5 Unique Chanakya Niti in Hindi – क्या आपका भाग्य आपके साथ है ?

Chanakya Niti in Hindi – Hello दोस्तों, आचार्य चाणक्य को कौन नहीं जानता। सिंपल शब्द में कहूं तो वे एक बहुत बड़े विद्वान् और पंडित थे, जिनके बारे में मुझे ज्यादा बोलने की जरुरत ही नहीं है। तो दोस्तों मैंने इस ब्लॉग में आपको बहुत सारे चाणक्य नीति के बारे में explain किया ही है और आज फिर से कुछ 5 अलग सा चाणक्य नीति आपके लिए लेके आया हूँ। आज भाग्य, सेवा, कर्म, विद्या और गुणवान पुत्र के बारे में चाणक्य जी का क्या कहना है उसको आपके साथ साझा कर रहा हूँ, इसे बहुत ध्यान से पढ़ियेगा और अपने जीवन उतार लीजियेगा। क्यूंकि चाणक्य नीति हमारे जीवन को सुधारने में काम आता है और ये Chanakya Niti एक बेहतर जीवन शैली की ज्ञान देता है।

 

5 Best Chanakya Niti [Hindi]

 

 

Chanakya Niti #1 – कुछ चीजें भाग्य से मिलती हैं

 

आचार्य चाणक्य जी भाग्य को लक्ष्य करके मानव जीवन के प्रारम्भ में उसके लेखन को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि आयु, कर्म, वित्त, विद्या, निधन, ये पांचों चीजें प्राणी के भाग्य में तभी लिख दी जाती हैं, जब वह गर्भ में ही होता है।

 

अभिप्राय यह है कि प्राणी जब मां के गर्भ में ही होता है, तभी पांच चीजें उसके भाग्य में लिख दी जाती है – आयु, कर्म, धन-सम्पत्ति, विद्या और मृत्यु।

 

इनमें बाद में कोई भी परिवर्तन नहीं हो सकता। उसकी जितनी उम्र होती है उससे एक पल भी पहले उसे कोई नहीं मार सकता। वह जो भी कर्म करता है, उसे जो भी धन-सम्पदा और विद्या मिलती है, वह सब पहले से ही तय होता है। जब उसकी मृत्यु का समय आ जाता है, तो एक क्षण के लिए भी फिर उसे कोई नहीं बचा सकता।

 

 

Chanakya Niti #2 – सन्तों की सेवा से फल मिलता है

 

आचार्य चाणक्य सन्तों की सेवा को महत्त्व देते हुए कहते हैं कि संसार के अधिकतर पुत्र, मित्र और भाई साधु-महात्माओं, विद्वानों आदि की संगति से दूर रहते हैं।

 

जो लोग सत्संगति करते हैं, वे अपने कुल को पवित्र कर देते हैं।

 

आशय यह है कि लगभग सभी लोग सत्संग से दूर रहते हैं। किन्तु जो व्यक्ति सच्चे ज्ञानी महात्माओं का साथ पाते हैं, वे अपने कुल को पवित्र करके उसका तारण करते हैं।

 

वे इस सदाचरण से अपने पूरे परिवार को उज्ज्वल बना देते हैं। उनके इस कार्य पर परिवार को गर्व करना चाहिए। उसे अपना आदर्श मानना चाहिए और उससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

 

मनुष्य जानता है कि शरीर नश्वर है, परन्तु वह यह यथार्थ जानते हुए भी सांसारिक कर्मों में लिप्त रहता है जबकि उसे निर्लिप्त रहकर कार्य करना चाहिए।

 

आचार्य चाणक्य सत्संगति की चर्चा करते हुए और कहते हैं कि जैसे मछली, मादा कछुवा और चिड़िया अपने बच्चों का पालन क्रमश: देखकर, ध्यान देकर तथा स्पर्श से करती हैं, उसी प्रकार सत्संगति भी हर स्थिति में मनुष्यों का पालन करती है।

 

आशय यह है कि मछली अपने बच्चों का पालन उन्हें बार-बार देखकर करती है, मादा कछुआ ध्यान लगाकर बच्चों को देखती है और मादा पक्षी बच्चों को पंखों से ढककर उनका पालन करते हैं। सज्जनों का साथ भी मनुष्य की इसी तरह देख-रेख होता है।

