Dar Ko Kaise Dur Kare | How to Overcome Fear?

Dar Ko Kaise Dur Kare – Hello दोस्तों, क्या आपको कभी डर लगा है? वो चाहे किसी भी चीज का डर क्यों न हो! आज मैं आपको उसी डर के बारे में डिटेल में बताऊंगा। आपको जिंदगी में कही भी, कभी भी डर तो लगा ही होगा और आप इससे छुटकारा भी पाना चाह रहे होंगे, है ना?

  • डर असल में है क्या?
  • क्यों हमे डर लगता है?
  • इसको अच्छे से समझ करके आप कैसे डर को overcome कर सकते है?

अगर आपको इन तीनों सवालों का सही जवाब चाहिए तो इस आर्टिकल को आगे पढ़े। तो चलिए शुरू करते हैं –

Dar Ko Kaise Dur Kare?

हमारे अंदर जो fear है और वो fear बहुत तरह के होते है। Unlimited fears है हमारे अंदर, मतलब जितने problem उतने डर है। तो अब इस fear को हम overcome कैसे कर सकते हैं?

अगर हमको समझ आ गया कि डर असल में क्या है? तो उसके बाद कुछ करने की जरुरत नहीं है, अपने आप ही हमारे अंदर से किसी भी चीज का डर चला जायेगा।

जैसे “आग जलाती है” – तो क्या आपके अंदर आग का डर है या knowledge है की आग जलाती है। Simple सी बात है आपके अंदर knowledge है।

डर क्या करेगा आपको unnecessary paralyze कर देगा, life में कुछ भी करने नहीं देगी।

Society का डर

हमारे अंदर ये डर है की अगर मैं सबसे यानि की society से अलग जा करके कुछ करूँगा तो क्या होगा? – ये डर है, तो क्या ये अच्छा है आपके लिए ? – No

हाँ आप ये कह सकते हो की society के लिए यह अच्छा है, क्यूंकि वो जो चाहती है उनका काम तो हो रहा है, आपके घर वालो के लिए अच्छे है, क्यूंकि वो आपको डर से कण्ट्रोल कर पा रहे है।

लेकिन क्या आपके लिए अच्छा है?

Job का डर

आप कही पर job कर रहे हो और आपकी गले पर एक तलवार लटका दी जाये की अगर आपने कोई भी गड़बड़ किया तो आपको निकाल देंगे company से, उसकी वजह से क्या हो रहा है की आप डर करके काम कर रहे हो।

ऐसा नहीं है कि आप काम ही नहीं कर रहे हो, आप काम तो कर रहे हो लेकिन दर करके कर रहे हो, तो ये उस company के लिए तो अच्छा है, लेकिन क्या यह आपके लिए अच्छा है?

How to में गड़बड़ी

डर को दूर करने का एक तरीका है how to में जाने का, क्यूंकि mind सबका यही चलता है कि how to overcome fear, how to……

जो Physical world है, वहा पर how to जरुरी है लेकिन Psychological world में how to नाम की कोई चीज ही नहीं है।

आपके अंदर गुस्सा है और अगर आप जानना चाहते हो की how to control my anger? – तो इसका कोई जवाब नहीं है, कोई रास्ता नहीं है।

और अगर आप जानना चाहते है की – मुझको गाड़ी नहीं चलानी आती है, तो इसका जवाब है की किसी driving school में जाओ गाड़ी सीखो और drive करो।

लेकिन आपके अंदर गुस्सा है तो किस वजह से गुस्सा है? कितना गुस्सा है? कबसे गुस्सा है? उसका reason क्या है? वो logical है भी या नहीं है?

