Panchatantra Story in Hindi – गोलू-मोलू और भालू

Panchatantra Story in Hindi – Hello दोस्तों, आज मैं फिर से एक और पंचतंत्र की कहानी संग्रह करके लेके आया हूँ, जिसे पढ़ने के बाद आप सीखेंगे कि सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय काम आए। तो इसे जानने के लिए यह छोटी सी पंचतंत्र कहानी अच्छे से पढ़िए। उम्मीद करता हूँ आपको अच्छा लगेगा। तो चलिए शुरू करते हैं –

Panchatantra Story in Hindi – गोलू-मोलू और भालू

गोलू-मोलू बहुत ही पक्के दोस्त थे। गोलू जहां दुबला-पतला था, वहीं मोलू मोटा गोल-मटोल। दोनों एक-दूसरे पर जान देने का दम भरते थे, लेकिन उनकी जोड़ी देखकर लोगों की हंसी छूट जाती।

एक बार उन्हें किसी दूसरे गांव में रहने वाले मित्र का निमंत्रण मिला। उसने उन्हें अपनी बहन के विवाह के अवसर पर बुलाया था।

उनके मित्र का गांव कोई बहुत दूर तो नहीं था लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए जंगल से होकर गुजरना पड़ता था। और उस जंगल में जंगली जानवरों की भरमार थी।

दोनों चल दिए…जब वे जंगल से होकर गुजर रहे थे तो उन्हें सामने से एक भालू आता दिखा। उसे देखकर दोनों भय से थर-थर कांपने लगे। तभी दुबला-पतला गोलू तेजी से दौड़कर एक पेड़ पर जा चढ़ा, लेकिन मोटा होने के कारण मोलू उतना तेज नहीं दौड़ सकता था।

उधर भालू भी निकट आ चुका था, फिर भी मोलू ने साहस नहीं खोया। उसने सुन रखा था कि भालू मृत शरीर को नहीं खाते। वह तुरंत जमीन पर लेट गये और सांस रोक ली। ऐसा अभिनय किया कि मानो शरीर में प्राण हैं ही नहीं। भालू घुरघुराता हुआ मोलू के पास आया, उसके चेहरे व शरीर को सूंघा और उसे मृत समझकर आगे बढ़ गया।

जब भालू काफी दूर निकल गया तो गोलू पेड़ से उतरकर मोलू के निकट आया और बोला, “मित्र, मैंने देखा था….भालू तुमसे कुछ कह रहा था। क्या कहा उसने ?”

मोलू ने गुस्से में भरकर जवाब दिया, “मुझे मित्र कहकर न बुलाओ…और ऐसा ही कुछ भालू ने भी मुझसे कहा। उसने कहा, गोलू पर विश्वास न करना, वह तुम्हारा मित्र नहीं है।”

सुनकर गोलू शर्मिन्दा हो गया। उसे अभ्यास हो गया था कि उससे कितनी भारी भूल हो गई थी। उसकी मित्रता भी सदैव के लिए समाप्त हो गई।

शिक्षा – सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय काम आए।

Conclusion

तो दोस्तों आपने देखा न कि मित्र ही मित्र को छोड़कर चला गया वो भी संकट के समय, तो इसलिए दोस्त सोच-समझकर बनाना चाहिए। मित्र पहचान में तब जब आप संकट में हो तो पहले मित्र की परख करना चाहिए या फिर दोस्त बनाने के बाद भी परख कर सकते हैं।

अगर हर बार आपको लगता है कि आपका मित्र किसी काम का नहीं, उनसे पीछा छुड़ाना ही उत्तम है। क्यूंकि वैसे दोस्त कभी भी आपका फायदा उठा सकता है और जब उसकी बारी आता है तो वह दूर भागता है, तो आपको भी वैसे दोस्त को avoid करना होगा।

वैसे दोस्त कभी भी आपका दुश्मन भी बन सकता है, इससे अच्छा है उससे दूर रहना।

दोस्तों आपको आज का हमारा यह पोस्ट “Panchatantra Story in Hindi – गोलू-मोलू और भालू” कैसा लगा ?

अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

इस पोस्ट “Panchatantra Story in Hindi – गोलू-मोलू और भालू” को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

Leave a Comment