Acidity Treatment in Hindi | एसिडिटी का कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

Acidity Treatment in Hindi | एसिडिटी का कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज – Hello दोस्तों, आज मैं आपको एक बहुत ही कॉमन प्रॉब्लम एसिडिटी के बारे में बताएँगे। आज कल ये सभी लोगों में प्रॉब्लम देखा जाता है क्यूंकि लोगों का खान-पान बहुत ख़राब होता है। तो ज्यादातर लोगों के पेट में एसिडिटी बढ़ने लग गया है। लेकिन इससे डरने की कोई जरुरत नहीं है, इसका बहुत इलाज है, आज हम इसे आयुर्वेद की मदद से कैसे ठीक करना है वो जानेंगे।

 

तो इस आर्टिकल में मैंने बहुत सारे आयुर्वेदिक डॉक्टरों के सलाह से इसके लक्षण, इनके कारण और आयुर्वेदिक उपचार के बारे में आपके साथ साझा किया है, तो अगर आपको भी एसिडिटी का बहुत प्रॉब्लम है तो इस आर्टिकल को आगे पढ़ सकते हैं, आपको इसका आयुर्वेदिक इलाज मिल जायेगा।

 

दोस्तों इसमें जो आयुर्वेदिक उपचार बताया गया है, उसमें कोई भी आपको साइड इफ़ेक्ट देखने को नहीं मिलेगा क्यूंकि सभी कुछ इलाज पेड़ के पत्ते या कोई पेड़ के फल से बने दवाई के बारे में ही बताया गया है।

 

Acidity Treatment in Hindi | एसिडिटी का कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज

 

Acidity क्या है ?

 

पेट में गैस, सीने में जलन और अपच की दिक्कत हो तो समझ लीजिए यह एसिडिटी है। एसिडिटी यानि की अम्ल पित्त, जिसमें खाना पचाने वाले रसायन का स्त्राव या तो बहुत ज्यादा होता है या बहुत कम। एसिडिटी को चिकित्सा की भाषा में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफलक्स डिजीज (Gastroesophageal Reflux Disease) कहते हैं।

कई बार एसिडिटी के कारण व्यक्ति को सीने में दर्द (Chest Pain) की शिकायत भी हो सकती है। यदि यह तकलीफ बार- बार हो रही हो तो यह गंभीर समस्या बन जाती है। एसिडिटी के कारण कई बार भोजन, भोजन नली से सांस की नली में भी पहुंच जाता है जिससे खांसी या सांस लेने संबंधी (Respiratory) समस्या भी हो सकती है। इतना ही नहीं एसिडिटी की समस्या बढ़ने पर खट्टे पानी के साथ मुंह में खून भी आ सकता है।

 

 

Acidity क्यूँ बनता है शरीर में ?

 

  1. खान-पान में अनियमितता।
  2. खाने को ठीक से न चबाना।
  3. पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना।
  4. मसालेदार खाना ज्यादा खाना।
  5. धूम्रपान और शराब का ज्यादा सेवन।
  6. आपके लिवर दुर्बल होने की वजह से भी आपका गैस या एसिडिटी बन जाता है।
  7. पेट में gallbladder stone होने की वजह से भी गैस या एसिडिटी बनता है।

 

तो इसलिए पेट में ज्यादा एसिडिटी या गैस बनने से आप एक बार अपने आयुर्वेदिक डॉक्टर से कंसल्ट कर लीजिये।

और अगर कम है तो नीचे दिए गए घरेलु इलाज से आप ठीक हो सकते हैं।

 

 

Acidity के लक्षण क्या क्या है ? (Symptoms of Acidity)

 

  1. कभी-कभी छाती में दर्द हो सकता है।
  2. पेट में भी दर्द होते हैं।
  3. खट्टी डकारें आना।
  4. खाना या खट्टा पानी (एसिड) मुंह में आ जाना।
  5. छाती में जलन होना।
  6. पेट में गैस बनना।
  7. मतली और उल्टी।

 

 

एसिडिटी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

 

तुलसी के पत्ते (Basil Leaves)

तुलसी के पत्ते आपको तुरंत एसिडिटी, गैस और उल्टी से राहत दे सकते हैं। उपचार के लिए कुछ तुलसी के पत्ते चबा कर खाएं। इसके अलावा तुलसी के कुछ पत्ते पानी में उबालकर, उस पानी को छान लें। गुनगुना रहने पर शहद मिलाकर पिएं। यह भी एसिडिटी के लिए अच्छा उपाय है।

 

 

छाछ (Buttermilk)

