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How We Got to Now Book Summary in Hindi - किस तरह से दुनिया की हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई है

  Rocktim Borua       रविवार

How We Got to Now: Six Innovations That Made the Modern World by Steven Johnson Book Summary in Hindi - किस तरह से दुनिया की हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई है


How We Got to Now Book Summary in Hindi - किस तरह से दुनिया की हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई है


Howdy Dude,  हाउ वी गाट टू नाव (How We Got to Now) में हम देखेंगे कि किस तरह से हम आज इस नए जमाने तक पहुंचे हैं। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से एक घटना ने दूसरी घटना को जन्म दिया और दूसरी घटना ने तीसरी घटना को जिस वजह से आज हम यहाँ तक पहुंच पाए हैं। इस किताब की मदद से हम यह जानेंगे कि किस तरह से यहाँ पर सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।


यह समरी कौन कौन पढ़ सकता है


-वे जो यह जानना चाहते हैं कि आज का जमाने का जन्म किस तरह से हुआ था।

-वे जो यह जानना चाहते हैं कि दुनिया की हर चीज़ किस तरह से एक दूसरे से जुड़ी हुई है।

-वे जो इतिहास में हुई घटनाओं के असर के बारे में जानना चाहते हैं।


स्टीवेन जानसन (Steven Johnson) अमेरिका के एक प्रसिद्ध लेखक हैं जो कि ज्यादातर साइंस के टापिक पर लिखा करते हैं। वे एक मीडिया थियोरिस्ट भी हैं। वे वाशिंगटन डीसी में अपनी पत्नी और 3 बच्चों के साथ रहते हैं।


आपको यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए ?


 मिस्टर नोबडी नाम की एक मूवी में एक व्यक्ति अपनी गर्लफ्रेंड का नंबर लेता है। लेकिन उस नंबर पर बारिश की बूंद गिर जाती है जिससे वो उसे फोन नहीं कर पाता। यह बूंद किसी दूसरे देश में बैठे इंसान के बर्तन से भाप बनकर हवा में गई थी जो कि उसके फोन नंबर पर गिरी। वो व्यक्ति एक जीन्स की फैक्टरी में काम कर रहा था और उस दिन उसका काम पर जाने का मन नहीं था। इसलिए वो घर पर बैठ कर अंडे उबाल रहा था। उससे निकला हुआ भाप बादल बना और वो उसके फोन नंबर पर जाकर गिरा, जिससे वो व्यक्ति अपनी गर्लफ्रेंड को फोन नहीं कर पाया और उसकी गर्लफ्रेंड को लगा कि वो उससे बात नहीं करना चाहता।

 तो क्या आपने अब से पहले कभी यह सोचा था कि अगर एक व्यक्ति हमारे देश में काम पर जाने का फैसला ना करे, तो उससे चाइना में किसी का ब्रेक अप हो सकता है? यह बात सुनने में बहुत अजीब लगती है और यह किताब हमें इसी तरह की बहुत अजीब लेकिन सच बातें बताती है। यह किताब हमें बताती है कि किस तरह से हम आज यहां तक पहुंचे और कैसे हर एक घटना दूसरी घटना से जुड़ी हुई है।


इस समरी को पढ़कर आप क्या सीखेंगे


-किस तरह से दुनिया की हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई है।

-एक जमी हुई मछली ने किस तरह से फैमिली प्लानिंग को संभव बनाया।

-किस तरह से एक खोज से दूसरी खोज जन्म देती है।


हमारी दुनिया के हर एक जीव का इवेल्यूशन किसी दूसरे जीव की वजह से हुआ है।


आपको बाहर से देखने में लगता होगा कि सारे जानवर किसी भी तरह से एक दूसरे से जुड़े हुए नहीं हैं। लेकिन असल में हम सभी जानवर जुड़े हुए हैं। हर एक जीव का इवोल्यूशन किसी दूसरे जीव की वजह से हुआ है। इसे कोड़वोल्यूशन कहा जाता है। इवोल्यूशन एक ऐसी प्रक्रिया है जहां पर एक जीव किसी दूसरे कमजोर जीव को खा कर जन्म लेता है। लेकिन कोइवोल्यूशन में एक जीव में कुछ बदलाव होते हैं जिससे कोई दूसरा जीव फायदा पाता है। अब से लगभग 14 करोड़ साल पहले फूलों में खुशबू और रंग पैदा होने लगे जिससे वे कीड़ों को आकर्षित करते थे। ये कीड़े जब फूलों का रस पीने के लिए आते थे तो फूलों के बीए उनसे चिपक जाते थे जिससे वो फूल दूसरे फूलों से मेट कर के बीज पैदा करते थे। इस तरह से फूल कीड़ों की मदद से अपने बीज बना लिया करते थे और कीड़ों को खाना मिल जाया करता था।

