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Expert Blogging Tips in Hindi - नया ब्लॉगर ये 5 बातें जरूर ध्यान रखें

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Expert Blogging Tips in Hindi. Hello दोस्तों, आज मैं आपको 5 ऐसी Best Blogging टिप्स बताऊंगा, जब Keywords research आप करते हैं आप ढूंढ लेते हैं Low Competition कौनसा हैं, High CPC किसका हैं और किससे आपको Traffic अच्छा मिलेगा,

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तो कौनसी ऐसी Tips हैं जिसका आपको ध्यान रखना चाहिए वो सारा Points मैं आपको Details में बताऊंगा, की Low Competition Keywords ढूंढने के बाद भी आपकी Post Rank क्यों नहीं करती, कौनसी ऐसी चीज है जिसको हम बार बार करते है। तो चलिए वो Tips जान लेते हैं -




Expert Blogging Tips in Hindi - नया ब्लॉगर ये 5 बातें जरूर ध्यान रखें

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Unbroken Book Summary in Hindi - ये स्टोरी Legend की है

Unbroken Book Summary in Hindi. Hello दोस्तों, अनब्रोकन बुक की ऑथर लौरा हिलेनब्रांड (Laura Hillenbrand) की ये स्टोरी मिडल ऑफ़ द एक्शन में शुरू होती है.



 ये स्टोरी एक ऐसे रेबेल की है जो ओलम्पियाड और एक वार हीरो रह चूका है और उसका नाम था लुइ सिल्वी ज़म्पेरिनी (Louis Silvie Zamperini).

 स्टोरी की स्टार्टिग में ही हमे आर्मी एयर फ़ोर्स के बोम्बार्डीयर (Army Air Forces bombardier ) लुइ ज़म्पेरिनी और उसके दो क्रू मेट्स का इंट्रोडक्टशन मिलता है.

 ये लोग अपनी ट्रिप में है और उन्हें आज 27 दिन हो गए है. ये लोग राफ्ट में लेटे हुए समुन्द्र के ऊपर है जहाँ पर जापानीज आर्मी का कण्ट्रोल है.

 इससे एक महीने पहले ही लुइ ओलिंपिक में दौड़ा था और न्यूज़ हेडलाइन्स में उसे काफी एप्रीशिएंश भी मिली थी.

 लेकिन अब वो मीलो दूर यहाँ इस हालत में पड़ा था, उसका वेट भी घटकर आधे से कम रह गया था.

 तभी अचानक इन लोगो की नज़र एक उड़ते हुए एरोप्लेन पर पड़ी तो उन्हें लगा शायद कोई उन्हें रेस्क्यू करने आ रहा है.

 लेकिन तभी उस प्लेन से लुइ और उसके साथियों पर फाइरिंग होने लगी. अपनी जान बचाने के लिए तीनो जल्दी से पानी में कूद गए.

इस स्टोरी के फर्स्ट चैप्टर में हम 1929 के कैलीफोर्निया में पहुँच जाते है. लुइ और उसके भाई पीट की एक विज़िंग साउंड से नींद खुल जाती है.

 जल्दी ही उन्हें पता चल जाता है कि उनकी सिटी में हवाई अटैक हो गया है.

 जर्मन एयरशिप ग्राफ जेपलिन (German airship Graf Zeppelin ) घरो के ऊपर से उड़ते हुए फायर कर रहे थे.

 ये एयरशिप्स आलरेडी फ़्रांस, स्विट्जरलैंड, न्यूयॉर्क, जापान, और जर्मनी को नेविगेट कर चुके थे और तीन दिनों से लगातार इसी तरह सिटीज़ के उपर से उड़ते हुए जा रहे थे और आज उनका लास्ट दिन था. 

 लुइ ज़म्पेरिनी (Louie Zamperini) न्यू यॉर्क के ओलेन में पैदा हुआ था, उसकी फेमिली इटेलियन इमीग्रांट्स थी.

 बचपन से ही लुइ रेबेल टाइप का था. अपने स्कूल और टोरेंस, कैलीफोर्निया (Torrance, California) की गलियों में उसने बहुत एडवेंचर किये थे.

 उसकी फेमिली कैलीफोर्निया में इसलिए शिफ्ट हुई थी क्योंकि न्यू यॉर्क के चिल्ड वेदर के चलते दो साल के लुइ को न्यूमोनिया (pneumonia) हो गया था.

 पीट (Pete) लुइ का बड़ा भाई था और उसके एकदम अलग था.

 वो लुइ की तरह शरारती बिलकुल नहीं था बल्कि काफी पोलाईट था और पढने में तेज़ था.

 पीट(Pete) को हमेशा ही लुइ की टेंशन रहती थी क्योंकि उसे पता था कि कुछ बदमाश टाइप के लड़के लुइ को उसकी शोर्ट हाईट और इटेलियन होने की वजह से तंग करते है.

 लुइ लोगो का खाना चुराता था, लड़ाई झगड़ा करता था, और कई बार तो उसकी हरकतो से पूरे मोहल्ले में हल्ला मच जाता था.

 लेकिन लुइ क्लीवर और कॉंफिडेंट भी बहुत था, वो इतना बोल्ड था कि किसी भी प्रॉब्लम से बड़ी चालाकी से बच निकलता था.

 और अपनी इसी क्वालिटी के चलते वो इतने सालो तक चली वार सरवाईव् कर पाया.

 उसके शहर की गवर्नमेंट ने कमज़ोर, बीमार और क्रिमिनल माइंड वाले बच्चो के लिए एक स्टरलाइजेशन (sterilization program) प्रोग्राम चला रखा था.

