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The FALCON Method Book Summary in Hindi - क्या आप भी इन्वेस्टमेंट सीखना और पैसिव इनकम करना चाहते हैं ?

  Rocktim Borua       बुधवार
The FALCON Method Book Summary in Hindi


द फैल्कान मेथड ( The FALCON Method ) में हम देखेंगे कि किस तरह से आप स्टॉक मार्केट में अपना पैसा इंवेस्ट कर सकते हैं और खुद को फाइनैंशियली आजाद कर सकते हैं। इस किताब के लेखक डेविड सोलयोमि ने स्टाक मार्केट में इंवेस्ट करने के वो तरीके बताएं हैं जो कि बहुत आसान हैं और जिनकी मदद से कोई भी खुद के लिए स्टाक्स के जरिए एक पैसिव इनकम बना सकता है।


यह किसके लिए है


-वे जो स्टॉक मार्केट को समझना चाहते हैं।

-वे जो कंपनियों में इंवेस्ट करना सीखना चाहते हैं।

-वे जो पैसिव इनकम बनाने के सबसे अच्छे तरीके के बारे में जानना चाहते हैं।


लेखक के बारे में


 डेविड सोलयोमि (David Solyomi) एक लेखक, एक इंवेस्टर और एक इंस्ट्रक्टर हैं जिन्होंने छोटी उम्र से ही पैसे कमाने और बचाने की प्रक्रिया से आजादी पाने के सपने देखने शुरु कर दिए थे। वे अब उन्हीं तरीकों के बारे में लोगों को बताते हैं जिनकी मदद से उन्होंने खुद आजादी हासिल की।


यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए


 आज के वक्त में यह बात हर कोई मानता है कि उन्हें सारी जिन्दगी पैसों के लिए काम नहीं करना। बहुत से लोग आज चाहते हैं कि वे स्टाम मार्केट में या फिर कहीं दूसरी जगह पर अपना पैसा इंवेस्ट कर के अच्छे पैसे कमाएँ। लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि शुरुआत कहाँ से की जाए। अगर आप भी उन लोगों में से हैं, तो यह किताब आपके लिए ही लिखी गई है।

यह कविता हमें स्टाक मार्केट में अपना पैसा इंवेस्ट करने का एक बहुत आसान तरीका बताती है, जिसे फैल्कान मेथड कहा जाता है। फैल्कान एक पक्षी का नाम है जो कि शिकार करने में माहिर होती है। उसी पक्षी की तरह यह मेथड भी काम करता है जो कि आपके लिए हमेशा बेहतर स्टाक पहचान कर लाता है।


इसे पढ़कर आप देखेंगे

  • किस तरह से आप अपना पैसा इंवेस्ट कर सकते हैं।
  • किसी कंपनी में इंवेस्ट करने से पहले आपको क्या देखना चाहिए।
  • किस तरह से अलग अलग फिल्टर लगा कर आप बेहतर कंपनियों की एक लिस्ट बना सकते हैं।


The FALCON Method Book Summary in Hindi - क्या आप भी इन्वेस्टमेंट सीखना चाहते हैं ?


आप तीन तरह से अपना पैसा इंवेस्ट कर सकते हैं और स्टॉक में इंवेस्ट करना सबसे अच्छा तरीका है।


आज के वक्त में हर कोई चाहता है कि वो इंवेस्ट करे और बिना काम किए पैसे कमाए। लेकिन कभी कभी यह इतना मुश्किल हो जाता है कि हम इसे समझ ही नहीं पाते। जो लोग इसे समझने का काम करते हैं वे इसमें पूरी जिन्दगी बिता देते हैं। लेकिन यही लोग हमें इसके बारे में कुछ जानकारी दे देते हैं, जैसे कि वैरन बुफ्फे।

उन्होंने 2011 के एक पत्र में तीन तरह के इंवेस्टमेंट के बारे में बताया और उसमें से अपने मनपसंद इंवेस्टमेंट के बारे में भी बताया।

