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Organizing From the Inside Out Book Summary in Hindi - अपने घर, दफ्तर और अपनी जिंदगी को व्यवस्थित रखने का बेहतरीन तरीका

  Rocktim Borua       शुक्रवार
Organizing From the Inside Out Book Summary in Hindi


 ऑर्गनाइजिंग फ्रॉम दि इनसाइड आउट (1998) एक बेहतरीन पुस्तक है जो हमें बताती है कि आप अपनी जिंदगी को व्यक्तिगत और सत्तपोषणीय तरीके से कैसे व्यवस्थित कर सकते हैं। आपके दफ्तर से लेकर घर से लेकर सूटकेस तक, इस पुस्तक के पाठ चरणबद्ध रुप से बताते हैं कि कैसे आप अपने पूरे जीवन को व्यवस्थित कर सकते हैं।

यह किताब किन लोगों के लिए है


* कोई भी व्यक्ति जो ज़िंदगी की अव्यवस्था में डूब रहा है।

* लोग जो व्यवस्थित होने का आनंद लेना चाहते हैं।

* लोग जिन्होंने अन्य उपलब्ध तरीकों को आजमाया है, पर उन्हें कुछ खास परिणाम नहीं मिले हैं।


लेखक के बारे मे


 लेखन जूली मॉर्गनस्टर्न ने "टास्कमास्टर्स" नाम की पेशेवर व्यवस्था कंपनी की स्थापना की है। यह एक कनसल्टेन्सी फर्म है जो अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी कंपनियों को भी अपनी सेवा प्रदान करता है। जब वह अपना कारोबार नहीं संभाल रही होती हैं तब वह या तो एक स्तंभकार के रुप में अपने विचार लिख रही होती हैं या फिर टेलीविजन के माध्यम से अपने विचार जाहिर कर रही होती हैं।

"ऑर्गनाइजिंग फ्रॉम द इनसाइड आउट" उनकी पहली सबसे ज्यादा बिकने वाली किताब है।


आपको यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए?


 क्या कभी-कभी आप भी सोचते हैं कि काश! मैं भी मैरी पॉपिंस के जैसे बना-ठना रह पाता । कैसे रहेगा कि आप बस यूँही अपनी उँगलियाँ चटकाते बैठे रहें और आपका बिखरा हुआ कमरा अपने आप ही व्यवस्थित और साफ हो जाए!

 दुर्भाग्य से भौतिक विज्ञान के नियम इस बात की इजाजत नहीं देते। मगर एक दूसरा तरीका है जिससे व्यवस्थित बनना काफी आसान हो जाता है- यहाँ तक की व्यवस्थित रहने में मजा आने लगता है। इसे "ऑर्गनाइजिंग फ्रॉम इनसाइड आउट मेथड" (अंदर से व्यवस्थित होने का तरीका) के नाम से जाना जाता है। और यह काम भी करती है क्योंकि यह आपके काम की दिनचर्या के साथ फिट बैठती है। इस किताब के पाठ आपको इसी विधि के बारे में बताते हैं और साथ ही समझाते हैं कि कैसे आप इसे अपने जीवन में लागू कर सकते हैं।

इसके अलावा आप सीखेंगे


* आपको एक झगड़ालू साथी पर कभी गुस्सा नहीं होना चाहिए।

* एक कमरे को व्यवस्थित और साफ करने में औसतन कितना वक्त लगता है।

* क्यों की व्यवस्था की आदत मनोवैज्ञानिक कारणों से हो सकती हैं।



Organizing From the Inside Out by Julie Morgenstern Book Summary in Hindi - क्या आप अपने आपको व्यवस्थित रखना चाहते हैं ?


अपनी व्यवस्था का कारण जानकर अंदर से व्यवस्थित होना शुरु कीजिए।


 यह हम सबके साथ होता है- अव्यवस्थता के कारण हमारी जिंदगी में एक निराशाजनक रुकावट आ जाती है, जिससे निपटने के लिए हम अनगिनत व्यवस्था के टिप्स और तकनीकों में से एक को फॉलो करते हैं। इसके बावजूद भी हममें से ज्यादातर लोग इस निराशा में ही इ रह जाते हैं।

मगर क्यों ?


