Chanakya Niti चाणक्य नीति – व्यवहार कुशल बनें

 Chanakya Niti चाणक्य नीति – व्यवहार कुशल बनें

 

सकुले योजयेत्कन्या पुत्रं पुत्रं विद्यासु योजयेत् ।
व्यसने योजयेच्छत्रु मित्रं धर्मे नियोजयेत् ॥

 

यहां आचार्य चाणक्य व्यावहारिकता की चर्चा करते हुए कहते हैं कि कन्या का विवाह किसी अच्छे घर में करना चाहिए, पुत्र को पढ़ाई-लिखाई में लगा देना चाहिए, मित्र को अच्छे कार्यों में तथा शत्रु को बुराइयों में लगा देना चाहिए। यही व्यावहारिकता है और समय की मांग भी।

 

आशय यह है कि कुशल व्यक्ति वही है, जो बेटी के विवाह योग्य होते ही उसका विवाह देख-भालकर किसी अच्छे खानदान में कर दे और बेटे को अधिक-से-अधिक शिक्षा दे। ताकि वह अपने जीवन में आजीविका की दृष्टि से आत्मनिर्भर बन सके।

 

 मित्र को मेहनत-परिश्रम, ईमानदारी की सीख दे ताकि सद्परामर्श से वह अपना जीवन सुधार सके और किसी अच्छे काम में लग जाए, किन्तु दुश्मन को बुरी आदतों का शिकार बना दे ताकि वह उसमें उलझकर आपको अनावश्यक रूप से तंग न कर सकें।

 

तो दोस्तों आपको आज का ये चाणक्य नीति कैसा लगा और इस नीति के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे, मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस चाणक्य नीति को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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