सबसे पहला आता है करेंसी बेस्ड इंवेस्टमेंट जैसे कि बॉन्ड। बॉन्ड एक तरह का कर्ज होता है जो कि एक सरकार या फिर एक कॉर्पोरेशन किसी को देती है और बाद में वो उससे ब्याज के साथ उसे वापस लेती है। लेकिन क्योंकि ये एक करेंसी बेस्ड इंवेस्टमेंट है, इसमें इन्फ्लेशन आ जाता है जिसकी वजह से समय के साथ पैसे की कीमत कम हो जाती है। आप ने जितने परसेंट का ब्याज लगाया था, उसे इन्फ्लेशन खा जाएगा और आपको कुछ फायदा नहीं मिलेगा या फिर ना के बराबर फायदा मिलेगा।

इसके बाद आते हैं अनप्रोडक्टव एस्सेट्स, जिसमें आप इस उम्मीद से सोना या तेल खरीदते हैं ताकि आप उसे कुछ समय के बाद ज्यादा दाम पर बेच सकें। लेकिन इससे आपको कुछ ज्यादा फायदा नहीं मिलेगा और जब तक यह चीजें आपके साथ रहेंगी तब तक ये आपको कुछ नहीं देंगी। इनसे आपको फायदा तभी होगा जब आप इसे बेचेंगे।

बुफ्फे के हिसाब से तीसरी कैटेगरी का इंवेस्टमेंट, यानी प्रोडक्टिव एस्सेट्स का इंवेस्टमेंट सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। इसमें आते हैं किसी कंपनी के शेयर या फिर एक ऐसा रियल एस्टेट जिसे आप किराए पर दे सकें। जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं तो आप भी उस कंपनी के एक हिस्सेदार बन जाते हैं और उस कंपनी के सारे फायदे आपको आपके पर्सेंट शेयर के हिसाब से मिलते रहते हैं।

अगर आप एक रियल एस्टेट लेकर उसे किराए पर दे दे रहे हैं तो आपको उसके किराए से फायदा मिलता रहेगा और साथ ही आप उसे बाद में बेच भी सकते हैं। यह दोनों ही किसी भी करेंसी पर निर्भर नहीं करते इसलिए इन्फ्लेशन का असर इन पर नहीं होता। यह सबसे अच्छे इंवेस्टमेंट होते हैं।


अच्छे से इंवेस्ट कर पाने के लिए आपको यह समझना होगा कि कंपनी किस तरह से कैश का इस्तेमाल करती है।


मान लीजिए कि कंपनी एक ब्लैक बॉक्स है जिसमें बहुत से इनपुट और आउटपुट पाइप लगे हुए हैं। आपको यह नहीं पता है कि ब्लैक बॉक्स के अंदर क्या हो रहा है, लेकिन आपको यह जरूर पता है कि उसके बाहर क्या हो रहा है। आपको सबसे पहले उसके बारे में अंदाज़ा लगाना छोड़ना होगा जो उसके अंदर हो रहा है और उसे समझना होगा जो उसके बाहर हो रहा है।

इनपुट पाइप का मतलब वो लाइन जिससे पैसा कंपनी के अंदर जाता है। इसमें आता है कंपनी का रेवेन्यू, यानी कि वो पैसा जो कंपनी अपने सामान को बेचकर कमाती है। इसके अलावा एक कंपनी पैसा कमाती है अपने नए शेयर्स को बेचकर। जब कंपनी अपने शेयर को बेचती है तो उसके स्टाक डाइल्यूट हो जाते हैं और इसलिए आपको इसके ऊपर ध्यान देने की जरुरत है।

इसके अलावा एक कंपनी जब किसी दूसरी कंपनी को खरीदती है तो उससे भी उसके पास पैसे आते हैं। उसका प्राफिट कंपनी के प्राफिट के साथ जुड़ जाता है।

इसके बाद आते हैं आउटपुट पाइप, यानी कि कंपनी में कहाँ से पैसा बाहर जाता है। इसमें कंपनी के खर्च आते हैं जैसे कि स्टाफ को सैलरी देना, कर्ज चुकाना, मार्केटिंग का खर्च और टैक्स का खर्च।

जब आप किसी कंपनी की जाँच करते हैं तो सबसे पहले आपको उसके प्राफिट वाले आउटपुट पाइप को देखना होगा। यही आपको बताती है कि किस तरह से आप किसी कंपनी में पैसा लगाकर फायदा कमा सकते हैं। इसके लिए आपको इन तीन बातों का ध्यान देना होगा।