 इस प्रकार की ज्यादातर तकनीकों को बिना किसी मानसिक दृष्टिकोण के बनाया जाता है। ये बहुत ही सामान्य होती हैं और हमें इन्हें अपनी जिंदगी में लागू करने में दिल तो है। इस दिक्कत से बचने और व्यवस्थित होने का एक उपाय "अंदर से व्यवस्थित होना है - एक तकनीक जो आपके और आपकी जरूरतों दोनों के लिए विशिष्ट है।

 पर इससे पहले की आप अपनी जिंदगी को आंतरिक रूप व्यवस्थित करने का प्रयास करना आरंभ करें आपको पता लगाना होगा कि आपकी जिंदगी उनी व्यवस्था क्यों है ?

 आप किसी चीज को तब तक नहीं जोड़ सकते जब तक कि आपको पता न हो कि वह चीज कैसे टूटी है। और इन आम व्यवस्था के परेशानी क्षेत्रों का ध्यान से निरीक्षण करके आप वह पता लगा सकते हैं कि आप अपनी व्यवस्था को कहाँ से सुधार सकते हैं?

 सर्वप्रथम, सो अक्सर का छोटी-छोटी कमियों होती है जो आपके व्यवस्था के सिस्टम को इसकी पूरी शक्ति का उपयोग करने से रोकती है। जैसे कुछ कान जिनके लिए आपके पास कोई ढंग -का लक्ष्य नहीं होता।

 दूसरा, कुछ पर्यावरणिक समस्याएं होती हैं - जो आपके नियंत्रण से बाहर होती हैं और वे आपकी व्यवस्था को भंग करने में अपना सहयोग देती हैं दफ्तर की अवास्तविक उम्मीदें, जौवन की बड़ी घटनाएं (जैसे घर में नया बच्चा आता या फिर तलाक होना), घरेलू समस्याएं (जैसे- एक सहयोग जीवनसाथी न होना) या फिर पर्याप्त स्पेस ना होना।

 ठीसरे समूह में आती हैं - मानसिक बाधाएं। आपके खुद के अंतर्मन की चीजें जो आपको विकार की तरफ धकेलने हैं। एक्साम्पल के लिए, अरपा लक्ष्य होता, या फिर किसी प्रकार का भय जो आपको व्यवस्थित होने से रोकता है या फिर हो सकता है कि आपको अपने चारों ओर चीजों को बिखेरे रखने में आनंद की प्राप्ति होती हो।

 जब भी आप इन तीन क्षेत्रों पर काम कर रहे हो तो याद रखिए कि इनमें से कई सारी चीजे आप पर अलग-अलग तरीके से लागू हो सकती है। अगर आप अपने में बहुत सारी दिक्कतें पाते हैं तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। अपने प्रति ईमानदार रहें और हमेशा याद रखिए हर मुसीबत का एक हल होता है।

 अव्यवस्थाता को हराने का पहला चरण यह जानना है कि हमारी अस्त-व्यस्तता का कारण क्या है? अपने आप का ईमानदारी से निरीक्षण करके आप अपनी दीवानों के लिए मजबूत हलों का निर्माण कर सकते हैं। इसलिए अपनी अव्यवस्थाता को दूर करने की शुरुआत अपनी बाधाओं को जानने-समझने के साथ करें।


अपने अव्यस्थित पार्टनर को प्रेरणा देकर सफाई की तरफ उसका ध्यान लगाने में मदद करिए।


 कल्पना कीजिए आप घंटों सफाई करने में बिताते हैं; मेहनत से सारे काम करते है। अंततः आपकी मेहनत रंग लाती है और आपका घर चमक उठता है। इसके बाद आपका साथी घर आता है और अपने कीचड़ से लिपटे जूतों को घर के बीच में खोल देता है। अपने गीले कोट को सोफे पर फेंक देता है और अपने जेब से चीजें निकाल कर मैज पर रख देता है। इस तरह से कुछ ही पलों में आपके घंटों की मेहनत बेकार हो जाती है।