कोई हो सकता है genuinely आपका torture कर रहा हो physical level पे उसकी वजह से आपके अंदर गुस्सा है, तो वो होना भी चाहिए और उस सिचुएशन में अगर आप कण्ट्रोल करो अपने अंदर की डर को तो इसलिए आपको इसमें क्लेरिटी चाहिए होता है।

जब आपको पता चलता है कि कहाँ पर डर है और कहाँ पर नहीं और आपको उस सिचुएशन का Exact नॉलेज होना जरुरी है और तभी आप उस सिचुएशन को अच्छे से समझ पाओगे और उसके हिसाब से Act कर पाओगे। ये सही तरीका होता है psychological level पे काम करने का।

लेकिन यहाँ पर गड़बड़ क्या होती है – हमारी आदत ये पड़ी हुई है ‘how to’ तो हम psychological space में भी how to लगाने की कोशिश कर रहे है।

Physical में चाहिए, आपको कुछ exam को crack करना है, क्या करना है, how to, आपको ये books पढ़नी है, इसको अच्छे तरीके से करना है, वहा पे मतलब exam पर जा करके लिखना है, वहा पर how to चलेगा।

डर (fear) में How to काम नहीं आता। जैसे आपको डर लगता है, किसी चीज़ से, मान लीजिये कि एक भुत आपको दिख रहा है, आप पूछ रहे हो की how to overcome that ghost? एक ये तरीका हो सकता है।

और अगर किसी बाबा के पास में आप अगर चली जाये, तो क्या होगा की वो कहेगा की गले में कुछ cross या ताबीज़ पहन लो etc., तो ऐसी ऐसी चीज़ होता है, ये एक तरीका है।

एक तरीका ये हो सकता है – what is ghost? भूत होते है या नहीं होते? भूत क्या होता है? भूत है भी या नहीं है? how to overcome ghost?

जब आप ऐसे सवाल करते हो तो आप अपने डर को दूर भगाने के रास्ते पर एक कदम और आगे बढ़ जाते हो।

इन सवाल से आप अपने डर को आसानी से दूर कर सकते हो

सुबह से रात तक आप जो भी करते है बस इस how to में ही फंसे रहते हो। nobody in this world ask this question, कि What is Fear? ना आपकी घर में कोई ये बात करेगा, ना college में, ना school में, ना यहाँ, ना वहा पर।

किसी को आप पूछो, तो वो कहेगा – अच्छा डर लग रहा है, अरे डरने की क्या जरुरत है, कोई भी आ करके आपको advice दे देंगे।

उनको उसी situation में डाल दो, वो तो आपसे भी ज्यादा डर जायेगा।

जैसे आपके parents कहेंगे की बेटा/बेटी exam से क्यों डर रहा है, उनको बोलो की आप दे दोना exam, आप मत डरना। तो वे तो और डर जायेगा।

तो डर क्या है? यह बहुत ही interesting है। मैं आपसे एक सवाल पूछता हूँ की – Can You Be Absolutely Fearless? आप कहोगे की – No, देखो काम ही ख़त्म हो गया ना।

आप absolutely fearless नहीं हो सकते, अगर आपने ये मान लिया तो काम ही ख़त्म हो गया, मतलब आपने डर को accept किया हुआ है, और वही डर आपको बांध देता है।

ये नहीं किया तो पता नहीं क्या हो जायेगा, ये किया तो पता नहीं क्या हो जायेगा – क्या आपकी life में यही नहीं चल रहा है सुबह से रात तक। क्यूंकि यही डर आपको बांध रहा है, ये बात आपको साफ नज़र आ रही है, अगर आपकी थोड़ी सी भी अकल है तो आप इस सच को देख सकते हो।

जो आप करना चाहते हो वो आप नहीं कर पा रहे क्यों? क्यूंकि डर लगता है। और जो आप कर रहे हो बिना मन के, फिर भी करना पर रहा है, ऐसे decisions लेने पर रहा है जो आप नहीं लेना चाहते हो, फिर भी ले रहे हो क्यों? डर की वजह से।

तो what is fear – क्या desire ही fear की जड़ नहीं है? क्या attachment fear की जड़ नहीं है? क्या आप अपने desires छोड़ने के लिए तैयार हो, आपका जवाब होगा नहीं। तो ऐसे में fears को कैसे छोड़ोगे?