सबसे पहले यह देखिए कि एक शेयरहोल्डर को एक डिविडेंड की तरह कितना पैसा मिल रहा है। वो कंपनी अगर अपने शेयरहोल्डर को ज्यादा पैसे दे रही है तो वो एक अच्छी इंवेस्टमेंट है।

इसके बाद शेयर बाइबैक से सावधान रहिए। कभी कभी कंपनी खुद अपने स्टॉक खरीद लेती है ताकि मार्केट में से कोई दूसरा उसे ना खरीद पाए। इससे उनका डिविडेंड पर शेयर का अमाउंट बढ़ जाता है।

अंत में रीटेन्ड अर्निंग पर ध्यान दीजिए जो कि वो पैसा होता है जो कंपनी अपने बढ़ने के लिए वापस खुद पर लगा देती है।


फैल्कान मेथड में आप बहुत सारी बातों को ध्यान में रखकर एक कंपनी में लम्बे समय के लिए इंवेस्ट करते हैं।


बहुत से इंवेस्टर क्वान्टम इंवेस्टिंग माडल के हिसाब से अपने पैसे कंपनियों में इंवेस्ट करते हैं। इसमें आप बहुत से नंबर्स पर ध्यान देते हैं, जैसे कि डिविडेंड पर शेयर, और उन नंबर्स के हिसाब से अलग अलग तरह की कंपनियों की लिस्ट बनाकर उसमें एक साल के लिए अपना पैसा लगाते हैं और फिर उसके शेयर को बेच देते हैं। इसके बाद अगले साल आप यही काम फिर से करते हैं।

क्वान्टम इंवेस्टिंग में आप नंबर पर और डाटा पर ध्यान देते हैं जिससे आप बहुत से साइकोलाजिकल गलतियां नहीं करते, जो कि पैसे खोने का आम जरिया होता है। लेकिन इसके कुछ नुकसान भी होते हैं। सबसे पहला तो यह कि जब आप डाटा के हिसाब से कंपनियों की एक लिस्ट बनाते हैं, तो आपकी मुलाकात बहुत सी ऐसी कंपनियों से होती है जिनका आप नाम भी नहीं जानते। और जिस कंपनी से आप वाकिफ नहीं हैं, उसमें पैसा लगाना अच्छी बात नहीं है।

इस मेथड के हिसाब से चलने का दूसरा नुकसान यह है कि जब आप हर साल अलग अलग कंपनियों की लिस्ट बनाकर उसमें इंवेस्ट करते हैं तो साल में कभी कभी आपको नुकसान भी सहना होता है। बहुत से इंवेस्टर इसलिए इस मेथड के हिसाब से इंवेस्ट नहीं करते।

इस समस्या से निकलने के लिए हम फैल्कान मेथड का इस्तेमाल करते हैं, जिसे भावनाओं में आकर फैसला न लेने के लिए बनाया गया है। इसके साथ ही इस मेथड में आप हर साल कंपनी में पैसा लगाते या निकालते नहीं हैं, बल्कि लम्बे समय तक उसमें पैसा लगाकर उसे होल्ड करते हैं। यहाँ पर हमारा मकसद होता है किसी कंपनी में पैसा लगाने के बाद उससे लम्बे से लम्बे समय तक फायदा लेते रहना।

इसके अलावा फैल्कान मेथड में आप सिर्फ उन कंपनियों में इंवेस्ट करते हैं जो कि इंवेस्ट करने के लायक होती हैं। हम में से बहुत से लोग अपनी लोकल कंपनियों पर भरोसा करते हैं और भावना में बहकर उसमें पैसा लगा देते हैं। आप इस तरह की गलती ना करें, इसलिए फैल्कान मेथड बहुत से फिल्टर्स का इस्तेमाल करता है। जो कंपनी इन सारे फिल्टर्स को पास कर जाए, वो ही एक अच्छी इंवेस्टमेंट होती है।


