3 Short Real Life Inspirational Stories in Hindi | Short Inspirational Stories in Hindi

3 Short Real Life Inspirational Stories in Hindi – Hello दोस्तों, स्वामी विवेकानंद जी ने एक बार कहा था की अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करो, अपने पुरे शरीर को उस एक लक्ष्य से भर दो और हर दूसरे विचार को अपनी जिंदगी से निकाल दो, यही सफल होने का मूल मंत्र है।

दोस्तों हम में से कई डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम साहब को इंस्पिरेशन मानते हैं, लेकिन क्या आपको पता उनकी इंस्पिरेशन कौन थे ? – स्वामी विवेकानंद

और सिर्फ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जी ही नहीं निकोला टेस्ला, सुभाष चंद्र बोस, लाल बहादुर शास्त्री, और भी कई सारे ऐसे लेजेंड्स थे, जिनकी इंस्पिरेशन स्वामी विवेकानंद जी थे।

आज हम स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के तीन कहानियां आपके साथ साझा करेंगे। दोस्तों इन तीनों कहानिओं में जीवन की बहुत बड़ी सीख मिलेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

3 Short Real Life Inspirational Stories in Hindi

 

पहली कहानी – टाइम

 

एक बार स्वामी को नदी पार करना था और वो नदी के पास में खड़े थे।

तभी एक साधु ने आकर उनसे पूछा कि क्या आप ही स्वामी विवेकानंद हो ?

तब स्वामी जी ने जवाब दिया की मैं ही स्वामी विवेकानंद हूँ ?

तभी उस साधु ने पूछा की स्वामी जी आप यहाँ पर क्या कर रहे हो ?

स्वामी जी ने कहा की मुझे नदी पार करना है और मैं नाव का इंतजार कर रहा हूँ।

तभी साधु ने घमंड में कहा तुम इतने बड़े इंसान हो, कई सारे लोग तुम्हें अपनी प्रेरणा का स्त्रोत मानते हैं और तुम एक नदी पार नहीं कर सकते ? देखो मैं तुम्हें नदी पार करके बताता हूँ।

तभी उस साधु ने पानी पर चल कर उस नदी को पार किया और फिर से पानी पर चल करके स्वामी जी के पास लौट कर आये,

और स्वामी जी को बोलने लगे की देखो मेरे पास इतनी शक्ति हैं, मेरे पास इतना टैलेंट है, मेरे पास इतना ज्ञान है उसके बावजूद भी मुझे कोई नहीं जानता और तुम्हारे पास कोई ज्ञान नहीं, कोई शक्तियां नहीं, उसके बावजूद भी तुम्हें सब जानते हैं।

तभी स्वामी जी मुस्कुराये और साधु से पूछा कि तुम्हें ये विद्या सिखने में कितना टाइम लगा ?

साधु ने कहा की 15 साल।

इतने में स्वामी जी नाव आ गयी और स्वामी जी ने साधु को नाव में बैठाया और वहां से चल दिए, दोनों ने नाव में बैठ कर नदी पार की।

और नदी पार करने के बाद स्वामी जी ने अपनी जेब से एक रूपए बाहर निकाला और उस नाव वाले को दे दिया। यानी की दोनों के मिलाके 50-50 पैसे यानी एक रूपए उन्हें दे दिया।

तभी स्वामी जी ने साधु से कहा की जो काम तुम 50 पैसे में कर सकते थे उसके लिए तुम अपनी जिंदगी के बहुत कीमती 15 साल बर्बाद कर दिए, और अगर यही 15 साल तुम अगर समाज के भलाई के लिए लगाते तो आज तुम्हें भी पूरी दुनिया जानती। और मैंने यही किया। इसलिए आज मुझे पूरी दुनिया जानती है और तुम्हें कोई नहीं जानता।

और स्वामी जी ने फिर से उस साधु से कहा की तुम्हारी तरह ही कई सारे लोग इसी तरह से अपने दिन, हफ्ते, महीने और साल लगा देते हैं, जिनका उनकी जिंदगी में कोई मतलब नहीं निकलता।

इसलिए दोस्तों आप अपनी टाइम को ऐसी जगह पर लगाओ जहाँ पर उसका एक्चुअल में कोई मतलब निकले।

क्यूंकि टाइम से बढ़ कर इस दुनिया में कोई भी इम्पोर्टेन्ट चीज नहीं है, अगर समय बर्बाद तो जिंदगी भी बर्बाद।

आपने अक्सर ज्यादातर लोगो को कहते सुना होगा काश समय रहते ही हमने उस काम को कर लिया होता तो आज हम वो बन जाते या काश अगर उस टाइम हम अपने कितनी वक़्त को बर्बाद नहीं किया होता घूम फिरके, पार्टी करके तो आज हम जिंदगी में कुछ कर लेते etc.