Actual में डर आपको नहीं पकड़ रहा है, आप डर को पकड़ रहे हो और यही गड़बड़ हो रहा है।

जैसे आपके अंदर एक exam को crack करने का जितना desire है उतना डर भी है, आपको जिस इंसान से जितनी attachment है उसको खोने का उतना ही डर है।

सोचो कि किसी इंसान से कोई Attachment नहीं है, तो उसको खोने का डर होगा क्या?

कितने लोग अभी मर रहे है? इस दुनिआ में अलग अलग जगह पर, कही ना कही earthquake आ रहे है, उसका डर है क्या आपको? आप कहोगे नहीं। तो क्यों नहीं है कभी सोचा आपने? लोग तो मर रहे है वहा पर भी। वहां डर नहीं है।

लेकिन मेरे घर पर अगर earthquake आ गया तो क्या होगा, वो डर है ना?

आपके अंदर किसी चीज़ को बहुत ज्यादा importance दी हुई है, किसी भी चीज़ को। तो उसको खोने का डर होगा ही होगा, ऐसा नहीं हो सकता की ना हो।

आपके अंदर desire है की – ‘मेरे को इस exam को crack करना है, तो वो crack नहीं हुआ तो क्या होगा !!!!! उसका डर होगा,’

लेकिन जिसको नहीं crack करना है exam, उसके अंदर डर होगा क्या? आप कहोगे नहीं होगा। क्यूंकि उसका desire नहीं है, तो क्या desire और fear एक ही नहीं है, क्या ये दोनों अलग अलग है? क्या यह एक ही सिक्के के दो पहलु नहीं है? क्या desire negative नहीं है क्यूंकि desire की वजह से तो fear आ रहा है, desire नहीं तो fear नहीं।

तो अगर किसी में बहुत ज्यादा desire होगा तो उसके अंदर कितने डर होंगे? बहुत ज्यादा डर। किसी के अंदर कोई desire नहीं होगा तो उसके अंदर कितने डर होंगे – कोई डर नहीं।

अब आप अपने अंदर झांक करके देख सकते हो कि आपके अंदर कितने desires है, कितनी attachment है।

क्यूंकि जितनी attachments है, जिन जिन चीज़ो से जितनी attachments है, जिन जिन लोगों से जितनी जितनी attachments है, उतने ही तरह की आपके अंदर डर है, मतलब जहा attachments है वहा fear है। जितनी attachments है उतना fear है।

अगर आपकी अंदर desires रखोगे और साथ में डर भी रखोगे और जिसको आपलोग success बोलते हो और जब आपको success मिलेगी, जिसको आप success बोलते हो – यानी की आज आपकी मानलो monthly salary है – 20 हजार रूपए, आप कहोगे 50 हजार रूपए मतलब success, तो उस 50 हजार रूपए की salary को खोने का, उस job को खोने का डर भी उतना ही बड़ा होगा।

धीरे धीरे डर बढ़ेगा

तो life जैसे जैसे आपकी आगे बढ़ेगी, तो डर बढ़ने वाला है, तो आप और ज्यादा paralyze होने वाले हो, अगर आप चाहो तो fearlessly act कर सकते हो।

जैसे जैसे responsibilities बढ़ेगी, अगर आप 20-30 साल तक की age group में है, तो अभी time है डर को कम करने का, fearlessly act करने का लेकिन अभी भी अगर आपके अंदर इतने डर है, तो आने वाले 10 साल बाद, 20 साल बाद आप कैसी ज़िंदगी जी रहे होंगे, वो आप खुद सोच सकते हो।

तो ऐसी ज़िंदगी आपको चाहिए या नहीं चाहिए? – ये सवाल अपने आपसे पूछना है।

अगर चाहिए तो ठीक है कोई फर्क नहीं पड़ता, सभी तो ऐसे ही चल रहा है, चलते रहो, ज़िंदगी काटने ही तो है काट लेंगे, डर डर करके जीते रहेंगे ये काम पसंद नहीं है फिर भी करते रहेंगे मरते दम तक।

ऐसी ज़िंदगी जीना समझदारी है क्या किसी भी angle से या बेवकूफी है – ये करना सिर्फ और सिर्फ बेवकूफी है, क्या आप बेवकूफ नहीं हो?

