Depression and Suicidal Thoughts को कैसे Overcome करें ?

Depression and Suicidal Thoughts को कैसे Overcome करें ? – Hello दोस्तों, आज हम एक बहुत ही इम्पोर्टेन्ट चीजों के बारे में बात करेंगे। टाइटल देख करके आपको पता लग ही गया होगा कि आज हम Depression और Suicidal Thoughts के ऊपर बात करेंगे की इसे Overcome कैसे किया जाये। इंडिया में हर साल हज़ारों इंसान सुसाइड करते हैं, पूरी दुनिया में लाखों लोग सुसाइड करते हैं। तो आज हम जानेंगे कि इसके क्या क्या Causes है, इसको ठीक कैसे किया जाये।

 

अगर आप भी Depression के घेरे में आ गए हैं तो आप एक बार इस आर्टिकल को जरूर पढ़े। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Depression and Suicidal Thoughts को कैसे Overcome करें ?

 

दोस्तों Depression और Suicidal Thoughts को अगर Overcome करना ही है तो आपको पहले जानना पड़ेगा की इसकी रुट कॉज क्या है, और इसे जानने के बाद इसकी 3 लेवल पर काम करना पड़ेगा।

 

 

एक लेवल है – हमारी बॉडी

 

अगर बॉडी के लेवल अगर हमे कोई भी प्रॉब्लम्स होगी तो पहले आपको अपने बॉडी को ठीक करना पड़ेगा।

बॉडी में भी specifically आपको अपने पेट को ठीक करना पड़ेगा।

आयुर्वेद में कहा गया है कि हर बीमारी की जो जड़ है वो सिर्फ और सिर्फ पेट ही है।

लेकिन जो मॉडर्न साइंस है वो हमारे ब्रेन पर ज्यादा काम कर रही है, पेट पे कम कर रही है।

आप एक बात अगर ध्यान से देखोगे तब आपको पता लगेगा कि जब भी आपका पेट ख़राब रहता है, तब आपको बुरा फीलिंग होने लगते हैं।

ऐसा आपने भी महसूस किया ही होगा कभी न कभी।

तो पेट का डायरेक्ट कनेक्शन है हमारे बुरा फील होने से, मूड ख़राब होने से। इसलिए सबसे पहले हमे ये देखना है की क्या हमारा पेट ठीक है, या नहीं है !

अगर पेट ठीक नहीं है तो उसके लिए आप कोई नेचुरोपैथी सेण्टर में जा सकते हो। जो बहुत ही कॉस्ट इफेक्टिव तरीकेसे ट्रीट करते हैं प्रॉब्लम को।

 

 

दूसरे लेवल है – हमारी थॉट प्रोसेस

 

अब देखना है की अगर हमारे पेट ठीक है फिर भी हमारे दिमाग में उल्टे थॉट्स आ रहे हैं, तो देखना पड़ेगा की इसका मतलब हमारी थॉट प्रोसेस में कोई प्रॉब्लम है।

उसके लिए आपको अपने थिंकिंग को समझना पड़ेगा। मतलब आपके जो थिंकिंग पैटर्न है उसको सही करना पड़ेगा।

क्यूंकि किसी इंसान की थिंकिंग ही गलत हो, तो उसको आप कितनी भी दवाईयां दे दो, किसी भी specialist के पास लेके जाओ वो कभी ठीक नहीं हो सकता। क्यूंकि प्रॉब्लम की जड़ पर कोई काम ही नहीं करेगा।

तो इसको ठीक करने के लिए आपको अपने थिंकिंग पैटर्न को ठीक करना पड़ेगा यानी आपकी थिंकिंग को सही करना पड़ेगा।

इसको easily ठीक किया जा सकता है, आप मोटिवेशनल स्पीच सुन सकते हो, किसी पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स या बुक्स पद सकते हो, आर्टिकल पढ़ सकते हो, मोटिवेशनल सेमिनार अटेंड कर सकते हो।

इसके आलावा भी जो प्रोफेशनल क्लीनिकल साइकोलोजिस्ट होते है उनके पास भी विजिट करके उनसे इसके बारे में बात की जा सकती है।

इसके बारे में समझ सकते हैं कि जो प्रॉब्लम है वो क्या है, उसका कॉज कहाँ पर है। हो इसका कॉज बचपन में हो, हो सकता है कोई लाइफ में बड़ी इंसिडेंट हुई हो, हो सकता है कोई mishappening हो, हो सकता है किसी से कुछ misunderstanding हो etc.

