Panchatantra Story in Hindi – बुद्धिमान सियार

Panchatantra Story in Hindi – Hello दोस्तों, मुझे पता है आपको हमारा पंचतंत्र की कहानियां सीरीज पसंद आ रहा है, तो आज मैंने फिर से आपके लिए एक नए पंचतंत्र की कहानी संग्रह करके लेके आया हूँ, इसे पढ़के आप सीखेंगे कि सतर्क व्यक्ति जीवन में कभी मार नहीं खाता। उम्मीद करता हूँ आज का ये स्टोरी भी आपको बहुत पसंद आएगा। और कुछ नया सीखने को मिलेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

Panchatantra Story in Hindi – बुद्धिमान सियार

एक समय की बात हैं कि जंगल में एक शेर के पैर में कांटा चुभ गया। पंजे में जख्म हो गया और शेर के लिए दौडना असंभव हो गया। वह लंगडाकर मुश्किल से चलता। शेर के लिए तो शिकार न करने के लिए दौडना जरुरी होता है। इसलिए वह कई दिन कोई शिकार न कर पाया और भूखा मरने लगा।

कहते हैं कि शेर मरा हुआ जानवर नहीं खाता, परन्तु मजबूरी में सब कुछ करना पडता हैं। लंगडा शेर किसी घायल अथवा मरे हुए जानवर की तलाश में जंगल में भटकने लगा। यहां भी किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। कहीं कुछ हाथ नहीं लगा।

धीरे-धीरे पैर घसीटता हुआ वह एक गुफा के पास आ पहुंचा। गुफा गहरी और संकरी थी, ठीक वैसी जैसे जंगली जानवरों के मांद के रुप में काम आती हैं। उसने उसके अंदर झांका मांद खाली थी पर चारो ओर उसे इस बात के प्रमाण नजर आए कि उसमें जानवर का बसेरा हैं। उस समय वह जानवर शायद भोजन की तलाश में बाहर गया हुआ था। शेर चुपचाप दुबककर बैठ गया ताकि उसमें रहने वाला जानवर लौट आए तो वह दबोच ले।

सचमुच उस गुफा में सियार रहता था, जो दिन को बाहर घूमता रहता और रात को लौट आता था। उस दिन भी सूरज डूबने के बाद वह लौट आया। सियार काफी चालाक था। हर समय चौकन्ना रहता था।

उसने अपनी गुफा के बाहर किसी बडे जानवर के पैरों के निशान देखे तो चौंका उसे शक हुआ कि कोई शिकारी जीव मांद में उसके शिकार की आस में घात लगाए न बैठा हो। उसने अपने शक की पुष्टि के लिए सोच विचार कर एक चाल चली। गुफा के मुहाने से दूर जाकर उसने आवाज दी “गुफा! ओ गुफा।”

गुफा में चुप्पी छायी रही उसने फिर पुकारा “अरी ओ गुफा, तु बोलती क्यों नहीं?”

भीतर शेर दम साधे बैठा था। भूख के मारे पेट कुलबुला रहा था। उसे यही इंतजार था कि कब सियार अंदर आए और वह उसे पेट में पहुंचाए। इसलिए वह उतावला भी हो रहा था।

सियार एक बार फिर जोर से बोला “ओ गुफा! रोज तु मेरी पुकार के जवाब में मुझे अंदर बुलाती हैं। आज चुप क्यों हैं? मैंने पहले ही कह रखा हैं कि जिस दिन तु मुझे नहीं बुलाएगी, उस दिन मैं किसी दूसरी गुफा में चला जाऊंगा। अच्छा तो मैं चला।”

यह सुनकर शेर हडबडा गया। उसने सोचा शायद गुफा सचमुच सियार को अंदर बुलाती होगी। यह सोचकर कि कहीं सियार सचमुच न चला जाए, उसने अपनी आवाज बदलकर कहा “सियार राजा, मत जाओ अंदर आओ न। मैं कब से तुम्हारी राह देख रही थी।”

सियार शेर की आवाज पहचान गया और उसकी मूर्खता पर हंसता हुआ वहां से चला गया और फिर लौटकर नहीं आया। मूर्ख शेर उसी गुफा में भूखा-प्यासा मर गया।

सीखः सतर्क व्यक्ति जीवन में कभी मार नहीं खाता।

Conclusion

तो आपने देखा न कि कैसे सियार ने शेर का शिकार बनने से बच गया, इसलिए तो सियार को वन के सबसे बुद्धिमान जीव कहा जाता है। इसलिए हर काम करने से पहले अपनी बुद्धि लगाकर उसपर सोच विचार करना चाहिए।

ऐसे ही किसी काम को करना नहीं चाहिए, नहीं तो मुश्किल और असफलताएं घेरा बना लेंगे। Proper planning के बिना किसी भी काम में आगे नहीं बढ़ना चाहिए। हाँ हो सकता है काम में बाधा आये, लेकिन बिना घबराएं रास्ते पर चलते रहना है और अपनी बुद्धि का उपयोग करना है।

शेर सियार के तुलना में अधिक बलशाली है लेकिन सियार ने अपनी बुद्धि का उपयोग किया, सियार आगे तो बढ़ गया था लेकिन रास्ते में कठिनाई आयी और अपनी बुद्धि से ही उसने शेर के हाथों से मरने से बच पाएं।

दुनिया में ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं है जिसका सलूशन न निकलता हो, बस उस प्रॉब्लम को परखना आना चाहिए। और उसी को बुद्धि बोलते हैं, जिससे हमें जीवन में आगे बढ़ने के लिए मदद मिलते हैं। आज तक जितने भी बड़े इंसान हुए हैं वह सिर्फ अपनी बुद्धि के कारन ही हुए हैं।

तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह Panchatantra Story in Hindi – बुद्धिमान सियार” कैसा लगा ?

आपने आज क्या सीखा?

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