Becoming Book Summary in Hindi | मिशेल ओबामा की आत्मकथा

Becoming Book Summary in Hindi – Hello दोस्तों, Becoming बुक में हम अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बाराक ओबामा की पत्नी मिशेल ओबामा के बारे में जानेंगे। यह किताब उनकी आत्मकथा है जिसमें उन्होंने बताया है कि किस तरह से शिकागो के एक छोटे परिवार से निकलकर उन्होंने वाइट हाउस तक के सफर को तय किया।

यह किताब उनकी जिन्दगी की मुश्किलों के बारे में हमें बताती है और साथ ही यह भी बताती है कि किस तरह से उन्होंने उन्हें पार कर के कामयाबी हासिल की।

अगर आपको आत्मकथा पढ़ना अच्छा लगता हैं, अगर आप मिशेल ओबामा के बारे में जानना चाहते हैं, या अगर आप कामयाब लोगों की जिन्दगी से उनकी कामयाबी के राज के बारे में  सीखना चाहते हैं तो ये बुक आपके लिए है।

 

लेखिका

मिशेल ओबामा (Michelle Obama) अमेरिका की एक लेखिका, वकील और यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेटर हैं। वे अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति बाराक ओबामा की पत्नी हैं और 2009 से 2017 तक अमेरिका की फर्स्ट लेडी थीं।

 

विषय - सूची

Becoming Book Summary in Hindi – मिशेल ओबामा की आत्मकथा

 

यह किताब आपको क्यों पढ़नी चाहिए?

 

आम आदमी के मन में राजनीति को लेकर नफरत होती है। उसे लगता है कि पावर पाने के लिए यह एक गंदा खेल है जो लोग जनता के साथ और अपने विरोधियों के साथ खेलते हैं। आम आदमी राजनीति में नहीं आना चाहता।

लेकिन अगर बहुत से लोगों को आप से उम्मीदें हों कि आप उनके लिए कुछ अच्छा कर सकते हैं, तो क्या फिर भी आ इसके लिए इनकार करेंगे?

मिशेल ओबामा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। वो भी शुरुआत में नहीं चाहती थीं कि ओबामा राजनीति में उतरें, लेकिन बाद में उन्होंने उसके लिए हाँमी भर दी। यह किताब मिशेल ओबामा की आत्मकथा है। यह हमें बताती है कि किस तरह से वे ओबामा से मिलीं और किस तरह से उन्होंने अपने वाइट हाउस तक के सफर को उनके साथ तय किया।

इस बुक को पढ़के आपको पता चलेगा कि मिशेल की मुलाकात ओबामा से किस तरह हुई, ओबामा किस तरह से अमेरिका के पहले काले राष्ट्रपति बने और वाइट हाउस में एक राष्ट्रपति और उनके परिवार की जिन्दगी कैसी होती है।

 

 

मिशेल ओबामा का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था जो उन्हें बहुत प्यार करता था।

 

मिशेल का असली नाम मिशेल रोबिनसन था। 1968 में शिकागो जब पुलिस और विएतनाम युद्ध के खिलाफ विरोध करने वाले लोगों में लड़ाई शुरू हुई तो मिशेल उस समय सिर्फ 4 साल की थीं। उस समय उन्हें राजनीति की जानकारी नहीं थी और वे अपने खिलौनों से खेलने में व्यस्त थीं। उनका परिवार लड़ाई वाली जगह से सिर्फ 9 किलोमीटर दूर था।

मिशेल का परिवार उन्हें बहुत प्यार करता था। उनके परिवार को म्यूजिक का बहुत शौक था। मिशेल के घर में हमेशा जैस की धुन गूँजती रहती थी। मिशेल के पिता एक वाटर फिल्ट्रेशन प्लान्ट में काम करते थे। मिशेल का एक भाई भी था जो उनसे 2 साल बड़ा था। उनकी माँ किसी भी खास सामाजिक काम के लिए पैसे इकट्ठा करने में माहिर थी।

मिशेल का परिवार एक दो फ्लोर के घर में दूसरे फ्लोर पर रहता था। पहले फ्लोर पर उनके नाना नानी रहते थे। मिशेल की नानी का नाम रोबी था जो कि एक पियानो की टीचर थी। मिशेल का बचपन इसी संगीत में गुजरा। वे अक्सर नीचे से अपनी नानी और उनके स्टुडेंट्स के पियानो की धुन सुना करती थीं। रोबी ने उन्हें भी पियानो बजाना सिखाया।

