Enlightenment का अनुभव कैसा होता है | What is Enlightenment

Enlightenment का अनुभव कैसा होता है – Hello दोस्तों, सालों तक एक ही ध्यान मुद्रा में समाधि में बैठे रहना, जीवन की सुखों को त्याग कर अकेले रहना और उसी में आनंद को पा लेना, इस संसार को ही नई दृष्टि से देखना। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्या होता है Enlightenment ? क्या होता है परम ज्ञान को प्राप्त कर लेना? कैसे एक साधारण इंसान, जिसका स्वभाव किसी को पसंद नहीं होता, वो ध्यान मुद्रा से अपना स्वभाव बदल लेता है।

 

ऐसे लोग संत तक बन जाता है। क्या आपने अपने व्यस्त जीवन को छोड़ कर कभी एकांत में ऐसे विचारों को मन में लाने की कोशिश की है ? अगर आपने इतना समय व्यर्थ नहीं किया तो मैं आपको इस छोटी सी आर्टिकल से समझाने की कोशिश करूँगा कि आखिर क्या है Enlightenment ? तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Enlightenment का अनुभव कैसा होता है ?

 

दोस्तों इसे शायद आप भगवान को देखना या कोई दिव्य शक्ति की तरह देखते होंगे, लेकिन Enlightenment का मतलब है मानसिक स्तर तक पहुँच जाना या फिर हम अपनी चेतना को पहचान जाते हैं।

 

 

हमारी लाइफ

 

जब हमारा जन्म होता है, तभी से हमारा सीखना शुरू हो जाता है, चलना कैसे है, खाना कैसे है, पहनना कैसे है, ये क्या चीज है, वो क्या चीज है, इसके बाद हमारी स्कूल की शिक्षा शुरू होती है, उसमें हमें सीखाया जाता है कि हमें समाज में क्या करना है, क्या नहीं करना है, हमारा इतिहास क्या है, हमारा भविष्य कैसा होगा, शिक्षा के बाद हम उसी समाज में कैसे पैसा कमा सकते हैं, कैसे अच्छी लाइफस्टाइल जी सकते हैं, ये सभी बातें हम एक एक करके सीखते हैं।

 

इस तरह हम जीवन में सिर्फ भौतिक ज्ञान को सीखते हैं, लेकिन मानसिक ज्ञान नहीं दिया जाता। हमें ये सीखाया जाता है की हमें शांत रहना है, लेकिन हमें ये नहीं सीखाया जाता की शांत रहना कैसे है!

 

हमें ये सीखाया जाता है की हमें गुस्सा नहीं करना है, लालच नहीं करनी है, लेकिन हमें ये नहीं सीखाया जाता की ये करना कैसे है, इसलिए इस जीवन में हम कही पहुँच ही नहीं पाते।

 

गुस्सा मत करो, अरे लेकिन गुस्से को कण्ट्रोल कैसे करें ? गुस्सा तो हर किसी को आता है। etc.

 

बचपन में ही हम सीखना और भागना शुरू कर देते हैं, लेकिन हमें ये नहीं सीखाया जाता की हमें पहुंचना कहाँ हैं ! यही कारण होता है हमारे जीवन के कष्टों का।

 

इस दुनिया में हर व्यक्ति कष्ट को झेलता है और सबका कष्ट भौतिक नहीं बल्कि मानसिक होता है। अतीत में घटी घटना या जीवन की विपत्ति, हमारे शरीर पर कोई कष्ट नहीं होता, फिर भी संतुष्ट नहीं होते।

 

हम जीवन के अंतिम चरण तक पहुँच जाते हैं, लेकिन हम जीवन का मकसद समझ नहीं पाते।

 

क्या आपको नहीं लगता की अगर हमारे सारे कष्ट मानसिक होते हैं तो इसका निवारण भी मानसिक ही होगा।

 

पुरे जीवन में हमें जो भी सीखाया जाता है वो हमारे मानसिक कष्टों को ठीक नहीं कर पाता। तो क्या आपको नहीं लगता हमें कुछ नया सीखने की जरुरत है।

 

 

Enlightenment का अनुभव

 

क्या होता है Enlightenment, क्या होता है वो परम ज्ञान जो हमें इन सबसे पार ले जाता है ? इसका जवाब है इन्हीं भौतिक दुनिया में मानसिक कष्टों से बाहर चले जाना, यानी हमारी समस्यायों का पूरा हल मिल जाना।

 

जब हम उसी जगह पर पहुँच जाते हैं जहाँ से हमारी शुरुवात होती है, हमने जीवन में जो भी सीखा होता है, उससे पहले उसी सूक्ष्म स्तर तक पहुँच जाना, जहाँ हमें ना कष्ट का ज्ञान था, ना लालच की इच्छा थी।

 

हमारे लिए सारी ही सृष्टि अपनी और नई सी लगने लगती है। ना किसी वैर, ना किसी का मोह, हमारा स्वभाव भी इसी लालच, वैर, इर्षा, मोह, जैसी भावनाओं का ही मेल होता है।

 

जब हम इन सबसे बाहर होते हैं, तो कष्ट ही नहीं रहते।

 

सिद्धार्थ गौतम भी सभी कष्ट लेकर ध्यान में मग्न हुए थे और जब उन्हें Enlightenment हुई तो वो गौतम बुद्ध कहलाये।

 

जब हम अपनी चेतना को समझ जाते हैं तब हम जीवन का मकसद भी समझ जाते हैं। हम अपने मन पर विजय पा लेते हैं, जहाँ हमें सुख और दुःख की कामना नहीं रहती, हमारा स्वभाव हमारी इन्द्रियों के वजन के नीचे नहीं दबता, बल्कि हम इन्द्रियों को सिर्फ एक भावना की तरह महसूस करने लगते हैं।

 

हम अपने जीवन की किसी भी शिक्षा को इस एहसास से नहीं जोड़ सकते, ये कोई दिव्य शक्ति नहीं बल्कि अभ्यास पाया वो मुकाम होता है, जहाँ से नई जीवन की शुरुवात होती है।

 

 

Conclusion

 

तो दोस्तों मुझे उम्मीद है की आपको Enlightenment के बारे में पता चल गया होगा।

आपको आज का यह आर्टिकल कैसा लगा ?

अगर आपके मन में कुछ भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

क्या आप Enlightenment होना स्वीकार करेंगे ?

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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