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Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति - भरोसा किस पर करें और किस पर नहीं

  Rocktim Borua       रविवार

Chanakya Niti in Hindi - देख परख कर भरोसा करें


Chanakya Niti in Hindi


नखीनां च नदीनां च श्रृंगीणां शस्त्रपाणिनाम् ।
विश्वासो नैव कर्तव्यः स्त्रीषु राजकुलेषु च ||

 आचार्य चाणक्य यहां विश्वसनीयता के लक्षणों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि लम्बे नाखूनवाले हिंसक पशुओं, नदियों, बड़े-बड़े सींगवाले पशुओं, शस्त्रधारियों, स्त्रियों और राज-परिवारों का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि ये कब घात कर दें, चोट पहुंचा दें कोई भरोसा नहीं।

 जैसे लम्बे नाखूनवाले सिंह, भालू अथवा बाघ आदि पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि उनके सम्बन्ध में आप इस बात के लिए आश्वस्त नहीं हो सकते कि वे आप पर आक्रमण नहीं करेंगे। हिंसक पशु तो स्वभाव से ही आक्रामक प्रवृत्ति के होते हैं, इसलिए उन पर विश्वास करनेवाला व्यक्ति सदा धोखा खाता है।

 ऐसे ही यदि आप कोई नदी पार करना चाहते हैं तो आपको किसी व्यक्ति के यह कहने पर भरोसा नहीं करना चाहिए कि नदी का प्रवाह अथवा गहराई कितनी है, क्योंकि नदी के प्रवाह और उसकी गहराई के सम्बन्ध में कोई निश्चित धारणा कभी नहीं बताई जा सकती। इसलिए आप यदि नदी में उतरते हैं तो आपका सावधान रहना आवश्यक है और स्वयं के विवेक का प्रयोग करना चाहिए।

 इसी प्रकार आचार्य चाणक्य का कहना है कि सींगवाले पशुओं तथा शस्त्रधारी व्यक्ति का भी विश्वास नहीं किया जा सकता। क्योंकि न जाने वे कब स्वार्थवश आपका अहित कर बैठे या अपने जुनून में आक्रमण कर दें।

 इसी प्रकार स्त्रियों का भी आंख मींचकर विश्वास नहीं किया जा सकता क्योंकि क्या पता उनके मन में क्या है और वे अपने संकीर्ण सोच, प्रति ईर्ष्या-द्वेष से ग्रस्त आपको कब गलत सलाह दे बैठे या आपको गलत, अपने मनोनुकूल कार्य के लिए प्रेरित कर दें।

 आचार्य चाणक्य का स्पष्ट मत है कि बहुत-सी स्त्रियां कहती कुछ हैं और करती कुछ और हैं। वे प्रेम किसी अन्य से करती हैं तथा प्रेम का प्रदर्शन किसी अन्य से करती हैं। इसीलिए उनकी स्वामिभक्ति व पतिव्रता होने पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इसमें सावधानी बरतनी चाहिए।

 इसी प्रकार आचार्य चाणक्य राजकुल की भी चर्चा करते हैं। उनके विचार से राजनीति सदा ही परिवर्तनशील होती है। राजपरिवार के लोग सत्ता-पक्ष से जुड़े होने के कारण या सत्ता में आने (सत्ता पाने) के लोभ में कूट चालों में ग्रस्त रहते हैं, उसी के शिकार भी होते हैं उनके मित्र व शत्रु सामयिक हानि-लाभ पर निर्भर करते हैं। इस पक्ष से ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में देखें तो यह तथ्य स्पष्ट है कि राज्य-प्राप्ति के लिए पुत्र पिता की हत्या करवा देता है। उसे कारागार में डलवा देता है।

 कंस ने लोभ में पिता उग्रसेन को कारागार में डाल दिया था और अपने प्राणों को सुरक्षित रखने के भाव से बहन देवकी को पति वासुदेव सहित जेल में डाल दिया था। कृष्ण का जन्म कंस की कारावास में ही हुआ था।

 अतः चाणक्य के अनुसार इन 6 सम्बन्धों-शक्तियों पर अन्धविश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि इनकी चित्तवृत्तियाँ क्षण-प्रतिक्षण बदलती रहती हैं। यही नीति कहती है।


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