 लुइ का एक पडोसी इस प्रोग्राम का विक्टिम बन गया और उसे देखकर लुइ इतना ज्यादा शॉक हुआ कि उसे सुधरने की कसम ले ली थी.

 लेकिन इतना ट्राई करने के बावजूद वो सुधर नहीं पा रहा था, तब उसने टोरेंस (Torrance) से भागने के बारे में सोचा.

 अपनी मेंटल स्ट्रेंग्थ की वजह से लुइ ज़म्पेरिनी (Louie Zamperini) हर मुश्किल हालात में भी डट कर खड़ा रहा.

 ये उसकी फ्लेक्सीबिलीटी ही थी कि बुरे से बुरे टाइम में भी उसने हिम्मत नहीं हारी.

 1931 की बात है, लुइ को चाबियां कलेक्ट करने का शौक चढ़ा, वो किसी भी रेंडम लॉक में चाबी लगा देता ये देखने के लिए कि वो खुलता है या नही.

 फिर एक दिन उसे पता चला कि उसकी घर की चाबी से टोरेंस जिम (Torrance gym) का लॉक खुल सकता है.

 अब उसने क्या किया कि बच्चो को बिना टिकट बास्केट बॉल गेम्स में भेजना शुरू कर दिया.

 लेकिन जल्दी ही ऑथोरिटी वालो को उसकी इस हरकत का पता लग गया और लुइ को हर स्पोर्ट्स एक्टिविटी से बैन कर दिया गया.

 लेकिन पीट(Pete) ने स्कूल प्रिंसिपल को मना लिया कि वे लुइ को फिर से सपोर्ट ज्वाइन करने दे.

 उसे लगता था कि लुइ में टेलेंट है और वो एक अच्छा रनर बन सकता है.

 पीट ने लुइ को एथलीट बनाने के लिए स्ट्रिक्ट ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी.

 लुइ ने कई सारी रेसेस जीती और आल सिटी फाइनल्स में फिफ्थ पोजीशन तक पहुँच गया.

 हालाँकि वो एक ब्रिलिएंट रनर था लेकिन उसे दौड़ना बोरिंग लगता था.

 उसे लग रहा था कि वो एक ही टाइप के रूटीन में फंस गया है.

 इस बात पर लुइ की अपने फादर से लड़ाई हो गयी जिसके बाद वो अपने एक फ्रेंड के पास लोस एंजेल्स (Los Angeles) चला गया.

 उसने डिसाइड कर लिया था कि वो अब कभी घर नहीं लौटेगा, लेकिन कई राते भूखे प्यासे सडक पर गुज़ारने के बाद उसे घर की याद आ ही गयी.

 अक्ल ठिकाने आते ही वो घर लौट आया, उसने अपने भाई के सामने हार मानते हुए फिर से एक बार ट्रेनिंग शुरू कर दी.

 ये 1932 की गर्मियों की बात है, लुइ की डेडीकेशन ने उसे एक ब्रिलिएंट रनर बना दिया था. वो इंडीउन रिजर्वेशन में ट्रेनिंग के लिए गया और जब वापस आया तो पैसन से भरा हुआ था.

 अब उसने अपनी डेली लाइफ में भी रनिंग को इन्वोल्व कर लिया था.

 अब वो अपनी बाइक चलाने के बजाये स्ट्रीट्स में दौड़ता था.

 लुइ ने एक्सटेंसिव ट्रेनिंग स्टार्ट कर दी. मिलर ग्लेन कनिघम (miler Glenn Cunningham) उसका आइडियल था जिसने बुरी तरह जल जाने के बाद रनिंग में अपना करियर बनाया था.

 लुइ की अब एक पर्सनेलिटी बन रही थी.

 हालाँकि वो अभी भी पहले वाला स्ट्रोंग और कभी हार ना मानने वाला लुइ ज़म्पेरिनी (Louis Zamperini) ही था लेकिन अब उसका एक एम्बिशन (ambition) था.

 जूनियर कॉलेज में लुइ क्लास प्रेजिडेंट बना. वो लड़कियों में काफी पोपुलर था. अब वो सब-फाइव मिनट्स माइल्स में दौड़ने लगा था.

 अपनी कम हाईट के बावजूद पोस्चर और ट्रीड (posture and tread)से वो किसी टाल बॉय का लुक देता था.

 वो रेस में काफी तेज़ भागता था और UCLA क्रोस कंट्री रेस में उसने अपने कॉलेज कॉम्पटीटर्स को काफी मील की दूरी से हराया था. पीट की गाइडेंस में लुइ शोर्ट टाइम में ही एक एक्सीलेंट रनर के तौर पे फेमस हो गया था.

 उसने अब तक जितनी भी रेस की थी सब में वो जीता था.

 1934 में उसने साउथर्न कैलीफोर्निया ट्रेक चैपियनशिप की रेस हुई जिसमे लुइ ने नेशनल हाई स्कूल माइल का रिकोर्ड तोड़ दिया था.

 अपनी फ़ास्ट स्पीड की वजह से उसका निकनेम पड़ गया था” द टोरेंस टोर्नेडो” (“The Torrance Tornado”)और टोरेंस के लोगो के लिए वो किसी सेलेब्रिटी से कम नहीं था.

 लुइ में मेंटल इमेजरी की स्ट्रोंग पॉवर थी और साथ ही अपनी स्ट्रोंग विल पॉवर की वजह से उसे किसी भी चैलेन्ज में हराना मुश्किल था.

 वो अब 1936 के ओलम्पिक में 1500 मीटर रेस के लिए का पार्ट लेने का ड्रीम देख रहा था.

