113 Body Health Tips in Hindi – हमेशा स्वस्थ रहने के 133 नियम

स्वस्थ रहने के नियम (Body Health Tips in Hindi) – Hello दोस्तों, आजकल सभी लोग अपने और अपने परिवार के स्वस्थ के प्रति बहुत सजग हो रहे हैं, लेकिन फिर भी उनको ये नहीं पता होता है की स्वस्थ रहे तो रहे कैसे ? बाजार में तो स्वस्थ रहने के कोई भी चीज नहीं मिलता है, 90% चीजें तो हमारी बॉडी को बीमार करने के लिए लगी पड़ी हैं।

तो आज मैं आपके लिए बहुत ही रिसर्च करने के बाद एक ऑथेंटिक सोर्स से कुछ नियम जो आपको डेली लाइफ में फॉलो करना चाहिए उसको लेके आया हूँ, अगर आप इन सारे चीजों को अपने डेली रूटीन में अपना हैबिट जैसा बना लें तो आप 100 साल तक स्वस्थ शरीर के साथ खुश रह पाएंगे।

तो चलिए शुरू करते हैं –

113 Body Health Tips in Hindi

अपने या अपने परिवार में स्वास्थ्य को उत्तम बनाये रखने हेतु सभी सदस्य को कुछ नियमों का पालन करना चाहिए, जो आपको नीचे बताया गया है।

लेकिन एक बात ध्यान रहे की ये जो नियम है ये सिर्फ स्वस्थ व्यक्तियों के लिए ही बनाये गए हैं जिससे उनका स्वस्थ्य अक्षुण्ण बना रहे। रोग की परिस्थिति में इन नियमों का यथासम्भव बदलाव किया जा सकता है, और हो सके तो रोग ठीक होने के बाद ही इसे try करें –

1. सुबह जल्दी उठो और 2 – 3 मील (2 – 3 किलोमीटर) रोज टहलो। संभव हो तो शाम को भी थोड़ा टहलो।

2. भोजन के साथ पानी कम से कम पीओ। दोपहर के भोजन के घंटे भर बाद पानी पियें। भोजन यदि कड़ा और रूखा हो तो 2 – 4 घूंट पानी अवश्य पियें।

3. रात्रि जागरण से वात की वृद्धि होती है, जिससे शरीर रुक्ष होता है। बैठे बैठे थोड़ी झपकी लेना स्वास्थ के लिए अच्छा है।

4. दिन में 2 बार मुँह में जल भरकर, नैत्रों को शीतल जल से धोना नेत्र दृष्टि के लिए लाभकारी है।

5. नहाने से पूर्व, सोने से पूर्व एवं भोजन के पश्चात् मूत्र त्याग अवश्य करना चाहिए। यह आदत आपको कमर दर्द, पथरी तथा मूत्र सम्बन्धी बीमारियों से बचाती है।

6. भोजन के प्रारम्भ में मधुर-रस (मीठा), मध्य में अम्ल, लवण रस (खट्टा, नमकीन) तथा अन्त में कटु, तिक्त, कषाय (तीखा, चटपटा, कसेला) रस के पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

7. स्वास्थ्य चाहने वाले व्यक्ति को मूत्र, मल, शुक्र, अपानवायु, वमन, छींक, डकार, जंभाई, प्यास, आँसू, नींद और परिश्रमजन्य श्वास के वेगों को उत्पन्न होने के साथ ही शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए।

8. कुछ लोगों की यह धारणा है कि चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाना पड़ता है, लेकिन हाल ही में जर्मनी में हुए शोधों से पता चला है कि यह धारणा सही नहीं है। इस शोध के मुताबिक 10 मिनट का व्यायाम भी आपको तरोताजा बनाये रखने के लिए काफी है। हो सकता है कि 10 मिनट के व्यायाम से आपके शरीर की अतिरिक्त चर्बी कम न हो, लेकिन 10 मिनट की एक्सरसाइज आपमें जोश भर देगी और आप सारा दिन खुद को तरोताजा महसूस करेंगी। इसका असर आपके काम पर भी पड़ेगा यानी 10 मिनट की एक्सरसाइज आपके काम करने की क्षमता को बढ़ायेगी।

9. हर दिन 10 मिनट का व्यायाम बीमारियों से लडऩे की शक्ति को 40 फीसदी तक बढ़ाता है।