तो ये सारी बातें एक साइकोलोजिस्ट ही प्रॉपर्ली एनालिसिस करते हैं। वो पुरे प्रॉब्लम को साइकोलोजिकल लेवल पर दाएगोनोस करेंगे कि वो प्रॉब्लम एक्चुअल में क्या है और वो उसके ऊपर काम करेंगे।

तो उनसे अप्पोइन्मेंट लेके, जो आप ऑनलाइन भी ले सकते हैं, उनसे एक बार बात जरूर करें।

इसका एक और हल है – कई बार क्या होता है की हमारे अंदर ही अंदर बहुत रखा होता, भरा पड़ा होता है, तो इसे लोगो के साथ शेयर कीजिये। किसी अपनो के साथ, किसी दोस्त के साथ, मतलब जिससे भी आप खुल के बात कर सकते हैं, जिसपे आप ट्रस्ट करते हैं।

या फिर अगर आपको बहुत जोड़ से रोना आ रहा है तो उनको आप अपने अंदर दबाके मत रखिये, खुल के रो दीजिये।

 

 

तीसरे लेवल है – Psychiatrist के पास जाना

 

तो आपको ये बात भी बता दें की यही सब कुछ नहीं है। मतलब आपने पेट को भी ठीक किया, थॉट्स को भी सही किया, एक्सरसाइज भी करते हैं, प्राणायाम भी करते हैं, योग भी करते हैं, मतलब पुरे शरीर को ठीक किया, अपने डाइट को भी ठीक किया।

इसके बाद भी प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हो रही है, फिर भी Suicidal Thoughts आ रहे हैं, तो फिर आपको इम्मीडिएटली किसी न किसी साइकेट्रिस्ट को कांटेक्ट करना चाहिए।

जो प्रोफेशनल साइकेट्रिस्ट होते है वो आपकी प्रॉब्लम को दाएगोनोस करेंगे।

हो सकता है आपके जो प्रॉब्लम हो वो ब्रेन में कुछ पर्टिकुलर केमिकल्स है जो रिलीज़ होने चाहिए, लेकिन वो आपके ब्रेन में रिलीज़ नहीं हो रहे हैं।

तो अब चाहे आप कितना भी अच्छा सोच लो, आपको बुरा ही फीलिंग आएगी।

तो अब आपको समझना है की प्रॉब्लम यही तीनों लेवल पर होगा। इसके आलावा इसका कोई लेवल नहीं है।

हाँ लेकिन आपको इन तीनों लेवल को ठीक करना होगा।

मतलब सिर्फ आपके बॉडी स्वस्थ होने से भी कुछ नहीं होगा, यानी सिर्फ आयुर्वेद भी कुछ नहीं कर सकती, सिर्फ साइकोलोजिस्ट भी कुछ नहीं कर सकता, सिर्फ साइकेट्रिस्ट भी प्रॉब्लम को ठीक नहीं कर सकते, सिर्फ सही थॉट प्रोसेस से भी कुछ नहीं हो सकता, आपको तीनों लेवल के काम करना पड़ेगा।

अगर आप इनमें से किसी एक पे ही काम कर रहे हो तो कुछ नहीं होगा। जब आप तीनो लेवल को ठीक कर देते हो तब आप कह सकते हो कि फिर आपकी कोई प्रॉब्लम होने की वजह रहेगी ही नहीं।

अगर ब्रेन में थॉट्स के लेवल पर कुछ प्रॉब्लम है और आप कोई दवाईयां ले रहे हो तो कैसे होगा??

