Intelligence Kya Hai – Increase Your Intelligence

Hello दोस्तों, क्या अपने मन में यह सवाल कभी आया है कि Intelligence Kya Hai, Intelligence को आप कैसे बढ़ा सकते है और कैसे Intelligence को बढ़ाके आप जिंदगी में आगे बढ़ सकते है और कैसे सही Decision ले सकते हो। आज हम इसी के बारे में डिटेल में बात करेंगे। तो अगर आपको Practically अपनी Intelligence को बढ़ाना है तो ये article पूरा पढ़े, इसमें कोई theoritical बातें नहीं बताई गयी है।

तो चलिए शुरू करते हैं –

Intelligence Kya Hai – Increase Your Intelligence

No 1 – क्या हम सभी को कुछ programming करके बनाया है ?

बचपन से हमारी सबकी ये programming करि गयी है बचपन से ही, competition की और comparison की, स्कूल में competition, घर में competition, भाई-बहन का आपस में competition – वह बहुत अच्छा है पढ़ाई में, तू बिलकुल बेकार है, वो कितना अच्छा खेलते है, तू क्यों नहीं खेल पाता, वो कितना अच्छा दिखता है तू इतनी अच्छी क्यों नहीं दिखती, etc.

बस Competition और Comparison – इससे हुआ क्या हमारी mind की programming हो गयी, हम चाहा करके भी इस दुनिआ को बिना किसी competition के, बिना कोई अपने आपको किसी और से compare किए देख ही नहीं सकते।

या तो हम किसी को अपने से compare करेंगे उसको अपने से ऊपर बिठा देंगे या उसको अपने से नीचे गिरा देंगे।

No 2 – बचपन से की गयी प्रोग्रामिंग को कैसे तोड़े?

इस programming को अगर तोड़ना है तो हमें एक सवाल बीच में लगाना ही होगा, How to increase your intelligence? उसके बिना ये programming नहीं टूट सकती, आप auto-pilot पे चलते ही चले जाओगे और फँसते ही चले जाओगे, आपको समझ ही नहीं आएगा की मेरी problems की जड़ क्या है।

Example – आपके पास में एक छोटी गाड़ी है, आपने देखा की आपका जो परोसी हे उसके पास में जो छोटी गाड़ी थी अब वो एक बड़ी गाड़ी ले आया, आपके पास में santro है वो honda city ले आया, आपका बहुत खास दोस्त है, वो भी इंजीनियर है और आप भी इंजीनियर हो।

दोनों एक ही तरह की काम कर रहे है, आप जब भी उसकी गाड़ी को देखोगे तो क्या होगा – comparison आएगा। यानी की उसके पास ये है, मेरे पास ये नहीं है, तो आपके अंदर एक desire उठेगा उस level पे।

बल्कि desire नहीं सबसे पहले एक wish उठेगी की काश मेरे पास भी एक ऐसी बड़ी गाड़ी हो, अब ये wish धीरे धीरे जब आप उस गाड़ी को देखते चले जाओगे, उसके बारे में सोचते चले जाओगे ये desire बन जाएगी।

No 3 – क्या आपकी ही Desire आपको फसाता है?

अब देखो ये desire किस तरीकेसे फंसायेगा आपको की आपने उस गाड़ी को देखा और आपके अंदर desire उठा की मुझे ये गाड़ी चाहिए यानी बड़ी गाड़ी चाहिए और आपके mind में imaginations आनी शुरू हो गयी की मुझे ये चाहिए, चाहिए ही चाहिए। बस किसी तरीकेसे मुझे यह मिल जाये, चाहे मुझे कुछ भी क्यों ना करना पड़े!