 इस घटना के बाद हो सकता है कि शायद आपको अपने साथी से लड़ने-झगड़ने का मन करे। अगर ऐसा हो, तो अपने आप को ऐसा करने से रोकिए - क्योंकि इसके बजाय कुछ और किया जा सकता है।

 गुस्से से अपने साथी से अपनी आदते बदलने के लिए कहना एक अच्छी रणनीति नहीं है। किसी व्यक्ति की सफाई की आदतों को सुधारने के लिए एक समझदारी भरे तरीके जरूरत पड़ती है। लेकिन ऐसा क्यों ? चलिए जानते हैं -

 आप किसी व्यक्ति को प्रत्यक्ष रूप से अपनी प्रेरणा के द्वारा प्रेरित नहीं कर सकते। आपको केवल उन्हें अपनों प्रेरणा देकर उनमें प्रेरणा जगानी होती है। दूसरों में उनकी खुद की प्रेरणा जगाने का एक अच्छा तरीका है उनसे यह सवाल करना कि - "तुम्हारी अव्यवस्थता से तुम्हें खुद कितनी परेशानियां होती है ?"

 हो सकता है कि आपके साथी की आदत हमेशा घर में चाबियाँ खो देना हो और फिर वह उन्हें ढूंढने में अपने कई घंटे बर्बाद कर देता हो। या हो सकता है कि उसने अपनी गर्दन अपने सामान के ढेर के गिरने से करीब करीब तुड़वा ही ली हो। अपने साइको इन घटनाओं को याद दिलाइए, इससे वे आपकी बातों का जरूर जवाब देंगे।

 एक बार जब आपका साधी इन बातों से प्रेरित हो जाता है तो वह अपनी अस्त-व्यस्तता को बदलने का प्रयास जरूर करेगा। इसमें यह तरीका मददगार साबित हो सकता है - अस्त-व्यस्त को दूर करने के कई तरीकों में से एक तरीका यह है कि अपने साथी को कमरे में उसका खुद का स्पेस दें।

 यह तकनीक प्रत्येक साथी कौ न केवल कमरे में उसका खुद का एक हिस्सा देती है बल्कि उसे दूसरों की सोच और जरूरतों के बारे में सोचना भी सिखाता है। इस तरह से आप अपने साथी की अस्त-व्यस्तता के कारण समझ सकते हैं - शायद वह कूड़ादान क्यों बेहद जरुरी है और उसे बताइए कि कैसे आप चीजों को करना पसंद करते हैं।

क्या पता आपकी अच्छी आदतों का प्रभाव आपके साथी पर भी पड जाये।

 अब तक शायद आप जान चुके होंगे कि अपने अव्यवस्थित साथी को व्यवस्थित रहने के लिए कैसे प्रेरित करें। इसके बाद आने वाला दूसरा चरण आपको अंदर से व्यवस्थित होना सिखाया है।


अपनी पुनर्व्यवस्था से ज्यादा अच्छे परिणाम पाने के लिए परिस्थिति का विश्लेषण करते हुए शुरुआत करें।


अपनी जिंदगी को व्यवस्थित करते वक्त कई मौकों पर लगता है कि हमें एक दम से व्यवस्था को लागू करके अपनी जिंदगी में बड़े बदलाव करने चाहिए। लेकिन बिना सोचे समझे और परिणाम का आकलन किये बिना उस काम में कूद जाना नुकसानदेह हो सकता है।

ऐसा इसलिए क्योंकि स्थित होने का सूत्र अपनी समस्या को जानने-समझने में ही छुपा है। अपनी परिस्थिति का विश्लेषण  करना आपको अपने लक्ष्य के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में मददगार साबित होता है। अपनी व्यवस्थैतिक चैलेंजों को आकलन करने के लिए इन पांच सवालों को स्वयं से पूछिए।

सबसे पहला सवाल, कौन-सी चीज काम करेगी?