अब अगर ब्रेन में कुछ केमिकल की वजह से प्रॉब्लम है तो सिर्फ साइकोलोजिस्ट भी कुछ नहीं कर सकता, वहां साइकेट्रिस्ट ही काम आएंगे।

मान लीजिये अगर सेरोटोनिन रिलीज़ नहीं हो रहे है, जिसकी वजह से मूड ख़राब हो रहा है तो कुछ मेडिसिन होती है जिससे अपनी ब्रेन को सेरोटोनिन मिलने लग जाती है तो मूड ठीक हो जाता है।

उसके बाद भी अगर हम उल्टा सोचे तो प्रॉब्लम कभी खत्म नहीं होगा। मतलब सिर्फ साइकेट्रिस्ट भी कुछ नहीं कर सकता है।

 

एक्साम्प्ल – हमारा शरीर ये बिलकुल एक गाड़ी के जैसा है। मतलब सिर्फ इंजन से कुछ नहीं होगा, सिर्फ पहिये से गाड़ी तो चलने वाला है नहीं, तो आपको बॉडी भी चाहिए, इंजन भी चाहिए और पहिये भी चाहिए और स्टेरिंग भी चाहिए।

 

वैसे ही हमारे अंदर की डिप्रेस्शन और Suicidal Thoughts को Overcome करने के लिए तीनो चीजों जरुरी है – बॉडी, थॉट्स और ब्रेन के केमिकल।

 

बॉडी मतलब पेट जो हम खाते है जिससे हमारे पुरे शरीर को नुट्रिशन मिलते है, थॉट्स मतलब माइंड की थिंकिंग पैटर्न, और ब्रेन के केमिकल मतलब जो हमे चाहिए, सेरोटोनिन, डोपामिन, ऑक्सीटोसिन, एंडोर्फिन्स।

 

तो आपको तीनो को ठीक करना है। अगर हमने तीनो चीजों को संभाल लिया है तो हमारी Depression और Suicidal Thoughts की प्रॉब्लम जड़ से खत्म हो सकता है।

 

 

क्या पॉजिटिव थिकिंग से इसको ठीक किया जा सकता है ?

 

अब मान लीजिये कि किसी की प्रॉब्लम है पेट पे तो कोई आकरके बोल रहा है अरे तू बहुत उल्टा सोचता है, तू उल्टा क्यूँ सोचता है।

या किसी के प्रॉब्लम है ब्रेन के केमिकल के लेवल पे, और कोई आकरके उसको बोल रहा है अरे तू हमेशा उल्टा क्यूँ सोचता रहता है, तू नेगेटिव क्यूँ सोचता है ? पॉजिटिव सोचना !

जैसे मैंने बताया वो पॉजिटिव थिंकिंग यानी थॉट्स एक लेवल पर ही काम करेगी। अगर ब्रेन भी उसका साथ दे और पेट भी उसका साथ दे तो वो बढ़ सकता है।

बस अकेला पेट और अकेली ब्रेन भी कुछ नहीं कर सकती। तीनों चीजें जरुरी है।

और इस बातों को समझना भी बहुत जरुरी है, क्यूंकि ये बहुत बड़ी प्रॉब्लम है।

जैसे एक टेबल के तीन पैर है तो आप इसके अगर एक भी निकाल दोगे तो टेबल गिर जाएगी। आपको शायद पता ही होगा की ये बहुत serious और sensitive issue है।

इंडिया में अभी तक लोगो को पता ही नहीं है की ये कितनी बड़ी प्रॉब्लम है।

कोई अगर आता है इस प्रॉब्लम के ऊपर बात करने के लिए तो कोई भी इस प्रॉब्लम के ऊपर बात ही नहीं करते है। और जिस वजह से लोग इस प्रॉब्लम के ऊपर बात करने पर भी घबराते हैं या डरते हैं।

तो इसके रिलेटेड लोगो में Awareness की जरुरत है, नॉलेज की जरुरत है।

यहाँ पर जो basically लोगों को जरुरत है कि सामने वाले को बताये जाये, ताकि उनको समझ आये जैसे ही कोई प्रॉब्लम होती है, मान लीजिये आपको कोई इन्फेक्शन हुआ है उसके लिए आप एंटीबायोटिक्स लेते है ना और फिर वो ठीक हो जाता है।

तो ऐसे ही ब्रेन के लेवल पर कुछ प्रॉब्लम हो सकती है जिसको प्रोफेशनल साइकेट्रिस्ट दाएगोनोस करेगा और उसके अकॉर्डिंग मेडिसिन्स देगा और ठीक हो सकती है।

अगर प्रॉब्लम पेट के लेवल पे है तो उसको कोई स्पेशलिस्ट एनालाइज करेगा और समझेगा, वहां पे मेरा रिकमेन्डेशन यही आप किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर के पास जाओ।