 इस तरह से कीड़े और फूल एक दूसरे पर निर्भर रहने लगे। इस वजह से हमिंगबर्ड का पंख विकसित हुआ था। हमिंगबर्ड नाम का पंछी भी फूलों की तरफ आकर्षित
होता था, लेकिन उन फूलों के रस को पीने के लिए उसे मधुमक्खियों की तरह हवा में उड़ते रहने की जरुरत थी। शुरुआत में वे ऐसा नहीं कर पाते थे लेकिन समय के साथ उनके पंख विकसित हुए और वो कुछ इस तरह के बन गए जिससे वे मधुमक्खियों की तरह हवा में उड़ते हुए फूलों का रस पी सकते हैं। तो इस तरह से फूलों से कीड़ों का और हमिंगबर्ड का विकास हुआ था। इन सबका जन्म एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।


अगर हम लम्बे समय के इतिहास को देखें तो हम यह पता नहीं कर पाएंगे कि किस तरह से वे सारे बदलाव आए हैं।


 इतिहास को जानना इतना भी आसान काम नहीं है। कभी-कभी इसे जानने के लिए हमें बहुत दूर तक देखना पड़ता है और उसमें होने वाली बहुत सी घटनाओं के बारे में हम पता नहीं लगा पाते। एकज़ाम्पल के लिए शायद आप ने बटरफ्लाइ एफेक्ट का नाम सुना होगा। इसमें यह कहा जाता है कि अगर इतिहास में जाकर एक तितली के पंख हिलाने के तरीके को हल्का सा बदल दें, तो उससे बहुत सारी घटनाओं की एक कतार लग जाएगी जिससे धरती पर किसी दूसरी जगह पर बवंडर आ सकता है। यानी कि इतिहास में होने वाले एक छोटे से बदलाव का असर भविष्य पर इतना ज्यादा पड़ता है कि उससे तबाही आ सकती है।

लेकिन हम यह बता नहीं सकते कि यह कैसे होगा। यह बात तो साफ है कि एक घटना को बदलने से भविष्य में बहुत से बदलाव आ सकते हैं, लेकिन वो बदलाव किस
तरह से आएंगे हम यह नहीं पता सकते। इसे लाँग जूम व्यू कहा जाता है। लेकिन कुछ बातों का पता हम लगा सकते हैं। एक छोटे से बदलाव के क्या क्या नतीजे हो सकते हैं यह हम पता लगा सकते हैं।

 एक्जाम्पल के लिए गूगल को ले लीजिए। जब गूगल ने अपना सर्च इंजन निकाला, तो बहुत से लोग उसे इस्तेमाल करने लगे। ज्यादा लोगों के होने की वजह से गूगल ने अपने बिजनेस माडल में बदलाव किया और दूसरी कंपनियों के ऐड उन लोगों को दिखाने शुरू किए। यहाँ पर गूगल ने अपने बिजनेस माडल में एक छोटा सा बदलाव किया। लेकिन इसका असर दुनिया भर की ऐड एजेंसी पर देखने को मिला। उनका प्राफिट कम होने लगा। साथ ही कंपनियों के काम करने के तरीकों में बदलाव आने लगा। लोग अपनी कंपनी के लिए वेबसाइट बनाने लगे। इसके लिए नई नौकरियां बनने लगी। उन नौकरियों की जानकारी देने के लिए नए स्कूल और कालेज बनने लगे। इस तरह से गूगल के किए गए एक छोटे से बदलाव ने पूरी दुनिया पर असर डाला।

 इस केस में हम यह दिखा सकते हैं कि इतने बड़े बदलाव किस छोटे से काम से जुड़े हैं। लेकिन ज्यादातर हालातों में यह पता कर पाना मुश्किल होता है कि अगर आप आज घर पर खाना ना खा कर बाहर खाना खा लेंगे तो उससे किस तरह से आने वाले वक्त में दुनिया बदल जाएगी।


एक इनोवेशन से दूसरा इनोवेशन कुछ इस तरीके से जन्म ले सकता है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।