लेकिन रोबी कुछ सख्त स्वभाव की थी और वो कुछ ज्यादा काम करने के लिए देती थी। साथ ही मिशेल भी कभी कभी उनसे लड़ बैठती थी। वो बचपन से ही ताकतवर दिमाग की थी। लेकिन फिर भी उनकी नानी ने उनकी मदद की।

मिशेल ने पहली बार एक भरी सभा में पियानो रुसवेल्ट यूनिवर्सिटी के कान्सर्ट हाल में बजाया था। यहाँ पर वे यह देखकर हैरान हो गई कि पियानो में सी चिप का बटन है ही नहीं। यही वो बटन था जिसे देखकर वो जान जाती थी कि कौन सा चिप दबाने पर कौन सी धुन बजेगी, लेकिन क्योंकि यहां पर उस एक खास बटन पर निशान नहीं लगाया गया था, वो वहाँ जाने के बाद घबरा गई। यहाँ पर उनकी नानी उनकी मदद के लिए आई और उन्होंने उनकी उंगली को उस सी चिप पर ले जा कर रख दिया। इसके बाद मिशेल ने अपना पियानो बजाया।

 

 

मिशेल को एक अच्छा स्टुडेंट बनाने में उनकी माँ ने उनकी मदद की।

 

शिकागो में बहुत सारे बदलाव आ रहे थे। वहाँ के रहने वाले लोग उस शहर को छोड़कर जाने लगे थे। 1950 में वहाँ पर 96% गोरे लोग रहते थे, लेकिन 1981 तक वहाँ पर 96% काले लोग रहने लगे। मिशेल इसी माहौल में बढ़ रही थी। क्योंकि सारे गोरे लोग जा चुके थे, अब वहाँ पर रहने वाले ज्यादातर लोग गरीब थे जिसकी वजह से स्कूलों की हालत खराब होने लगी।

इसके अलावा वहाँ का व्यापार भी खराब होने लगा और लोगों में गरीबी बढ़ने लगी। मिशेल जिस स्कूल में पढ़ती थीं, अब वहाँ पर गोरे और काले दोनों लोगों के बच्चे आकर पढ़ने लगे।

हालांकि ज्यादातर लोग शहर के उस हिस्से से निकल कर भाग रहे थे, लेकिन मिशेल के परिवार के लिए वो जगह अब भी एक घर की तरह है। उनकी माँ ने वहाँ के लोगों की मदद करने की हर तरह से कोशिश की। साथ ही उन्होंने मिशेल की पढ़ने में बहुत मदद की।

मिशेल को अपने स्कूल से बहुत नफरत थी जब दो दूसरी कक्षा में से थी। उनके क्लास के बच्चे बहुत शरारत करते थे और उनके टीचर उन्हें संभाल भी नहीं पाते थे। ऐसे में उनकी माँ ने उन्हें तीसरी कक्षा में डाल दिया जहाँ के बच्चे अच्छे थे और टीचर समझदार थे। मिशेल ने यहां से मन लगाकर पढ़ना शुरू किया।

इसके बाद वे शिकागो के एक बहुत अच्छे स्कूल में गई जिसका नाम विट्नी एम यंग हाई स्कूल था। यहाँ पर पूरे शहर के सबसे होनहार बच्चे आते थे और यहां पर एडमिशन लेने के लिए लोगों को एक टेस्ट पास करना होता था। मिशेल को खुद पर बहुत शक था कि वो इस स्कूल के लायक थी या नहीं। लेकिन उन्होंने यह के टेस्ट पास किया और उस स्कूल में पढ़ने के लिए चलीं गई।

स्कूल उनके घर से बहुत दूर था और उन्हें आने जाने में बहुत समय लगता था। वहाँ के टीचर बहुत अच्छे थे जिससे मिशेल ने स्कूल में अच्छा करना शुरू किया और उन्हें अच्छे मार्क्स मिलने लगे। इससे उनका शक दूर हुआ और वे खुद को काबिल समझने लगीं।

 

 

मिशेल ने प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर एक नई दुनिया की तरफ कदम बढ़ाया।

 

मिशेल यंग हाई स्कूल में बहुत अच्छा कर रही थीं। वे अपने क्लास के सबसे होनहार बच्चों में से एक थीं और लोग उनकी काबिलियत को समझने लगे थे। लेकिन फिर भी कुछ लोग उनसे कहते थे कि वे अभी प्रिंसटन के लायक नहीं हैं और उन्हें इतने ऊँचे ख्वाब नहीं देखने चाहिए।

