Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति – मृत्यु के कारणों से कैसे बचें ?

Chanakya Niti in Hindi चाणक्य नीति – मृत्यु के कारणों से कैसे बचें ?

 

दुष्टा भार्या शठं मित्रं भृत्यश्चोत्तरदायकः ।
ससर्प गृहे वासो मृत युरेव न संशयः ॥
 
 
आचार्य चाणक्य जी कहते हैं – दुष्ट पत्नी, शठ मित्र, उत्तर देनेवाला सेवक तथा सांपवाले घर में रहना, ये मृत्यु के कारण हैं। इसमें सन्देह नहीं करना चाहिए।
 
 आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ये चार चीजें किसी भी व्यक्ति के लिए जीती-जागती मृत्यु के समान हैं – दुश्चरित्र पत्नी, दुष्ट मित्र, जवाब देनेवाला अर्थात् मुँह लगा नौकर-इन सबका त्याग कर देना चाहिए। घर में रहनेवाले सांप को कैसे भी, मार देना चाहिए। ऐसा न करने पर व्यक्ति के जीवन को हर समय खतरा बना रहता है। क्योंकि किसी भी सद्गृहस्थ के लिए उसकी पत्नी का दुष्ट होना मृत्यु के समान है। वह व्यक्ति आत्महत्या करने पर विवश हो सकता है। वह स्त्री सदैव व्यक्ति के लिए दुःख का कारण बनी रहती है। और इससे जो दुःख होता हैं, ये हर वक़्त आपके पास ही रहता है।
 
 इसी प्रकार नीच व्यक्ति, धूर्त अगर मित्र के रूप में आपके पास आकर बैठता है तो वह आपके लिए अहितकारी ही होगा। सेवक या नौकर भी घर के गुप्तभेद जानता है, वह भी यदि स्वामी की आज्ञा का पालन करनेवाला नहीं है तो मुसीबत का कारण हो सकता है। उससे भी हर समय सावधानी बरतनी पड़ती है, तो दुष्ट स्त्री, छली मित्र व मुंहलगा नौकर कभी भी समय पड़ने पर धोखा दे सकते हैं।
 
 अत: ऐसे में पत्नी को आज्ञाकारिणी व पतिव्रता होना, मित्र को समझदार व विश्वसनीय होना और नौकर को स्वामी के प्रति श्रद्धावान होना चाहिए। इसके विपरीत होने पर कष्ट ही कष्ट है। इनसे व्यक्ति को बचना ही चाहिए वरना ऐसा व्यक्ति कभी भी मृत्यु का ग्रास हो सकता है।
 
 ऐसी दुःख, कष्ट अगर इंसान के जीवन में होता है तो उसके लिए यह दुनिया ही नर्क बन जाता है।
 
 
 
 
 
 तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह चाणक्य नीति कैसा लगा और इससे आपको क्या सीख मिला उसको नीचे कमेंट में जरूर बताये और इस चाणक्य नीति को अपने दोस्तों के साथ share जरूर करें।
 
 
आपका बुहुमुल्य समय देने लिए दिल धन्यवाद,
 
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