Sandeep Maheshwari Motivational Speech in Hindi – आज में जीना सीखो

Sandeep Maheshwari Motivational Speech in Hindi – Hello दोस्तों, आज मैं फिर से आपके लिए संदीप महेश्वरी जी के द्वारा बताया गया एक मोटिवेशनल स्पीच के बारे में बात करूँगा की हम Pen से क्या सीख सकते है और कैसे सीख सकते है।


तो आपको ये Miss नहीं करना चाहिए।

आज में जीना सीखो – Sandeep Maheshwari Motivational Speech in Hindi

 

दोस्तों जैसे Pen में ink होता और हम उससे लिखते हैं, ऐसे ही हमारा लाइफ है, क्यूंकि हमारा लाइफ भी ऐसा ही है की उसी एक pen में जैसे एक ink होते हैं वैसे ही हमारे लाइफ भी एक ही बार मिलता है और उसी में हमें क्या करना है, क्या नहीं करना है वो सब एक ही बार कर सकते हैं।


Pen में जो ink है, उसको आप देख सकते हो टाइम की तरह।


टाइम हम सबके पास में लिमिटेड है। आप चाहो ना चाहो वो ink खत्म होती ही चली जाती है क्यूंकि pen कभी रुकता नहीं है।


आपको लगता है की वो रुक गया है, लेकिन रुकता नहीं है।


Pen तो चलता ही रहता है। और जैसे चलता रहता है, क्यूंकि लाइफ चलती रहती है, लाइफ कभी रूकती नहीं है।


आप अपने thought के level पे रुक सकते हो, लेकिन लाइफ नहीं रूकती है। body तो grow करती रहती है ना !


बूढ़े होते रहते हैं ! मतलब की हमें पता है की वो ink खत्म होने वाली है एक दिन !


तो ink खत्म होती चली जा रही है मतलब हमारे टाइम खत्म होता चला जा रहा है।


तो इस लिमिटेड टाइम में, लिमिटेड ink के साथ में आप जो लिख सकते हो वो भी लिमिटेड है। तो जब लिखना ही है, कुछ ऐसा लिखो ना की आने वाली जो generations है, वो देख करके कहे – अरे मजा आ गया, क्या लिखा है !


खुद को भी मजा आये वो पढ़ करके। जब pen में वो ink खत्म होने वाली होगी, कुछ दिन रह जायेंगे और हमको दिख रहा है, धीरे धीरे वो pen की ink खत्म होती चली जा रही है, थोड़ी सी रह गयी है।


मतलब जिंदगी के अब सिर्फ 5-10 साल रह गए हैं, डॉक्टर के पास जा रहे होते हैं, जैसे pen के साथ भी लास्ट में ऐसा ही होता है। उस टाइम पे भी मैं क्या कर रहा हूँ, अपनी उस ink को use कर रहा हूँ, अपनी उस टाइम को use कर रहा हूँ, कुछ और अपनी लिखावट को improve करने के लिए।


अब एक बात है की जो pen की बात हो रही है, मतलब जो हमारी लाइफ है, वो बीच में भी खत्म हो सकती है, जैसे pen बीच में भी टूट सकता है। ये भी हमें ध्यान रखना पड़ता है।


तो इसीलिए कभी भी अपनी ख़ुशी को या satisfaction को postpone मत करो। अपनी जिंदगी को हर moment को इस तरीकेसे जीओ की अगर आगे moment में सब कुछ खत्म भी जाये यानि की वो pen टूट जाये या ink leak हो जाये।


होता है ना की डॉक्टर ने एकदम से कुछ बोला की अब तुम्हारे पास में 20 साल नहीं है, 20 दिन है।


तो ये होना चाहिए जैसे ही हमे पता चले की 20 दिन है – क्या फर्क पड़ता है, मैं अपनी जिंदगी अच्छे जी सुका हूँ। अब अगर ये pen टूटता भी है तो टूट जाये।


मौत से कौन डरता है क्या आपने कभी सोचा है – मौत से वो डरता है, जिसने कभी जिंदगी को जीया ही नहीं है।