10. दफ्तर की सीढिय़ां चढऩा, उतरना तथा पार्किग स्थल से दफ्तर तक पैदल चलना भी तरोताजा रखने वाला व्यायाम है।

11. सुबह-सुबह 10 मिनट की जॉगिंग कई घंटों तक आपमें चुस्ती बरकरार रख सकती है। यह ध्यान रखें कि व्यायाम को मौजमस्ती में करें यानी उसे बोझ समझकर न करें।

12. अगर बाहर जाकर व्यायाम करना संभव न हो तो संगीत की धुन पर 10 मिनट डांस करिए।

13. प्रातः उठते ही खूब पानी पीओ। दोपहर भोजन के थोड़ी देर बाद छाछ और रात को सोने के पहले उष्ण दूध अमृत समान है।

14. बुखार, थकान, कमजोरी महसूस करने की स्थिति में व्यायाम से बचें।

15. ध्यान रखें, जहां व्यायाम करें वहां शांति हो, जगह साफ-सुथरी हो, प्राकृतिक हवा हो और पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी हो।

16. व्यायाम का समय बढ़ाना हो तो धीरे-धीरे बढ़ाएं, एकदम से समय बढ़ाने से थकान, कमजोरी की शिकार हो सकती हैं।

17. सुबह का नास्ता सुपाच्य और पौष्टिक होना चाहिए। सुबह में नास्ते की आदत अवश्य डाले।

18. भोजन करने से पूर्व हाथ की अच्छी तरह से साफ कर लेना नितांत आवश्यक है। वैसे भी कोरोना से बचना ही है ना!

19. ठूस ठूस कर खाने से बचना चाहिए। हमेश भोजन भूख से कम ही करना बेहतर है।

20. भोजन हमेशा शांतचित होकर करना चाहिये। प्रत्येक निवाला को खूब चबा चबाकर खाना चाहिए।

21. भोजन करने के क्रम में बार बार पानी नही पीनी चाहिये। आवश्यकता के अनुसार दो-चार घूंट पी सकते हैं। भोजन करने के लगभग 45 मिनट बाद ही पानी पीनी चाहिये। एक बात और भोजन से पहले भी पानी का सेवन न करे,नही तो जठराग्नि मंद पड़ जाती है।

22. सुलभता के अनुसार भोजन में सलाद, हरी साग-सब्जी, और मौसमी फलो का सेवन करना चाहिए।

23. भोजन के अंत में मठ्ठा का सेवन भी पाचन के लिए लाभप्रद है।

24. भोजन के बाद हाथ और दाँतों की अच्छी तरह सफाई करनी चाहिये। भोजन के बाद लघुशंका कर थोड़ी देर टहलना भी चाहिए।

25. भोजन करते समय ढीले ढाले वस्त्रों को ही धारण करना चाहिए।

26. तनावमुक्त होकर तथा मन व शरीर शांत रखकर व्यायाम करें।

27. इस हकीकत को स्वीकारें कि हमेशा युवा नहीं रह सकतीं। चाहे दिन रात व्यायाम करें। बढ़ती उम्र को गर्व से स्वीकार करें।

28. अच्छे स्वास्थ्य और लंबी जिंदगी के लिए योगाभ्यास तो जरूरी है ही पर इसके अतिरिक्त कुछ सामान्य नियमों और सावधानियों का पालन भी आवश्यक है। इन नियमों-सावधानियों व जानकारियों के पालन से दिनचर्या व्यवस्थित होने लगती है और हम लंबे समय तक युवा बने रह सकते हैं।

29. प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठने का नियम बनाएं। इसके लिए रात में जल्दी सोने की आदत डालें। सुबह उठने के बाद शौचादि से निवृत्त होकर ऊषापान करें। ऊषापान के लिए रात में पानी तांबे के बर्तन में भर कर रख दें और सुबह उसमें से लगभग दो गिलास पानी खाली पेट पीएं। सर्दी के मौसम में पानी थोड़ा गुनगुना कर लें।

30. सूर्योदय से पहले ही नित्यकर्म से निवृत्त होकर खुले वातावरण में जाकर योगाभ्यास करें।

31. अपनी दिनचर्या में शारीरिक श्रम को महत्व दें। कई रोग इसीलिए पैदा होते हैं, क्योंकि हम दिमाग से अधिक और शरीर से कम काम लेते हैं। आलस्य त्यागकर पैदल चलने, खेलने, सीढ़ी चढ़ने, व्यायाम करने, घर के कामों में हाथ बंटाने आदि शारीरिक श्रम वाली गतिविधियों में लगें।