यह सवाल यह सोचने के लिए है कि आप सबकुछ गलत तो नहीं कर रहे हैं। इसलिए एक मिनट का समय सोचने में लीजिए कि सब सही तो चल रहा है ना? यह आपको न सिर्फ अपनी अच्छी आदतों को छोड़ने से रोकेगा बल्कि साथ ही साथ आपको उन चीजों को अपनी जिंदगी में अपनाने में मदद करेगा जो काम कर रही हैं।

अगला सवाल है - कौन सी चीज काम नहीं कर रही है?


आपके सिस्टम में क्या गड़बड़ी है यह जानने के लिए आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी की कमियों को सूचीबद्ध कर सकते हैं और यह भी लिख सकते हैं कि कैसे वे आपके जीवन को धीमा बनाते हैं। इस सूची को किसी ऐसे स्थान पर लटकाएं जहाँ पर आपकी रोज इसपर नजर पड़े।

अबतक आप जान चुके हैं कि कैसे आप खुद को सुधार सकते हैं। अपने आप से सवाल कीजिए कि कौन-कौन सी आपके लिए मायने रखती हैं। ये चीजें कुछ भी हो सकती हैं। जैसे कि मान लीजिए कि संगीत आपको किसी कठिन दिन के अंत में विराम देने में सहायक साबित होता है तो आपकी जरूरी चीजों की सूची में गानों की सी.डी.सी प्राथमिकता हो सकती है।

जब आपको पता चल जाए कि आपको कौन-कौन-सी चीजों को रखना है तब आपको लिखना है कि आप व्यवस्थित क्यों होना चाहते हैं? व्यवस्थित होना एक कठिन काम है और अपनी प्रेरणा का पता लगाना इस काम को आपके लिए आसान बनाने में मददगार सिद्ध होगा।

अतंत: अपने आपसे पूछिए कि जो परेशानियां आपको उठानी पड़ रही है वे क्यों बन रही है? यह इच्छाशक्ति में कमी के कारण है या फिर कौशल में ? या फिर यह आपके साथी की अव्यवस्थाता की वजह से हो सकता है।

यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि आप अपनी समस्याओं को तभी दूर कर पाएंगे जबकि आपको पता होगा कि वे किस कारण से पैदा हो रही हैं।

समस्या का विश्लेषण करने में समय लगता है और इस काम को छोड़ने और सीधे आगे बढ़ जाने की चाहत भी काफी ज्यादा होती है। लेकिन व्यवस्थित बनने में लिया हुआ वक्त आपको व्यवस्था स्थापित हो जाने के बाद आपका दस गुना ज्यादा समय बचाएगा। हमेशा याद रखना एक ईमानदार विशेषण के बिना असल में व्यवस्थित बनना संभव नहीं है।


व्यवस्थित होने से पहले रणनीति बनाइये।


 तो अब तक आपने अपनी व्यवस्था की स्थिति का विश्लेषण कर लिया है। पहले अगर आपको अपनी स्थिति सुधारने का मन नहीं करता होगा तो अब शायद कर रहा होगा। लेकिन इसमें पहले कुछ रणनीतियां विकसित करना जरूरी है।

व्यवस्थैतिक रणनीतियाँ आपको अपने प्रयासों को तेज में मदद करेंगी और आपके काम को सही दिशा देगी।

इन दो रणनीतियों को try कीजिये -


 पहली रणनीति को व्यवस्थित होने की किनडरगारटेन मोडल ऑफ आर्गेनाइजेशन (व्यवस्था का बाल-विद्यालय नमूना) राजनीति कहा जाता है। इस रणनीति में सब चीजों को अलग-अलग क्रियाकलापों के क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है। इसमें कोन चरण होते हैं -

तो सबसे पहले आप अपने क्रियाकलाप के क्षेत्र बाँटिए, जैसे कि जगह जहाँ पर आप काम करते है या फिर टेलीविजन देखते हैं।