 

 

दूसरी कहानी – नेगेटिव विचार

 

एक बार स्वामी जी एक जंगल के रास्ते से जा रहे थे किसी गाँव में, तभी वहां कुछ बन्दर उनके पीछे पर जाते हैं, कोई बन्दर उनपर लपक रहा था, कोई उनका प्रसाद छीनने की कोशिश कर रहा था।

और स्वामी जी उन बंदरों से पीछा छुड़ाने के लिए वहां से भागने लगे।

स्वामी जी भागे जा रहे थे और वो सारे बन्दर भी उनके पीछे पीछे भागने लगे, तभी एक आदमी ने स्वामी जी से कहा की आप डरो मत, इतना सामना करो, आप जितना ज्यादा इनसे डरोगे, ये आपको उतना ज्यादा डराएंगे।

तभी उस आदमी की बात सुनकर स्वामी जी पीछे मुड़ते हैं और ऑंखें निकाल कर उन बंदरो पर जोर से चीखते हैं और तभी सारे बन्दर वहां से दुम दबाकर भाग जाते हैं।

दोस्तों उन्हीं बंदरों की तरह होते हैं हमारे नेगेटिव विचार, जिनसे हम डरते हैं।

जितना ज्यादा हम अपने नेगेटिव विचारों से डरेंगे ये हमें उतना ही ज्यादा डराएंगे।

इसलिए नेगेटिव विचार और डर से डरो मत बल्कि उनका सामना करो, इनसे तुम जितना ज्यादा डरोगे, ये तुम्हें उतना ही डराएंगे, अगर तुम इनका सामना करते हो, तो नेगेटिव थॉट्स और डर भी एक तुमसे डर जायेगा।

 

 

तीसरी कहानी – असंभव कुछ नहीं

 

एक बार स्वामी विवेकानंद जी उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस जी के साथ कही जा रहे थे।

तभी रास्ते में उन्हें एक आदमी मिला, जो पत्थर पर कुछ बना रहा था।

तभी श्री रामकृष्ण परमहंस जी ने उनसे पूछा कि तुम ये क्या बना रहे हो ?

तभी उस आदमी ने जवाब दिया की मैं एक राजा की मूर्ति बना रहा हूँ।

श्री रामकृष्ण परमहंस जी ने पूछा की क्या तुम्हारे पास में उस राजा की कोई तस्वीर है ?

तभी उस मूर्तिकार ने कहा की नहीं, मेरे पास उनकी कोई तस्वीर नहीं है।

तभी रामकृष्ण परमहंस जी बोले कि अगर तुम्हारे पास उनकी कोई तस्वीर नहीं हैं, तो फिर तुम उनकी मूर्ति कैसे बना सकते हो ?

तभी उस मूर्तिकार ने जवाब दिया कि भले ही मेरे पास उनकी कोई तस्वीर नहीं हैं, लेकिन मेरे दिमाग में उनकी स्पष्ट तस्वीर छपी हुई है।

और देखते ही देखते कुछ ही देर बाद उस मूर्तिकार ने राजा की एक सुन्दर मूर्ति बना ही दिया।

स्वामी जी ये सारा दृश्य अपनी आँखों से साफ देख रहे थे और तभी उन्हें अपने कुछ सवालों का जवाब मिला।

की अगर कोई भी इंसान अपनी जिंदगी में कुछ भी पाना चाहता है तो उस मुकाम की या फिर उस चीज की तस्वीर उसके माइंड में एकदम क्लियर होना चाहिए।

 

 

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Conclusion

 

दोस्तों उम्मीद करता हूँ आपको आज का ये तीनों कहानिया पसंद आयी होगी।

आपको ये कहानी कैसा लगा और आपने स्वामी विवेकानंद जी के इन तीनों कहानिओ से क्या सीखा ?

आपके मन जो भी सवाल या सुझाव है वो मुझे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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