छाछ पीने से भी एसिडिटी में बहुत राहत मिलती है। छाछ में पेट की अम्लता को संतुलित करने के लिए लैक्टिक एसिड होता है। उपचार के लिए मेथी के दानों को पानी के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को एक गिलास छाछ में मिलाकर पिएं। इससे पेट का दर्द भी ठीक होगा और गैस से भी राहत मिलेगी।

साथ ही, एसिडिटी भी खत्म होगी। स्वाद बढ़ाने और बेहतर परिणाम के लिए इस छाछ में काला नमक और काली मिर्च भी मिलाई जा सकती है।

 

 

सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar)

सेब का सिरका भी एसिडिटी को ठीक करने का आसान तरीका है। उपचार के लिए एक कप पानी में दो चम्मच कच्चा सेब का सिरका मिलाकर दिन में दो बार पिएं। खाना खाने से पहले भी इसे पिया जा सकता है।

 

 

जीरा (Cumin)

जीरा भी एक बेहतरीन एसिड न्यूट्रालाइजर (Acid Neutralizer) है जो एसिडिटी को कम करता है। इसके साथ ही पाचन शक्ति को बढ़ाकर पेट दर्द से भी राहत देता है। उपचार के लिए जीरा को भूनकर उसका पाउडर बनाएं। इस पाउडर को खाना खाने के बाद एक गिलास पानी में मिलाकर पिएं। जीरा पाउडर को छाछ में मिलाकर भी पिया जा सकता है।

 

 

अदरक (Ginger)

अदरक में पेट की अम्लता से लड़ने के गुण होते हैं जो एसिडिटी से राहत देते हैं। उपचार के लिए खाने के बाद अदरक का एक छोटा टुकड़ा मुंह में रखकर चबाएं। या फिर एक कप पानी में अदरक को कुचलकर डालें और उबालें। इस पानी को छनकर पिएं।

 

 

ठंडा दूध (Cold Milk)

दूध पेट में एसिड के निर्माण को रोकता है साथ ही गैस्ट्रिक एसिड को स्थिर करके एसिडिटी की समस्या होने से बचाता है। हालांकि एसिडिटी की समस्या होने पर सिर्फ ठंडा दूध ही पीना चाहिए। गरम दूध उतना लाभकारी नहीं होता।

 

 

सौंफ (Fennel)

सौंफ खाने को पचाने में सहायता करती है और गैस को दूर रखती है। हर रोज खाना खाने के बाद सौंफ को मुंह में रखकर चबाएं। सौंफ के साथ मिश्री भी मिलाई जा सकती है। ऐसा करने से एसिडिटी से राहत मिलती है।

 

 

एसिडिटी का परमानेंट इलाज क्या है?

 

  1. पानी ज्यादा से ज्यादा से पीएं
  2. चाय-कॉफी कम से कम पीएं
  3. कोल्डड्रिंक या अन्य आर्टिफिशियल पेय न लें
  4. खाना समय से खाएं और खाकर कुछ देर टहलें, तुरंत सोएं नहीं
  5. ज्यादा तला-भुना या मसालेदार खाना न खाएं
  6. भोजन बनाने में हींग का प्रयोग करें
  7. अगर आपके पेट में गैस या एसिडिटी बहुत ज्यादा बन रहा है तो एक बार अपने एरिया के आसपास के आयुर्वेदिक डॉक्टर को जरूर दिखाए। क्यूंकि कई बार ये देखा गया है की पेट gallbladder stone होने के कारण भी पेट में ज्यादा गैस बनते हैं।
  8. अगर आप अफ़्फोर्ड कर सकते हैं तो हर साल एक बार अपने पेट का Ultrasound जरूर करवाए।

 

 

Conclusion

 

तो दोस्तों आपको आज का पोस्ट “Acidity Treatment in Hindi | एसिडिटी का कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज” कैसा लगा और आपको इन घरेलु आयुर्वेदिक दवाई से लाभ कितना मिला है मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

अगर ज्यादा एसिडिटी है तो मेरा रिकमेन्डेशन है की आप आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जरूर जाये।

क्या आपने ऐसे कई घरेलु नुस्खे पहले त्राय किया ?

दोस्तों हो सके तो एलोपैथिक मेडिसिन का सहारा ना ले, क्यूंकि इनके बहुत सारे साइड इफ़ेक्ट होते हैं।

एलोपैथिक मेडिसिन एसिडिटी तो ठीक कर देगा और जब दवाई का डोज़ कम हो जायेगा तब फिर से गैस बनने लगता है।

इसलिए आयुर्वेदिक मेडिसिन का सहारा लीजिये और खान-पान को ठीक कीजिये और आप पर्मानेंट्ली ठीक हो जायेगा।

दोस्तों इस पोस्ट “Acidity Treatment in Hindi | एसिडिटी का कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक इलाज” को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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