मिशेल की एक प्रोफेशनल काउंसेलर से मीटिंग थी जिसमें काउंसेलर ने मिशेल से कहा कि उसे प्रिंसटन के बारे में नहीं सोचना चाहिए क्योंकि वो उसकी पहुंच से दूर है। लेकिन मिशेल के भाई क्रेग को पहले ही वहाँ पर एडमिशन मिल चुका था और मिशेल चाहती थीं कि वे वहाँ पर जाकर अपने भाई के साथ पढ़ें। इसलिए उन्होंने काउंसेलर की बात टालकर प्रिंसटन का फार्म भर दिया और उन्हें भी वहाँ पर एडमिशन मिल गया।

इसके बाद मिशेल को एक नई दुनिया देखने को मिली। प्रिंसटन में उस समय बहुत कम काले लोग थे और वहाँ के ज्यादातर बच्चे गोरे थे। लेकिन वहाँ पर थर्ड वर्ल्ड सेंटर था जो कि यह देखता था कि वहाँ पर रंग के हिसाब से भेदभाव बिल्कुल ना हो इसलिए मिशेल को वहाँ पर ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेकिन फिर भी, क्योंकि वहाँ पर उनकी तरह के लोग नहीं थे, उन्हें कुछ असुविधा महसूस होती थी।

थर्ड वर्ल्ड सेंटर को अब कार्ल ए फील्ड्स सेंटर फार इक्वेलिटी एण्ड कल्चरल अंडरस्टैंडिंग के नाम से जाना जाता है। इसकी एक लीडर का नाम जर्नी ब्रैस्वेल था जो कि एक काली महिला और एक माँ थी। मिशेल की ज़र्नी से बहुत अच्छी दोस्ती हो गई और वे उनकी असिस्टेंट बन गई।

ज़र्नी ने मिशेल को पढ़ने के लिए अलग अलग लेखकों की किताबों के नाम दी, उनके सवालों के जवाब दिए और साथ ही उन्हें जिन्दगी के बारे में कुछ जरुरी बातें बताई। उनके साथ रहकर मिशेल स्कूल के समय के बाद काले बच्चों के लिए एक स्कूल भी चलाने लगीं।

जर्नी मिशेल के लिए एक मिसाल थीं। उनमें मिशेल को अपना भविष्य दिखता था। उन्हें लगता था कि वे भी एक दिन उनकी तरह माँ बनेंगी और सारी जिम्मेदारियों को उठाएंगी।

 

 

मिशेल की मुलाकात बाराक ओबामा से 1988 में हुई।

 

मिशेल ने अपनी ज्यादातर जिन्दगी सिर्फ कामयाबी पर ध्यान लगाया था। उनके पास अपने काम पर ध्यान लगाने के अलावा कोई काम नहीं था। लेकिन जब वे ओबामा से मिलीं, तो उनका मन कुछ बदल गया।

मिशेल ने एलएसएटी (LSAT) टेस्ट को पास किया जिससे उन्हें सीधा हार्वर्ड लॉ स्कूल में एडमिशन मिल गया। 1988 में हार्वर्ड से निकलने के बाद उन्होंने सीड्ली एण्ड आस्टिन नाम का एक फर्म जाइन किया जहां पर उनकी मुलाकात ओबामा से हुई। उनसे मिलने से पहले ही मिशेल ने उनके बारे में बहुत तारीफें सुन रखी थीं।

हर कोई उनके आत्मविश्वास की तारीफ करता था और उनसे बहुत प्रभावित रहता था। उनके प्रोफेसर उन्हें बहुत मानते थे। लेकिन मिशेल को लग रहा था कि ये गोरे लोग किसी भी आधे पागल व्यक्ति को समझदार कह देते थे। इसलिए वे ओबामा से दूरी बना कर रखती थीं।

सीड्ली एण्ड आस्टिन में मिशेल का काम था वहाँ के होनहार लॉ स्टुडेंट्स से मिलकर उन्हें बाद में उसी फर्म के लिए काम करने के लिए मनाना। क्योंकि ओबामा होनहार थे, इसलिए उन्हें उनसे मिलना पड़ा। उस एक मुलाकाल का मिशेल पर बहुत असर हुआ।