 हाई स्कूल पास करने के बाद लुइ को अपने यूनिवरसिटी ऑफ़ कैलीफोर्निया में स्कोलरशिप मिल गयी थी जहाँ उसका भाई भी पढता था.

 लेकिन उसके भाई ने उसे कहा कि कुछ टाइम और ट्रेनिंग करो उसके बाद कॉलेज ज्वाइन करना.

 लुइ ने काफी कोशिश की लेकिन वो ओलम्पिक टीम में सेलेक्ट नहीं हो पाया.

 फिर उसने कोम्प्टन ओपन 5000 मीटर रेस (Compton Open’s 5000 meter race) में हिस्सा लिया.

 इसमें उसका कोम्प्टीशन एक प्रिमिसिंग रनर नार्मन ब्राइट से था जो 1936 ओलम्पिक टीम में भाग ले चूका था.

 पूरी रेस में लुइ ब्राइट के साथ-साथ दौड़ता रहा लेकिन बहुत स्माल मार्जिन से वो ये रेस हार गया था.

 याह एक बार फिर उसकी विल पॉवर काम आई, उसने ओलम्पिक के लिए फाइनल ट्रायल देने का सोचा.

 फाइनल ट्रायल न्यूयॉर्क में होना था. लुइ ज़म्पेरनी (Louis Zamperini) ट्रायल के लिए न्यूयॉर्क गया, पूरे टोरेंस को उस हाई स्कूल ग्रेजुएट से उम्मीदे थी.

 लेकिन न्यूयॉर्क में सब कुछ गड़बड़ हो गया. हीट वेव के चलते मेनहट्टन 40 लोगो की मौत हो गयी थी.

 सारे एथलीट्स डिहाईड्रेट हो गए थे और उनका वेट भी घट रहा था.

 लेकिन इस सब के बीच भी लुइ बदला नहीं, उसके माइंड में एक ही पिक्चर थी.

 वो खुद को ओलिंपिक ट्रेक में दौड़ते हुए देखना चाहता था.

 और वो हर मुसीबत फेस कर सकता था पाने इस ड्रीम को हकीकत में बदलने के लिए.

 रेस वाले दिन टेम्परेचर बहुत ज्यादा हाई था, सारे एथलीट्स रेस के लिए एकदम रेडी थे.

 इस रेस में लुइ ज़म्पेरिनी ने कुछ अनएक्सपेक्टेड किया: उसने अनबीटेबल डॉन लेश (Don Lash)को हराकर ये रेस जीत ली.

 लेकिन फिर कुछ मिनट बाद ही अनाउंसमेंट हुई कि रेस लुइ ने नहीं बल्कि डॉन ने जीती है. लेकिन लुइ को कोई फर्क नहीं पड़ा.

 वो फिर भी ओलिंपिक टीम का यंगेस्ट डिस्टेंस रनर बन गया था और अपने माइंड में तो वो आलरेडी बर्लिन के ट्रेक में दौड़ रहा था.

 अमेरिकन ओलिंपिक टीम ट्रेनिंग के लिए जेर्मनी आई.

 जहाँ ओलिंपिक होना था वो विलेज जेर्मन के कण्ट्रोल में था.

 अपने बारे में लुइ ऑलमोस्ट श्योर था कि वो शायद मेडल ना जीत पाए क्योंकि फ़िनलैंड कई सालो ये रेस जीत रहा था.

 फाइनल से पहले लुइ को पीट का लैटर मिला.

 इसमें एक जोकर और एक रेसर की पिक्चर थी जिसके नीचे लिखा था” इनमे से कौन लुइ बनेगा?”.

 पीट के इस लैटर ने लुइ को बड़ा मोटिवेट किया और रेस के फाइनल लेप में फिनिश लाइन के पास पहुँचते ही लुइ ने अपनी पूरी ताकत लगा दी.

 ओलंपिक्स के फाइनल में लुइ 8 वे नंबर पे था फिर भी उसने फास्टेस्ट फिनिश का रिकॉर्ड बनाया.

 यहाँ तक कि हिटलर ने डिमांड रख दी थी कि उसे एक हेंडशेक के लिए “द बॉय विथ द फ़ास्ट फिनिश” से मिलना है.

 1936 के ओलंपिक्स के एंड में बर्लिन में एक बड़ा ही डिफरेंट माहौल बन रहा था.

 ओलिंपिक विलेज मिलिट्री बैरेक्स में बदला जा रहा था और पूरी सिटी में हर जगह एंटी- सेमिटिक साइन्स देखे जा सकते थे.

 लुइ ने बर्लिन से एक नाज़ी फ्लैग चुरा लिया और अपने साथ टोरेंस ले आया, हालाँकि उस टाइम उसे पता नहीं था कि आने वाले टाइम में इस फ्लेग का सिम्बल उसकी लाइफ और अमेरिका में क्या टर्न लाने वाला है.

 टोक्यो ओलिंपिक 1940 में 1500 मीटर की रेस की ड्रीम के साथ लुइ कैलीफोर्निया लौट आया.

 यूनिवरसिटी ऑफ़ साउथर्न् कैलीफोर्निया में एडमिशन लेने के बाद लुइ ने काफी हार्ड ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी.

 इस दौरान वो अपनी ट्रेक टीम के काफी क्लोज आ गया था.

 इनमे से एक मिस्ट्रीरियस सा जापानीज़ भी था जिसे लोग ससाकी या जिमी के नाम से बुलाते थे.

 जिमी खुद को इवी लीग एजुकेशन (Ivy League education ) का स्टूडेंट बोलता था.

 हालाँकि लुइ को जल्दी ही उसका ये झूठ पता चल गया लेकिन उसने झूठ क्यों बोला, ये बात वो कभी नहीं समझ सका.