क्या आपको पता है कि एक जमी हुई मछली की वजह से फैमिली प्लैनिंग संभव हो सका था? यह बात सुनने में जितनी अजीब है असल में उतनी ही सच भी है। क्लरेंस बर्ड्सआइ नाम का एक व्यक्ति कैनेडा की बर्फ भरी जगहों पर मछली पकड़ रहा था। वहाँ का तापमान इतना कम था कि वो जैसे ही मछली को पानी से बाहर निकालता, वो मछली जम जाती थी। जब उस मछली को वो घर पर ले जाकर खाता था तो उसे वो मछली खाने में बहुत ताज़ा लगती थी। इस तरह से उसके दिमाग में फ्लैश फ्रीजिंग का आइडिया आया। इसके बाद उसने एक ऐसी टेक्नोलॉजी बनाई जिसमें खाने को जमा कर उसे काफी समय तक ताजा रखा जा सकता
था। इससे मीट और फलों को दूर तक ले जाया जाने लगा। लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल इंसान के स्पर्म और ओवम को स्टोर करने के लिए भी किया जाने लगा। इस प्रक्रिया को ओसाइट क्रायोप्रीसर्वेशन का नाम दिया गया। ओसाइट क्रायोप्रीसर्वेशन की मदद से हम इंसान के सेहतमंद स्पर्म को और सेहतमंद ओवम को स्टोर कर पाते थे जिससे उन लोगों को भी बच्चे पैदा करने की सुविधा मिलती थी जो होमोसेक्शुअल हैं या फिर एक सिंगल पैरेंट हैं। स्पर्म और एण बैंक्स का जन्म कुछ इसी तरह से शुरु हुआ।

 तो अगर क्लरेंस ने उस दिन उस मछली को देखकर फ्लैश फ्रीज की टेक्नोलॉजी न बनाई होती, तो आज फैमिली प्लैनिंग कुछ इस तरह से नहीं हो पाती। इस तरह से एक इनोवेशन दूसरे इनोवेशन से कुछ इस तरह से जुड़ा हुआ है कि हम उसका पता भी नहीं लगा सकते।


कुछ छोटी-छोटी चीजों से समाज में बहुत भारी बदलाव आ सकता है।


 शायद अब आप यह सोच रहे होंगे कि क्या बिना जमी हुई मछली के भी हम स्पर्म और एएस को स्टोर करने की तकनीक को खोज सकते थे? इसका जवाब यह है कि
कुछ चीज़ों की खोज से कुछ दूसरी चीजें पनपती हैं, लेकिन उनके बीच में कोई सीधा संबंध नहीं होता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनके बीच में संबंध ही नहीं होता। हम 14वीं और 17वीं शताब्दी के समय को रिनाइसेंस का समय कहते हैं। यह वो वक्त था जब लोगों की मानसिकता में बहुत से बदलाव आए। यह वो वक्त था जब इंसान ने खुद के अंदर झाँक कर खुद को जानने की कोशिश थी। इसकी शुरुआत हुई थी शीशे से। शीशे की खोज 1400 के बाद हुई थी। इससे पहले लोग
खुद को नहीं देख पाते थे और आर्टिस्ट लोगों का चित्र बनाया करते थे। लेकिन लोगों के दिमाग में उनका चित्र नहीं था। जब शीशा बना, तो हर कोई खुद को देख पाता
था और कलाकार भी शीशे की मदद से लोगों का चित्र बेहतर तरीके से बनाने में काबिल बन पाए। इसके साथ ही इस समय नावेल्स का जन्म हुआ जिन्हें कुछ इस तरह से लिखा जाता था कि पढ़ने वाले को लगता था कहानी का मुख्य पात्र खुद उन्हें अपनी कहानी सुना रहा है। इन कहानियों को पढ़ने के बाद लोग खुद के विचारों पर
और अपनी जिन्दगी पर सवाल किया करते थे। वे खुद को उस कहानी के हीरो की तरह देखना शुरू करते थे और जाने अनजाने में उसकी तरह काम भी किया करते थे। लेकिन इस शीशे और नावेल्स ने हमारे समाज को किस तरह से बदला ?

 हम पक्के तौर पर तो नहीं कह सकते, लेकिन इन चीजों की वजह से ही एक व्यक्ति ने खुद को समाज के एक अंग की तरह देखना छोड़कर खुद को एक अलग इंसान की तरह देखना शुरू किया। जब वे खुद को देख पाते थे, तो वे खुद के अंदर भी देखना शुरू करते थे। उनके दिमाग में उनकी एक अलग पहचान बननी शुरू हुई। इस तरह से नए जमाने के यूरोप का जन्म हुआ। अब हम यह सीधे सीधे तो नहीं कह सकते कि शीशे ने नए जमाने को जन्म दिया। लेकिन इसने उन आइडियाज़ को जन्म दिया जिन पर आज का समाज आधारित है।


फोटोग्राफी के जन्म की वजह से हम दुनिया एक हिस्से को दूसरे हिस्से से वाकिफ करा पाए।