ओबामा उनसे कुछ साल बड़े थे और हार्वर्ड में पढ़ने से पहले तरह तरह के काम कर चुके थे। उनमें और मिशेल में बहुत सी बातें मिलती थी। ओबामा शिकागो के उस भाग में एक आर्गनाइज़र की तरह काम कर चुके थे जहां पर मिशेल रहती थी। वे दोनों ही होनहार थे और वे एक दूसरे की बातों को समझने लगे।

ओबामा की जो बात मिशेल को नहीं पसंद थी वो यह कि वे सिगरेट पीते किन उनकी बहुत सी बातें उन्हें अच्छी लगती थी। इसलि उन्होंने अपनी पहली डेट के लिए उन्हें हाँ बोल दिया।

जब उन्होंने ओबामा को किस किया, तो उन्हें लगना लगा कि ओबामा ही उनके पति बनने के लायक हैं।

 

 

मिशेल और ओबामा शादी के बाद बहुत से समाज सेवा के काम में लग गए।

 

मिशेल का भाई क्रेग ओबामा को बहुत पसंद करता था क्योंकि ओबामा एक अच्छे बास्केटबॉल के खिलाड़ी थे। क्योंकि मिशेल अपने भाई को पसंद करती थीं और उनके भाई को ओबामा से कोई शिकायत नहीं थी, मिशेल ने ओबामा से शादी कर ली। लेकिन उससे पहले उन्हें कुछ वक्त तक अलग रहना था।

ओबामा ने जब हार्वर्ड पर अपनी पढ़ाई पूरी कर ली तो उन्होंने हार्वर्ड लॉ रिव्यू जर्नल में एक एडिटर की नौकरी कर ली। हार्वर्ड में यह नौकरी पाने वाले वो पहले काले व्यक्ति थे। इसके बाद वे 1991 में शिकागो गए जहाँ पर उन्होंने मिशेल के साथ कुछ समय बिताया। इस वक्त उन्हें बहुत सी नौकरियों के आफर आ रहे थे लेकिन वे हर किसी को ना बोल रहे थे क्योंकि उन्हें समाज सेवा के लिए काम करना था।

मिशेल भी कोई नौकरी नहीं कर रही थीं क्योंकि वो लोगों की मदद करने का काम करना चाहतीं थीं। 1991 में मिशेल की मुलाकात वैलेरी जेरेट से हुई। वैलेरी में भी समाज सेवा की भावना थी। वो काले लोगों के लिए काम करती थी। वे हैराल्ड वाशिंगटन के आफिस में काम करती थी जो कि मेयर थे और साथ ही काले लोगों के हीरो भी थे।

लेकिन उनकी मौत हर्ट अटैक की वजह से हो गई थी और नए मेयर का नाम रिचर्ड डेली थी। वैलेरी अब भी उनके आफिस में रहकर उनके सपने को पूरा करने की कोशिश कर रही थी।

वैलेरी मिशेल की अच्छी दोस्त बन गई और उसने मिशेल को नौकरी दिलाई। अब वे मिलकर समाज सेवा का काम कर रहे थे। इसके बाद 1992 में मिशेल ने ओबामा से शादी कर ली, लेकिन वे फिर भी ज्यादा देर तक साथ नहीं रह पाए।

ओबामा को प्रोजेक्ट वोट को प्रमोट करने के लिए चुन लिया गया था जिसमें उनका काम था ज्यादा से ज्यादा काले लोगों को नवंबर में होने वाले इलेक्शन के लिए वोट देने के लिए राजी करना ओबामा ने इस काम में पूरी मेहनत लगा दी और एक हफ्ते में 7000 काले लोगों को वोट देने के लिए राजी कर लिया।

1993 में मिशेल पब्लिक एलाइज के साथ व्यस्त थीं। सिटी हॉल में कुछ वक्त तक काम करने के बाद उन्होंने एक नान प्राफिट आर्गनाइजेशन में एक्सेक्यूटिव डाइरेक्टर की नौकरी को अपना लिया। यह संस्था काबिल लोगों की मुलाकात अच्छे टीचरों से करवाती थी ताकि वे लोग अपनी काबिलियत को निखार सकें।

मिशेल को यह नौकरी इसलिए पसंद आई क्योंकि एक वक्त था जब उन्हें भी एक टीचर की सख्त जरूरत थी। वे काबिल तो पहले से थी, लेकिन उन्हें इसका एहसास तब तक नहीं हुआ जब तक वे अच्छे टीचर्स से नहीं मिली। अब वे अपने जैसे लोगों की मदद करना चाहती थीं।

