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Asset and Types of Assets - Financial Tips in Hindi. Hello दोस्तों, अगर आप MBA में कोई financial statements पढ़ते है balance sheet या business newspapers या फिर business magazines पढ़ते है तो आपको कई तरीके का assets देखने को मिलते है।

 for example- Current Asset or Non-current Asset , fixed Assets , tangible or intangible Assets, operating या non-operating Assets तो कोई बार काफी confusion हो जाता है की कौनसे तरीके का asset, कौन से category में आता है, और उसका exactly मतलब क्या है ? तो आज मैं आपको बताऊँगा Asset की definition और ये Assets कितने types की होती है।


Asset and Types of Assets - Financial Tips in Hindi


Asset and Types of Assets - Financial Tips in Hindi



1. What is an Asset ?

 Asset एक एसा resource है जो उसको कोई भी company या individual उसको own कर सकता है , जो आपको long term के अन्दर cash flows देता है । तो अब देखिये यहा पर important चीज़ें निकल कर आती है -

1. Resource;

2.Ownership;

3. तीसरी बात है assets के बारे में की ये economic value देते है और इनको exchanged भी किया जा सकता और sell भी किया जा सकता है।

Example : मान लीजिये एक factory है , उस factory के अन्दर land है और पुरा building जो है ये complete एक Asset है।

 तो यहा पर Asset क्या है - Factory अपने आप के अन्दर एक Asset है , जो किसी भी business को एक long term benefit देगी और factory के अन्दर अब क्या क्या portions है -

1. Land

2. Building

3. Plant and equipment

 - ये सारे के सारे Fixed Assets है , अब अलग तारिके का assets भी होते है , हम सारे तारिके की assets की बात करेंगे । तो अब देखिये Assets को अगर हमें classified करना हो तो हम three categories के अन्दर इसको classify कर सकते है - 

1. Convertibility - की कितना जल्दी वो आपको cash दे सकता है - और convertibility के अन्दर भी २ भाग आ जाते है -

a) Current Assets - Current Assets होते है जो आपको short term के अन्दर cash मे convert किया जा सकता है।

b) Non - Current Assets - Non - Current Assets होते है जिनको long term के अन्दर cash मे convert किया जा सकता है। 

2. Physical Existence - 

a) Tangible Assets - जिनको आप touch कर सकते है।

b) Intangible Assets - जिनको आप देख नहीं सकते या फिर आप उनको touch नहीं कर सकते। 

3. Usage - 

a) Operating Assets - Operating Assets वो होते है जो आपके day to day company operations मे production वगेराह मे काम आते है।

b) Non-Operating Assets - Non-Operating Assets वो होते है जिनका daily operations से कोई मतलब नहीं है लेकिन फिर भी वो आपको long-term के अन्दर value देते है। 




Full Explained - Asset



Current Assets : Current Assets वो होते है जिनको cash मे convert किया जा सकता है एक साल से कम के अन्दर । एक साल से काम का मतलब है आप मन के चलिये accounting conventions के अन्दर जो भी चीज एक साल से कम मे convert हो सकती है cash मे, उसे हम short term केहते है । 


Example for current assets -

i. Cash and Deposits : Company के पास जो cash in hand परा है , और bank के अन्दर जो भी fixed deposits है या बैन के जो cash परा है जिसको आप immediately cash के अन्दर convert कर सकते है । 

ii. Accounts Receivables : मान लीजिए आपने कुछ सामान उधार पे बेचा है तो वो आपको पैसा immediately नही मिला है । लेकिन वो आपकी मिल जायेगा , मतलब एक साल से भी कम के अन्दर वो पैसा आपको मिल जायेगा । 

iii. Short Term Investments : आपकी जो भी less than 1 year की investment है जहाँ से भी आपको interest आ रहा है, आपके returns आ रहे है short term की अन्दर वो आपके current assets हो गया । 

iv. Short Term Loans and Advances : मान लीजिए company ने loan दिया है , किसी को कोई advanced दिया है जो आपको एक साल के अन्दर अन्दर recover हो जायेगा वो भी current asset हो गया । 

v. PrePaid Expenses : मान लीजिये आपका कोई insurance premium हो गया जो आपने advance मे pay कर दिया , उसका लेकिन benefit आपको एक साल के अन्दर अन्दर मिल रहा है , कुछ contractors की payments हो सकती है - आपने हो सकता है उसको advance मे ही कर दिया । तो वो भी आपके current assets हो जाते है । 

vi. Inventory : आपका जितना भी stock परा हुआ है, जितना भी माल परा हुआ है company के पास वो भी सारा current assets मे आता है , क्योंकि उसको भी आप convert कर सकते है, आप जैसे ही माल बेचेंगे आपको पैसा मिलेगा या पैसा immediately नही भी मिलेगा तो वो accounts receivables मे जायेगा तो वो भी current asset ही होता है।

 अब Inventory ३ तरीके की होता है -
i. Raw Materials,
ii. Work in Progress - जो basically manufacturing process के दौरान जितना भी stock आपका, उसकी inventory ली जाती है।
iii. Finished Goods - इसका मतलब की सामान तो पुरा बन के तयार हो गया लेकिन वो आपके warehouse मे परा है , जो अभी तक बिका नही है। तो वो भी आपका current asset मे आ जाता है। 


2. Non-Current Assets :

 जो भी more than 1 year लगता है cash मे convert होने मे या उसकी value long term के अन्दर हमें मिलती है वो होते है non-current assets  या फिर हम उन्हें long term assets भी कह सकते है । 

Example for Non-Current Assets —


1. Fixed Assets :

i) Land and Building,
ii) Plant and Equipment = आपके factory मे जीतने भी plants है, computers है, printers है, barcode scanner है, या कोई vehicles है, या फिर construction equipment है जो भी आपके काम मे आता है business के अन्दर, production के अन्दर वो सारे fixed assets हो गए।
iii) Furniture and Fixtures . 