 अंधेरे में उजाले की जरुरत हमें हमेशा से थी। जब मोमबत्ती की खोज हुई तो इसकी माँग लोगों में बहुत तेजी से बढ़ने लगी। लेकिन उस समय मोमबत्ती स्पर्मसेटी नाम की चीज़ से बनाया जाता था जो कि स्पर्म व्हेल की खोपड़ी में पाया जाता था। स्पर्म व्हेल का शिकार करना बहुत खतरनाक काम था और इसलिए मोमबत्ती उस समय बहुत महंगी मिलती थी। लेकिन इसकी माँग बहुत ज्यादा थी जिस वजह से स्पर्म व्हेल का शिकार इतना ज्यादा होने लगा कि उनके खत्म होने की नौबत आ गई थी। बाद में बल्ब के बन जाने से सिर्फ व्हेल ही नहीं बचे बल्कि लोगों में लिटरेसी रेट्स भी बढ़ गए क्योंकि वे अब ज्यादा पढ़ पा रहे थे। इसके बाद जब हम रोशनी को बनाना सीख गए तो इससे समाज सुधार के बहुत से काम होने लगे।

 चार्ल्स स्मिथ नाम के एक एस्ट्रोनामर और इनोवेटर ने 1800 की सदी में गीज़ा के पिरामिड पर फोटोग्राफी का इस्तेमाल किया था। राजा के अंधेरे कमरे की फोटो लेने के लिए उन्होंने मैग्नेशियम और बारूद का इस्तेमाल किया था और कमरे में रोशनी की थी। इसका नाम फ्लैस फोटोग्राफी रखा गया था। इसके बाद जैकाब रिस नाम के एक पत्रकार ने फ्लैश फोटोग्राफी के बारे में जाना और उसने न्यू यॉर्क के फाइफ पाइंट्स नेबरहुड में रहने वाले लोगों की बद से बदतर हालात की फोटो खींच कर दुनिया के सामने लाने का काम किया। उसने पहले ही यहाँ के बारे में बहुत सी बातें लिखी थीं, लेकिन यहाँ की अंधेरी गलियों की फोटो खींच पाना उसके लिए संभव नहीं था। फ्लैश फोटोग्राफी के जरिए यह संभव हो सका। जब यह फोटो लोगों तक पहुँची, तो वे सरकार के ऊपर भड़क गए। इसके दो साल के बाद न्यूयॉर्क स्टेट टेनेमेंट हाउस एक्ट को पास कर दिया गया जिससे वहाँ के गरीब लोगों की बुरी हालत में सुधार आया। इस तरह से एक फ्लैश फोटोग्राफी की खोज की वजह से समाज सुधार का काम संभव हो सका था।


कभी-कभी नेक इरादे से की गई खोज का नतीजा बहुत बुरा होता है।


 पिछले सबक में हमने देखा कि किस तरह से एक खोज की मदद से समाज में सुधार का काम हो सकता है। लेकिन कभी-कभी अच्छे इरादे से की गई खोज का समाज पर बहुत बुरा असर पड़ता है। टाईटैनिक के डूब जाने की खबर सुनने के बाद रेगिनैल्ड फेसेनडेन ने सोचा कि वे कुछ ऐसा बनाएंगे जिससे जहाज समुद्र में किसी चीज़ से ना टकराए। इसके बाद उन्होंने सोनार नाम की एक डिवाइस बनाई जो कि आवाज की तरंगें निकालती थी। यह तरंगें जब किसी चीज़ से टकराती थी तो वो लौट कर वापस आती थीं। इस तरह से अगर सामने कुछ है तो उसका पता हमें दूर से ही चल जाता था जिससे हम अपनी जहाज का रुख पहले ही मोड़ लेते थे।

 इसके अलावा इसका इस्तेमाल समुद्र की गहराई को नापने के लिए और समुद्र में डूबी हुई चीजों की खोज करने के लिए भी किया जाता था। लेकिन बाद में इसका बहुत खतरनाक असर पड़ा। सोनार में जिस तकनीक का इस्तेमाल हुआ था, उसी का इस्तेमाल अल्ट्रासाउंड को बनाने में किया जाने लगा। इसकी मदद से हम पेट में पल रहे बच्चे का जेंडर पता कर कर उसके पैदा होने से पहले बता सकते थे कि वो एक लड़का है या लड़की। इसका इस्तेमाल चाइना और इंडिया में किया जाने लगा
जहां के लोग चाहते हैं कि उनके यहाँ बेटा पैदा हो। इस वजह से जब लोग यह देखते थे कि उन्हें बेटी पैदा होने वाली है तो वे अबार्शन करा लिया करते थे। चाइना में 1980 के दशक में इस टेक्नोलॉजी को बैन कर दिया गया था। लेकिन आज भी भारत और चाइना का सेक्स रेशियो बैलेंस में नहीं है। इस तरह से नेक इरादे से की गई खोज का गलत असर भी हमारे समाज पर पड़ सकता है।