 लुइ अब डे बाई डे बैटर बैटर परफोर्म कर रहा था.

 बेहद टफ कॉम्पटीशन और इंजरीज (injuries ) के बावजूद उसने एनसीएए चैपियनशिप (NCAA championship) जीत ली थी और एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो 15 सालो तक कोई तोड़ ना सका.

 फिर जल्दी ही वर्ल्ड वॉर II स्टार्ट हो गयी.

 जापानीज गवर्नमेंट चाइना पर कण्ट्रोल करने की तैयारी कर रही थी.

 अप्रैल 1940 में, जापान के चाइना को हारने के दो साल बाद हिटलर ने पोलैंड को अपने कब्ज़े में ले लिया था.

 हिटलर की आर्मी का पूरा योरप में टेरर फैला हुआ था.

 सोवियत यूनियन ने हेलसिंकीHelsinki) के ओलिंपिक स्टेडियम को बोम्ब से उड़ा दिया जिसकी वजह से 1940 के ओलंपिक्स कैंसिल करने पड़े.

 इन सारे इवेंट्स का लुइ की हेल्थ पर काफी डीप इफेक्ट पड़ा.

 वो अक्सर बीमार रहने लगा था.

 फिर उसने एक वेल्डर (welder) की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी.

 कांग्रेस ने ड्राफ्ट पास किया और लुइ ने अपना नाम एयर कोर्प्स में लिखवा लिया था.

 लेकिन उसे फ्लाईंग बिलकुल भी पसंद नहीं थी इसलिए उसने ये जॉब भी छोड़ दी और मूवी में काम करने लगा जहाँ उसे एक्स्ट्रा रोल मिलते थे.

 हालाँकि कुछ ड्राफ्ट्स के बाद ही उसे एयरफ़ोर्स में बोमबार्डर की जॉब मिल गयी.

 फिर एक दिन ऍफ़बीआई (FBI) को पता लगा कि जिम्मी उर्फ़ सासकी असल में एक जापानीज नेवी का एक स्पाई यानी जासूस था जिसे कैलीफोर्निया में जासूसी करने और पैसे जमा करने के लिए भेजा गया था.

 इस बात के खुलासे के बाद पूरी दुनिया में पर्ल हार्बर (Pearl Harbor) पर अटैक की खबर फ़ैल गयी थी.

 लुइ और पीट ने भी ये न्यूज़ सुनी जिससे दोनों बेहद डर गए थे. लुइ ने एयरफ़ोर्स के बोम्बार्डयर (bombardier) के तौर पर ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी.

 अब वो एक क्रू का मेम्बर था जो “द फ्लाइंग कॉफिन” के निकनेम से मशहूर एक एयरप्लेन चलाते थे..

 फिर जल्द ही लुइ ने आर्मी फ्लाइंग स्कूल की ग्रेजुएशन कम्प्लीट की जिसके बाद उसे सेकंड लेफ्टिनेंट (second lieutenant) की पोस्ट मिली.

 उसकी दोस्ती रसेल एलेन फिलिप्स (Russell Allen Phillips) से हुई जो काफी हद तक पीट जैसा लगता था.

 2 नम्बर 1942 में लुइ, फिल और बाकी क्रू मेंबर एक प्लेन बी- 24 में बैठकर वॉर के लिए निकले.

 ये लोग हिकम फील्ड, हवाई (Hickam Field in Hawaii) में स्टेशन्ड थे.

 हालाँकि लुइ वॉर में नहीं जाना चाहता था लेकिन एयरफ़ोर्स में उसकी सर्विस एक तरह से उसके काम आई थी.

 उसकी ट्रेनिंग डिफिकल्ट थी, लेकिन उसके साथ ऐसे लोग थे जो उसे सिर्फ सक्सेसफुल ही नहीं बल्कि उसे अपना बेस्ट करते हुए भी देखना चाहते थे.

 आर्मी बैरक की लाइफ इतनी ईजी नहीं होती, और लुइ खुद को बेस्ट मिलिट्री मेन बनाने के लिए काफी स्ट्रगल कर रहा था.

 उसके साथ डोरमेट्री में 15 और ऑफिसर भी रहते थे.

 उनके बीच वाटर फाईट होती, सब खूब बियर पीते थे, मिलकर पोकर खेलते और मूवीज देखने भी जाते, कुल मिलाकर लाइफ काफी कूल लग रही थी.

 लेकिन वे लोग ट्रेनिंग भी उतनी ही मेहनत से करते थे.

 दिसम्बर 23,1942 में लुइ और बाकी क्रू वेक आटोल (Wake Atoll) में जापानीज फोर्सेस पर बोम्बिंग करने गए.

 हालाँकि उनका मिशन सक्सेसफुल रहा लेकिन प्लेन की गैस खत्म हो गयी थी. एयरफ़ोर्स में लुइ की ये फर्स्ट क्लोज कॉल थी.

 जनवरी 8 1943 में लुइ के दो फ्रेंड्स पर्ल हार्बर के उपर ट्रेनिंग रन के लिए गए.

 फिर न्यूज़ आई कि प्लेन क्रेश हो गया और दोनों आदमी मारे गए.

 जो क्रेश में बच गए थे उन्हें शार्क ने मार डाला था.

 टोटल 10 लोग मर गए थे. इस खबर ने लुइ को बुरी तरह हिला डाला था.

 उसे एयरफ़ोर्स में आये अभी टू मंथ्स ही हुए थे और उसके कितने ही फ्रेंड्स अब तक मर चुके थे.

 लुइ को रियेलाइज हो गया था कि आर्मी की लाइफ बड़ी अनसर्टेन होती है, वो डेथ के बारे में बात नहीं करता था ताकि उसकी स्ट्रेंग्थ और विल पॉवर बनी रहे.