32. दिन में कम से कम दो लीटर पानी अवश्य पीओ।

33. भूख लगने पर ही भोजन करें। जितनी भूख हो, उससे थोड़ा कम खाएं। अच्छी तरह चबा कर खाएं। दिन भर कुछ न कुछ खाते रहने का स्वभाव छोड़ दें। दूध, छाछ, सूप, जूस, पानी आदि तरल पदार्थों का अधिकाधिक सेवन करें।

34. प्रकृति के नियमों के अनुरूप चलें, क्योंकि ‘कुदरत से कुश्ती’ करके कोई निरोगी नहीं हो सकता।

35. प्रतिदिन योगाभ्यास का नियम बनाएं।

36. भोजन पौष्टिक हो और सभी आवश्यक तत्वों से भरपूर होना चाहिए।

37. मिष्ठान, पकवान, चिकनाई व अधिक मसालों के इस्तेमाल से परहेज करें।

38. सोने, जागने व भोजन का समय निश्चित करें और साफ-सफाई का हर हाल में ध्यान रखें।

39. बढ़ती उम्र के साथ यदि यह भाव मन में घर कर गया कि मैं बूढ़ा हो रहा हूं, तो व्यक्ति अपने इसी मंतव्य के कारण जल्दी बूढ़ा होने लग जाता है।

40. शरीर का वजन न बढ़ने दें। इसके लिए अधिक भोजन से बचे और योग जरूर करें।

41. क्रोध, चिंता, तनाव, भय, घबराहट, चिड़चिड़ापन, ईर्ष्या आदि भाव बुढ़ापे को न्यौता देने वाले कारक हैं। हमेशा प्रसन्नचित्त रहने का प्रयास करें। उत्साह, संयम, संतुलन, समता, संतुष्टि व प्रेम का मानसिक भाव हर पल बना रहना चाहिए।

42. मन में रोग का भाव बीमारियों में बढ़ोत्तरी ही करता है। स्वास्थ्य का भाव सेहत में वृद्धि करता है इसलिए दिन भर इस भाव में रहें कि “मैं स्वस्थ हूं”। मन में यह शंका न लाएं कि भविष्य में मुझे कोई रोग होगा। अगर आप बीमार भी हो तो भी मन में हर पल बोलो “मैं स्वस्थ हूं”

43. धूम्रपान, मादक पेय – पदार्थ (जरदा, गुटखा, सॉफ्ट ड्रिंक जैसे कोकाकोला, पेप्सी इत्यादि एवं शराब आदि) सर्वथा छोड़ दो।

44. जीभ पर नियंत्रण रखें, क्योंकि जीभ के दो ही कार्य होते हैं – बोलना और स्वाद लेना। अतः अधिक बोलने से बचें। आचार्य चाणक्य जी भी यही बात बोलते हैं।

45. आधि – मन का रोग, व्याधि – तन का रोग और उपाधि – मद, ये तीनों यौवन के भयंकर शत्रु हैं। इनसे दूर रहें।

46. प्रायः देखा जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ व्यक्ति पढ़ना-लिखना छोड़ देता है। इससे उसके मस्तिष्क के तंतु निष्क्रिय होने लगते हैं और नाड़ी तंत्र भी मंद पड़ने लगता है। इसका असर शरीर की समस्त क्रियाओं पर पड़ता है। व्यक्ति जल्दी बूढ़ा होने लगता है। अतः बढ़ती आयु के साथ स्वाध्याय और आध्यात्मिक ज्ञान में वृद्धि होती रहनी चाहिए।

47. बीड़ी-सिगरेट जैसे नशीले व हानिकारक पदार्थों से बचें, क्योंकि ये सभी बुढ़ापे की ओर ले जाते हैं।

48. चाय- कॉफी आदि के स्थान पर सादा ठंडा या गुनगुना पानी, नींबू पानी, छाछ, गाजर, पालक चुकन्दर, लौकी, टमाटर इत्यादि सब्जियों का एवं मौसम्मी या संतरा, पपीता इत्यादि फलों के रस का उपयोग लाभकारी होता है।

49. डाइबीटीज के रोगी को शक्कर या उससे बने पदार्थों से पूर्ण परहेज करना चाहिए। फलों में अधिक मीठे फल का सेवन कम करें। फल के रस के बजाय फल खायें।

