Chanakya Niti in Hindi – संगति कुलीनों की करें

 Chanakya Niti in Hindi – संगति कुलीनों की करें

 

एतदर्थ कुलीनानां नृपाः कुर्वन्ति संग्रहम् ।
आदिमध्यावसानेषु न त्यजन्ति च ते नृपम् ॥

 

आचार्य चाणक्य यहां कुलीनता का वैशिष्ट्य बताते हुए कहते हैं कि कुलीन लोग आरम्भ से अन्त तक साथ नहीं छोड़ते। वे वास्तव में संगति का धर्म निभाते हैं। इसलिए राजा लोग कुलीनों का संग्रह करते हैं ताकि समय-समय पर सत्परामर्श मिल सके।

 

अभिप्राय यह है कि अच्छे खानदानी व्यक्ति जिसके साथ मित्रता करते हैं, उसे जीवन भर निभाते हैं। वे शुरू से अन्त तक सुख और दुःख दोनों दशाओं में कभी साथ नहीं छोड़ते। इसीलिए राजा लोग ऐसे कुलीनों को अपने पास रखते हैं।

 

 इसलिए राजा लोग और राजपुरुष महत्त्वपूर्ण एवं विशिष्ट राजकीय सेवाओं में कुलीन की नियुक्ति उनके उच्च संस्कारों और परम्परागत शिक्षा-दीक्षा के कारण ही करते हैं। वे कभी नीच अथवा ओछे हथकण्डे अपनाकर अपने स्वामी के साथ छल या धोखा नहीं करते।

 

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