Andrew Carnegie की सक्सेस स्टोरी | Andrew Carnegie Biography in Hindi

Andrew Carnegie की सक्सेस स्टोरी – Hello दोस्तों, क्या आपने Andrew Carnegie के बारे में सुना है ? कभी पढ़ा है उसके बारे में ? अगर नहीं तो आपको आज के इस आर्टिकल में उनके बारे में पता चल जायेगा। आज हम उनकी सक्सेस जर्नी के बारे में जानेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Andrew Carnegie की सक्सेस स्टोरी | Andrew Carnegie Biography in Hindi

 

Andrew Carnegie स्कॉटलैंड में जन्मे एक इंदुस्ट्रियालिस्ट थे, जिन्होंने अपनी ग़रीबी में अमेरिका आकर दुनिया का सबसे अमीर इंसान बनकर दिखाया।

 

 

जन्म

 

Andrew Carnegie का जन्म 1835 में Dunfremline Scotland में हुआ था, उनके पिता का नाम William Carnegie और माँ का नाम Margaret Morrison Carnegie था।

 

Dunfremline लिनेन का कपड़ा बनाने के लिए फ़ेमस था लेकिन किसी रीज़न से लिनेन का काम धीरे-धीरे कम होने लगा और कपड़े का काम कम होने की वजह से Andrew के पिता का काम भी बंद हो गया।

 

Andrew के पिता का काम बन्द होने की वजह से चार्टिस्ट आंदोलन जॉइन किया लेकिन 1848 में वो आंदोलन विफ़ल हो गया, तभी Will और Margaret ने अपना सारा सामान बेच दिया ताकि वो अपने बेटे Andrew और Tom को लेकर अच्छे फ़्यूचर के लिए अमेरिका जा सके उस वक़्त Andrew की उम्र सिर्फ़ 13 साल थी।

 

1848 में ही Andrew के पिता Will ने Allegheny, Pennsylvania में बसने का फ़ैसला किया जहाँ उनके दोस्त और रिश्तेदार रहते थे और Andrew और उनकी फ़ैमिली अमेरिका शिप से गये थे जो न्यूयॉर्क पहुँचाता था, Andrew बड़े शहर में आकर वहाँ के लोगों और हलचल को देखकर अचंभित थे।

 

न्यूयॉर्क से Andrew की फ़ैमिली एक स्टीम बोट से Pennsylvania अपने रिलेटिव्स के यहाँ चले गए और वहाँ एक बुनाई की दुकान पर जाकर काम करने लग गए लेकिन कुछ टाइम बाद उनके पिता का बुनाई का काम भी फ़ैल हो गया।

 

 

सक्सेस जर्नी

 

13 साल की उम्र में Andrew ने Pennsylvania की एक कपड़ा बनाने की फैक्ट्री में बोबिन बॉय का काम किया, जहाँ से उन्हें एक हफ़्ते का 1.20 डॉलर मिलता था।

 

1 साल बाद Andrew ने वहाँ की एक टेलीग्राफ कंपनी में मैसेंजर का काम किया और कुछ टाइम बाद उन्होंने काम सीख लिया और उन्हें टेलीग्राफ ऑपरेटर की जॉब मिल गयी।

 

लगभग 10 साल वहाँ काम करने के बाद Andrew टेलीग्राफ ऑपरेटिंग में इतने मास्टर हो गए की उन्हें Pennsylvania Railroad में Superintendent पद पर नौकरी मिल गयी, उस टाइम उनकी उम्र 24 साल थी और उसी जॉब के दौरान वो James Anderson की खोली गई लाइब्रेरी में पढ़ाई भी कर रहे थे।

 

Railroad की नौकरी के दौरान Andrew के बॉस Homas A. Scott ने Andrew को एडम्स एक्सप्रेस कंपनी के 10 शेयर्स खरीदने की सलाह दी और Andrew की माँ Margaret ने अपने घर का सामान बेच कर Andrew को 500 डॉलर दिए, जो Andrew की लाइफ़ का पहला इन्वेस्टमेंट था और जल्द ही उन्हें उसमें प्रॉफिट होने लगा।

 

