.

 आपने गुड कंटेंट क्रिएटिंग की इम्पोर्टेंस के बारे में भी जाना. ऐसे कंटेंट प्रोड्यूस करे जिससे लोग आप पर ट्रस्ट कर सके और बाकी लोगो को भी आपका बिजनेस रेफर कर सके.

 कस्टमर आपसे थ्री स्टेज में इंटरएक्ट करता है. सबसे पहले वो आपको जानता है, फिर वो आपको लाइक करता है और फिर फाइनली वो आपपे ट्रस्ट करता है और जब ये सब होता है तो पहले वो आपका प्रोडक्ट ट्राई करेगा और फिर आपके बाकि नए प्रोडक्ट्स भी खरीदता रहेगा.

 फिर फाइनली वो आपके लिए मार्केटिंग भी करेगा जैसे अपने फ्रेंड्स और फेमिली को आपके प्रोडक्ट्स के बारे में बता कर उन्हें रेफर करेगा.


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