आपने रास्ते निकालने शुरू कर दिए, इन desire के according mind automatically रास्ता निकालता हे, की अब ये कैसे मिल सकती है, जल्दी से जल्दी ये कैसे मिल सकती है।

और उस वक़्त हमको और कुछ दिखाई नहीं दे रहा होता है, कुछ और चीजें समझ नहीं आ रही होती है, और हुआ क्या की आप गए और कुछ महीने बाद जा करके एक गाड़ी खरीद करके ले आयी finance कराके, आपकी इतनी capacity नहीं है उस गाड़ी को afford करने की, लेकिन आपका desire बहुत strong था तो उसने वो काम करवा ही दिया आपसे।

अब जैसे ही आपने finance कराई आपकी जो savings थी वो भी उस में लग गयी, plus monthly installments गयी, आपकी salary का एक बहुत बड़ा हिस्सा 20% या 30% उस installment में जाने लग गया आपका।

एक बार सोचिये अगर आपके boss को इसके बारे में पता लग गया तो वो क्या कर सकता है आपके साथ! उसको ये समझ आ जाये की आपके अंदर इस गाड़ी को खोने का डर है, यानी की अगर किसी वजह से मेरी गाड़ी मेरे हाथ से चली गयी तो मैं क्या करूँगा, इस society में जाकरके कैसे अपनी शकल दिखाऊंगा, लोग कहेंगे छोटी गाड़ी में आगया वापस से बड़ी गाड़ी से।

तो उस गाड़ी से आपको attachment हो जाएगी की अगर उसपे किसी ने scratch मारा तो लड़ाई झगड़ा होगा, कुछ भी हुआ problem तो हम चिपकते ही चली जा रही है उस गाड़ी से, और चिपकने के वजह से क्या हुआ?

तो उस desire की वजह से क्या हुआ अब आप पूरी की पूरी trap में फंसते चले जाओगे।

ये मैंने गाड़ी का example लिया है, ऐसी और बहुत सारे examples है, और हुआ क्या की जैसे ही उस boss को ये बात समझ में आया की अब आप इस नौकरी को छोड़ नहीं सकते, अगर आपने यह नौकरी छोड़ा तो आपकी installment इतनी ज्यादा है इस गाड़ी की – कि आप problem में आ जाओगे।

अब वो boss क्या बोलेगा आपको? कि आपको daily 2-3 घंटे overtime करना है, क्या आप मना कर पाओगे – आप मना ही नहीं कर सकते और आप फंस गए।

अब आप इस चीज को समझ नहीं पाओगे की आप फँसे किसकी वजह से हो, आपके अंदर एक डर पनपेगा की अगर मैंने ये job छोड़ दी और 3-4 महीने तक मुझे कही और job नहीं मिली तो मेरा क्या होगा EMI कहा से दूंगा, मेरे घर के खर्चे कहा से निकालेंगे, ये कैसे होगा, वो कैसे होगा और आप फंसे ही चले गए।

आपके अपने desire ने boss के through आपको फंसा दिया और उसके बाद में जैसे जैसे आप आगे बढ़ते चले जाओगे वहा पर जितना आपका torture होगा, वो torture आ कर आप कहा निकलोगे – अपने घर पे, अपनी family पर गुस्सा करोगे, तुम्हे पता नहीं है मेरे पे कितना pressure है, मेरे पे कितना stress है!

आप खुद सोचो ना Stress को create किसने किया? आपकी desire की वजह से आपने अपनी चादर से ज्यादा पैर फैलाएंगे तो problem शुरू तो होंगे ही ना?

No 4 – अब Desire की वजह से जो प्रॉब्लम आयी उससे बाहर कैसे निकले?

अब सोचो इसमें करना क्या है, इस situation से कैसे निकल सकते है? जिस वक्त हमारे अंदर ये desire उठे की मुझे भी ये बड़ी गाड़ी चाहिए या कुछ भी चाहिए तो अपने आपको रुक करके ये पूछना है – क्या सच में मुझे यह चाहिए या सिर्फ comparison की वजह से मैं unnecessary अपने ऊपर एक pressure create कर रहा हूँ?

जहा आपने यह सवाल पूछा उसी वक़्त आप इस पूरी की पूरी problem से 1 सेकंड में बहार आ गए। इसमें आपके intelligence बीच में आगयी, और वही आपको बचा सकता है। यानी desire को उठने से पहले ही आपने ख़त्म कर दिया, आपने कहा मुझे गाड़ी नहीं चाहिए, मुझे आजादी चाहिए, I need freedom.