50. मेथीदाना और करेला डाइबीटीज की रामबाण दवा हैं। इनका रोज उपयोग करें। मेथीदाना रोज 18/24 घंटे के लिए पानी में भिगो के रखें, जहां तक संभव हो सके मिट्टी के बर्तन में भिगोयें। दूसरे दिन सुबह नाश्ते के पहले या बाद में दानामेथी का पानी पी लें। मेथीदाना अंकुरित कर सलाद में या नमक, नींबू लगाकर भी खा सकते हैं।

51. भोजन में स्वाद बढ़ाने वाली चीजें जैसे मिर्च, प्याज, लहसुन, खटाई इत्यादि का प्रयोग कम से कम करें, हो सके तो छोड़ दें।

52. रोज शाम निवृत्त हो जाने के बाद, दिनभर में अपने पुरूषार्थ से किये काम – काजों की सफलता अथवा असफलता प्रभु को समर्पित कर, निश्चिंत होकर, जल्दी सोंये ताकि सुबह भोर में उठ सकें।

53. प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व अवश्य उठें। उठने का समय 5 बजे के आस-पास होना चाहिए। लेकिन ऐसा भी नहीं होना चाहिए की उठते ही आपको नींद आने लग जाये, तब तो कोई फायदा नहीं, आप जल्दी सोये और तभी आप जल्दी उठ पाएंगे, क्यूंकि नेचर के साथ चलना हमारे लिए ही अच्छा है।

54. टहलते समय नाक से लम्बी – लम्बी सांसें लो तथा यह भावना करो कि टहलने से आप अपने स्वास्थ्य को संवार रहे हैं।

55. सूर्योदय से पूर्व शीतल जल से स्नान करें। इससे शरीर को बल मिलता है व पाचन उत्तम बनता है।

56. आटा मोटा पिसवाया जाए व ग्रीष्म ऋतू में जौ तथा वर्षा तथा शीत ऋतू में चना मिलवाकर पिसवाए।

57. जितना सम्भव हो जीवित आहार लें। अधिक तला भुना पदार्थ व जंक फूड मृत आहारों की श्रेणी में आते हैं।

58. तीन सफेद विषों का प्रयोग कम से कम करें – सफेद नमक, सफेद चीनी व सफेद मैदा।

59. प्रतिदिन कुछ न कुछ शारीरिक श्रम, व्यायाम अथवा खेलकूद अवश्य करें। इससे मासपेशिया मजबूती बनी रहती है। हृदय तथा आतों की मासपेशिया सुचारु रूप् से काम करती हैं।

60. घर में फ्रिज में कम से कम सामान रखने का प्रयास करें। पुराना बारीक आटा व सब्जी का प्रयोग जोड़ों के दर्द को आमन्त्रित करता है।

61. हफ्ते में एक दिन नमक/चीनी छोड़कर अस्वाद व्रत करें।

62. नींबू की खटाई उपयोगी रहती है। नींबू पानी का सेवन से शरीर स्वस्थ बना रहता है।

63. फल सब्जियों में पर्याप्त मात्रा में फाइबर होते हैं। इनका प्रयोग लाभप्रद रहता है।

64. कभी-कभी बादाम व अखरोट को भिगोकर सेवन करते रहें। इससे जोड़ों की ग्रीस अर्थात् ताकत बनी रहती है, अखरोट सेहत के लिए जरुरी है।

65. टहलने के अलावा, दौड़ना, साइकिल चलाना, घुड़सवारी, तैरना या कोई भी खेलकूद, व्यायाम के अच्छे लाभ हैं। स्त्रियां चक्की पीसना, बिलौना बिलोना, रस्सीकूदना, पानी भरना, झाड़ू- पोछा लगाना आदि घर के कामों में भी अच्छा व्यायाम कर सकती हैं। रोज थोड़े समय छोटे बच्चों के साथ खेलना, 10 – 15 मिनट खुलकर हंसना भी अच्छे व्यायाम के अंग हैं।

66. घर में अथवा आस-पास नीम चढ़ी गिलोय उगाकर रखें व हफ्ते पन्द्रह दिन एक-दो बार प्रातःकाल उबालकर पीते रहें। गिलोय से शरीर स्वस्थ व निरोग रहता है। लीवर सुचारू रूप् से काम करता है।

