Henry Ford की सक्सेस स्टोरी – किसान के बेटे थे वो

Henry Ford की सक्सेस स्टोरी – Hello दोस्तों, Ford कंपनी को कौन नहीं जानता ! अगर Ford नहीं होता तो आम जनता तक गाड़ी पहुँचता ही नहीं, तो आज हम उसी के फाउंडर Henry Ford के बारे में बात करेंगे की कैसे एक किसान के बेटे होने के बावजूद भी उन्होंने Ford की शुरुवात करी और कैसे उसको सक्सेस मिला, उसी सक्सेस जर्नी के बारे जानने के लिए आपको ये पोस्ट आगे पढ़ना होगा।

 

तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Henry Ford की सक्सेस स्टोरी

 

जब कार बनना शुरू हुई थी तब आम लोगों के लिये इसे खरीदना लगभग नामुमकिन था क्योंकि या तो वो बहुत ज़्यादा महँगी थी या उन्हें बिना ट्रेनिंग के चलाना इतनी आसान बात नहीं थी, लेकिन गाड़ियों को आम जनता की सुविधा के अनुसार बनाने में अगर किसी का हाथ है तो वो हैं Henry Ford, जिन्होंने फ़ोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना की और गाड़ियों को आम जनता के लिए आसान, हल्का और सुविधा जनक के साथ काफ़ी सस्ता भी बना दिया था।

 

 

जन्म

 

Henry Ford का जन्म 30 जुलाई 1863 को ग्रीनफ़ील्ड टाउनशिप, मिशिगन, अमेरिका में हुआ। Henry अपने 6 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे।

 

उनके पिता एक किसान थे और वो चाहते थे कि Henry भी उनके साथ खेत में उनकी मदद करे लेकिन उनको बचपन से ही मशीनों और मैकेनिकल चीज़ों से लगाव था इसी के चलते वो लोगों की घड़ियाँ भी ठीक किया करते थे जब Henry 15 साल के थे तो उनके माता-पिता की डेथ हो गयी फिर Henry 1879 में डेट्रॉइट चले गए।

 

 

सक्सेस जर्नी

 

डेट्रॉइट जाने के बाद Henry ने James F. Flower & Brothers के साथ में काम किया और इसी साथ में कई वर्कशॉप में काम करके एक्सपीरिएंस लिया। वहाँ उनकी सैलरी पर्याप्त न होने की वजह से वो रात में घड़ियाँ ठीक करने का काम करते थे, जिससे कुछ एक्स्ट्रा इनकम हो सके।

 

7 साल तक अलग-अलग कारखानों में काम करने के बाद Henry अपने पिता के फ़ार्म पर वापस आ गए फिर वो वेस्टिंगहाउस में स्टीम इंजन पर काम करने लग गए, जो कंपनी फार्मिंग में यूज़ किये जाने वाले स्टीम इंजन बनाती थी।

 

अपने फ़ार्म पर वापस आकर उन्होंने मशीन और इंजन ठीक करने का कारखाना खोला और उसी दौरान 11 अप्रैल 1988 को उन्होंने Clara Jane Bryant से शादी कर ली। शादी के बाद उनका मशीन बनाने का कारखाना यंत्रों की कमी से बंद करना पड़ा और वो फिर से डेट्रॉइट चले गए।

 

डेट्रॉइट वापस जाने के बाद उनके हुनर और मशीन के प्रति लगाव को देखकर उन्हें जुलाई 1891 में Edison Illuminating Company में बतौर इंजीनियर नौकरी मिल गयी और 6 नवम्बर 1893 को Henry चिफ़ इंजीनियर के पद पर प्रमोट हो गए।

 

उसके बाद उनकी पैसों की समस्या थोड़ी कम हुई लेकिन उनका सपना एक अच्छी नौकरी पाना था, वो गैसोलीन से चलने वाले इंजन के प्रति ज़्यादा इंटरेस्टेड थे, उन्होंने उसको लेकर कुछ बड़ा करने की मन मे ठान ली थी और ऐसा ही हुआ साल 1893 में उन्होंने पेट्रोल से चलने वाला इंजन भी बनाया।

 

उसकी सक्सेस के बाद वो उसी इंजन को लेकर कार बनाने के काम पर लग गए और 1896 में पहली कार बनाई जिसका नाम उन्होंने Quadricycle रखा। उसके बाद उन्होंने खुद की ऑटोमोबाइल की कंपनी बनाने की सोची, वहीं Edison की कंपनी ने उनके सामने 1200 डॉलर्स सैलरी का प्रपोज़ल रखा और जनरल सुपरिटेंडेंट का पद देने की बात कही।

