Aryabhatta की सक्सेस स्टोरी | Aryabhatta Biography in Hindi

Aryabhatta की सक्सेस स्टोरी | Aryabhatta Biography in Hindi – Hello दोस्तों, Aryabhatta प्राचीन काल के एक महान गणितज्ञ और एस्ट्रोनॉमर थे जिन्होंने मॉडर्न साइंस से लगभग 1500 साल पहले अपनी कैलकुलेशन और इंटेलिजेंस से एस्ट्रोलॉजी में महारत हासिल की और उनके द्वारा की गयी खोज मॉडर्न साइंटिस्ट के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। तो आज उन्हीं के सक्सेस जर्नी के बारे में जानेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Aryabhatta की सक्सेस स्टोरी | Aryabhatta Biography in Hindi

 

 

जन्म और पढाई

 

Aryabhatta के जन्म को लेकर कई बातें सामने आती है लेकिन किसी के पास उनके जन्म को लेकर स्ट्रोंग एविडेंस नहीं हैं, लेकिन कई जगहों पर उनके बारे में पढ़कर ये पता चलता है कि उनका जन्म 476 AD में पटना (पाटलिपुत्र) के पास कुसुमपुर गाँव में हुआ था और रिसर्च के अनुसार उनकी पढ़ाई भी नालंदा यूनिवर्सिटी में हुई थी।

 

 

जर्नी

 

Aryabhatta ने कई मैथेमैटिकल और एस्ट्रोनॉमिकल ग्रंथ लिखे हैं लेकिन उनमें से जो मैन है और जिसकी वजह से लोग उन्हें जानते है, उसका नाम Aryabhatiya है, जिसमें मैथ्स और एस्ट्रोनॉमी से रिलेटेड जानकारी को कविता के रूप में लिखा गया है। उन्होंने यह ग्रंथ 23 की उम्र में लिखा था और इसी ग्रंथ की वजह से राजा Buddhagupta ने उन्हें नालंदा विश्वविद्यालय का प्रमुख बना दिया।

 

सबसे पहले Aryabhatta ने ही ये सिद्ध किया और बताया कि पृथ्वी गोल है और इसकी परिधि का अनुमान 24835 मील है, ये एक धुरी पर घूमती है जिसकी वजह से दिन और रात होते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण होने के भी कारण बताए।

 

 

Aryabhatta जी के ग्रंथ

 

Aryabhatta ने बहुत से ग्रंथ लिखे है लेकिन आज के समय में 4 ग्रंथ ही मौजूद है बाकी के ग्रंथ अस्तित्व में नहीं है, उन 4 ग्रंथों का नाम आर्यभट्ट, दशगीतिका, तंत्र और आर्यभट्ट सिद्धांत है। आर्यभट्ट उनमें से सबसे लोकप्रिय ग्रंथ है जिसमें कुल 121 श्लोक है और उन 121 को भी अलग-अलग भागों में लिखा गया है –

 

  1. गीतिका पद – इसमें 13 श्लोक है और इसमें सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों के बारे में बताया गया है।
  2. गणित पद – इसमें अंकगणित, बीजगणित और ज्यामिति के बारे में बताया गया है।
  3. काल क्रिया पद – इसमें हिन्दू टाइम पीरियड और ग्रहों की दशा के बारे में बताया गया है ।
  4. गोल पद – इसमें स्पेस, साइंस और एस्ट्रोलॉजी के बारे में बताया है।

 

इसके अलावा आर्यभट्ट ने हमें कई सिद्धांतों के बारे में बताया है जिसमे शंकु यंत्र ( Gnomon), छाया यंत्र (shadow instrument), बेलनाकार यस्ती यंत्र (cylindrical instrument), छात्रा यंत्र (umbrella device) और भी कई यंत्रो के बारे में उन्होंने अपने ग्रंथ में बताया है।

 

 

Aryabhatta जी के गणित

 

आर्यभट्ट ने मैथ में जो योगदान दिया है वो पीयरलेस है, उन्होंने ट्रायंगल और सर्किल के क्षेत्रफल निकालने के जो सूत्र 1500 साल पहले दिए वो सही साबित हुए। उन्होंने जो PI का मान दिया 3.14 वो भी सही साबित हुआ, उन्होंने PI का मान अपनी गणितपद में कुछ इस तरह दिया कि 100 में 4 जोड़े 104 फिर उसे 8 से गुणा करे और उसमें 62000 जोड़े और उसमें 20000 का भाग देंगे तो PI का मान आ जाता है।

 

[(4 + 100) × 8 + 62,000 ] / 20,000 = 62,832

 

62,832 / 20,000 = 3.1416

 

उन्होंने पृथ्वी की परिधि के बारे में भी अपने ग्रंथ में बताया, उन्होंने बिना किसी डिवाइस से अपनी कल्पना से पृथ्वी की परिधि को 49968.05 किलोमीटर बताया जो असल परिधि से 0.2% कम है और मॉडर्न साइंस के लिए आज भी सरप्राइज़िंग है कि उस टाइम बिना किसी GPS और एकदम कम से कम डिवाइस के साथ ये कैलकुलेशन कर पाना कैसे पॉसिबल है।

 

ज़ीरो की खोज भी आर्यभट्ट ने की,

 

एकं च दश च शतं च सहस्रं तु अयुतनियुते तथा प्रयुतम्.

कोट्यर्बुदं च वृन्दं स्थानातू स्थानं दशगुणं स्यात् ॥ २॥

 

इस श्लोक से मतलब निकलता है कि अगर आप “0” को किसी भी चीज़ के आगे लगाते हो तो उसका मान 10 गुना बढ़ जाता है।

 

आर्यभट्ट ने त्रिकोणमिति और बीजगणित के बारे में भी अपने ग्रंथ के गणित पद में लिखा है।

 

इसके अलावा आर्यभट्ट ने सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के बारे में जो जानकारी दी है वो भी बिल्कुल सटीक निकली, सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण होने के रीज़न भी बताए, इसके साथ-साथ उन्होंने ये भी बता दिया था कि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है और उसकी वजह से अंतरिक्ष मे तारों की पोजीशन में हमें फ़र्क नज़र आता है।

 

ये सब बातें आर्यभट्ट ने आज से लगभग 1500 साल पहले बता दी थी और आज के मॉडर्न ज़माने में उनकी बातों और बताई गई जानकारी पर रिसर्च की गई तो उसमें पता चला कि उनकी सभी जानकारी लगभग परफेक्ट है, उसी से उनके इस अद्भुत नॉलेज के बारे में हमें पता चलता है। उनके बारे में जितनी जानकारी मौजूद है उसके मुताबिक साल 550 में 74 की उम्र में आर्यभट्ट का निधन हो गया।

 

आर्यभट्ट के नाम से भारत ने अपना पहला उपग्रह अंतरिक्ष में छोड़ा, जिसे 19 अप्रैल 1975 को लॉन्च किया गया । उनकी पर्सनल जानकारी के कोई भी स्ट्रोंग एविडेंस आज अवेलेबल नहीं है लेकिन हम उनकी इंटेलिजेंस का अंदाज़ा लगा सकते हैं।

 

 

 

 

Conclusion

 

दोस्तों क्या आपको आज से पहले आर्यभट्ट जी के बारे में इतना कुछ पता था ?

आज का यह आर्टिकल “Aryabhatta की सक्सेस स्टोरी | Aryabhatta Biography in Hindi” आपको कैसा लगा ?

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