तो जितनी attachments उतने ही डर, attachments हमारी किस से होती है? कभी सोचा है क्या? क्या आपकी कभी काम से attachments होती है या काम से जो मिलने वाला है उस से attachments होती है?

हमें हमेशा Results पर फोकस्ड होता है और जिंदगी में जितनी भी प्रॉब्लम है वह सिर्फ इसी के कारण होते हैं। यह डर भी इसी के कारण एक्सिस्ट करता है।

अगर काम से attachments हो जाये तो क्या होगा? किसी के अंदर पढ़ने का डर होता है या fail होने का डर होता है? – आप कहोगे fail होने का डर होता है।

तो क्या हो आपको अगर किसी काम से प्यार हो जाये तो, love is the way to overcome fear, प्यार ही ऐसी चीज है जहाँ कोई डर नहीं है। इसका मतलब जहाँ प्यार है वहां कोई डर नहीं।

जैसे भूतों से हमें डर लगता है और अगर हम कहें हमें भूतों से प्यार है तो डर गायब, It’s Funny ना!

हम क्या करते है Love को भी हमने जा करके जोड़ दिया attachments से। हम सोच रहे है की love होने के लिए attachments होनी बहुत जरुरी है। जबकि इन दोनों का आपस में कोई connection ही नहीं है, जहा पर attachments है वहा पर fear भी है, जहा पर डर है वहा पर कोई love नहीं है।

बच्चो में डर

ये सब सुनने में बहुत कड़वा लगेगा आपको – माँ-बाप कहते है कि हम अपने बच्चे से बहुत प्यार करते है – क्या यह प्यार है? student तो suicide कर रहे है, depression में तो जा रहे है, stress तो बहुत ज्यादा है उनके ऊपर, pressure बहुत ज्यादा है, 16-17  घंटे पढ़ रहे है। तो कौन पीछे से उनके पीछे pressure create कर रहे है? – उनके ही अपने माँ-बाप। वो माँ-बाप जो कहते है की बहुत प्यार करते है हम अपने बच्चो से।

अगर आप actual में प्यार करते हो तो क्या कभी ऐसा करोगे? उनके अंदर भयानक डर पनप रहा है क्यूंकि आप उनसे attached हो और जिसकी वजह से आपको डर है की मेरा बच्चा अगर ये नहीं कर पाए तो क्या हो जायेगा! और ज्यादातर पेरेंट्स इसी थिंकिंग की वजह से अपने ही बच्चो के अंदर डर पैदा कर रहे हैं।

अगर आपको सच में प्यार होगा तो आप क्या कहोगे – “जा जो करना है कर, मैंने तो अपनी ज़िंदगी जी ली, मैं तो एक level पे आ गया, तेरी पूरी की पूरी life आगे पड़ी है, जा अपना रास्ता खुद बना।”

आपको समझना पड़ेगा की प्यार क्या है? attachment क्या है? क्या attachment प्यार है?

जहा पर attachment होती है वहा पर प्यार होता है क्या?

आप किसी इंसान से attach हुए पड़े हो बुरे तरीके से, क्या आप उसको genuinely प्यार करते हो? क्या प्यार कब्ज़ा करना है? attachment का मतलब ही कब्ज़ा है। for example – ‘I am attach to my car’, क्यूंकि वो car मेरी है, तो मैं उसको जैसे चाहुँ वैसे चलाऊँ, ये मेरी वाइफ है, ये बच्चे मेरे है – ये प्यार है क्या?