फैल्कान मेथड में सबसे पहले आप अच्छी कंपनियों को पहचानते हैं।


 आपको यह कैसे पता लगेगा कि कोई कंपनी इंवेस्ट करने लायक है भी या नहीं? इसके लिए आप उसके रेवेन्यू या फिर कैश फ्लो को नहीं देख सकते, क्योंकि यह सारे काम कागजी होते हैं और इनमें कोई भी फेरबदल कर के आपको बेवकूफ बना सकता है। इसलिए आपको कुछ ऐसा देखना होगा जिसमें फेरबदल ना किया जा सके। आपको यह देखना होगा कि वो कंपनी अपने डिविडेंड को पैसा दे रही है या नहीं।

जो कंपनी पिछले 20 साल से अपने डिविडेंट्स को लगातार पैसे दे रही है, उसमें आप अपना पैसा लगा सकते हैं। यह बिल्कुल ट्रांसपेरेंट होते हैं और इन्हें छिपाया नहीं जा सकता। लेकिन आप सोच रहे होंगे कि 20 साल तक क्यों देखना, सिर्फ 5 या 10 साल तक देखने में क्या परेशानी है? सबसे पहले तो यह कि लम्बे समय तक देखने से हमें

यह पता लग जाता है कि मार्केट के हालात खराब होने पर कंपनी किस तरह से बर्ताव करती है।

 एग्जांपल के लिए जब 2008 में मार्केट क्रैश हुआ था, तो किस तरह से कंपनियों ने अपने डिविडेंट्स को पैसा दिया, यह देखने के लिए आपको लम्बे समय पर ध्यान देना होगा। दूसरा यह कि अगर कंपनी लगातार अपने डिविडेंट्स को पैसे दे रही है तो वो एक अच्छी कंपनी है।

अब तक आप समझ ही गए होंगे कि इस तरह की कंपनियां हर इन्वेस्टर को बहुत प्यारी होती हैं। S&P 500 इंडेक्स ने इस तरह की कंपनियों की एक लिस्ट बना कर उन्हें डिविडेंड एरिस्टोक्रैट्स का नाम दिया है। यह वो कंपनियां हैं जिन्होंने पिछले 25 साल से अपने डिविडेंड को लगातार पैसे दिए हैं।

लेकिन यहां पर एक समस्या है। सबसे पहला तो यह कि हम S&P 500 इंडेक्स की लिस्ट पर ही क्यों निर्भर रहें, जबकि हमारे पास बहुत से दूसरे आप्शन हैं। और दूसरा यह कि अगर कोई कंपनी दो साल तक लगातार अपने डिविडेंड को एक बराबर पैसे देती रहे, तो उसे डिविडेंड एरिस्टोक्रैट्स की लिस्ट से हटा दिया जाता है।

लेकिन फैल्कन मेथड में हम एक दूसरा तरीका अपनाते हैं जो कि सिर्फ इस बात पर फोकस करता है कि कंपनी ने लम्बे समय तक अपने डिविडेंड को पैसे दिए हों। यह जरूरी नहीं है कि अगर किसी कंपनी का डिविडेंड रिकॉर्ड अच्छा हो तो वो एक अच्छी कंपनी ही हो, लेकिन यह एक पॉज़िटिव साइन है कि वो इंवेस्ट करने के लिए एक अच्छी कंपनी हो सकती है।


उन स्टाक्स को खरीदिए जो कि अपने एवरेज दाम से सस्ती हों।


आपको स्टाक मार्केट में फायदा तब होगा जब आप स्टाक को कम दाम पर खरीद कर उसे ज्यादा दाम पर बेचें। लेकिन क्योंकि स्टॉक मार्केट के दाम अक्सर ऊपर नीचे होते रहते हैं, एक अच्छा मौका अपने हाथ से निकल सकता है। लेकिन फिर भी आपके पास मोल भाव करने का आप्शन रहता है, जिसकी मदद से आप स्टॉक को कम दाम पर खरीद सकते हैं। अगर आप ने उसे कम दाम पर खरीदा है, तो आप उसे ज्यादा में बेच सकते हैं।

एक अच्छी डील पाने के लिए आपको एक स्टाक को तब खरीदना होगा जब उसके दाम उसके पूरे इतिहास के दामों के उतार चढ़ाव के एवरेज से कम हो। कीमती समय के हिसाब से बदलती रहती हैं लेकिन आपको उसे तब खरीदना होगा जब उसकी कीमत उसकी औसत कीमत से कम हो।