 

 

ओबामा और मिशेल दोनों ही शुरुआत में राजनीति में आने के लिए उत्सुक नहीं थे।

 

ओबामा के अंदर लोगों को प्रभावित करने का हुनर पहले से था। वो लोगों की खोई हुए उम्मीद जगा कर उन्हें फिर से प्रेरित करने के काबिल थे। मिशेल को उनकी यह बात सबसे ज्यादा अच्छी लगती थी। इसके अलावा प्रोजेक्ट वोट की कामयाबी के बाद ओबामा की इस खूबी पर शिकागो के मैगज़ीन ने भी ध्यान देना शुरू किया।

उन्होंने उनसे कहा कि क्यों न वे राजनीति में आ जाएं या फिर किसी सरकारी आफिस में काम करें, लेकिन ओबामा ने मना कर दिया। उस समय उन्हें अपनी एक किताब लिखनी थी ड्रीम्स फ्राम माई फादर।

ओबामा के परिवार का इतिहास बहुत उलझा हुआ था। उनके पिता केन्या के रहने वाले एक काले व्यक्ति थे और उनकी माँ कन्सस की एक गोरी महिला। उनके पिता की केन्या में पहले से ही एक पत्नी थी और ओबामा की माँ उनकी दूसरी पत्नी थी। जल्द ही ओबामा के पैरेंट्स अलग हो गए और इसके ओबामा की माँ इंडोनेशिया के एक व्यक्ति के साथ रहने लगी। उस समय ओबामा 6 साल के थे।

ओबामा के पिता की मौत 1982 में हो गई, लेकिन फिर भी वे केन्या के लोगों के साथ जुड़े हुए थे। उनकी ज्यादातर जिन्दगी हवाई और इंडोनेशिया के चक्कर काटते हुए गुजर गई क्योंकि उनकी माँ का परिवार हवाई में रहने लगा था और उनकी माँ को अपने परिवार से मिलने के लिए बार बार इंडोनेशिया से हवाई जाना पड़ता था। ओबामा ने बताया कि जब उन्होंने सबसे पहले मिशेल को देखा तो उन्हें उनमें अपनी दादी दिखाई दी।

ड्रीम्स फ्राम माई फादर की ज्यादा कापियां तो नहीं बाकी, लेकिन लोगों ने इसे पसंद किया। 1995 में यह किताब पब्लिश हुई थी और उस समय ओबामा यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो में नस्लवाद और कानून पढ़ाने रहे थे। इसी वक्त ओबामा के पास राजनीति में घुसने का मौका आया, लेकिन इस बार ना बोलने की बारी मिशेल की थी।

मिशेल चाहती थी कि ओबामा एक नान प्राफिट आर्गनाइजेशन चलाएँ, ना कि राजनीति में जाएं। लेकिन उस समय इलिनी ओस स्टेट सिनेट की सीट खाली थी जिसके लिए हाइड पार्क के एक प्रतिनिधि को चुनाव लड़ना था। ओबामा ने इनके लिए इस बार हाँ बोल दिया क्योंकि उन्हें लगा कि इस तरह से वे ज्यादा लोगों की मदद कर सकते हैं।

 

 

1998 में ओबामा और मिशेल की पहली बेटी हुई जिसका नाम मालिया ओबामा था।

 

हालांकि ओबामा और मिशेल एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे और उनमें बहुत सी बातें मिलती भी थी, लेकिन इसके बावजूद भी उनमें बहुत से अंतर थे। सबसे बड़ा अंतर यह था कि ओबामा नेगेटिव कमेंट को बहुत अच्छे से संभालने की काबिलियत रखते थे जबकि मिशेल को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि कोई उनके बारे में खराब बोले। क्योंकि अब वे राजनीति में उतर आए थे, उनके विरोधी उनके खिलाफ बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ते थे।

ओबामा उन दिनों यूएस कांग्रेस हाउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव्स के लिए चुनाव लड़ रहे थे। उनके विपक्ष में बाबी रश और डोनी ट्रोटर लड़ रहे थे। इसी बीच 1998 में उनकी पहली बेटी मालिया एन ओबामा रखा गया। मिशेल प्रेग्नेंट नहीं हो रही थी और इसके लिए उन्हें विद्रो फर्टिलाइजेशन का इस्तेमाल करना पड़ा था।