 इसके बाद अपनी जगह का नक्शा खींचिए। नक्शा खींचते वक़्त अपनी स्वाभाविक आदतों और पसंद-नापसंदों के साथ ही साथ अपनी क्रियाकलापों के साथ रिश्तों को ध्यान में रखिए।

 एग्जांपल के लिए, अगर आप अक्सर अपने दोस्तों के साथ मिलकर टेलीविजन देखते हैं तो सुनिश्चित करें वहाँ पर बैठने की उचित व्यवस्था उपलब्ध हो।

 अपने नक्शे के आधार पर अपने फर्नीचर को व्यवस्थित कीजिए और देखिए कि कैसे आपके द्वारा किये गए बदलाव आपके सामने मौजूद सारी अव्यवस्था को चुटकी में दूर कर देते हैं।

 इस विस्तृत अनुप्रयोग का प्रयोग पूरे घर से लेकर छोटे-से दराज तक, किसी भी चीज का नक्शा खींचकर कीजिए और व्यवस्था का लाभ उठाएं।

 दूसरी रणनीति व्यवस्थित होने में लगने वाले समय को ईमानदारी से आकलित करने की है।

 व्यवस्था बनाने के लिए रणनीति बहुत जरूरी है क्योंकि ज्यादातर लोग व्यवस्थित होने में लगने वाले समय को लेकर निश्चित नहीं होता।

 अवास्तविक उम्मीदें आपने इरादों पर पानी फेर सकते हैं। जब आप व्यवस्थित होने के काम को कुछ बहुत बड़ा काम समझ लेते हैं तो आप शुरूआत करने से डरने लगते हैं और जब आप ही बहुत ही छोटा काम समझ लेते है तो आपकी इसमें से रूबी गायब हो जाती है क्योंकि इससे आप चमत्कारिक रूप से कामयाब नहीं हो पाएंगे।

 इन गलत उम्मीदों से प्रत्येक चरण की शानदार योजना का निर्माण करके बचा जा सकता है। मसलन, एक कमरे को व्यवस्थित करने में 1 से डेढ़ दिन का वक़्त लगता है।

माना कि आपने लगने वाले वक़्त का आकलन कर लिया है और अब आप आगे की योजना बनाना चाहते हैं। तो यह सोचिए -

अमेरिका की प्रसिद्ध पत्रिका 'द वाल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक एक अमरीकी कामकाजी व्यक्ति साल के औसतन 6 हपते सिर्फ अव्यवस्थित मेजों और कागजातों को ढूंढने में ही खर्च कर देता है। थोड़ा गणित करें तो यह प्रतिदिन का 1 घंटा निकलता है।

अब क्योंकि आपके पास योजना बनाने के लिए रणनीतियाँ, मौजूद है तो अब तक आप आसानी से इसमें लगने वाले वक़्त की गणना कर सकते हैं। और इसके बाद आप आसानी से इसे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी पर लागू कर सकते हैं।


अपनी व्यवस्था को संभालकर व्यवस्थित बनिए।


तो अब तक आपने अपनी स्थिति का विश्लेषण कर लिया है और उसके लिए एक योजना तैयार कर ली है। अब आता है सबसे शानदार कार्य-व्यवस्थित होने का।

"स्पेस (SPACE)" नामक शब्द आपको व्यवस्थित रखने में सहयोग कर सकता है। कैसे ? चलिए जानते है -

एस (S) - एस चीजों के प्रकार (SORT)" को दर्शाता है।


खुद को व्यवस्थित करने की शुरुआत यह पूछ कर कीजिए कि "क्या मै इस चीज को इस्तेमाल करता हूँ" या "यह चीज कौन-सी श्रेणी से संबंधित है?" अव्यवस्विंत चीजों की भली-भांति जांच पड़ताल करें। कौन-सी चीज जरुरी है, इसका पता लगाइए और एक जैसी चीजों को एक ही समूह में रखिए।