 म्यूजिक और अल्कोहल में वो अपना अकेलापन और दर्द भुलाने की कोशिश करता था.

 एक वो ही नहीं पूरा अमेरिका दर्द और तकलीफ से जूझ रहा था.

 लुइ ऐसे कई सारे मिशन्स में गया जिनमे से एक बार उसके प्लेन में 594 बुलेट होल्स आये थे.

 लेकिन हर बार उसकी स्ट्रेंग्थ और रेसिलिएंस (resilience) उसे बचा लेती थी.

 इस इंसिडेंट के बाद जापानीज प्लेन्स ने नॉरू (Nauru) की बोम्बिंग का बदला लेने के लिए आईलैंड ऑफ़ फुनाफूटी (island of Funafuti) पर बोम्बार्डिंग कर दी थी.

 काफी लोग मारे गए लेकिन एक बार फिर लुइ किसी तरह बच निकला.

 27 मई को लुइ, फिल और बाकी क्रू मेंबर पेसिफिक ओसीन की तरफ गए जहाँ उन्हें एक दिन पहले लापता हुए एक प्लेन को रेस्क्यू करना था.

 दोपहर के टाइम उनके प्लेन “द ग्रीन होर्नेट” में कुछ मेकेनिकल प्रोब्लम आ गयी जिसकी वजह से प्लेन ओसीन में गिर गया.

 लुइ बुरी तरह वायर्स के बीच फंस चुका था और प्लेन के मलबे के साथ ही पानी के अंदर डूबने लगा.

 प्लेन का मलबा तेज़ी से ओसीन बोटम में जा रहा था.

 लुइ ने बचने की उम्मीद छोड़ दी और बेहोश हो गया.

 लेकिन तभी जैसे एक मिराकल हुआ.

 लुइ को होश आया, वो प्लेन के मलबे से बाहर निकला और तैरता हुआ उपर आ गया.

 लुइ ज़मेरिनी की लाइफ में ये घटना किसी मिराकेल (miracle) से कम नहीं थी, उसे लाइफ में एक सेकंड चांस मिला था.

 ग्रीन होर्नेट प्लेन के बस तीन लोग ही बचे थे, लुइ, फिल और न्यू टेल गनर मैक.

 उनके पास सप्लाई काफी कम थी, दो राफ्ट्स और न्यूट्रीशन पैक्ड चोकलेट का एक पैकेट बस इतना ही था.

 तीनो राफ्ट के उपर बैठे रेस्क्यू का वेट रहे थे, खतरनाक शार्क्स उनके चारो तरफ घूम रही थी.

 जब रात हुई तो जिंदगी में पहली बार लुइ को वीकनेस फील हुई, ये शायद इमोशनल और स्प्रीचुअल टेंशन का असर था जो उसकी फिजिकल हेल्थ पर पड़ रहा था.

 वो एक ऐसे प्लेस में था जहाँ उम्मीद की कोई किरन नज़र नहीं आ रही थी.

 फिर भी लुइ बड़ी हिम्मत से एक-एक दिन काट रहा था.

 उसके दिल में कहीं ना कहीं उम्मीद की एक रौशनी थी.

 28 मई को ग्रीन होर्नेट को मिसिंग प्लेन डिक्लेयर्ड कर दिया गया.

 लुइ, फिल और मैक जिंदा रहने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे.

 दिन में जब कोई प्लेन उनके ऊपर से गुजरता तो उन्हें लगता शायद वो उन्हें ही बचाने आ रहा है लेकिन फिर उनकी उम्मीद टूट जाती.

 फिर रात को बड़े दुःख के साथ ये लोग उसी राफ्ट के उपर सो जाते थे.

 पांचवे दिन टोरेंस (Torrance) में खबर फ़ैल गयी कि लुइ ज़म्पेरिनी मर चूका है.

 लेकिन लुइ की मदर लौइसे (Louise ) को इस बात पे बिलकुल भी यकीन नहीं था.

 पेसिफिक में लुइ ने दो बार अमेरिकन वॉरप्लेन्स को स्पॉट किया लेकिन दोनों ही प्लेन्स उन्हें स्पॉट नहीं कर पाए.

 और वे कई दिनों तक तीनो राफ्ट में ऐसे ही तैरते रहे.

 उनके पास ड्रिंकिंग वाटर भी खत्म हो गया था.

 अब उनके पास पीने को कुछ भी नहीं था.

 एक रात तूफ़ान के साथ जोरो की बारिश हुई.

 बारिश का पानी पीकर उन्होंने अपनी प्यास बुझाई और खाने के लिए जो भी थोडा बहुत था वो मैक खा गया था जिसकी वजह से अब तीनो भूख से तडफ रहे थे.

 एक दिन उन्होंने एक चिड़िया पकड़ी और उसे मारकर कच्चा ही खा गए, फिर दुसरे दिन एक फिश पकड़ कर खा ली.

 इस तरह से ये लोग ओसीन में अपने दिन काट रहे थे, उन्होंने अब होप ही छोड़ दी थी कि कोई उन्हें बचाने आएगा, भूख और प्यास उनकी पनिशमेंट बन गयी थी.

 लेकिन लुइ की एथलेटिक स्ट्रेंग्थ और रेसिलिएंस (resilience) ने उसे स्टेबल बनाये रखा.

 वो अपने दोस्तों से बाते करता रहता और उनसे किसी भी सब्जेक्ट पर क्वेश्चन्स पूछता था जिससे कि उसका और उसके दोस्तों का माइंड शार्प रहे.

