Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति – दोष कहाँ नहीं है?

Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति –  दोष कहाँ नहीं है?

 

 

कस्य दोषः कुले नास्ति व्याधिना को न पीडितः ।
व्यसनं केन न प्राप्तं कस्य सौख्यं निरन्तरम् ॥

 

यहां आचार्य चाणक्य का कथन यह है कि दोष कहां नहीं है? इसी आशय से उनका कहना है कि किसके कुल में दोष नहीं होता? रोग किसे दुःखी नहीं करते? दु:ख किसे नहीं मिलता और निरंतर सुखी कौन रहता है अर्थात् कुछ-न-कुछ कमी तो सब जगह है और यह एक कड़वी सच्चाई है।

 

 दुनिया में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो कभी बीमार न पड़ा हो और जिसे कभी कोई दुःख न हुआ हो या जो सदा सुखी ही रहा हो। तो फिर संकोच या दुःख किस बात का?

 

इसलिए व्यक्ति को अपनी कमियों को लेकर अधिक चिन्ता नहीं करनी चाहिए बल्कि कमियों के रहते भी आचरण पर ध्यान देते हुए उसे अन्य मानवीय गुणों से सम्पन्न करना चाहिए ताकि व्यक्तित्व को पूर्णता प्राप्त हो सके। क्योंकि निरन्तर सुख तो संसार में किसी को भी प्राप्त नहीं होता। आज दुःख है तो कल सुख भी होगा। आज सुख है तो कल दु:ख भी होगा। यही जग की रीति है।

 

आपको बस करना यह है कि जब भी दुःख मिलता है या बीमार होते हैं तो धीरज रखना ही आपके लिए सबसे उत्तम कार्य है। बीमार है तो दबाईया लीजिये और दुःख है तो उसका कारण जानिए और उसका निवारण कीजिये। असल में जीवन जीने में जो ही लोग Simplisity के साथ लाइफ में आगे बढ़ते रहते है मतलब हर वो काम या चीज को सिंपल तरीकेसे करते हैं तो आपके लाइफ में दुःख आ ही नहीं सकते।

 

और रहे बीमारी, तो अगर आप ज्यादा एक्सरसाइज और योग कीजिये और खान-पान में हेल्थी खाना खाये तो बीमार कमसे कम या ना के बराबर होगा। तो अभी अगर आपके लाइफ में दुःख है तो दुःख का कारण जानके उसका overcome करे। पैसा नहीं है तो काम कीजिये, किसी से कोई दुश्मनी ले रहे हैं तो उससे माफ़ी मांग ले, और सबसे प्यार से बातें कीजिये और जिसको हो सके उसको हेल्प कीजिये और हमेशा अपने फॅमिली का अच्छे से ध्यान रखें। तो लाइफ के सारे प्रॉब्लम धीरे धीरे गायब हो जायेगा।

 

 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह चाणक्य नीति कैसा लगा और आपका कोई सवाल है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस चाणक्य नीति को अपने दोस्तों के साथ शेयर भी जरूर करें।
 
 
आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,
 
Wish You All The Very Best.

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