67. गेहू, चावल थोड़ा पुराना प्रयोग करें।

68. मल-मूत्र का त्याग बैठकर करें व उस समय दात भींचकर रखें।

69. वस्त्र सदा ढीलें पहने। नाड़े वाले कुर्ते-पजामे सर्वोतम वेश हैं। कसी जीन्स आदि बहुत घातक होती हैं।

70. भूख से थोड़ा कम खाए।

71. जब भी मिठाई खाए, कुल्ला अवश्य करें।

72. दोनों समय ब्रश न करें, एक समय अनामिका ऊॅंगली से सूखा-मंजन या नमक, सरसों का तेल मिला कर करें। इससे मसूड़ों की मालिश होती है।

73. प्रतिदिन मुह में पानी भरकर अथवा मुह फुलाकर जल से नेत्रों को धोएं।

74. मंजन के पश्चात् जिह्वा अवश्य साफ करें तथा हलक तक ऊॅंगली ले जाकर गन्दा पानी निकाल दें।

75. घर में तुलसी उगाकर रखें इससे सात्विक ऊर्जा में वृद्धि होती है तथा वास्तु दोष दूर होते हैं। समय-समय पर तुलसी का सेवन करते रहें।

76. भोजन के साथ पानी का प्रयोग कम करें। इससे पाचक अग्नि मन्द होने का भय रहता है।

77. भोजन सादा करो एवं उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करो, शांत, प्रसन्न और निश्चिन्तता पूर्वक करो और उसे अच्छी तरह चबाचबा कर खाओ। खाते समय न बात करो और न हंसो। एकाग्र चित्त होकर भोजन करना चाहिए।

78. आवले का उपयोग करें। यह बहुत ही उच्च कोटि का स्वास्थ्यवर्धक रसायन है।

79. जल पर्याप्त मात्रा में पिए।

80. भोजन करने के पश्चात् एक दम न सोए, न दिन में, न रात में।

81. भोजन के उपरान्त वज्रासन में बैठना बहुत लाभकारी होता है।

82. भोजन के पश्चात् दाई सास चलाना अच्छा होता है। इससे जठाराग्नि तीव्र होती है व पाचन में मदद मिलती है।

83. प्रातःकाल सूर्योदय के समय सभी देवता को प्रणाम कर उत्तम स्वास्थ्य की कामना करें व गायत्री मन्त्र पढ़ें। इससे सूर्य स्नान होता है। नस नाडि़यों के रोग जैसे सर्वाइकल आदि नहीं होते।

84. सूर्योदय के समय प्राणवायु सघन होती है। उस समय गहरी-गहरी श्वास लेते हुए टहलें अथवा प्राणायाम खुले में करें। इससे बल में वृद्धि होती है व प्रसन्नता बढ़ती है।

85. भोजन शान्त मन से चबा-चबा कर व स्वाद ले-लेकर करें। यदि भोजन में रस आए तो वह शरीर को लगता है अन्यथा खाया-पीया व बेकार निकल गया तथा पचने में मेहनत और खराब हो गई।

86. प्रातः टहलने के बाद भूख अच्छी लगती है। इस समय पौष्टिक पदार्थों का सेवन करें। अंकुरित अन्न, भीगी मूंगफली, आंवला या इससे बना कोई पदार्थ, संतरा या मौसम्मी का रस अच्छे नाश्ता का अंग होते हैं।

87. पानी सदा बैठकर धीरे-धीरे पिए, एकदम न गटकें।

88. आटा चोकर समेत खाओ, सम्भव हो तो हाथ का पिसा हुआ खाओ। जौ, गेहूं, चना, सोयाबीन का मिस्सी रोटी का आटा सुपाच्य एवं पौष्टिक होता है। पौष्टिकता की दृष्टि से रोटी में हरी सब्जी, पालक, मेथी, बथुआ आदि पत्तीदार सब्जी मिलाकर बनायें/खायें। दलिया/खिचड़ी में भी पत्तीदार एवं हरी सब्जियाँ मिलाकर पौष्टिकता बढ़ाई जा सकती है। सब्जियों के सूप का नित्य सेवन पौष्टिक एवं हलके भोजन का अच्छा अंग हो सकता है।

89. प्रकृति विरुद्ध, मौसम विरुद्ध और शरीर विरुद्ध भोजन से वचना चाहिए। भोजन ज्यादा गरम या ज्यादा ठंडा भी नही होना चाहिए। बसी भोजन से परहेज करना चाहिए।