पी(p)- पी "बेकार के सामान से छुटकारे (PURGE)" को दर्शाता है।


इसका अर्थ यह निर्णय करना है कि कौन-सी चीज को छोड़ना है और अगर छोड़ना है तो कैसे छोड़ना है ? याद रखिए हर गैरजरूरी चीज कूड़ा नहीं होती। आप कुछ चीजों को फेंक सकते हैं; कुछ को बेच सकते हैं और कुछ को चाहे तो भविष्य के लिए संभाल कर भी रख सकते हैं। चीजों को नाम लिखे हुए डिब्बों में रखने से यह काम और भी आसान हो जाता है।

अपने बेकार के सामान से छुटकारा पाना आसान नहीं होता। स्वयं को प्रेरित करने के लिए आप उन फायदों के बारे में सोच सकते हैं जो व्यवस्थित होने के बाद आपको मिलने वाले हैं- जगह, समय, पैसा और संतुष्टि। एक्साम्पल के लिए, नई किताबे रखने की जगह के बारे में सोचिये जो आपको मिलने वाली है जब आप अपनी पुरानी किताबों को वहां से हटा देते हैं।

ए (A)- ए "जगह देने (ASSIGN A HOME)" को दर्शाता है।


एक जैसी चीजों को समूहों में बांटकर उनके लिए स्थान की व्यवस्था कीजिये। यहा ध्यान रहें कि आप कौन सी चीजों को सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते है। एक्साम्पल के लिए, अपनी सी.डी. के सेट को स्टीरियो के साथ रखिए और ज्यादा पढ़ी जाने वाली किताबों को उन किताबों के ऊपर रखिए जिन्हें आप कम ही पढ़ते हैं।

 और उन चीजों को, जिन्हें आप साल-दो-साल में एक बार निकालते हैं, को घर के सबसे निचले कमरों (बेसमेंट) या फिर रैक में रखना बेहतर रहेगा।

सी (C) - सी "डिब्बाबंदी (CONTAINERISING) को दर्शाता है।


 डिब्बे, पेटियां या फिर कहें कंटेनर बहुत ही शानदार चीजें होती हैं। ये आपकी वर्गीकृत की हुई चीजों को अलग-अलग और समूहित रखती है। डिब्बों पर तरह-तरह के रंग करके आप इस काम को मजेदार बना सकते हैं।

सबसे आखिरी और जरुरी शब्द ई (E) - का मतलब है "बराबर करना (EQUALISE)"


 एक बार जब भाप अपनी व्यवस्था की योजना की शुरुआत कर देते है तो किसी भी सूरत में गिरने न दें। अपनी व्यवस्था का निरीक्षण कीजिए और आवश्यक बदलाव कीजिए। इसके बाद समय-समय पर अपनी व्यवस्था की सफलता का निरीक्षण करने के लिए समय निकालिए।

इस स्पेस (SPACE) नामक तकनीक को इस्तेमाल करने के बाद आप जरूर हैरान होने कि कैसे इसने आपकी अव्यवस्था को व्यवस्था में बदल दिया है।

अब जब आप खुद को व्यवस्थित बनाने के हथियार से लैस हो चुके हैं, तो अब वक़्त आ चूका है कुछ एक्साम्पल को जानने का, जो बताते हैं कि अपना ज्ञान कैसे प्रयुक्त करें।


अपनी व्यवस्था को लागू करके अपने बच्चों के कमरे से लेकर अपनी दिनचर्या तक हर चीज व्यवस्थित कीजिए।


 अंदर से व्यवस्थित होने की तकनीक की खास बात यह है कि यह हर प्रकार की स्थिति में काम करती है। आप इस तकनीक को बड़े कामों से लेकर छोटे कामो और पूरी अव्यवस्था से लेकर हल्की अव्यवस्था में प्रयोग कर सकते हैं।

 विश्लेषण करने, रणनीति बनाने और उसे लागू करने की इस 3 चरणों की प्रक्रिया को फॉलो करके आप अपने सूटकेस से लेकर रसोई तक हर चीज को व्यवस्थित कर सकते है।

 लेकिन कई बार होता है कि हमे अपने नहीं बल्कि किसी और के सामान को व्यवस्थित करना होता है - अक्सर यह आपके बच्चों का होता है। अपने बच्चों का सामान व्यवस्थित करते समय सारा काम स्वयं ही न करें बल्कि कुछ काम उन्हें खुद भी करने दें, इससे वे व्यवस्था बनाने में सक्षम हो पाएंगे।

लेकिन क्यों ?