 27 वे दिन लुइ और उसके फ्रेंड्स ने आसमान में एक और प्लेन देखा.

 उन्हें लगा ये रेस्क्यू प्लेन है लेकिन वो जापानीज फाइटर प्लेन निकला जिसने उन पर फायर करना स्टार्ट कर दिया.

 इस अटैक में तीनो किसी तरह बच तो गए लेकिन अब उनकी रेस्क्यू की उम्मीद टूटती जा रही थी.

 उन्हें इस राफ्ट में एक महीने से ऊपर होने को आया था.

 इस दौरान मैक की मौत हो गयी और उसे वही समुन्द्र में ही दफना दिया गया.

 जुलाई 13, 1943, के दिन लुइ और फिल को फाइनली एक आईलैंड दिखा.

 लेकिन वो उस आईलैंड तक पहुँच नहीं पाए क्योंकि उसी रात समुंद्र में एक बड़ा तूफ़ान आया.

 और जब तूफ़ान थमा तो लुइ और फिल ने फिर से आईलैंड तक पहुँचने की कोशिश की.

 लेकिन जापानीज आर्मी उन्हें देख चुकी थी, उन्हें तुरंत ही अरेस्ट कर लिया गया.

 दोनों की आँखों पर पट्टी बांध कर एक प्रीजन कैम्प में ले जाया गया जो क्वाजालीन आईलैंड (Kwajalein Island) में था, जहाँ ये लोग वॉर प्रिजनर्स के तौर पर बंदी बना दिए गए थे.

 इस कैंप में लुइ और फिल ने सब कुछ सहा, बीमारी भी और अब्यूजमेंट भी.

 दोनों को स्ट्रिक्ट इन्टेरोगेशन सेशन (interrogation sessions) से गुजरना पड़ा था, उनसे खूब पूछताछ की गयी.

 उन्हें ये भी पता चला कि जो 9 मिसिंगमरीन्स (marines) थे, उन्हें यही पर एक्सीक्यूट (executed)किया गया था.

 26 अगस्त, 1943 के दिन लुइ और फिल को सारे कपडे उतरवा कर और नहला कर एक शिप में बैठा दिया गया.

 ये शिप योकोहांमा (Yokohama) जापान के प्रिजनर कैंप जा रहा था.

 उन दोनों को ओफुना: एक डिटेनेशन कैंप एंड इन्टेरोगेशन सेंटर फॉर इम्पोर्टेंट वॉर प्रिजनर्स) (Ophuna: a secret detention camp and interrogation center for important war prisoners) ले जाया गया.

 वहां लुइ और फिल के साथ 200 और प्रिजनर्स भी थे जिन्हें जापानीज़ गार्ड्स और एक ऑफिसर “द क्वेक” टॉर्चर करते थे.

 उन्हें ये आर्डर भी मिला था कि अगर अमेरिका या उनकी स्पोर्टिंग कंट्री इन्हें बचाने जापान आये तो रेस्क्यू होने से पहले ही सारे प्रिजनर्स को मार दिया जाए.

 लुइ उस टाइम हैरान रह गया जब उसने सासाकी को वहां एक इन्टेरोगेटर के तौर पे देखा.

 ओफुना कैंप के हार्श ट्रीटमेंट के बावजूद प्रिजनर्स में एक तरह की रेसिलिएंस (resilience) की फीलिंग थी.

 मार्च 1944 में फिल को स्लेव लेबर कैंप अशियो (Ashio)भेज दिया गया.

 लुइ और उसका लास्ट क्रूमेट बिछड़ गए थे.

 1944 में अमेरिकंस ने क्वाजालीन आईलैंड (Kwajalein Island) पर कब्ज़ा कर लिया, उन्हें कुछ ऐसे प्रूफ मिले जिससे पता चलता था कि लुइ और फिल जिंदा हो सकते है.

 लुइ के फादर और ब्रदर ने डिसाइड किया कि वार खत्म होते ही वे लोग लुइ की तलाश करेंगे.

 सेप्टेम्बर 30 को लुइ को ओफुना कैंप से ट्रान्सफर करके ओमोरी प्रिजनर कैंप में भेजा गया जो टोक्यो से बाहर था.

 यहाँ लुइ कारपोरल मुत्सुहीरो वाटानाबे (Corporal Mutsuhiro Watanabe) से मिला जिसका निकनेम था “द बर्ड”, और ये ओमोरी कैंप में डिसप्लिनेरी ऑफिसर था.

 यहाँ लुइ की विल पॉवर और रेस्ट्रेंट (restraint)टेस्ट होना था कि वो किस हद तक इमोशनल और फिजिकल अब्यूजमेंट बर्दाश्त कर सकता है.

 वाटानाबे (Watanabe) एक सेडिस्टिक साईंकोपेथ (sadistic psychopath) जिसने लुइ ज़म्पेरिनी की विल पॉवर को तोडना अपनी लाइफ का मिशन बना लिया था.

 उसकी कमांड में लुइ को बेशुमार मार पड़ी थी, उसे बुरी तरह टॉर्चर किया गया और जो कोई सोच भी ना सके उसे तरीके से ह्यूमिलेट किया गया.

 बर्ड ने उसे फिजिकली और साइकोलोजिकली टॉर्चर करने में कोई कसर नही छोड़ी थी.

 उसकी ओबसेशन ने लुइ की हालत ऐसी कर दी थी कि वो मौत और इन्सेनिटी के छोर पर खड़ा था.

 लेकिन वो लुइ ज़म्पेरिनी था, मौत से भी बदतर टॉर्चर सहने के बावजूद भी वो अनब्रोकन था.