90. सप्ताह में एक दिन उपवास भी आवश्यक है, उस दिन अन्न का सेवन न करें, कुछ फल के रस का ही सेवन करें। इससे हमारा स्वास्थ ठीक रहता है, पेट सबंधी बीमारियों से बचाव होता है।

91. भोजन के तुरंत बाद सोना कई बिमारियों को न्योता देना है।

92. रात्रि का भोजन सोने के तीन घंटे पहले करें। यदि रात्रि फल, दूध लेना है तो भोजन के एक घंटे बाद लें।

93. खाने के तुरंत बाद सहवास से बचना चाहिए। सहवास के तुरंत बाद शिशु को माँ का दूध वर्जित है।

94. सोने से पहले हाथ-पैर धोकर पोंछ ले, अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए सो जाएँ। सर्वप्रथम चित होकर दस सांसे ले, फिर दायें करवट छः गहरी सांसे लें, फिर बायीं करवट लेकर सो जाएँ।

95. सोने के समय मुहँ ढँक कर नही सोना चाहिए। सोने का कमरा भी हवादार हो तो बहुत ही अच्छा है।

96. सोने से पहले संगीत सुनना भी लाभप्रद है।

97. यदि स्वस्थ रहना है तो शराब,धूम्रपान और बुरे व्यसनों से दूर रहना चाहिए।

98. दिन में सोने से जठराग्नि मंद पड़ जाती है। जिससे शरीर में भारीपन, शरीर टूटना, जी मिचलाना, सिरदर्द, ह्रदय में भारीपन आदि लक्षण उत्पन्न हो जाते है।

99. जो लोग शारीरिक श्रम से वंचित रहते हैं वो आसन, प्राणायाम एवं पैदल चलने का अभ्यास अवश्य करें। आरामपरक जीवन जीने से शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे लीवर, यकृत, अग्नाश्य, एवं हृदय धीरे-धीरे करके कमजोर होते चले जाते हैं।

100. जो लोग शारीरिक श्रम कम करते हैं परन्तु मीठा खाने के शौकीन हैं उनको मधुमेह रोग होने का खतरा बना रहता है। अतः उतना ही खाया जाए जितना आवश्यक है।

101. गतिशीलता ही जीवन है और गतिहीनता ही मृत्यु। गतिशील जीवन ही भविष्य में पल्लवित और पुष्पित होता हुआ संसार को सौरभमय बना देता है। मन की प्रफुल्ता से हमारा स्वास्थ भी सुन्दर और निरोग रहता है। जीवन जीना और स्वस्थ रहना एक मानवीय आवश्यकता के साथ साथ एक कला भी है, यदि सही तरीके से कुछ नियमानुसार जिन्दगी को ढाल ले तो बहुत हद तक हम सुखी एंव निरोग रह सकते है। जैसे की कोई भी काम एक प्लान के अनुसार शुरू करते हैं उसी प्रकार हमारी दिनचर्या या जीवन शैली भी एक प्लान के अनुसार होनी चाहिए।

102. सूर्योदय से दो घंटे पहले हमे अवश्य जग जाना चाहिए। देर तक सोना स्वस्थ के लिए बहुत ही हानिकारक है। इस समय प्रकृति मुक्तहस्त से स्वास्थ्य, प्राणवायु, प्रसन्नता, मेघा, बुद्धि की वर्षा करती है।

103. सुबह उठ कर तांबे के लोटे में भरा पानी का सेवन करें जो रात्रि में ही रखा हो करना चाहिए, कम से कम दो ग्लास की मात्रा होनी चाहिए। बासी मुँह 2-3 गिलास शीतल जल के सेवन की आदत सिरदर्द, अम्लपित्त, कब्ज, मोटापा, रक्तचाप, नैत्र रोग, अपच सहित कई रोगों से हमारा बचाव करती है।

104. नित्य क्रिया के पश्चात सुबह में एक मील तक टहलने अवश्य ही जाये। उसके बाद प्राणायाम, आसन और व्यायाम 15 से 20 मिनट करना चाहिए।

105. प्रतिदिन हो सके तो गुनगुने पानी से रगड़ रगड़ स्नान करना सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक है। स्नान के समय सर्वप्रथम जल सिर पर डालना चाहिए, ऐसा करने से मस्तिष्क की गर्मी पैरों से निकल जाती है।