यह तरीका काम इसलिए करता है क्योंकि इंसान अक्सर अपनी भावनाओं पर काबू नहीं कर पाता जिससे वो उसे काबू करने लगते हैं। लालच और डर, यह दो चीजें हैं जिनकी वजह से स्टाक मार्केट के दाम घटते या बढ़ते हैं। जब लोगों के अंदर डर बनता है, तो वे सब कुछ बेचकर भागने के बारे में सोचते हैं और समझदार इंवेस्टर यहाँ पर आकर अच्छे फैसले लेते हैं।

जब सब लोग डर के मारे निराश होकर स्टाक मार्केट में सब कुछ बेचने लगते हैं, तो स्टाक की कीमत कम होने लगती है और इस वक्त उसे खरीद कर आप फायदे में रह सकते हैं। यह सुनने में तो बहुत आसान लगता है कि जब सब लोग डर के मारे सब कुछ बेच रहे हों तो आप सब कुछ खरीदिए, लेकिन ऐसा करना मतलब भीड़ के हिसाब से ना चलना, जो कि अपने आप में एक मुश्किल काम होता है। इसके लिए आपको बहुत अच्छी जानकारी की जरूरत होगी।

कभी कभी ठीक इसी का उल्टा भी होता है। जब सब लोग शांत होते हैं और कोई घबराता नहीं है तो इस हालात में स्टॉक की कीमत बढ़ने लगती है और ऐसे में आपको कभी भी स्टॉक नहीं खरीदना चाहिए।


अच्छे स्टॉक को पहचानने के लिए उसके डिविडेंड याइल्ड, फ्री कैश फ्लो याइल्ड और फर्श शेयरहोल्डर याइल्ड पर ध्यान दीजिए।


अब आपके पास आपकी एक लिस्ट तैयार हो चुकी होगी उन कंपनियों की जिसमें आपको अपना पैसा लगाना है। लेकिन उससे पहले हमें कुछ बातें और जान लेनी चाहिए। वो हैं - डिविडेंड याइल्ड, फ्री कैश फ्लो याइल्ड और फर्श शेयर होल्डर याइल्ड।

डिविडेंड याइल्ड का मतलब वो पैसा जो कि एक स्टॉक अपनी कीमत के हिसाब से पैदा करेगा। एक्जाम्पल के लिए अगर आपने एक कंपनी का डिविडेंड 100 रुपए में खरीदा है और वो आपको अगले साल तक 10 रुपए देगी, तो उसका डिविडेंड याइल्ड 10% है।

जब कंपनी अपने खर्च के लिए काम भर का पैसा इस्तेमाल कर लेती है, तो जो पैसा बच जाता है उसे फ्री कैश फ्लो कहते हैं। यह हमें बचे हुए पैसे और मार्केट में स्टाक की कीमत के संबंध के बारे में बताता है। इसे पता करने के लिए फ्री कैश फ्लो को पूरे शेयर के नंबर से डिवाइड कर दीजिए। अगर एक कंपनी के पास 1000 रुपए का फ्री कैश फ्लो है और उसके पास 200 शेयर्स हैं, तो उसका फ्री कैश फ्लो याइल्ड 5 रुपया प्रति शेयर हुआ।

अंत में आता है एक कंपनी का फर्स्ट शेयरहोल्डर याइल्ड। इसका मतलब उस पैसे से होता है जो कि एक कंपनी अपने इन्वेस्टर्स के पास शेयर बाइबैक के जरिए भेजती है। जब एक कंपनी अपने शेयर को काबू करने के लिए ओपन मार्केट से खुद अपने ही शेयर्स को खरीद लेती है तो उसे शेयर बाइबैक कहते हैं। इससे उसके शेयर की कीमत बढ़ जाती है और साथ ही वो कीमत भी बढ़ जाती है जो वो अपने डिविडेंड को भविष्य में देगी।

इसे कैल्कुलेट करने के लिए मान लीजिए कि एक कंपनी ने 100 रुपए अपने डिविडेंड पर खर्च किए और 150 रुपए शेयर बाइबैक पर। सबसे पहले इन्हें जोड़ दीजिए, जिससे आपको 250 रुपए मिलेंगे। अब मान लीजिए कि जो नए शेयर्स हैं उनकी कीमत 50 रुपए है और उसे इसमें से माइनस कर दीजिए, तो आपको मिलेगा 200 रुपए। इसके बाद इसे उस कंपनी के सारे शेयर्स की कीमत (यानी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन) से डिवाइड कर दीजिए। मान लीजिए कंपनी का मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 5000 रुपए है। तो 200 को 5000 से डिवाइड करने पर आपको मिलेगा. 04 यानी 4%, जो कि उस कंपनी का फर्स्ट शेयरहोल्डर याइल्ड है।