मेरी ink खत्म हो जाएगी उससे कौन डरता है – जिसने कभी कुछ ढंका लिखा ही नहीं है। उस pen को ढंग से use किया ही नहीं है। जिसने pen को पूरी तरह से use कर दिया, अब उसके अंदर कुछ बचा नहीं है की अब मुझे ये करना बाकि रह गया।


अब वो बंदा पूरी तरह से तैयार है की अभी मौत आती है तो अभी आ जाये। क्यूंकि मैं अपनी जिंदगी बहुत अच्छी तरीकेसे पूरा जी लिया हूँ।


हो सकता है आप इस बात समझ पाओ, नहीं पाओ – एक पंछी है वो क्यों पैदा हुआ है ! – उड़ने के लिए। अगर वो उड़ा ही नहीं पूरी जिंदगी के लिए तो ! तो उसके अंदर एक उम्मीद रहेगी की हाँ किसी दिन उडूँगा और उसको मरने का डर लगेगा। क्यूंकि वो तो उड़ा ही नहीं।


लेकिन अगर वो पंछी एक बार पूरी तरह से उड़ गया, जिसलिए वो पैदा हुआ था, वो काम हो गया ना ! खत्म…….


और जब वो ऐसे जियेगा, तो वो मौत के साथ जीयेगा। यानी जिंदगी और मौत उसके लिए अलग अलग नहीं।


असली जिंदगी वो है जहाँ पर आप अपनी जिंदगी के हर पल को मौत के साथ जीओ। मौत मतलब क्या – कुछ छूट जाता है, उसको मौत बोलते है। सब कुछ छूटने से डरते हैं ना हम की सब कुछ छूट जायेगा।


तो छोड़ने से कौन डरता है, जिसने कभी पूरी तरह से किसी चीज को पकड़ा ही ना हो, वो छोड़ने से डरता है, जिसने आधा-अधूरा पकड़ा हो।


for example – आपने एक जगह पर पूरी तरह से अपना 100% दे देते हैं, और उसी तरह से आपने और एक जगह पर 100% देते हो उसके 1 साल बाद तो अगली वाली जो जगह थी उसकी याद तक नहीं रह जाएगी आपके पास।


लेकिन अगर आपने उस एक साल बाद आप अपनी लाइफ को पूरी तरह से नहीं जी रहे होंगे तब आपको मौत से डर लगेगा और आप अपनी जिंदगी को आधे-अधूरे समझेंगे। और ये बातें आपको हर वक़्त सताता रहेगा।


तो आप कहाँ जी रहे होंगे अपने past में, और फिर आपके अंदर एक उम्मीद पैदा होंगी की शायद फिर से वो 100% देने वाली काम को मुझे फिर से करने पड़े तो फिर से मुझे वो एक साल पहले वाली मजा आएगा। और हममें से ज्यादातर लोग ऐसे ही जीते हैं।


की मैं उस hill स्टेशन पे गयी थी अपने friends के साथ में कितना मजा आया था। हमारे पुरे भाई-बहन इक्कठे थे, पुरे relatives आये हुए थे, उस शादी पे, कितना मजा आया था अब फिर वो 5 साल बाद उसकी शादी आएगी, उसमें बहुत मजा आएगा। लेकिन आता नहीं है। हम ऐसे जीते है इसलिए हम मौत से डरते हैं।


अगर एक पंछी पूरी तरह से उड़ रहा है, तो जिस वक़्त वो उड़ रहा है, उसके mind में memory है की एक साल पहले वो उड़ान क्या थी ! नहीं है, क्यूंकि वो उड़ान भी perfect थी और ये उड़ान भी perfect है, यहाँ कोई comparison नहीं हो सकता।


अगर आप इस बात को समझके अपनी लाइफ को पूरी तरह से जी रहे हो, तो वहां पर memories के कोई गुंजाइश होती ही नहीं है।


जब भी आप कोई काम पूरी तरह से कर रहे होते हो, तो वहां पर past की memories नहीं होती है, आप पूरी तरह उस moment में होते हो, वहां पर कोई future नहीं होता है, future का डर नहीं होता है।


तो आप टाइम से ऊपर उठ जाते हो, जब आप उस पल में बिल्कुल वहाँ होते हैं।



Don’t be afraid of Death, Be afraid of an Unlived Life – Sandeep Maheshwari



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