 उसकी रेसिलिएंस (resilience) एक बार फिर उसके काम आई थीजहाँ वो बर्ड की दी गयी हर तकलीफ और अब्यूज को बर्दाश्त करता गया.

 ये अक्टूबर 1944 की बात थी, ओमोरी प्रिजनर्स को न्यू अमेरिकन वॉर प्लेन्स बी-29 जापान के उपर उड़ते हुए दिखाई दिए.

 पूरे जापान में जितने भी प्रिजनर्स थे, उन्हें फर्स्ट साइन दिख रहे थे कि अमेरिका ये वर्ल्ड वार जीत लेगा.

 इससे बर्ड बहुत गुस्से में आ गया था और वो कहर बनाकर प्रिजनर्स पर टूट पड़ा.

 उसने लुइ को इतना मारा कि उसके लेफ्ट कान में टेम्परेरी डीफनेस आ गयी थी.

 नवम्बर के मन्थ में लुइ को एक रेडियो ब्रोडकास्ट के लिए चूज़ किया गया जो जापान से अमेरिका के लिए था.

 लुइ ये ब्रॉडकास्ट करने के लिए एग्री हो गया क्योंकि उसे फ्रीडम थी कि वो जो चाहे वो बोल सकता है.

 फ़ाइनली ये ब्रॉडकास्ट अमेरिका पहुंचा और लुइ की फेमिली को पता चल गया कि वो जिंदा है.

 कुछ दिनो तक लुइ कम्फर्ट में रहा फिर एक दिन उसे रेडियो ब्रॉड कास्ट के लिए एक स्क्रिप्ट दी गयी जिसमे उसे अमेरिका के वॉर एफोर्ट्स को अंडरमाइन करना था.

 लुइ ने जब मना किया तो उसे वापस ओमोरी कैंप भेज दिया गया जहाँ बर्ड ने उसे वेलकम किया, एक बार फिर से उसे टॉर्चर करने के लिए.

 न्यू इयर से कुछ ही दिन पहले बर्ड का एक दुसरे प्रिजनर कैंप में ट्रांसफर हो गया.

 उसका जाना ओमोरी कैंप के प्रिजनर्स के लिए कुछ हद तक राहत थी.

 अमेरिकन बी -29 प्लेन्स अब अक्सर जापान के उपर उड़ते हुए दीखते थे.

 अमेरिका की जीत की उम्मीद बढ़ने लगी थी.

 फरवरी में टोक्यो में बोम्ब्स गिराए गए जिससे प्रिजनर्स और पूरे जापान को हिला कर रख दिया था.

 फिर उन लोगो को नावेत्सू कैंप (Naoetsu camp) भेज दिया गया जहाँ बर्ड उनका वेट कर रहा था.

 उस टेरिबल लिविंग कंडीशन में बेहिसाब टॉर्चर के साथ-साथ उनसे स्लेव लेबर भी करवाया जाता था.

 1945  में जेर्मनी की हार के बाद सबको यकीन हो गया था कि अब जापान भी वार में ज्यादा देर नहीं टिक पायेगा.

 और इसके साथ ही सबको अपनी मौत का डर सताने लगा कि कहीं जापानीज़ “किल आल” का ऑर्डर ना दे दे.

 22 अगस्त, 1945 में ये डिसाइड किया गया कि नावेत्सू कैंप (Naoetsu camp) के सभी प्रिजनर्स को मार दिया जाए.

 एक दिन बर्ड ने लुइ के सर पर एक बड़ा हैवी वूडन बीम रखवाया.

 लुइ से कहा गया कि अगर उससे ये बीम नीचे गिर गयी तो उसे गोली मार दी जायेगी.

 अपनी स्ट्रोंग विल और रेसिलिएंस (resilience) से लुइ ने बर्ड को हरा दिया और पूरे 37 मिनट तक अपने सर के उपर बीम को होल्ड करके रखा.

 इस बात से चिढकर बर्ड ने लुइ को इतने कोढ़े मारे कि वो बेहोश होकर गिर गया.

 6 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा के उपर फर्स्ट एटोमिक बोम्ब गिराया. और 20 अगस्त को, “ किल आल” से दो दिन पहले जापानीज़ गार्ड्स कैंप छोडकर भाग गए और एनाउंस हुआ कि वार खत्म हो गयी है.

 कैंप में अब सिर्फ प्रिजनर्स बचे थे, जो सेलिब्रेट कर सकते थे.

 22 अगस्त, 1945 के दिन प्रिजनर कैंप में खबर पहुंची कि जापान ने सरेंडर कर दिया है ये न्यूज़ फैलते ही बॉनफायर जलाकर सेलीब्रेशन किया गया.

 सारे प्रिजनर्स को वापस अमेरिका भेजने का अरेंजेमेंट चल रहा था, तब तक उनके लिए अमेरिकन एयर जेट्स हर कैंप के ऊपर से सप्लाईज़ ड्राप कर रहे थे.

 फाइनली 2 सेप्टेम्बर 1945 को जापान ने अपना फॉर्मल सरेंडर कर दिया और इसके तीन दिन बाद ही लुइ ने नावेत्सू (Naoetsu) कैंप छोड़ा.

 वहां से योकोहामा और योकोहामा से वे लोग अमेरिकन बेस कैंप ओकिनावा जाने के लिए एक प्लेन में बैठे.

 ओकिनावा से इन वॉर प्रिजनर्स को वापस अमेरिका भेजा जाना था.

 ओलिंपिक एथलीट लुइ ज़म्पेरिनी को देखकर बहुत से लोग हैरान थे कि वो अभी जिंदा है और घर वापस जा रहा है.

 मिड ओक्टोबर में लुइ फाइनली अपने शहर कैलीफोर्निया पहुंचा.