 

 

Chanakya Niti #3 – जहाँ तक हो पुण्य कर्म करें

 

आचार्य चाणक्य जी आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हुए कहते हैं कि जब तक शरीर स्वस्थ है, तभी तक मृत्यु भी दूर रहती है। अतः तभी आत्मा का कल्याण कर लेना चाहिए।

 

प्राणों का अन्त हो जाने पर क्या करेगा? केवल पश्चात्ताप ही शेष रहेगा।

 

यहाँ आशय यह है कि जब तक शरीर स्वस्थ रहता है, तब तक मृत्यु का भी भय नहीं रहता। अत: इसी समय में आत्मा और परमात्मा को पहचानकर आत्मकल्याण कर लेना चाहिए।

 

मृत्यु हो जाने पर कुछ भी नहीं किया जा सकता।

 

आचार्य चाणक्य का कहना है कि समय गुजरता रहता है, और न जाने कब व्यक्ति को रोग घेर ले और कब मृत्यु का संदेश ले यमराज के दूत द्वार पर आ खड़े हों, इसलिए मानव को चाहिए कि वह जीवन में अधिक-से-अधिक पुण्य कर्म करे क्योंकि समय का क्या भरोसा? जो कुछ करना है समय पर ही कर लेना चाहिए।

 

 

Chanakya Niti #4 – विद्या कामधेनु के समान होती है

 

आचार्य चाणक्य जी विद्या के महत्त्व के बारे में कहते हैं कि विद्या कामधेनु के समान गुणोंवाली है, बुरे समय में भी फल देनेवाली है, प्रवास काल में मां के समान है तथा गुप्त धन है।

 

आशय यह है कि विद्या कामधेनु के समान सभी इच्छाओं को पूरा करनेवाली है। बुरे-से-बुरे समय में भी यह साथ नहीं छोड़ती। घर से कहीं बाहर चले जाने पर भी यह मां के समान रक्षा करती है। यह एक गुप्त धन है, इस धन को कोई नहीं देख सकता।

 

आचार्य चाणक्य मानते हैं कि विद्या एक गुप्त धन है अर्थात् एक ऐसा धन है जो दिखाई नहीं देता पर वह है और अनुभव की वस्तु है। जिसका हरण तथा विभाजन नहीं हो सकता, अतः वह सब प्रकार से सुरक्षित और विश्वसनीय भी है। वही समय पड़ने पर आदमी के काम आता है।

 

इस प्रकार विद्या संकट में कामधेनु गाय के समान और परदेश में मां के समान है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह प्रच्छन्न और सुरक्षित धन है। सोने के आभूषणों के समान इसे न कोई छीन सकता है, न चुरा सकता है।

 

 

Chanakya Niti #5 – गुणवान पुत्र एक ही पर्याप्त है

 

आचार्य चाणक्य जी उपादेयता, गुण तथा योग्यता के आधार पर पुत्र के महत्त्व को प्रतिपादित करते हुए कहते हैं कि केवल एक गुणवान् और विद्वान् बेटा सैकड़ों गुणहीन, निकम्मे बेटों से अच्छा होता है।

 

जिस प्रकार एक चांद ही रात्रि के अन्धकार को दूर करता है, असंख्य तारे मिलकर भी रात्रि के गहन अन्धकार को दूर नहीं कर सकते, उसी प्रकार एक गुणी पुत्र ही अपने कुल का नाम रोशन करता है, उसे ऊंचा उठाता है; ख्याति दिलाता है।

 

सैकड़ों निकम्मे पुत्र मिलकर भी कुल की प्रतिष्ठा को ऊंचा नहीं उठा सकते। निकम्मे गुणहीन पुत्र उलटे अपने बुरे कामों से कुल को कलंकित करते हैं। उनका होना भी किसी काम का नहीं। वे तो अनर्थकारी ही होते हैं।

 

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तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह Chanakya Niti(चाणक्य नीति) आपको कैसा लगा मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस चाणक्य नीति को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें और आपका कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद।

Wish You All The Very Best.

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