1999 में मालिया के कान में एक इंजेक्शन फैलने लगा। उस समय ओबामा का परिवार हवाई में छुट्टियां मना रहा था और तभी इलिनीओस सिनेट ने यह घोषणा की कि वो बिग गन कंट्रोल बिल के लिए एमर्जेंसी वोट करवाएगी। बिग गन कंट्रोल बिल को पास करने के लिए ओबामा काफी समय से मेहनत कर रहे थे, लेकिन क्योंकि वे उस समय अपनी बेटी के बीमार होने की वजह से वहाँ आ नहीं पाए, मीडिया ने उन्हें वोट ना देने के लिए उनपर बहुत से इल्जाम लगाए।

एक लोकल न्यूज़पेपर ने ओबामा को डरपोक भेंड़ कहा बाबी रश ने ओबामा को पढ़ा लिखा मूर्ख कहा ट्रोटर ने कहा कि ओबामा अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए अपनी बेटी का सहारा ले रहे हैं। ओबामा को पहले से लग रहा था कि उनके वोट ना देने की वजह से मीडिया उनकी बहुत बुराई करेगी, लेकिन मिशेल को यह बात बरदाश नहीं हो रही थी। इसके अलावा बहुत से लोगों ने उन्हें काले व्यक्ति की शकल में एक गोरा आदमी कहा।

ओबामा इसमें हार गए लेकिन फिर भी उन्होंने सिनेट के लिए काम करना जारी रखा। 2001 में उनकी दूसरी बेटी हुई जिसका नाम नताशा मारिएन ओबामा था। उनकी दूसरी बेटी को वे शाशा कहकर बुलाते थे, जो कि ओबामा की दादी का नाम था।

 

 

लोगों का सहारा पाने के बाद मिशेल ने राजनीति में अपने पति की मदद करने का फैसला किया।

 

मिशेल को सरकारी काम इसलिए अच्छे नहीं लग रहे थे क्योंकि ओबामा सिनेट के काम की वजह से घर पर अपने परिवार के साथ बहुत कम समय बिताने लगे थे। वो नहीं चाहतीं थीं कि ओबामा यूएस सिनेट का चुनाव लड़ें क्योंकि इसके बाद वे और ज्यादा व्यस्त हो जाएंगे और उन्हें परिवार के लिए बिल्कुल समय नहीं मिलेगा।

लेकिन फिर भी उन्होंने ओबामा को इसके लिए हाँ कह दिया क्योंकि उन्हें अंदर से लग रहा था कि वे जीत जाएंगे। साथ ही ओबामा ने वादा किया था कि अगर वे हार गए तो वे राजनीति छोड़ देंगे।

लेकिन जैसे किस्मत को उनका हारना मंजूर नहीं था। उनके रिपब्लिकन विरोधी ने चुनाव लड़ने के लिए मना कर दिया और उनके विरोधी रेस से बाहर हो गए। इसके बाद प्रेसिडेंशियल कैंडिडेट जान केरी ने ओबामा को पूरे अमेरिका के सामने एक स्पीच देने के लिए कहा। ओबामा को इलिनीओस के बाहर कोई नहीं जानता था। टीवी पर उनकी यह पहली स्पीच होती।

ओबामा इस दिन के लिए अपनी स्पीच बहुत दिनों से तैयार कर रहे थे और उन्होंने इसे पूरा याद कर लिया था। उनकी इस शानदार स्पीच को सुनने के बाद एनबीसी के कमेंटेटर क्रिस मैथ्यूस ने कहा मैं अभी अभी अमेरिका के पहले काले प्रेसिडेंट को देखकर आ रहा हूँ। मिशेल को पहले से पता था कि यह स्पीच शानदार होगी क्योंकि उन्हें अपने पति पर पूरा भरोसा था।

जब ओबामा ने यह घोषणा की कि वे प्रेसिडेंट के लिए चुनाव लड़ेंगे, तो उन्हें सुनने के लिए कड़ी ठंड में 15000 लोग इलिनीओस में आ गए। यह देखकर मिशेल का मन बदल गया। उन्हें लगा कि जब लोग उनपर उतना भरोसा कर रहे हैं, तो उन्हें उनके लिए जरूर कुछ करना चाहिए। अब वो अपने पति के लिए प्रचार करने में पूरी तरह से जुट गई। उन्हें लगना लगा कि अपने देश के लोगों की उम्मीद पर खरा उतरना उनकी जिम्मेदारी है।