 जहाँ उसकी लाइफ धीरे-धीरे वापस ट्रेक पे आ रही थी.

 हालांकि वो पोस्ट ट्रौमेटिक स्ट्रेस और सफ़ोकेटिंग एन्जाईटी से गुजर रहा था लेकिन एक नार्मल लाइफ जीने की उसकी कोशिश जारी थी.

 मार्च 1946, में लुइ की मुलाकात सिंथिया एप्पलव्हाइट से हुई और उसके दो हफ्ते बाद ही एप्पलव्हाईट फेमिली की मर्जी के खिलाफ दोनों ने एंगेजमेंट कर ली.

 मई में सिंथिया लुइ से मिलने कैलीफोर्निया आई और दोनों ने शादी कर ली.

 इसी दौरान जापान में बर्ड को वार क्रिमिनल डिक्लेयर किया गया जो ऑथोरिटी की नॉलेज के बिना ये सब एक्टिविटीज करंता आ रहा था.

 लुइ को अक्सर फ्लैशबैक आते थे और वो नाईटमेयर्स, और एन्जाईटी जैसी प्रॉब्लम सफर कर रहा था.

 फिर उसने शराब का सहारा लिया और एल्कोहोलिक बन गया.

 उसने फिर से रेसिंग की तरफ ध्यान देना शुरू कर दिया था लेकिन एक इंजरी की वजह से उसके रेसिंग करियर पर फुल स्टॉप लग गया.

 अब उसने बर्ड को मारने का एम बना लिया था.

 बर्ड की तलाश में उसने पूरा जापान छान मारा था.

 सासकी और उसके जैसे कई सारे वॉर क्रिमिनल्स पकडे गए थे.

 1946  में बर्ड ऑथोरिटी से बचकर अपनी फेमिली से मिलने टोक्यो पहुंचा.

 ऑथोरिटी को एक पहाड़ी में एक डेड बॉडी मिली जिसे उन्होंने बर्ड समझ लिया था.

 और वो जापान में डेड डिक्लेयर कर दिया गया.

 लुइ और सिंथिया की मैरीड लाइफ की प्रॉब्लम्स अभी खत्म नहीं हुई थी.

 लुइ ने कुछ इन्वेस्टमेंट किये जो फ्लॉप रहे थे.

 उसका अपनी लाइफ पर कोई कण्ट्रोल नहीं रह गया था.

 वो कहीं भी जॉब में टिक नहीं पाता था.

 अपनी इमोशनल फुलफिल्मेंट के लिए वो शराब की तरफ झुकता चला गया.

 जब सिंथिया प्रेग्नेंट थी तो एक बार आधी रात को उठकर वो उसका गला दबाने लगा.

 सपने की हालत में उसने सिंथिया को बर्ड समझ लिया था.

 जल्दी ही सिंथिया ने डिसाइड कर लिया कि वो अब और लुइ के साथ नहीं रह सकती इसलिए उसे डिवोर्स चाहिए.

 ऐसा लग रहा था कि अपनी लाइफ के इस पॉइंट पे आकर लुइ ने हर उम्मीद छोड़ दी है.

 जैसे कि लुइ फाइनली अब ज़म्पेरिनी इर्रडीमेबल (irredeemable) हो गया है.

 बर्ड मन्थ में एक बार छुपकर अपनी मदर से मिलने आता था.

 1949 में लोस एंजेलस में सिंथिया ने महान बिली ग्रैहम का रीवाईवाल अटेंड किया जिसने उसकी पर्सनेलिटी ही बदल कर रख दी थी.

 अब वो एक डिफरेंट औरत थी. उसने डिसाइड किया कि वो अब लुइ को डिवोर्स नहीं देगी और उसे भी बिली ग्रैहम के पास भेजेगी.

 लेकिन लुइ नहीं मानता था, वो कभी-कभी मिड सर्विस में ही चर्च से चला जाता था.

 लेकिन एक रात बिली ग्रैहम की स्पीच सुनने के बाद लुइ क्रिस्चियन बन गया. फाइनली उसे थोड़ी शांति मिल रही थी.

 उसने अपनी लाइफ और मैरिड लाइफ को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की. और अपने टोरमेंटर्स से मिलने 1950 में जापान गया.

 उसने प्रोमिस किया था कि वो अपनी लाइफ गॉड के नाम कर देगा और पूरी लाइफ क्रिस्चियन सर्विस करेगा.

 उसने अपना प्रोमिस निभाया एक मोटीवेशनल और इन्स्प्रीरेशनल (inspirational) स्पीकर के तौर पे उसने वर्ल्ड टूर किया और फाइव गेम्स से पहले ओलिंपिक टोर्च भी पकड़ी.

 1952 में बर्ड अपनी हाइडिंग से बाहर निकला जब वॉर क्रिमिनल्स को सजा में छूट दी गयी.

 उसकी शादी हुई, बच्चे हुए और इंश्योरेंस कम्पनी में जॉब करके उसने खूब पैसा कमाया.

 लुइ जब टोक्यो में था तो उसने बर्ड से मिलने की कोशिश की लेकिन बर्ड ने मिलने से मना कर दिया.

 अप्रैल 2003 में बर्ड की मौत हो गयी.

 1998 में लुइ को टोक्यो ओलंपिक्स में एक फाइनल रेस करनी थी जहाँ उसने एक ऐसे जापान की ओलिंपिक टोर्च पकड़ी थी जो ब्यूटी, लाफ्टर, पीस और जॉय से भरा था.

 लुइ की रेसिलिएंस और स्ट्रेंग्थ ने उसे ना सिर्फ वॉर में जीतना सिखाया बल्कि लाइफ में भी.


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