एक्युप्रेशर VS एक्युपंचर: Acupressure और Acupuncture में क्या अंतर है ?

एक्युप्रेशर VS एक्युपंचर: Acupressure और Acupuncture में क्या अंतर है ?

 
 एक्युप्रेशर (Acupressure) दो शब्दों Acus+pressure से बना है। Acus लैटिन का शब्द है जिसका अर्थ सूई (needle) तथा pressure अंग्रेजी का शब्द है जिसका अर्थ दबाव डालना है। व्यावहारिक रूप में एक्युप्रेशर का अभिप्राय सूइयों द्वारा इलाज से नहीं है। सूइयों द्वारा इलाज का नाम एक्युपंचर(Acupuncture) है।
 
 यद्यपि प्रचलित रूप में एक्युप्रेशर तथा एक्युपंचर दोनों ही चीनी पद्धतियाँ मानी जाती हैं तथा दोनों एक-दूसरे से मिलती-जुलती हैं पर इनमें मुख्यतः यह अन्तर है कि एक्युपंचर में रोग निवारण के लिए सूइयों का प्रयोग किया जाता है अर्थात एक विशेष प्रकार की सूइयाँ एक खास ढंग से शरीर के कई भागों (key points) पर लगाई जाती हैं ।
 
 एक्युप्रेशर पद्धति में सूइयों की बजाए हाथों के अँगूठों, अँगुलियों या किन्हीं उपकरणों से रोग से सम्बन्धित केन्द्रों पर दबाव डाला जाता है जिसे प्रेशर, डीप मसाज या गहरी मालिश (compresslon massage) कहते हैं।
 
 शरीर के विभिन्न अंगों से सम्बन्धित ये केन्द्र हाथों, पैरों, चेहरे तथा कानों पर स्थित हैं। रीढ़ की हड्डी के साथ-साथ तथा शरीर के कई अन्य भागों पर भी अनेक एक्युप्रेशर केन्द्र हैं। इन आकृतियों में केवल उन्हीं केन्द्रों को दर्शाया गया है जिन्हें प्रमुख रिफ्लैक्स केन्द्र (Main Reflex Centres) कहा जा सकता है।
 
 इन केन्द्रों की पहचान एवं जाँच प्रत्येक व्यक्ति आसानी से कर सकता है। वैसे तो चीनी चिकित्सकों ने सारे शरीर पर सैंकड़ों एक्युप्रेशर केन्द्रों का पता लगाया है लेकिन उन सब केन्द्रों की पहचान करना एक साधारण व्यक्ति के लिए कठिन कार्य है।
 
 सामान्य रोगों के उपचार के लिए इन सब केन्द्रों की पहचान करना जरूरी भी नहीं है। केवल पैरों, हाथों, चेहरे, कानों, पीठ तथा शरीर के कुछ भागों पर प्रमुख केन्द्रों पर प्रेशर डालने से ही सारे रोगों को दूर किया जा सकता है।
 
 पैरों, हाथों, चेहरे तथा कानों पर लगभग एक जैसे एक्युप्रेशर केन्द्र हैं पर एक्युप्रेशर चिकित्सा में पैरों का प्रथम स्थान है। पैरों में प्रतिबिम्ब केन्द्रों की जाँच आसानी से हो जाती है और इन पर प्रेशर भी आसानी से दिया जा सकता है।
 
 प्रतिबिम्ब केन्द्रों की ठीक जाँच हो जाने और ठीक प्रेशर देने के कारण सारे रोग शीघ्र दूर हो जाते हैं।
 
 जाँच तथा प्रभाव के सम्बन्ध में दूसरा नम्बर हाथों के प्रतिबिम्ब केन्द्रों का है। चेहरे, कानों, पीठ तथा शरीर के विभिन्न भागों पर स्थित अनेक एक्युप्रेशर केन्द्र भी काफी महत्वपूर्ण हैं। अच्छा तो यह है कि रोग की अवस्था में पैरों, हाथों, चेहरे, कानों तथा पीठ पर स्थित रोग से सम्बन्धित एक से अधिक प्रतिबिम्ब केन्द्रों पर प्रेशर दिया जाए। ऐसा करने से काफी अच्छा प्रभाव पड़ता है और रोग शीघ्र दूर हो जाता है।
 
 चेहरे तथा कानों पर विभिन्न एक्युप्रेशर केन्द्रों पर प्रेशर हाथों के अँगूठों या अँगुलियों के साथ देना चाहिए और वह भी धीरे-धीरे तथा हल्का देना चाहिए। इन केन्द्रों पर किसी प्रकार के किसी उपकरण (gadgets) का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
 
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