यानी की अगर मुझे उस job में मजा नहीं आ रहा और मुझे उस नौकरी को लात मारनी पड़े तो मैं 1 सेकंड भी न लगाओ लात मार दू, मुझे एक stress-free लाइफ चाहिए, मुझे एक tension-free लाइफ चाहिए। मतलब इन सब में कोई trap नहीं है।

No 5 – क्या आपको Freedom चाहिए?

जहा हम चीज़ों से जा करके जुड़ गए वहा पे trap ही trap है, सारि की सारि problems है। हमें करना क्या है उस situation में – उस गाड़ी को छोड़ना है, क्या problem है गलती कर दी गाड़ी ले ली। बड़ी गाड़ी बेच एक छोटी गाड़ी ले लो, सारि problem solve.

लेकिन हमारा दिमाग कभी इस direction में जायेगा ही नहीं, सारा का सारा जो खेल है वो मन का है, मन ही है सारी problem की जड़।

लोग कर क्या रहे है अपने मन की सुन रहे है, मन से प्यार कर रहे है, भगवान से डर रहे है, करना क्या है इसका उल्टा भगवान से प्यार करना है और मन से डरना है यानी अपनी इंटेलिजेंस का Use करना है और Intelligence क्या है? Intelligence is Questioning.

जैसे हम बीमार हो गए या सोचो बीमार हो गए और जा करके भगवान के सामने बैठना है, या सोचो की मैं बीमार क्यों हुआ?

क्यूंकि जब मैं किसी शादी में गया, तो इतना सारा खाना देख करके मुझसे रहा नहीं गया, मेरा मन करता था की मैं सब कुछ खा लू!

इसमें हमने क्या किया हमने पेट की भूख को मिटाने की वजाय अपने मन की भूख को मिटाने की कोशिश करि, जिसकी भूख कभी मिट ही नहीं सकती, खाते रहे, खाते रहे, जा करके हॉस्पिटल में पहुँच गए।

अब भगवान को बोल रहा है – भगवान तूने ये क्या कर दिया? वो भी हस्ता होगा वो कहता होगा भाई कर क्या रहा है तू, तू देख तो सही तेरा मन तुझसे क्या करवा रहे है?

हमें इस मन को वश में करना है। और यही पर हमारी Intelligence काम आता है? यानी हमें थोड़ा रुक करके अपने आपसे सवाल पूछना चाहिए कि क्या सच में हमें यह चाहिए? वो चाहे कुछ भी हो।

No 6 – मन क्या है?

मन = Desire + Attachment का Combination.

आप खुद एक चीज से, एक situation से या एक इंसान से attach हो जाते हो, जहा आप उसके साथ में चिपक गए तो क्या होगा उसका सुख-दुःख आपका सुख-दुःख बन गया, वो मिला तो खुश, नहीं मिला तो परेशान, etc.

तो किसने कहा है चिपकने के लिए आपको?

For example – अगर आपको उठा करके आपकी गाड़ी की वजह से आपके boss ने पिंजरे में दाल दिया, पिंजरा ही हो गया न, यानी की ना आपको उस job में मजा आ रहा है, और ना ही उसको छोड़ सकते हो!

बेमन के किसी काम को करोगे तो क्या तरक्की करोगे उसपर, कहा आगे बढ़ोगे, काम का असर किस पर आएगा relationship पर आएगा। यानी सब कुछ जुड़ा हुआ है और हम फंसते ही चले जा रहे होते है।

No 7 – हमारा Desire कैसा होना चाहिए?

हमे बनने की desire पैदा करने है, की मुझे कुछ बनना है, जो भी मैं आज हूँ उससे better बनना है।

For example – मैं एक painter हूँ, तो मुझे एक better painter बनना है। ऐसे ही किसी भी फील्ड में हमें grow करने की सोचने चाहिए और ऐसा करने से हमें जो चाहिए वो मिल सकता है।

लेकिन “मुझे और चाहिए” – ये खतरनाक desire है, इस सिचुएशन में आप at least कुछ questions पूछो, जैसा की मैंने पहले ही बताया हुआ है।

Science क्या है – It’s all about questioning, अगर एक सवाल नहीं होता तो आज science नहीं होती।

एक आदमी आराम से पेड़ की नीचे बैठा हुआ था, उसके पास में एक apple गिरा था, apple गिरा और उसने देख करके अपने आपसे question पूछा की apple नीचे क्यों आता है ऊपर क्यों नहीं जाता, the law of gravity was born in that particular moment.

