10 बातें जो भगवान् श्री कृष्ण से जरूर सीखनी चाहिए - Shrimad Bhagwat Geeta Gyan in Hindi

Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi. Hello दोस्तों, आज मैं आपको दिवाली की शुभकामना देते हुए, भगवान श्री कृष्ण जी की कही हुई कुछ 10 important बातें आपको बताने वाला हूँ, अगर आपको जानना है तो आप आगे जरूर पढ़े। और एक बात बता दूँ की इस article में बताये गए ज्ञान ही परम सत्य है, इसमें आपको कुछ समझ में नहीं भी आ सकते है।

 तो अगर आपको लगता है की इसको समझने के लिए आपको परेशानी हो रही है तो इस article को आप छोड़ भी सकते है। और अगर आपको परम ज्ञान जानना है तो उसके लिए आपको इस article को पढ़ना पड़ेगा और इसको अच्छे से हर एक शब्द को समझना पड़ेगा तभी आप इस ज्ञान को प्राप्त कर सकते हो।


Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi - 10 बातें जो श्री कृष्ण से जरूर सीखनी चाहिए


Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi - 10 बातें जो भगवान् श्री कृष्ण से जरूर सीखनी चाहिए


जाती -

No 1 - मनुष्य केवल दो प्रकार के है - देवता और असुर। जिसके ह्रदय में दैवी सम्पद कार्य करती है वह देवता है तथा जिसके ह्रदय में आसुरी सम्पद कार्य करती है वह असुर है। तीसरी कोई अन्य जाती सृष्टि में नहीं है।


ज्ञान -

No 2 - सम्पूर्ण पापियों से भी अधिक पाप करने वाला ज्ञानरूपी नौका द्वारा निःसंदेह पार हो जायेगा।


कर्म -

No 3 - कर्म के बारे में ये बताया - आसक्ति और संगदोष को त्याग कर, सिद्धि और असिद्धि में समान भाव रख कर योग में स्थित हो कर कर्म किये जा। कौन सा कर्म - निष्काम कर्म।

No 4 - कोई भी पुरुष किसी भी काल में क्षणमात्र भी कर्म किये बिना नहीं रह सकता, क्यूंकि सभी पुरुष प्रकृति से उत्पन्न हुए गुणों द्वारा विवश होकर कर्म करते है। प्रकृति और प्रकृति से उत्पन्न गुण जब तक जीवित हैं, तब तक कोई भी पुरुष कर्म किये बिना रह ही नहीं सकता। इसीलिए आपको बिना कर्म किये सोकर या बैठ कर दिन नहीं गुजारना चाहिए।


आत्मा -

No 5 - दुःख-सुख को समान समझनेवाले जिस धीर पुरुष को इन्द्रियों और विषयों के संयोग व्यथित नहीं कर पाते, वह मृत्यु से परे अमृत-तत्त्व की प्राप्ति के योग्य हो जाता है। यहाँ अमृत मतलब परम सत्य को बोला गया है।

No 6 - श्री कृष्ण, अर्जुन को बोलते है - पार्थिव शरीर को रथ बनाकर ब्रह्मरूपी लक्ष्य पर अचूक निशाना लगाने वाला पृथापुत्र अर्जुन ! जो पुरुष आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यक्त जानता है, वह पुरुष कैसे किसी को मरवाता है और कैसे किसी को मारता है ? अविनाशी का विनाश असंभव है। अजन्मा जन्म नहीं लेता। अतः शरीर के लिए शोक नहीं करना चाहिए।


कर्म और ज्ञान -

No 7 - श्री कृष्ण, अर्जुन को ये भी बोलते है - सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले बिना शरीरवाले और मरने के बाद भी बिना शरीरवाले हैं। जन्म के पूर्व और मृत्यु के पश्चात भी दिखायी नहीं पड़ते, केवल जन्म-मृत्यु के बीच में ही शरीर धारण किये हुए दिखायी देते हैं। अतः इस परिवर्तन के लिए व्यर्थ की चिंता क्यों करते हो ? -

 आत्मा ही सनातन है और इसको जानने के लिए आपको सिर्फ काम करने की जरुरत पड़ती है - पहला निष्काम कर्मयोग और दूसरा ज्ञानयोग और ये दोनों मार्गो में किया जाने वाला कर्म एक ही है।

No 8 - संसार में कर्म करने के दो दृष्टिकोण प्रचलित हैं। लोग कर्म करते हैं तो उसका फल भी अवश्य चाहते है या फल न मिले तो कर्म करना ही नहीं चाहते;

 किन्तु योगेश्वर श्री कृष्ण इन कर्मों को बंधनकारी बताते हुए 'आराधना' को एकमात्र कर्म मानते है। यहाँ श्री कृष्ण ये बताते है की सांसारिक परम्परा से हटकर कर्म करने की कला बतायी कि कर्म तो करो, श्रद्धापूर्वक करो; किन्तु फल के अधिकार को स्वेच्छा से छोड़ दो।

 फल जायेगा कहाँ ? आपने कर्म किया है तो उसका फल भी मिलेगा, लेकिन फल मिलेगा तो कर्म करना है, या फिर फल नहीं मिलेगा तो कर्म नहीं करना है। ऐसा नहीं करना है आपको।

 फल की चिंता न करते हुए किये जाने वाले कर्म ही असली कर्म है।

 फल आपको वही मिलगा जो कर्म आप कर रहे हो, तो अगर आप अच्छा कर्म करते हो तो आपको अच्छा फल मिलेगा, या फिर अगर आप बुरा कर्म करते हो तो आपको बुरा फल मिलेगा। तो आप choose कर सकते हो की आपको कैसा कर्म करना है।

No 9 - जो मनुष्य मन से इन्द्रियों को वश में करके, जब मन में भी वासनाओं का स्फुरण न हो, सर्वथा अनासक्त हुआ कर्मेन्द्रियों से कर्मयोग का आचरण करता है, वह श्रेष्ठ है।

 कर्म कौनसा करे - अपने निर्धारित किये हुए कर्म को करे। अर्थात कर्म तो बहुत से हैं, उनमें से जो कोई एक चुना हुआ है, उसी नियत कर्म को आपको करना है।

 कर्म न करने की अपेक्षा कर्म करना ही श्रेष्ठ है।


मैं कौन हूँ ?

No 10 - मैं कौन हूँ का जवाब - शरीर से इन्द्रियों को परे अर्थात सूक्ष्म और बलवान है, इन्द्रियों से परे मन है, यह उनसे भी बलवान है। मन से परे बुद्धि है और जो बुद्धि से भी अत्यंत परे है, वह है हमारी आत्मा। और वही मैं या आप हो। इसीलिए हम इन्द्रियां, मन और बुद्धि को control कर सकते है और जो इसे control कर लेता है वही जीवन में success को प्राप्त होते है।


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