106. सूर्य स्नान भी शरीर के लिए बहुत ही लाभप्रद है। इससे प्राकृतिक रूप से विटामिन \’डी\’ की प्राप्ति होती है। सुबह में आधे घंटे धुप में बैठे।

107. मौसम की ताजा हरी सब्जी और ताजे फल खूब खाओ। जितना हो सके कच्चे खाओ अन्यथा आधी उबली/उबली तथा कम मिर्च-मसाले, खटाई की सब्जियां खाओ। एक रोटी के साथ चार गुना सब्जी के अनुपात का प्रयास रखो।

108. हो सके तो प्रतिदिन नही तो सप्ताह में सरसों तेल या ओलिव आयल से शरीर की अच्छी तरह से मालिस करनी चाहिए।

109. मोबाईल पर लम्बी बातें न करें। यह दिमाग में टयूमर व अन्य व्याधियां उत्पन्न कर सकता है।

100. पैदल चले, साइकिल चलाने से जी न चुराएं। अपना काम स्वयं करने का अभ्यास करें।

111. देसी गाय के दूध घी का सेवन करें। देसी गौ का सान्निधय भी बहुत लाभप्रद रहता है।

112. दस-पन्द्रह दिन में एक बार घर में यज्ञ अवश्य करें। अथवा प्रतिदिन घी का दीपक जलाएं।

113. इन्द्रिय संयम विशेषकर ब्रह्मचर्य का उचित पालन करें। यह निरोग जीवन के लिए अनिवार्य है। अश्लील मनोरंजन के साधनों का प्रयोग न करें।

114. मच्छर से बचाव के लिए मच्छरदानी सर्वोतम है। दूसरे साधन लम्बे समय प्रयोग से कुछ न कुछ नुक्सान अवश्य करते हैं।

115. ध्यान रहे लम्बे समय तक वासना, ईष्र्या, द्वेष, घृणा, भय, क्रोध के विचार मन में न रहें अन्यथा ये आपका स्नायु तन्त्र विकृत कर सकते हैं। यह बड़ा ही दर्दनाक होता है न व्यक्ति जीने लायक होता है न मरने लायक।

116. धन ईमानदारी से कमाने का प्रयास करें। सदा सन्मार्ग पर चलने का अभ्यास करें। इससे आत्मबल बढ़ता है।

117. सदा सकारात्मक सोच रखे। यदि आपने किसी का बुरा नहीं सोचते तो आपके साथ बुरा कैसे हो सकता है। यदि आपसे गलतिया हुई हैं तो उनका प्रायश्चित करें। इससे उनका दण्ड बहुत कम हो जाता है। जैसे डाकू वाल्मिकी ने लोगों को लूटा तो सन्त हो जाने पर बेसहारों को सहारा देने वाला आश्रम बनाया।

118. दो ठोस आहारों के बीच 6 घण्टें का अन्तर रखें। 3 घण्टें से पहले ठोस आहार न लें। अन्यथा अपच होगा जैसे हाण्डी में यदि कोई दाल पकाने के लिए रखी जाए उसके थोड़ी देर बाद दूसरी दाल डाल दी जाए तो यह सब कच्चा पक्का हो जाएगा। बार-बार खाने से भी यह स्थिति उत्पन्न होती है। भोजन के पश्चात् 6 घण्टें से अधिक भूखे न रहें। इससे भी अम्लता इत्यादि बढ़ने का खतरा रहता है।

119. भूख से कम खाओ अथवा आधा पेट खाओ, चौथाई पानी के लिए एवं चौथाई पेट हवा के लिए खाली छोड़ो।

120. सामान्य परिस्थितियों में जल इतना पीए कि 24 घण्टें में 6 बार मूत्र त्याग हो जाए। मूत्र त्याग करते समय अपने दात बीच कर रखें।

121. दिन में भोजन के पश्चात् थोड़ी देर विश्राम व सायंकाल लगभग 100-200 कदम अवश्य चलें।

122. घर का निर्माण इस प्रकार करें कि सूर्य का प्रकाश पर्याप्त रहे। अन्धेरे वाले घर में जीवनी शक्ति का क्षय अधिक होता है।

123. दीर्घ आयु के लिए भोजन का क्षारीय होना आवश्यक है। क्षार व अम्ल का अनुपात 3ः1 होनी चाहिए। जो लोग अम्लीय भोजन करते हैं उसमें उनको रक्त-विकार अधिक तंग करते हैं। कुछ शोधों के निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि भोजन में क्षार तत्व बढ़ाकर हृदय की धमनियों के ब्लॉकेज भी खोलें जा सकते हैं।