या प्यार ये है या होना चाहिए कि जो उसके लिए सही है, वो नहीं जो मुझे लगता है की उसके लिए सही है। दोनों में जमीन आसमान का फर्क है।

मुझे किस base पे लगता है की उसके लिए वो सही है, अपने unlimited fears के base पे, की अगर ये नहीं हुआ तो लोग क्या कहेंगे, रिश्तेदार क्या कहेंगे, उनके सामने हम जा नहीं पाएंगे, etc.

अब अगर actual में आप डर से पूरी तरह से free होना चाहते हो तो उसका सिर्फ एक ही तरीका है that is – ‘LOVE’, if you really love something, उसके लिए अगर आपको torture भी सहना पर रहा है, तो torture भी अच्छा लगता है, यानि की अगर पढ़ना भी पर रहा है, तो वो पढ़ना भी अच्छी लगती है, अगर आपको उस काम से प्यार है तो …..

Conclusion

सब कुछ अपने थिंकिंग का ही उपज है अपने थिंकिंग को समझ जाओ और डर गायब।

  • अब जैसे बच्चो को फ़ैल होने का डर लगता है की लोग क्या कहेंगे, उससे डरने की बजाय उस desire से दूर हो जाओ यानी जो होगा सो होगा क्या फर्क पड़ता है, ऐसी सोच हो तो डर अपने आपही खत्म हो जायेगा।
  • जैसे पेरेंट्स को बच्चो में attachments होता है तो बच्चो में डर भर देते हैं और जिसकी वजह से बच्चो को खोना पड़ता है, तो उसका सलूशन यह है कि उस अटैचमेंट को छोड़ कर बच्चो को प्यार करना चाहिए, उसको जो करना है उसे करने देना चाहिए।
  • जैसे लोगो अपनी बात कहने से डर लगता है, क्यूंकि उनके अंदर एक अटैचमेंट है रिजल्ट क्या होगा, तो इसका सलूशन है जो होगा देखा जायेगा अब मुझे मेरे बात को लोगो को बताना है, ऐसी सोच डेवेलोप करनी होगी।
  • एक होता है चीजों का डर, उसके लिए उस चीज को एक बार देखना चाहिए, फील करना चाहिए, Try करना चाहिए। जैसे मुझे ऊंचाई से डर लगता है तो बंजी जंपिंग Try करो, Parachuting try करो। पानी से डर लगता है तो Swimming सीखो, etc.
  • जैसे हमें छिपकली से डर लगता है तो उसको पास से देखो, उसके बारे में नॉलेज लो, क्या उससे हमें कोई हानि होता है या नहीं। अगर कुछ नहीं होता है तो डर भी नहीं।
  • जैसे सांप से डर लगता है तो वह डर ठीक भी है क्यूंकि आपकी जान बच जाएगी।
  • जैसे मौत का डर हमें अंदर से paralyze कर देता है क्यों? क्यूंकि हमें मरना नहीं है। अब ऐसा तो नहीं हो सकता कभी भी तो इससे डर ने से क्या फायदा? सबको मरना है आज नहीं तो कल!
  • जैसे किसी अपने को खोने का डर होता है, तो आपको यह बात भी पता होना चाहिए कि आपको भी मरना है। जैसे आप कहो उसको नहीं मरना चाहिए, अरे! जैसे ही इस बात को आप कहते हो तो इसका मतलब है आप मुर्ख हो और मूर्खों को कोई बात समझ आएंगे ही नहीं।
  • जैसे किसी को Job खोने का डर होता है तो जैसे ही आप अपने अंदर की Desire को छोड़ देते हैं वैसे ही डर खत्म हो जाता है।
  • जैसे हमें भविष्य का डर होता है तो उसे दूर करने का उपाय है डिजायर को छोड़ना और अभी जो आप कर रहे हो उसके ऊपर ध्यान देना।
  • जैसे हमें अँधेरे का डर होता है तो इससे दूर रहो यानी लाइट में रहो। या अँधेरे को समझो कि कुछ नहीं होता है अगर अँधेरा भी होता है तो! तब आप इस डर को खत्म कर सकते हो।
  • जैसे किसी शत्रु का डर है और वह डर तभी खत्म होंगे जब सभी अटैचमेंट्स से आप ऊपर उठ पाओगे और शत्रु से मित्रता कर लोगे। अगर हमेशा अपनी शत्रु से घृणा करोगे, क्रूरता करोगे etc. तब तो डर हमेशा रहेंगे ही ना!
  • जैसे हमारे अंदर कोई बड़ी बीमारी होने का डर रहता है तो उस डर को ख़त्म करने का एक तरीका यह है कि सही Diet हर दिन फॉलो करना है और थोड़ा Yoga और मैडिटेशन करना है। और कभी भी गलत खाना सेवन नहीं करना है।
  • जैसे हमारे अंदर भीड़ पर रहने का डर होता है, तो भीड़ से दूर रहो या भीड़ का सामना करो तभी आपके अंदर से यह डर खत्म होगा। बेस्ट तो यह है उसका Experience करो।
  • जैसे हमें Public Speaking का डर होता है तो उसे खत्म करने के लिए कही स्टेज पर जाकर बोलने की Try करनी चाहिए, और बार बार Try करनी चाहिए और अपने आपको Improve करनी चाहिए।
  • जैसे कुछ डर होता है लोगो से बात करने डर, उसके साथ बैठने का डर। तो आपको क्या लगता है कि वो कैसे solve होंगे, उसका सिर्फ एक ही तरीका है उसका सामना करना है, उनसे दूर भागना नहीं है।
  • जैसे होता है आसमानी बिजली गिरने का डर, तो वह डर होना चाहिए। नहीं तो आप मरोगे। आप कहोगे बिजली कड़क रही है मुझे डर नहीं लगता बाहर जाने में और आप बाहर गए और……….