 

 

वाइट हाउस में जाने के बाद भी मिशेल ने अपने बच्चों को एक आम बचपन देने की कोशिश की।

 

ओबामा के प्रेसिडेंट का चुनाव जीतने के बाद उनका परिवार वाइट हाउस में रहने लगा । यहाँ पर आने के बाद उनकी जिन्दगी पूरी तरह से बदल गई। एक प्रेसिडेंट के तौर पर ओबामा को दुनिया की और इतिहास की सबसे मजबूत सिक्योरिटी में रखा गया था।

यहाँ पर एक छोटे से छोटे काम को भी बहुत ध्यान से किया जाता था और पीने के पानी की भी जाँच होती थी। इससे ओबामा और मिशेल को कुछ परेशानियाँ हुई क्योंकि अब उन्हें अकेले वक्त बिताने का मौका नहीं मिलता था।

लेकिन फिर भी मिशेल ने अपनी दो बेटियों को एक आम बचपन देने का वादा किया। उन्होंने अपनी बेटियों का एडमिशन सिडवेल फ्रेंड्स स्कूल में कराया जहाँ पर चेल्सी क्लिंटन पढ़ने जाया करते थे। इसके बाद हिलरी क्लिंटन ने मिशेल को अपने घर बुलाकर उन्हें बताया कि किस तरह से वे अपना फर्ज निभा सकती हैं। हिलरी मिशेल से पहले वाइट हाउस में राष्ट्रपति की पत्नी की तरह 8 साल तक रह चुकी थीं।

मिशेल को हिलरी से काफी मदद मिली। उनकी मदद से वे यह समझ पाई कि किस तरह से अपने देश के साथ साथ अपने परिवार के लिए अपने फर्ज को अच्छे से निभा सकती हैं।

मिशेल ने शाशा और मालिया को बताया कि वे वाइट हाउस को अपना ही घर समझें। वे दोनों लोग एक दूसरे के साथ मिलकर खेला करतीं थीं लेकिन उन्हें वाइट हाउस से बाहर जाकर अपने दोस्तों से मिलने की आजादी नहीं थी। वाइट हाउस में सिर्फ वही आ सकता था जिसका सोशल सिक्योरिटी नंबर होता था। इसलिए उनके दोस्तों का वाइट हाउस में आ पाना लगभग असंभव था। लेकिन फिर भी मिशेल ने उन्हें अपने दोस्तों से मिलने की कुछ आजादी दी थी।

 

 

वाइट हाउस में रहकर मिशेल अपने अमेरिका के बच्चों का मोटापा कम करने के लिए अभियान चलाया।

 

बाइट हाउस में रहते वक्त ओबामा को बार बार लम्बे रास्ते तय कर के आफिस नहीं जाना पड़ता था। उनका आफिस वाइट हाउस में ही था जिसकी वजह से ओबामा अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिता पाते थे। यह बात मिशेल को अच्छी लग रही थी। ओबामा अपनी सारी जिम्मेदारियों को निभा पा रहे थे और मिशेल ने सोचा कि उन्हें भी अपने देश के लिए कुछ करना चाहिए।

लेकिन इसके लिए हिलरी क्लिंटन ने मिशेल को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के लोगों को यह नहीं पसंद था कि राष्ट्रपति की पत्नी राजनीतिक कामों में दखल दें। हिलरी ने भी फर्स्ट लेडी के तौर पर कुछ करने की कोशिश की थी लेकिन मीडिया ने इसके लिए उनकी बहुत बुराई की थी।

मिशेल ने अपना अभियान बहुत सावधानी से लाँच किया। उन्होंने अमेरिका के बच्चों में बढ़ते मोटापे को कम करने के लिए अभियान लाँच किया जिसका नाम लेट्स मूव था। इसे चार स्टेप्स में लाँच किया जाना था।

सबसे पहले बच्चों के माता पिता को सेहतमंद खाने के बारे में जानकारी दी गई। दूसरे स्टेप में स्कूलों में सेहतमंद खाना उपलब्ध कराए जाने लगे। तीसरे स्टेप में गाँव के इलाकों में ताजा खाना पहुँचाने का काम किया जाने लगा क्योंकि वहाँ तक अक्सर अच्छ खाना नहीं पहुँच पाता था। और चौथे स्टेप में बच्चों में जागरुकता फैलाने का काम किया जाना था।

