Friday

Chanakya Niti in Hindi - चाणक्य जी कहते हैं कि विवाह समान में ही शोभा देता है

  Rocktim Borua       Friday

Chanakya Niti in Hindi - विवाह समान में ही शोभा देता है


Chanakya Niti in Hindi


वरयेत्कुलजां प्राज्ञो निरूपामपि कन्यकाम्।
रूपवतीं न नीचस्य विवाहः सदृशे कुले ||

 आचार्य चाणक्य विवाह के सन्दर्भ में रूप और कुल में श्रेष्ठता कुल को देते हुए कहते हैं कि बुद्धिमान मनुष्य को चाहिए कि वह रूपवती न होने पर भी कुलीन कन्या से विवाह कर ले, किन्तु नीच कुल की कन्या यदि रूपवती तथा सुशील भी हो, तो उससे विवाह न करे क्योंकि विवाह समान कुल में ही करना चाहिए।

(विवाह के लिए वर और वधू, दोनों का घराना समान स्तर का होना चाहिए। बुद्धिमान मनुष्य को अपने समान कुल की कन्या से ही विवाह करना चाहिए। चाहे कन्या साधारण रूप-रंग की ही क्यों न हो, निम्न कुल की कन्या यदि सुन्दर और सुशील भी हो, तो उससे विवाह नहीं करना चाहिए।)

 गरुड़ पुराण में भी यह श्लोक किंचित् पाठभेद से मिलता है। उसमें भी कहा गया है कि 'समान कुलव्यसने च सख्यम्' अर्थात् मित्रता एवं विवाह समान में ही शोभा देता है। विजातीय अथवा असमान (बेमेल विवाह) में अनेक कष्ट आते हैं। अनेक समस्याएं पैदा हो जाती हैं ।

 यद्यपि मनुस्मृति में प्रतिकूल विवाह का भी विधान है लेकिन देखने में यही आता है कि असमान विवाह अनेक कारणों से असफल ही हो जाते हैं या उनका परिणाम सुखद नहीं रह पाता। इसलिए जीवन के सन्दर्भ में विवाह जैसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न को भावुकता का शिकार बनने से रोकना ही नीतिसंगत है।


और चाणक्य नीति पढ़ें -



 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह चाणक्य नीति आपको कैसा लगा मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये। और इस चाणक्य नीति को अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें।


आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.
logoblog

Thanks for reading Chanakya Niti in Hindi - चाणक्य जी कहते हैं कि विवाह समान में ही शोभा देता है

Previous
« Prev Post

No comments:

Post a Comment