2. Long-Term Investments :


 जो more than 1 year के अन्दर आपको returns देंगी, वो भी long term investments है।
i) Stocks : आपकी company ने हो सकता है stocks मे invest किया हो।
ii) Bonds,
iii) Fixed Deposits,
iv) Mutual Funds,
v) Vacant Land: ये vacant land एसी है जो basically right now operational नही है वो सिर्फ as an investment परी हुई है।


3. Intangible Assets :


 ये Intangible Assets एसे होते है जिनको आप touch नही कर सकते ।

i) Patents, Trademarks, Copyrights - कोई company इन चीजो मे deal करते है, example - Pharma Companies के लिए ये बोहत important  होता है, Tech Companies के अन्दर भी कोई बार patents और copyrights काफी important होते है या फिर Media Companies के अन्दर भी ये काफी important होते है।

ii) Goodwill and Brand - अब ये goodwill और brands को ना आप touch कर सकते है; ना आप उसकी कोई fixed value भी लगा सकते है।

iii) Internet-Domains, Websites - आपने कुछ domains purchase किया है , या फिर आप कुछ websites operate करते है, वो भी आप touch नही कर सकते है तो वो भी intangible assets मे आ जाता है । 

iv) Proprietary Items - Blueprints, Software, Databank, Records, Content etc. : आपकी company के अन्दर कुछ blueprints हो सकते है, कुछ maps हो सकते है, software हो सकता है, कोई email list हो सकता, medical records हो सकते है, आपकी company का कोई educational content हो सकता है। ये सब आपके intangible assets है।



4. Other Assets :

 कुछ asset है जिसको company किसी भी categories मे सामील नही करते है उसको other assets बोलते है। 

i) Non-Current Receivables : अब non-current receivables कौनसे होते है ? — जैसे आपकी accounts receivables एक साल के अन्दर आपके पैसा आना था लेकिन एसा भी हो सकता है की आपके पास immediately पैसा ना आए और more than 1 year के अन्दर चले जाए, तो एसे receivables को आप other assets के अन्दर दाल सकते है और वो भी Non-Current Assets के अन्दर आ जायेंगे। 

ii) Fictitious Assets : Fictitious Assets basically Fake assets ही हे , इसमे क्या होता है की कुछ एसे expanses होते है या हो सकता है की company का कोई loss हो गया हो,

 मान लीजिए 10 लाख का कोई advertising expense है उसको company केहती है कि हम उसको 10 साल के अन्दर दिखाना चाहते है company के balance sheet मे दिखाना चाहते है,

 तो अब ये जो 10 लाख की value है advertising expense की ये हो सकता है 10 साल तक काम मे आए, तो इसलिए company हो सकता है उसको 1 लाख हर साल मे दिखाना चाहे,

 उसी तरह कुछ losses हो सकते है, जिनको company over a period of time दिखाना चाहती है तो वो actually एक asset नही है , लेकिन वो virtual asset type का है , जिसको company expense को over a period of time उसको ammotise कर रही है।

5. Tangible Assets : तो जितने भी आपके current assets है वो सारे Tangible Assets मे आ जाते है, और Fixed Assets और Long Term Investments भी tangible assets मे आते है, और इसके अलावा Non-Current Receivables भी tangible assets के अन्दर आता है।


6. Operating Assets :

 Operating Assets वो होते है जो आपके company मे day to day operations मे काम आते है।

For example -

i) Cash and Deposits : यहाँ पर कुछ cash हो सकता है आप daily operations मे use कर रहे हो या फिर deposits.

ii) Prepaid expenses : यहाँ contractors को आप day to day काम मे pay करते है तो ये Operating Assets भी है।

iii) Inventory,
iv) Fixed Assets,
v) Intangible Assets.


Non-Operating Assets :

i) Cash and Deposits - कुछ हो सकता है FD आपकी परी हुई है उसको आप operations मे नही use कर रहे है।

ii) Accounts Receivables - इसको आप day to day operations मे use नही कर रहे है तो ये Non-Operating Assets हो गए,

iii) Short Term Investments,

iv) Short Term Loans and Advances,

v) Prepaid Expenses - यहाँ अगर आप Insurance pay कर रहे तो वो daily तो काम मे नही आ रहे है तो वो non-operating होती है । 

vi) Long Term Investments,

vii) Non-Current Receivables.


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 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह Article (Asset and Types of Assets - Financial Tips in Hindi) कैसा लगा, मतलब क्या आपको इससे कुछ सीखने को मिला, मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस Article (Asset and Types of Assets - Financial Tips in Hindi) को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करे।


आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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