124. यदि व्यक्ति को जुकाम रहता है तो रात्रि में नाक में कड़वे तेल की अथवा गाय के घी की दो बूंदे सोने से पूर्व डालें। इससे जुकाम दूर होता है व नेत्र व मस्तिष्क मजबूत बनते हैं। जिनको जुकाम न हो उनके लिए भी यह प्रयोग उत्तम है।

125. रात्रि में सोने से पूर्व पैर के तलवों पर तेल मलना लाभप्रद रहता है इससे शरीर की नस नाडि़या मजबूत होती हैं।

126. सोने से पूर्व यदि पैरों को ताजे पानी से धो लिया जाए तो नींद बहुत अच्छी आती है।

127. जो लोग पेट से सांस लेते हैं वो शान्त प्रकृति के होते हैं व दीर्ध आयु होते हैं। सांस सदा गहरी लेनी चाहिए। गहरी सांस का अर्थ है कि सांस को नाभि तक लेने का प्रयास करें। इससे नाभि चक्र सक्रिय रहता है। नाभि चक्र की सक्रियता पर ही हमारा पाचन तन्त्र निर्भर है।

128. जिन लोगों को उच्च रक्त चाप की समस्या है यह छोटा से प्रयोग करके देखें। रक्तचाप मापें व नोट करें। फिर श्वास को 2-4 बार नीचे नाभि की तरफ धकेंले। फिर रक्तचाप नापें। रक्तचाप में कुछ न कुछ कमी अवश्य प्रतीत होगी।

129. आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य की प्रकृति तीन प्रकार की होती है। वात, पित, कफ। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी प्रकृति को पहचानने का प्रयास अवश्य करना चाहिए। अपनी प्रकृति पहचानने के उपरान्त उसी अनुसार खान-पान, रहन-सहन व दवाओं का उपयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए पित्त प्रकृति का व्यक्ति गरम चीजों जैसे लहसुन आदि का प्रयोग बिल्कुल न करे। अधिक जानकारी के लिए स्वस्थ भारत नामक पुस्तक पढ़ें।

130. भोजन में रोज अंकुरित अन्न अवश्य शामिल करें। अंकुरित अन्न में पौष्टिकता एवं खनिज लवण गुणात्मक मात्रा में बढ़ जाते हैं। इनमें मूंग सर्वोत्तम है। चना, अंकुरित या भीगी मूंगफली इसमें थोड़ी मेथी दाना एवं चुटकी भर – अजवायन मिला लें तो यह कई रोगों का प्रतिरोधक एवं प्रभावी ईलाज है।

131. जब भी व्यक्ति को कोई रोग हो तो उसको हल्के उपवास व वैकल्पिक चिकित्सा का सहारा लेकर दूर करने का प्रयास करें। आज समाज में एक गलत परम्परा बन गई है जैसे ही व्यक्ति को छोटी-मोटी कोई बीमारी होती है अतः इनका उपयोग विवश्ता में करना चाहिए। उदाहरण के लिए यदि व्यक्ति का रक्तचाप बढ़ा हुआ है तो नमक कम करें। आवलाँ, ब्राह्मी अथवा सर्पगन्धा का प्रयोग करके उसको नियन्त्रित करे। तुरन्त अंग्रेजी दवाईयों की ओर न दौड़ें।

132. वर्ष की आयु के उपरान्त प्रोटीन का उपयोग सीमित रखें। नमक व चीनी भी कम लें। मीठे की पूर्ति के लिए फलों का उपयोग करें।

133. व्यायाम के समय बातचीत न करें, व्यायाम के समय चुप रहने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।

Conclusion

तो दोस्तों अगर आप इन सारे 133 नियमों को अपने डेली हैबिट में अपनाते हैं तो आपको स्वस्थ रहने से कोई रोक नहीं सकता।

तो आपको आज का यह पोस्ट “113 Daily Health Tips in Hindi” कैसा लगा ?

क्या आप ऐसे नियम पहले से अपने हैबिट में डाल दिए हैं या नहीं ?

क्या आप इस प्रकार के नियम अपने डेली हैबिट में अपनाना चाहेंगे ?

आपका कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

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आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

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