एडा लवलेस ने दुनिया का सबसे पहला साफ्टवेयर बनाया था।


 अक्सर आप सुनते होंगे कि किस तरह से एक वैज्ञानिक समाज की सोच के खिलाफ जाकर कुछ काम करता है और कामयाब होता है। लेकिन कभी-कभी वैज्ञानिकों के परिवार से उन्हें काम करने के लिए बहुत सहारा मिलता है जिससे वे कामयाब होते हैं। साथ ही कभी कभी हम इन खोजों की कहानी पूरी तरह से नहीं जानते।

 एक्ज़ाम्पल के लिए बहुत से लोगों को लगता है थामस अल्वा एडिशन ने अकेले बल्ब बनाया था। उन्होंने बहुत सारे दूसरे इंवेंटर्स के साथ मिलकर काम किया था और देश भर के 20 दूसरे लोगों की मदद भी ली दी। उनके अलावा उन्हीं के समय में बहुत से दूसरे लोग भी थे जो बल्ब बनाने पर काम कर रहे थे, लेकिन वे उनसे पहले ना बना पाए। वे उसके प्रोटोटाइप पर काम कर रहे थे। इससे हमें कुछ बातें पता लगती है। दुनिया भर के लोग उस समय उनके साथ बल्ब बनाने पर काम कर रहे थे।
साथ ही, बहुत से लोगों के पास उस समय उसे बनाने की जानकारी थी। तो इसके हिसाब से बल्ब बनाने का काम उस समय नया तो था, लेकिन उसमें कोई बड़ी बात नहीं थी, क्योंकि लोगों के पास उसे बनाने के लिए पहले से ही बहुत जानकारी थी। लेकिन अगर हम कहें कि 19वीं सदी में दुनिया का सबसे पहला साफ्टवेयर बनाया गया था तो इसपर आपको हैरानी होनी चाहिए। उस समय कंप्यूटर नाम की चीज़ का किसी ने नाम भी नहीं सुना था। लेकिन एडा लवलेस ने 1842 में पहला कंप्यूटर एल्गोरिथ्म लिखा था।

 लवलेस लार्ड बाइरान नाम के एक व्यक्ति की बेटी थीं। लार्ड बाइरान एक बहुत ही क्रीएटिव व्यक्ति थे जो कि आगे चलकर पागल हो गए थे। एडा की माँ ने कहा कि वे मैथ्स की पढ़ाई करें, ताकि वे अपने पिता की तरह पागल ना हों। इसके बाद लवलेस ने चार्ल्स बैबेज की मदद की जिससे वे पहला कंप्यूटर बना पाए। चार्ल्स बैबेज को फादर आफ कंप्यूटर कहा जाता है। उनके इस प्रोजेक्ट के साथ ही दुनिया का सबसे पहला साफ्टवेयर पब्लिश हुआ था। यहाँ पर लवलेस के पिता आर्ट्स में दिलचस्पी रखते थे और बहुत ज्यादा सोचने की वजह से पागल हो गए। इसलिए उनकी मां ने उन्हें हमेशा मैथ्स पर ध्यान देने के लिए कहा। उनकी परवरिश कुछ इस तरह से हुई थी कि वे इस तरह का काम करने के काबिल बन पाईं। उनके परिवार के माहौल की वजह से वे इस तरह की जानकारी को सबके सामने लेकर आ पाई।


Conclusion


 कोइवोल्यूशन की वजह से एक जीव में होने वाले बदलाव से दूसरा जीव विकासित हुआ और उससे तीसरा जीव। इस तरह से छोटे छोटे बदलाव भविष्य में बहुत बड़े बदलाव लेकर आते हैं। साथ ही एक इनोवेशन से दूसरा इनोवेशन पनपता है। कभी कभी यह डाइरेक्ट नहीं होता, लेकिन इसका असर कहीं न कहीं हमें देखने को जरूर मिलता है। इस तरह से यहाँ पर सब कुछ एक दूसरे से जुड़ा हुआ है।


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 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह बुक समरी कैसा लगा और इस बुक समरी से आपको क्या सीखने को मिला, मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस समरी को अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें।


आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.
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Thanks for reading How We Got to Now Book Summary in Hindi - किस तरह से दुनिया की हर चीज़ एक दूसरे से जुड़ी हुई है

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