Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति – लोगो के लक्षणों से आचरण का पता कैसे लग सकता है ?

Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति – लोगो के लक्षणों से आचरण का पता कैसे लग सकता है ?

 

आचारः कुलमाख्याति देशमाख्याति भाषणम् ।
सम्भ्रमः स्नेहमाख्यति वपुराख्याति भोजनम्॥

 

आचार्य चाणक्य लक्षणों से प्राप्त संकेतों की चर्चा करते हुए कहते हैं कि आचरण से व्यक्ति के कुल का परिचय मिलता है।

 

 बोली से देश का पता लगता है।

 

 आदर-सत्कार से प्रेम का तथा शरीर को देखकर व्यक्ति के भोजन का पता चलता है।

 

 अभिप्राय यह है कि उच्च वंश का व्यक्ति शालीन होगा तथा शान्त और अच्छे स्वभाव का होगा ही, यह माना जाएगा और नीच वंश का आदमी उद्धत, बातूनी और मान-मर्यादा का खयाल न रखनेवाला होगा।

 

 इस बात से तो प्रायः सभी परिचित हैं कि व्यक्ति अपनी बोली और उच्चारण से पहचाना जाता है कि वह किस प्रदेश का रहनेवाला है।

 

 यों तो बोली थोड़ी-थोड़ी दूरी पर थोड़ा बदल जाती है, परन्तु काफी बड़े क्षेत्र में मुख्य स्वर (लहजा) एक ही रहता है, बोलचाल की मूल भाषा एक जैसी रहती है। इसलिए यह पहचानने में दिक्कत नहीं होती कि व्यक्ति कहां का रहनेवाला है।

 

 इसी प्रकार व्यक्ति के हाव-भाव और क्रियाओं से उसके मन के विचारों का पता चल जाता है कि उसका स्नेह-आचरण वास्तविक है या बनावटी, क्योंकि मन की भावनाओं के अनुरूप ही व्यक्ति कार्य करता है। मन की भावनाओं की झलक उसके कार्यों में अवश्य मिलती है। उसके व्यवहार से ही पता चल जाता है कि उसका स्नेह दिखावटी है या असली।

 

 अधिक देर तक कोई भी व्यक्ति अपनी भावनाओं को छिपाये नहीं रख सकता। आचार्य चाणक्य का यह कथन सही है कि व्यक्ति की देह से उसकी खुराक का अनुमान लगाया जा सकता है। चाणक्य ने यहां सामान्यतया लागू होनेवाली बातें ही कही हैं और ये संकेत व्यक्ति की सामान्य झलक से ही मिल जाते हैं।

 

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