किसी कंपनी में इंवेस्ट करने से पहले इन तीन चीज़ों पर ध्यान दीजिए और उसमें इंवेस्ट कीजिए जिसमें यह तीनों पर्सेंट ज्यादा से ज्यादा हों। सिर्फ कुछ कंपनियां ही इन तीनों को पास कर पाती हैं और जो पास करती हैं, वो फायदेमंद इंवेस्टमेंट होती हैं।


अलग अलग कंपनियों की तुलना कर के उन्हें वेटेज दीजिए।


वेटेज का मतलब नंबर्स में यह पता लगाना कि कौन सी कंपनी कितनी अच्छी इंवेस्टमेंट होगी। इसमें आप उसके डिविडेंड पर शेयर, कैश फ्लो याइल्ड और दूसरी चीजों को नंबर देते हैं और फिर उसे पर्सेंट में निकालकर यह पता करते हैं कि उसका वेटेज कितना है।

इसे समझने के लिए दो कंपनियों का एक्ज़ाम्पल लेते हैं -


स्टाक ए और स्टाक बी। हम दोनों कंपनियों के डिविडेंड पर शेयर, कैश फ्लो याइल्ड और शेयरहोल्डर याइल्ड को पता कर के उनका वेटेज निकालेंगे।

 मान लेते हैं कि यहाँ पर तीनों का वेटेज 33.33% है। आप अपने हिसाब से वेटेज तय कर सकते हैं, लेकिन उस वेटेज को जोड़ने पर 100% आना चाहिए। स्टाक ए के लिए डिविडेंड पर शेयर, कैश फ्लो याइल्ड और शेयरहोल्डर याइल्ड 5,7 और 10 परसेंट है और बी के लिए यह 10, 5 और 12 परसेंट है। अब यहाँ पर हर एक स्टॉक का वेटेज 33.3 परसेंट यानी. 333 है। आप स्टाक के फाइनल स्कोर को इससे मल्टिप्लाई कर के उसे जोड़ दीजिए, तो आपको उसका फाइनल स्कोर मिल जाएगा। हमारे एक्जाम्पल में यह स्टाक ए के लिए 10.6 है और बी के लिए 8.91,

लेकिन यहाँ पर हम डिविडेंड पर शेयर, कैश फ्लो याइल्ड और शेयरहोल्डर याइल्ड का ही इस्तेमाल फिर से कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल हमने पहले ही कर लिया है। इसलिए अब हमें कुछ नए तरीकों की जरूरत होगी। इसके लिए फैल्कान मेथड में हम चाओडर रुल से मिलता हुआ, लेकिन उससे बेहतर तरीका इस्तेमाल करेंगे। इस तरीके में आप स्टाक के इस समय के डिविडेंड की तुलना उसका भविष्य में होने वाली बढ़ोत्तरी से करते हैं।

इसमें आप कंपनी के इस समय के स्टाक के डिविडेंड याइल्ड को उसके पिछले पांच साल में होने वाली स्टाक डिविडेंड याइल्ड में बढ़ोत्तरी के साथ जोड़ देते हैं। अगर स्टॉक डिविडेंड याइल्ड 3% से ज्यादा है, तो इस नंबर को 12 से ज्यादा होना चाहिए और अगर स्टॉक डिविडेंड याइल्ड 3% से कम है, तो इस नंबर को 15 से ज्यादा होना चाहिए।

लेकिन पाँच साल का समय लेना कुछ समस्या पैदा करता है। हो सकता है कि कंपनी ने चार साल तक अपने डिविडेंट को अच्छे पैसे दिए हों, लेकिन पाँचवें साल में कम कर दिया हो। ऐसे हालात में आपको सही नतीजा नहीं मिलेगा। इसलिए आप अलग अलग समय लीजिए, जैसे कि एक साल, तीन साल या चार साल तक का समय और फिर सबका इस्तेमाल उसके हिसाब से वेजेट रैंकिंग में कीजिए।