तो question क्या है – एक desire है कुछ जानने का, questioning is also a desire, जो आपके intelligence को बड़ा देगा, और एक desire है चीज़ो का, जो आपकी intelligence को कम कर देगा।

No 8 – क्या आप अपने आपको Question करते हो ?

एक question पूछो अपने आपको की हम ये कर क्यों रहे है?

यानी की मैं अपने परोसी की गाड़ी को देख करके ये क्यों चाह रहा हूँ की मुझे भी वो गाड़ी चाहिए?

ये मेरा अपना desire है या बचपन से मेरी ऐसी conditioning हुई पड़ी है, बचपन से मेरी ऐसी programming हो गयी है। competition, competition…… comparison, और बस comparison……

क्या उस गाड़ी में बैठने के बाद में बहुत मजा आने वाला है?

क्या वही ज़िंदगी है या ज़िंदगी कुछ और है?

पिंजरा जैसा ही हो, सोने का भी हो, है तो पिंजरा ही न?

किसी भी चीज़ का desire एक सोने के पिंजरे जैसे है, जो हमको कैद कर देता है।

No 9 – आप Intelligent कैसे बन सकते हो?

Questioning पूछने का जो desire है वो सबसे बढ़िया है यह आपके intelligent को बढ़ाएगा। किसी भी काम में आपको extra-ordinary होने के लिए आपको questions पूछना ही पड़ेगा।

Business में आपको daily हजार बार सवाल पूछना ही पड़ेगा के मेरे customers को क्या चाहिए, उनकी requirement को समझना है, और उसके साथ आपको brain exercises, brain training भी करना पड़ेगा, मतलब आपकी brain को question करना पड़ेगा।

Brain को मतलब अपने आपको better बनाना है, जिसको सवाल पूछने की आदत है, वो किसी भी field में चला जाये वो कामयाब  जायेंगे, उसको कोई रोक नहीं सकता,

मान लीजिये दो इंजीनियर है I.I.T. के अंदर – एक है सिर्फ रट्टा मार रहा है, एक है जो इस फंदा को समझ रहा है, जिसको फंदा समझ आ गया वो किसी भी problem को solve कर सकता है।

लेकिन जिसने रट्टा मारा वो सिर्फ एक ही problem को solve कर सकता है, जिसने रट्टा मारा उसका दिमाग सीधे है, वो सिर्फ एक ही तरह की काम कर सकता है।

लेकिन जिसने basics को समझ लिया वो कुछ भी कर सकता है और basics को वही समझ सकता है जो questioning कर सकता है, सही तरह की questions, सही जगह पर पूछते चले जाना है, पूछते चले जाना है, और उसका mind sharp होता चला जायेगा।

Conclusion

तो आपने देखा कि Questioning ऐसा एक उपाय है जिससे हम सच में अपनी Intelligence को बढ़ा सकते हैं।

तो इसलिए अगर आपको सही में अपनी Intelligence बढ़ानी है तो आपको हर चीज में हर वक़्त कमसे कम एक बार Questioning का सहारा लेना ही चाहिए।

बहूत सारे मोटिवेशनल स्पीकर बोलते हैं कि Intelligence बढ़ाने के लिए यह एक्सरसाइज करो, बादाम खाओ, कुछ भी बताते हैं, लेकिन वह प्रैक्टिकल सलूशन नहीं है, Practical सलूशन सिर्फ वह है – सही समय पर सही Questioning. बस

तो दोस्तों आपको आज का पोस्ट कैसा लगा?

आज आपने क्या नया सीखा?

अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

”The important thing is not to stop questioning. Curiosity has its own reason for existing” – Albert Einstein

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

 Wish You All The Very Best.

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