इसकी शुरुआत मिशेल ने वाइट हाउस में गार्डेन बनाने से की। वे चाहतीं थीं कि उनके परिवार को पैकेट के खाने से छुटकारा मिले और खाने के लिए ताजा फल मिले। 10 हफ्तों में उनके बगीचे से 90 पाउंड के फल निकले जिससे उनके घर में ताजा फल आ गए। इसके अलावा लेट्स मूव का अभियान शुरुआत से ही बहुत कामयाब रहा।

स्कूलों में खान पान की व्यवस्था सुधर गई और अमेरिका के कोल्ड ड्रिंक और दूसरे पैक्ड फूड इंडस्ट्री ने अपने खाने के बारे में पैकेट पर ज्यादा जानकारी देना शुरू किया। टीवी पर बच्चों की सेहत सुधारने के लिए बहुत से प्रोग्राम आने लगे।

 

 

वाइट हाउस की जिन्दगी में भी कुछ परेशानियाँ थीं, लेकिन मिशेल ने उनका भी सामना किया।

 

एक प्रेसिडेंट के तौर पर ओबामा और मिशेल किसी रेस्टोरेंट या थिएटर में वक़्त बिताने के लिए नहीं जा सकते थे। अगर वे जाते थे तो वहाँ पर आने जाने वाले हर व्यक्ति की चेकिंग की जाती थी जिससे आम लोगों को बहुत परेशानी होती थी। इसके लिए मीडिया में उनकी बहुत बुराई होती थी और लोग तरह तरह की अफवाहें फैलाने लगते थे।

मिशेल को इन अफवाहों से सख्त नफरत थी। लोग ओबामा के ऊपर गलत इल्जाम लगाने लगते थे जिससे जनता भड़क जाती थी और ओबामा को धमकियाँ मिलने लगती थी।

पहले प्रेसिडेंशियल अभियान के बाद वे 2011 में फिर से खुद संभाल पाए। उसकेकुछ हफ्ते के बाद एक बंदूक वाले ने वाइट हाउस के रेसिडेंशियल फ्लोर पर अपनी राइफल हमला कर दिया। जिस कमरे में मिशेल पढ़ा करती थीं, उस कमरे के शीशे में गोली का एक निशान पड़ गया था। इसके बाद मिशेल को एहसास हुआकि क्यों उनके परिवार के लिए इतनी सुरक्षा लगाई गई थी।

मिशेल अब जब उन दिनों के बारे में सोचती हैं तो उन्हें अपनी कामयाबी पर गर्व होता है। लेट्स मूव अभियान से 45 मिलियन बच्चों को फायदा हुआ और 11 मिलियन बच्चों से सेहत से संबंधित स्कूल के बाद के प्रोग्राम में भाग लिया।

इसके अलावा उन्होंने जाइनिंग फोर्सेस का अभियान चलाया जिससे 15 लाख सेनानी और उनकी पत्नियों को नौकरी मिली। इसके साथ ही उन्होंने लेट गर्ल्स लर्न नाम का अभियान चलाया जिससे दुनिया भर की लड़कियों को अच्छी शिक्षा देने के लिए उन्होंने बहुत सारे पैसे इकट्ठा किए।

उनकी दोनों बेटियाँ स्कूल से इसी बीच ग्रेजुएट हो गई। मिशेल को अब भी राजनीति से नफरत है और वे इसमें फिर से आना नहीं चाहती हैं। लेकिन इस बीच उन्होंने जो भी कामयाबियों हासिल की और अपने लोगों के लिए जो काम किया उसके लिए उन्हें खुद पर गर्व है।

 

 

Conclusion

 

मिशेल ओबामा का जन्म शिकागो शहर में हुआ था। ओबामा से उनकी मुलाकात अपने हार्वर्ड के दिनों में हुई थी और उन्होंने उसके कुछ साल बाद उनसे शादी कर ली। मिशेल लोगों की मदद करना चाहती थीं लेकिन फिर भी उन्हें राजनीति से नफरत थी। वाइट हाउस में रहते वक्त उन्होंने बहुत से कामयाब अभियान लाँच किए। उन्हें अपनी सारी कामयाबियों पर गर्व है।

तो दोस्तों आपको आज का हमारा Becoming Book Summary in Hindi कैसा लगा ?

आज आपने मिशेल ओबामा की आत्मकथा से क्या सीखा ?

अगर आपके मन में कुछ भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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