Railroad के काम से जुड़े रहने के दौरान Andrew ने कहीं और भी काम देखना शुरू किया, कुछ समय बाद Theodore Woodruffne Andrew को स्लीपिंग रेल कार का आईडिया दिया और Andrew ने उसमें इन्वेस्ट करके उसमें अपना हिस्सा ले लिया, जिसका नाम Woodruff Sleeping Car Company था।

 

Andrew ने उसमें इन्वेस्ट करने के लिए बैंक लोन लिया था जो Andrew की लाइफ़ बदल देने वाला एक सौदा था।

 

30 उम्र में Andrew ने लोहे के काम, लेक पर स्टीमर और ऑयल के काम में इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया, बाद में वो फाइनली लोहे के काम में ज़्यादा इंटरेस्ट दिखाने लगे और उन्होंने अपनी खुद की कंपनी Carnegie Steel Corporation बनाई और फिर Andrew अपनी मेहनत की वजह से दिन ब दिन अमीर होते गए।

 

Andrew को मॉडर्न Philanthropy का जनक कहा जाता है, उन्होंने 1870 के बाद Philanthropy का काम करना शुरू कर दिया, Andrew को ज़्यादातर अपने द्वारा खोली गयी फ्री लाइब्रेरी के लिए जाना जाता है, अपने philanthropy के काम के दौरान ही उनकी मुलाक़ात Louise Whitfield से हुई जिनसे वो न्यूयॉर्क में मिले थे।

 

बाद में वो भी Andrew के काम में उनका साथ देने लगी, उसके 2 साल बाद उन्होंने Gospel Of Wealth बुक लिखी जिसमें उन्होंने अमीर लोगों को अपने धन को दान देने और दुनिया में अच्छा काम करने के लिए कई विचार रखे।

 

 

काम से रिटायरमेंट

 

1901 में Andrew ने अपनी कंपनी को 480 मिलियन डॉलर में J.P Morgan को बेच दिया और रिटायर हो गए, रिटायरमेंट के बाद Andrew ने अपने धन को लाइब्रेरी के अलावा चर्च बनवाने में यूज़ किया, उन्होंने अपने धन से कई देशों में स्कूल, कॉलेज और NGO बनाये।

 

उन्होंने अपने नाम से कई ट्रस्ट बनाये जिससे वो लोगों की मदद कर सके जैसे Carnegie Museum Of Pittsburg, The Carnegie Trust For The Universities Of Scotland, Carnegie Institution For Science, Carnegie Foundation (supporting the peace places), Carnegie Dunfermline Trust, Carnegie Foundation For The Advancement Of Teaching, Carnegie Endowment For International Peace और The Carnegie UK Trust.

 

Carnegie ने अपनी Philanthropy के ज़रिए 2509 लाइब्रेरीज़ बनवाई, जिसमें से 1679 लाइब्रेरीज़ सिर्फ़ अमेरिका में थी, जिसमें उन्होंने 55 मिलियन डॉलर दान दिए थे। उन्होंने लाइब्रेरी बनाने पर अपना ध्यान इसलिए दिया क्योंकि वो खुद एजुकेटेड नहीं थे और वो ऐसे लोगों तक एजुकेशन पहुँचाना चाहते थे जिनके पास पढ़ने-लिखने के लिए प्रयाप्त धन नहीं हैं।

 

11 अगस्त 1919 को Carnegie की मौत हो गयी, उन्होंने अपनी डेथ के टाइम जितना भी धन कमाया था सब-कुछ लोगों की भलाई और दुनिया में शांति फैलाने के लिए दान दे दिया था लेकिन वर्ल्ड वॉर की वजह से वो आखिरी समय में भी खुश नहीं थे क्योंकि उनके द्वारा इतना सब कुछ किये जाने के बाद भी दुनिया में इस तरह की घटनाएं होती जा रही थी।

 

 

Conclusion

 

दोस्तों देखा लोग अपने मेहनत के दम पर कहाँ से कहाँ तक पहुँचते हैं ?

आपको Andrew Carnegie की सक्सेस स्टोरी से इंस्पिरेशन लेना चाहिए।

क्या ऐसे बिजनेसमैन के बारे में जानना अच्छा लगता है, क्या आप भी बिजनेसमैन बनना चाहते हैं ?

आपको आज का या आर्टिकल अच्छा लगा ही होगा, तो मुझे ये बताइये की क्या आप कौनसा बिज़नेस करना चाहेंगे ?

आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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