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3D क्या है ? 3D Technology Explained in details | Hindi


3D Technology Explained in details | Hindi

 3D technology के बारे में तो बहुत बार सुना है पिछले कुछ सालो में 3D TV, 3D movie, 3D कैमरा वगैरह वगैरह। आज मैं आपको 3D Technology के बारे में Detail Explained करूँगा, अगर आपको 3D Technology के बारे में जानना है तो आप ये Article आगे पढ़ सकते है।

 3D क्या है ?

 तो देखिये 3D का पूरा मतलब है 3 dimension, यानि की उसकी high, width और depth; मतलब आप कोई भी एक normal वीडियो टीवी पे या यूट्यूब पे या फिर फेसबुक पे देख रहे है, वो normal 2D वीडियो है।

 3D कैसा है ?

 मान लीजिये आप एक movie देख रहे है उसके अंदर कोई सा character है तो उसको जब आप 3D के अंदर देखोगे तो आपको ऐसा लगेगा की वो character स्क्रीन से बाहर आ गया है और आप उस character की पीछे जो कुछ भी है उसकी difference की आप अंदाजा लगा सकेंगे।

 अब 3D वीडियो को रिकॉर्ड कैसे करते है ? सबसे पहले हम ये जान लेते है, playback की जो बात है वो बाद में आएगी, रिकॉर्ड के लिए अगर आप normal किसी कैमरा से किसी भी चीज को रिकॉर्ड करते है तो वो 2D में रिकॉर्ड करते है क्यूंकि वो एक angle पे कैमरा लगा होता है सामने एक स्क्रीन होता है तो वो सिर्फ जो भी नज़र आ रहा है फ्रेम में वो as it is रिकॉर्डिंग कर देता है।


3D recording camera


 3D में हम क्या करते है दो कैमरा का setup use करते है, एक कैमरा right और एक कैमरा left side होता है और दोनों subject के तरफ फोकस कर रहे होते है, लेकिन वो हल्केसे tilt हुए होते है दोनों के दोनों कैमरा और उनका separation है वो ज्यादा दूर होता है, बहुत ही नज़दीक नज़दीक होते है और वो आपको अलग अलग angle से वो subject को capture करते है।

 तो अगर आप right से भी देखोगे या फिर left से भी देखोगे तो आपको उसका एक overall 3D जो आपको एक जो dimension है वो देखनेको मिलेगा।

 3D कैमरा वाले कुछ मोबाइल फ़ोन भी मार्किट में आये थे HTC और LG वगैरह ने कुछ अपने models launch किये थे 3D रिकॉर्डिंग करने वाले, उनमे भी पीछे आपको दो अलग अलग कैमरा देखनेको मिलते थे, दोनों के दोनों हल्केसे tilt थे जो आपको 3D रिकॉर्डिंग करके दे सकते थे।

 professionally जो कैमरा use करते है वो simple ऐसा कैमरा नहीं होता है जिसके अंदर दो lens होते है दो अलग अलग कैमरा को use करते है अलग अलग angles पे ताकि वो आपको एक 3D effects दे पाए और बाद में उन दोनों के रिकॉर्डिंग को overlap कर देते है synchronized कर देते है और जो आपको आउटपुट देखने को मिलता है वो है 3D movie.

 अब हम बात करते है 3D playback की, तो देखिये 3D playback को हम तीन categories में divide करेंगे पहला होता है active 3D playback, दूसरा होता है passive 3D playback और तीसरा होता है glasses free playback.


active 3d glass


अब आपने जैसे कि photo में देखा है, ये active 3D को support करता है, active 3D का मतलब ये है की आपको उस glass के अंदर बैटरी चाहिए और आपको उसको charge करना पड़ेगा और उसके बाद आप 3D playback देख पाएंगे।


 ये काम कैसे करता है, जो आपका tv है न जो image है जैसे मैंने बताया की दो perspective होते है एक थोड़ा right से और एक थोड़ा left से तो वो दोनों perspectives को बारी बारी बहुत ही तेजी से cycle करता है, जैसे मान लीजिये पहले right उसके बाद left ऐसेही right/left, right/left, right/left करके वो बहुत ही तेजी से करता है और इतना तेजी से करता है की आप उससे judge नहीं कर पाते।

अगर आप tv देखते है 3D वाला बिना glass के तो आपको लगता है की दो photos है, साथ साथ वो हलकी सी overlapped है, तो वो आपको judge नहीं हो पाता है की वो on/off, on/off हो रहे है, क्यूंकि वो बहुत ही तेजी से होता है।

 अब जो glasses है ये किया करता है, tv में एक a-meter लगा होता है, जो information भेजता है और glass में जो है एक receiver लगा होता है, तो receiver क्या करता है की receiver वो जो information जो tv भेज रहा है, उसको receive करता है और जो glass में बैटरी लगी होती है, उसकी मदद से जैसेही cell थोड़ी सी volt लगाता है, जो glass है वो dark हो जाता है, अगर cell ने कोई volt नहीं लगाता है तो आपको बिलकुल एक transparent glass जैसा नजर आएगा।