 आपका बच्चा अपना कमरा व्यवस्थित नहीं रखेगा यदि वह उसकी जरूरत के हिसाब से व्यवस्थित नहीं है। यह निश्चित करने के लिए कि आपके बच्चे का कमरा व्यवस्थित रहे, अपने बच्चे को उसका कमरा व्यवस्थित करने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाएँ।

 खेर, बच्चे कई बार असहयोगी होते हैं और माता-पिता के लिए का सहयोग पाना सिरदर्द का विषय बन जात है। इस परेशानी का सबसे अच्छा उपाय है व्यवस्थित होने की इस प्रक्रिया को मजेदार बनाना। उदाहरण के लिए आप बच्चों को गंदे कपड़े सही करने के लिए हेम्पर पर बास्केटबॉल की बास्केट (हूप) बांधकर उन्हें दे सकते है।

 अपने पुरे घर को, यहाँ तक कि बच्चों के कमरे को भी व्यवस्थित कर लेने पर आपको उपलब्धि का भाव महसूस होगा, लेकिन आपको यहाँ पर ही नहीं रुक जाना है। अंदर से व्यवस्थित होने की तकनीक समय को बचाने के लिए भी इस्तेमाल हो सकती है।

 अपने समय को व्यवस्थित करना ठीक अपनी अलगारी को व्यवस्थित करने के जैसा है। आप अपनी नई तकनीकों की मदद से अपने बिखरी हुई दिनचर्या को व्यवस्थित कर सकते हैं।

आपको बस ये 3 चरण याद रखने की जरूरत है।


 विश्लेषण कीजिए कि कौन-से काम आपके लिए जरूरी हैं और कौन-कौन-से कामों के बिना आप रह सकते हैं।

 रणनीति बताइये कि कौन-सी ची करती है और उसे कब तक पूरा करना है।

और अंतत: बेकार के कामों को छोड़कर और अपने कामों को समूहों में विभाजित करके अपनी व्यवस्था को लागू कीजिए। उदाहरण के लिए, अपने सारे बिलों का भुगतान एक साथ करना।

अब तक शायद आप अंदर से व्यवस्थित होने की शक्ति जान गए होंगे इसलिए यह वक़्त है इसे अपनी जिंदगी पर लागू करने का।


Conclusion -


 एक बहुत ही ज्यादा अव्यस्थित व्यक्ति भी इस तकनीक के जरिए खुद को व्यवस्थित बना सकता है। लेकिन आपको इस काम में तकलीफ होगी जब तक कि आप इस तकनीक को व्यक्तिगत रुप नहीं देंगे। आप अपने संसार को अपनी इकछानुसार आकार में ढाल सकते हैं आपको जरुरत है तो सिर्फ और सिर्फ अपनी जरूरतों के हिसाब से उसे विश्लेषित, राजनीति और उसे अपनी जिंदगी पर लागू करने की।

क्या करें?


अपनी व्यवस्थैतिक जरूरतों को विश्लेषित कीजिए।


 पता लगाइए कि कहाँ-कहाँ आपकी व्यवस्था उन चीजों की सूची लगाने से सुधार सकती है, जो आपको दिन-ब-दिन धीमा करती हैं। आप अपनी इस सूची को फ्रिज, दरवाजे या दीवार पर लगाकर अपने को सुधार की याद दिला सकते हैं। इसके बाद अपनी योजना की रणनीति को अपने कामों में लागू कीजिए।



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आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

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