तो अब जब भी ऐसी चीज हमारे सामने आये जिससे हमें डर लगता है तो उसके बारे में सही नॉलेज होना जरुरी है। क्यूंकि कहीं डरना ही सही है और कहीं पर उसका सामना करना।

अगर फिजिकल लेवल पर किसी चीज से हमें नुकसान होता है तो उनसे डरने की बजाय उसका नॉलेज होना जरुरी है और तब हम उस चीजों से बच सकते हैं।

जैसे कुछ डर ठीक भी है सांप का डर, जंगली जानवरों के डर, etc. डर उस चीज का होना चाहिए जिससे हमें फायदा मिलें।

जैसे कुछ चीजें है जिसमें प्रैक्टिकल करने पर ही हमारे अंदर वह डर खत्म होगा। एक्साम्प्ल – Public speaking का डर, किसी को अपनी बात को बताने का डर, लोग क्या कहेंगे का डर etc.

अब इसका एक सार भी है – वह है अपना ध्यान Spiritual की तरफ थोड़ा लेकर जाएँ, Spiritual बुक्स पढ़ें – सबसे जरुरी है आप Shrimad Bhagwat Geeta का अध्ययन करें, Shrimad Bhagavatam पढ़ें, उसके बाद Ramayana, कृष्ण लीला, Vedas इत्यादि पढ़ें। इससे आपके अंदर सच में ताकत Build होंगे, आपकी Personality बदल जायेंगे।

यह बातें मैं इसलिए बता पा रहा हूँ क्यूंकि मेरे अंदर भी बहुत सारे डर थे और मैं थोड़ा स्पिरिचुअल की तरफ आगे बढ़ा और आज मैं उस बहुत सारी डर से ऊपर उठ पाया हूँ। इसमें सबसे जरुरी होता है विश्वास।

तो आपको आज का यह पोस्ट “Dar Ko Kaise Dur Kare” कैसा लगा?

अगर आपके मन कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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