 लेकिन जैसे उस special glass को हम on करेंगे तो आपको वो glass black नज़र आएंगे, आप उनके आर-पार नहीं देख पाएंगे, जिस स्पीड से tv उन images को cycle करता है, उसी स्पीड से glasses भी वो information जो tv भेजता है उसकी मदद से अपने right और left glasses है वो उनको  on/off, on/off करते है और ऐसा लगता जब हम दोनों images को combine करते है तो हमारे दिमाग में एक 3D picture बन जाती है और हम 3D picture को enjoy कर पाते है।


passive 3d glass


 उसके बाद हम बात करते है passive 3D की - तो देखिये normal consumer electronics जो products है जैसे की tv या मोबाइल फ़ोन वगैरह है उनमें passive 3D नहीं होता है, लेकिन आप movies देखते है सिनेमा hall में जाके, वो सब होती है passive 3D, उनमे जो आपके 3D glasses दिए जाते है, उनमें नहीं तो कोई बैटरी होती है, नहीं तो कोई cell होता है, नहीं कोई receiver या a-meter वगैरह होता है।

 उनमें आपको colorized glass देखने को मिलता है, वो क्या होता है जो आपका स्क्रीन है जहा पे projection हो रहा है movie का, पीछे की तरफ में दो projector लगे होते है और वो दो अलग अलग feeds को directly एक साथ स्क्रीन पे produce कर देते है, वो cycle नहीं करते है on/off, on/off, वो continuously right वाला right side और left वाला left side वो overlap करके थोड़ा सा और वो आपको produce कर देते है।

 जो आपका चश्मा होता है उस चश्मा में colorized glass होते है, यानि की जो आपका right वाला चश्मा है वो सिर्फ right वाले जो picture है वो उसी को pick करेगा, जो left वाला है वो सिर्फ left वाले picture को ही pick करेगा, तो वो आपको एक साथ दोनों picture को बिना किसी cell या बैटरी के एक साथ pick कर लेते है और आपको 3D image देखने को मिल जाते है।


glasses free 3D


 अब हम बात करते है glasses फ्री 3D की, तो देखिये जैसे मैंने आपको बताया की HTC और LG ने अपने कुछ phones launch किये थे 3D technology के साथ में, लेकिन आप एक फ़ोन को आप अगर glass लगा के देखे उसका 3D स्क्रीन, तो उसमें तो कोई मजे वाली बात नहीं है, तो इसलिए portable बनाने के लिए उन चीज को और ज्यादा mass users तक पहुंसाने के लिए उन्होंने जो features launch किया था वो था glass free 3D का।

 इसमें क्या होता है - जो स्क्रीन होता है उसके ऊपर एक छोटी सी layer लगायी होती है, वो layer right और left दोनों जो images बनती है उनको हल्का सा अलग अलग direction में transmit करती है अब जब आप उस स्क्रीन की तरफ देखते है तो आपकी जो right आंखे होती है वो right वाली information को pick करती है, left वाली, left वाली information को pick करती है।

 और at the end जो आपका brain है वो automatically 3D एक picture create कर लेता है, लेकिन ये technology जो है ये इतनी popular नहीं है और इतनी अच्छी भी नहीं है, क्यूंकि इसमें क्या होता है जो आपके पुरे स्क्रीन का जो resolution होता है, वो 50-50% divide हो जाता है right और left में।

 ऐसे में जब आप एक picture देखते है तो आपको उतनी अच्छी quality नहीं मिल पाती, आपको उतना अच्छा 3D effect नहीं मिल पाता, tv वगैरह में technology आती है उसमें glasses फ्री 3D की भी, लेकिन अगर आप देखेंगे तो भी आपको उतना मजा उसमें नहीं आएगा।

 अब हम बात करते है 2D से 3D convert कैसे होते है, देखिये बहुत से tv या बहुत से ऐसे device है जो की 3D support करते है क्यूंकि 3D content इतना popular नहीं है, इसलिए वो यह चाहते है की हम 2D content को भी 3D में use कर पाए।

 तो ऐसे में क्या करते है जो एक 2D image है या 2D वीडियो है उसमे वो alternet pixel की जो lines है, जैसे मान लीजिये first, 3rd, 5 th, 7 th ऐसे करते करते, वो एक छोरके एक pixel की line right और लेफ्ट में convert कर लेगा, तो बरी बारी एक बार right देखिये और एक बार लेफ्ट दिखिए और अगर आप glasses लगाएंगे, देखेंगे तो आपको लगेगा ऐसा की वो जो picture है, वो 3D है।

 लेकिन conversion process कहने को तो 3D में convert कर देती है, लेकिन इसमें भी जैसे मैंने आपको बताया glass फ्री 3D की तरह जो resolution है वो half हो जाता है, क्यूंकि आधी जो line है वो गायब हो जाती है और at the end आपको जो effect मिलता है देखनेको, वो इतना अच्छा नहीं मिलता है, बस आपको थोड़ा बहुत लगता है की है ये कुछ तो 3D हो रहा है।

 क्यूंकि उसकी actual में रिकॉर्डिंग हुई नहीं 3D में, तो आप 3D में अच्छे से कैसे देख पाएंगे।


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 तो अब आपको 3D technology मतलब 3D क्या है ? के बारे सब कुछ समझ में आ गए होंगे, अगर आपको कुछ पूछना है तो comment करके पूछ सकते है। और इस post (3D Technology Explained in details | Hindi) को आप आपके friends के साथ share कीजिये, क्यूंकि उसको भी पता चले 3D technology के बारे में।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

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