वो आपकी पल्स देख करके ये पता लगाएगा की basically आपकी बॉडी में जो बैलेंस होना चाहिए उसको बोलते है – वात, पित्त और कफ, कही इसमें इम्बैलेंस तो नहीं क्रिएट हो रहा है।

कही ऐसा तो नहीं है की शरीर में वात (Gas) बहुत ज्यादा बढ़ रही है, जब गैस बहुत ज्यादा बढ़ रही है ब्रेन के अंदर, तो ना चाहते हुए भी थॉट्स बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं। और ऊपर प्रेशर क्रिएट होने लग जाता है।

तो ऐसे में वो आयुर्वेदिक डॉक्टर आपके वात को बैलेंस करेगा तो उससे आपकी बॉडी ठीक हो जाएगी।

 

 

तीन प्रोसेस

 

तो ऐसी Depression और Suicidal Thoughts की प्रॉब्लम में जो –

 

  1. पहली एप्रोच होनी चाहिए ऐसी किसी भी प्रॉब्लम में वो होनी चाहिए आयुर्वेद और नेचुरोपैथी।
  2. दूसरी एप्रोच होनी चाहिए थिंकिंग या थॉट्स के पैटर्न को ठीक करना, यानी संदीप महेश्वरी जी के सेशंस, या मेरे इस ब्लॉग में आर्टिकल पढ़ना या किसी प्रोफेशनल साइकोलोजिस्ट के पास जाये।
  3. तीसरी एप्रोच होनी चाहिए साइकेट्रिस्ट। जो आपके ब्रेन के केमिकल के लेवल को बैलेंस बनाएगा। मतलब अगर आपके ब्रेन में सेरोटोनिन, डोपामिन, ऑक्सीटोसिन, एंडोर्फिन्स रिलीज़ नहीं हो रहे हैं तो उसको मेडिसिन के थ्रू रिलीज़ करवाएगा।

 

और आपको पूरी तीनों लेवल के ऊपर साथ साथ काम करने से आपकी Depression और Suicidal Thoughts धीरे धीरे ठीक हो जायेगा।

मतलब तीनों को साथ में लेके चलना पड़ेगा। एक को आप छोड़ नहीं सकते। अगर प्रॉब्लम ज्यादा है तो।

 

लेकिन 99% केसेस में आप देखोगे जैसे ही आप पेट को ठीक कर लोगे या फिर आपके बॉडी में जो इम्बैलेंसेस हो रहे हैं वात, पित्त, कफ के उसको आप बैलेंस कर लोगे और थोड़ी सी थॉट प्रोसेस को ठीक कर लोगे मोटिवेशनल या पर्सनल डेवलपमेंट सेमिनार देख करके तो प्रॉब्लम 99% केसेस में ठीक हो जाएगी।

आपको अगले लेवल पे जाना ही नहीं पड़ेगा। लेकिन फिर भी इन दोनों को यानी बॉडी और थॉट्स के ऊपर काम करने के बाद भी अगर ये ठीक नहीं हुआ तो उसके बाद आपको जल्दी से जल्दी साइकेट्रिस्ट के पास जाना चाहिए।

उसमें आपको ज्यादा सोचना नहीं है, टाइम waste करने की जरुरत नहीं है। यानी ये सभी करने के बाद भी आपके अंदर Suicidal Thoughts आ रहे हैं तो हो सकता है वो प्रॉब्लम ब्रेन के लेवल पर हो।

तो आपको उसके अकॉर्डिंग एक्ट करना चाहिए।

 

 

Recommended Books –

 

 

 

Conclusion

 

दोस्तों आपको समझ में आ गया होगा Depression और Suicidal Thoughts को कैसे Overcome करना है, फिर भी आपके मन में कुछ सवाल है तो मुझे नीचे कमेंट में जरूर बताये।

आप मुझ से कंसल्ट भी कर सकते हैं, WhatsApp No. – 9101025898

अगर आपको इस आर्टिकल से कुछ भी हेल्प मिला है तो मुझे जरूर बताये।

आप लोगो को इसके बारे में बता भी सकते है ताकि लोगो में Awareness फैले।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

 

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