फैल्कान मेथड के अंत में आप अपना दिमाग लगाकर फैसला करते हैं।


अब तक हमने जो भी तरीके देखे जिनकी मदद से आप अच्छी इंवेस्टमेंट को खराब इंवेस्टमेंट से अलग करते हैं, वो सब कुछ नंबर के हिसाब से थे और उसमें कहीं भी भावनाओं का इस्तेमाल नहीं हुआ। लेकिन अगर आपको बेहतर फैसले लेने हैं तो आपको कुछ और खास बातों का ध्यान रखना होगा।

सबसे पहले उसके आरओआईसी (ROIC) इंडिकेटर पर ध्यान दीजिए। आरओआईसी का मतलब होता है रीटर्न आन कैपिटल इंवेस्टमेंट। इसका मतलब उस पैसे से है जो आपको किसी कंपनी में इंवेस्ट करने पर मिलता है। एक अच्छे इन्वेस्टर को यह पता होना चाहिए कि एक फर्म में किस तरह से उसके पैसे का इस्तेमाल हो रहा है और यह पता लगाने के लिए आरओआईसी इंडिकेटर का इस्तेमाल किया जाता है। यह बताता है कि एक कंपनी कितने अच्छे से अपने फायदे को अपने इन्वेस्टर्स के साथ बाँटती है।

इसके अलावा आप उन स्टाक्स में पैसा मत लगाइए जो कि साइक्लिकल हैं। साइक्लिकल स्टाक्स का मतलब उन स्टाक्स से है जिनकी कीमत में बहुत ज्यादा उतार चढ़ाव आता है। इनकी कीमत अचानक से ऊपर चढ़ जाती है और अचानक से गिर भी जाती है। हालाँकि इसमें अगर आप गिरने पर अपना पैसा लगाते हैं तो आप बहुत जल्दी मालामाल हो सकते हैं, लेकिन इसमें यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कब उसकी कीमत बिल्कुल कम हो चुकी है और कब इंवेस्ट करने का सही समय है। इसके अलावा फैल्कान मेथड के हिसाब से हम एक स्टाक में लम्बे समय तक पैसा लगाते हैं, ना कि छोटे समय के लिए। जब आप लम्बे समय के लिए अपना पैसा किसी कंपनी में लगाते हैं, तो आप ज्यादा फायदा कमाते हैं।

आरओआईसी इंडिकेटर का इस्तेमाल अंत में किया जाता है। हमने पहले ही चार तरीके देख लिए हैं जिनकी मदद से आप बेहतर स्टाक को पहचान सकते हैं। इसके अलावा हर इंवेस्टिंग मेथड की तरह फैल्कान मेथड में भी कुछ कमियां हैं, लेकिन फैल्कान पक्षी की तरह यह ज्यादातर समय सही शिकार करती है और इसका निशाना बहुत कम चूकता है।


Conclusion -


अगर आपको एक अच्छी पैसिव इनकम बनानी है तो उसका सबसे अच्छा तरीका है स्टॉक में इंवेस्ट करना। किसी भी कंपनी में इंवेस्ट करने से पहले उस कंपनी की अच्छी जाँच कीजिए और उसके डिविडेंड पर शेयर, डिविडेंड याइल्ड, फ्री कैश फ्लो याइल्ड और फर्श शेयरहोल्डर चाइल्ड जैसे नंबर्स के बारे में पता लगाइए। इस तरह से आप बेहतर कंपनियों की एक लिस्ट तैयार कर सकते हैं और उसमें इंवेस्ट कर के एक अच्छी पैसिव इनकम बना सकते हैं।

क्या करें?

खुद से कुछ टेस्ट कीजिए।


अब जब आपको पता चल गया है कि फैल्कान मेथड क्या होता है, तो आप जाकर खुद की कंपनियों की एक लिस्ट बनाइए। यह देखिए कि कौन सी कंपनियां अपने डिविडेंड को लम्बे समय से पैसे दे रही हैं। आप चाहें तो किसी दूसरी फार्म की लिस्ट से मदद ले सकते हैं, जैसे S&P 500 इंडेक्स या फिर डो जोन्स।


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आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

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