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Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति - दुष्ट से कैसे बचें?

  Rocktim Borua       रविवार

 Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति - दुष्ट से कैसे बचें?


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दुर्जनेषु च सर्पेषु वरं सर्पो न दुर्जनः ।
सर्पो दंशति कालेन दुर्जनस्तु पदे-पदे ॥


आचार्य चाणक्य यहां दुष्टता की दृष्टि से तुलना करते हुए उस पक्ष को रख रहे हैं जहां दुष्टता का दुष्प्रभाव कम-से-कम पड़े। उनका मानना है कि दुष्ट और साँप, इन दोनों में साँप अच्छा है, न कि दुष्ट।


साँप तो एक ही बार डसता है, किन्तु दुष्ट तो पग-पग पर डसता रहता है। इसलिए दुष्ट से बचकर रहना चाहिए। साँप से आप दूर भाग के बच सकते हैं लेकिन दुष्ट से आप दूर भाग के भी बच नहीं सकते। दुष्ट आपको बार बार क्षति पहुँचाने कि कोशिश में लगे रहते हैं। दुष्ट व्यक्ति आपको कभी शांति से रहने नहीं देंगे।


अभिप्राय यह है कि यदि यह पूछा जाय कि दुष्ट और साँप में से कौन अच्छा है? तो इसका उत्तर है - सांप।


सांप दुष्ट से हजार गुना अच्छा है, क्योंकि सॉप तो कभी-कभार किसी विशेष कारण पर ही मनुष्य को डसता है और उससे दूर रह के तो आप बच भी सकते हैं, किन्तु दुष्ट तो पग-पग पर डसता रहता है।


दुष्ट का कोई भरोसा नहीं कि कब क्या कर बैठे और यह भी तथ्य है कि साँप तभी काटता है जब उस पर पांव पड़ जाए या वह किसी कारण भयभीत हो जाए लेकिन दुर्जन (दुष्ट) तो अकारण ही दुःख पहुंचाने का यत्न करता है। बार बार आपकी बुराई करने में लगे रहते हैं। आपको हर तरीकेसे क्षति पहुँचाने की कोशिश में लगे रहते हैं।


दुष्ट की पहचान -


कभी आपको किसी अपने के बारे बुरा सोचने के लिए मजबूर करता है तो कभी आपको डिमोटिवेट करते हैं। कभी आपको गलत तरीका सीखाते है तो कभी आपको बुराइओं में धकेल देते हैं। कभी आपको किसी जगह फॅसा देंगे तो कभी आपको भले इंसान से मिलने को रोक देंगे। कभी आपके बारे लोगों से छुपके से बुराईयां करेंगे तो कभी आपको उनके बारे में आपको बुरा बोलेंगे। तो ऐसे व्यक्ति से हमेशा दूर रहे।


आपका फॅमिली ही आपके लिए दोस्त है इसके आलावा और कोई नहीं। साथ रहना है तो फॅमिली के साथ रहिये और दुष्ट आपका कोई अहित नहीं कर सकता। कभी अगर सांप से सामना हो जाये तो भागिए और कभी अगर दुष्ट से सामना हो जाये तो और जोड़ से भागिए।



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