 

Ford वो सैलरी और पद चाहते थे क्योंकि उनके पास नई कंपनी बनाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं थे, लेकिन आखिर उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने में ध्यान दिया।

 

अगस्त 1899 में उन्होंने Edison की कंपनी छोड़ दी और डेट्रॉइट ऑटोमोबाइल नाम की खुद की कंपनी बनाई, जिसकी फंडिंग उन्हें William H. Murphy नाम के नामी बिज़नेसमैन से मिली जो 18 महीनें बाद दिवलिया हो गयी और Ford का सपना एक बार फिर से टूट गया।

 

उसी दौरान Henry Ford ने कुछ रेसिंग कार्स बनाई थी जिन्होंने रेस में काफ़ी अच्छा परफॉर्म किया था जहाँ उन्होंने Alexander Winton को रेस में हरा दिया। उसके एक महीने बाद Henry ने अपनी दूसरी कंपनी बनाई जिसका नाम उन्होंने Henry Ford कंपनी रखा, जो बाद में जाकर Cadillac Motor Car Company बनी।

 

दो बार हार का सामना करने के बाद फ़ाइनली उन्होंने 16 जून 1903 को Henry Ford Motor Company की स्थापना की, जिसमें 12 इन्वेस्टर्स ने मिलकर 28000 डॉलर्स इन्वेस्ट किये, जिसमें Henry का शेयर 25.5% था और 15 जुलाई 1903 को Ford ने अपनी पहली कार बेची जिसका नाम Model A था और पहले साल में उन्होंने 1708 कारें बेचीं और दूसरे साल लगभग 5000 कारें बेची।

 

1906 में Henry, कंपनी के प्रेज़िडेंट बने और उन्होंने सभी शेयर होल्डर्स को उनके शेयर देकर खुद कंपनी के मालिक बन गए। फिर उन्होंने काम को बढ़ाने के लिए मूविंग असेंबली लाइन के तरीके को खोजा और आज बड़ी-बड़ी कंपनीज़ में जिस तरह से काम होता है उसकी खोज असल मे Henry Ford ने की थी, वो किसी भी काम को नए तरीके से करना और क्वालिटी को बनाये रखते हुए काम को आसान करना जानते थे।

 

Ford प्रेज़िडेंट बन गए लेकिन उनका असली मक़सद एक बड़ी कंपनी का मालिक बनना नहीं था बल्कि ट्रांसपोर्टेशन का ऐसा साधन बनाना था जिसको आम लोग आसानी से खरीद सके, इसी को ध्यान में रखते हुए Ford ने 1908 में Model T नाम की कार बनाई, ये कार इतनी सस्ती थी कि आम आदमी भी इस कार को खरीदने में समर्थ था, ये कार इतनी कामयाब हुई कि मेजोरिटी अमेरिकन के पास Model T कार थी और इसकी वजह से अमेरिकन हाईवे को बनाने का प्रस्ताव पास हुआ और ऑयल का यूज़ भी बढ़ा।

 

1924 के आते-आते Ford ने ट्रैक्टर्स और ट्रक भी बनाना शुरू कर दिया था और 1931 के आते-आते Ford Motor Company 2 करोड़ से ज़्यादा ऑटोमोबाइल्स

बना चुकी थी।

 

1929 में उन्होंने “The Henry Ford Museum” और “Edison Institute Of Technology” की स्थापना की।

 

Henry Ford एक बिज़नेसमैन होने के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता भी थे, उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स को किसान और ग्रामीण लोगों के अनुसार सस्ता बनाया।

 

शुरुआत में मिली दो बड़ी असफ़लताओं के बाद अगर Henry ने हार मान ली होती तो वो कभी सफ़लता के इतने बड़े आयाम नहीं देख पाते और हम आज उनकी बनाई बेस्ट परफॉर्मेन्स कार को नहीं देख पाते, उनके इस पैशन की वजह से उन्हें कार्स की दुनिया का जनक कहा जाता है जो 7 अप्रैल 1947 को चल बसे और उनकी डेथ के बाद वो आज भी दुनिया पर राज करते हैं।

 

 

Conclusion

 

तो दोस्तों आपने Henry Ford की सक्सेस स्टोरी से क्या सीखा ?

 

एक किसान का बेटा अगर एक कार कंपनी को बना सकता है तो हर कोई कुछ बड़ा कर सकता है।

 

क्या आप भी कोई इनोवेशन करना चाहते हैं ?

 

आप दुनिया में अपना छाप छोड़ना चाहते हैं ?

 

क्या आप भी बड़े आदमी बनना चाहते हैं ?

 

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