Panchatantra Story in Hindi – महान घुड़सवार

Panchatantra Story in Hindi – Hello दोस्तों, मुझे पता है कि आपको हमारा पंचतंत्र की कहानियां सीरीज पसंद आ रहा है, तो आज मैंने फिर से आपके लिए एक नए पंचतंत्र की कहानी संग्रह करके लेके आया हूँ, इसे पढ़के आप सीखेंगे कि सेवा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती। उम्मीद करता हूँ आज का यह स्टोरी भी आपको बहुत पसंद आएगा। और कुछ नया सीखने को मिलेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

Panchatantra Story in Hindi – महान घुड़सवार

एक बार एक राजा शिकार खेलने के लिए अपने सैनिकों के साथ जंगल में पहुंचा, तो उनके शत्रुओं ने चारों तरफ से उन्हें घेर लिया उनके सारे सैनिकों को मार गिराया और जैसे तैसे करके राजा ने शत्रुओं को मार गिराया।

वह घुड़सवार यानी राजा अकेला ही शत्रुओं से घिरकर बहुत बुरी तरह से घायल भी हो गया था। शत्रुओं से बचने के बाद उन्होंने आसपास देखा तो उन्हें कुछ ही दूर में एक गाँव दिखा। वह धीरे धीरे ऐसे-वैसे करके उस गाँव तक पहुंचा।

जब वह पास के गाँव वालों के पास पहुंचा तो उन्होंने उसका उपचार कर उसे बचाया। किसी को भी यह नहीं पता था कि वह घुड़सवार वहाँ का राजा था। क्यूंकि गाँव वाले थे तो राजा तक कभी उनका पहुंच ही नहीं था। कभी गाँव वालों ने राजा को देखा ही नहीं था।

गाँव के एक परिवार ने उसे अपने घर में रखकर उसकी सेवा सुश्रूषा की थी। अंततः कुछ ही दिन में राजा स्वस्थ हो गया। गाँव से जाते समय उसने अपना नाम महाश्वरोहा बताया था।

गाँव छोड़कर जाते समय जिसके घर वह रहा था उससे महाश्वरोहा ने कहा, “जब तुम शहर आओगे तब पहरेदार को मेरा नाम बताना, वह तुम्हें मुझ तक अवश्य पहुँचा देगा।” कई महीनों बाद राजा ने अपने राज्य में कर बढ़ा दिया।

गाँव वालों ने परेशान होकर उस व्यक्ति से जाकर कहा कि उसने जिसकी सेवा और उपचार किया था वह हमारा राजा ही था। सबके कहने पर वह जाकर राजा से मिला और कर के बोझ की बात करी। राजा ने उसका स्वागत किया और उस व्यक्ति के कहने पर कर हटाने पर राजी हो गया।

अगले दिन ही राजा ने सभा बुलाकर उस व्यक्ति के बारे में सभी मंत्रिओं को बताया और कर को कम करने के लिए बोला और उस दिन कर भी कम हो गया और राजा ने उस व्यक्ति को कुछ दिन अपने महल में रुकने को कहा और चार दिन बाद बहुत सारे धन देकर उसको विदा किया और राजा ने यह भी कहाँ की उस गाँव में स्कूल, अस्पताल वगैरह जैसे सभी सुविधा कुछ ही महीनों में उपलब्ध कराया जायेगा।

सीख: सेवा कभी भी व्यर्थ नहीं जाती।

Conclusion

दोस्तों इसलिए कभी भी अगर किसी को सेवा करने की अवसर मिले तो उसे गवाना नहीं है, चाहे उस समय आपका कुछ फायदा न हुआ हो, लेकिन हो सकता है बाद में उसका कई गुना फायदा आपको मिले। कई गुना सेवा आपको मिले।

लोगों को हेल्प करना चाहे कुछ पैसा देकर हो या चाहे कुछ काम करके हो, वैसा सेवा अगर हो सकता है तो ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए, क्यूंकि आपको भी कभी हेल्प चाहिए होगा तब उस सेवा का फल किसी अलग तरीकेसे आपको जरूर मिलता है।

हो सकता है आपने जिस व्यक्ति की सेवा की थी वह आपको आपके प्रॉब्लम के समय न मिले लेकिन कोई दूसरा आपको हेल्प करने के लिए जरूर आगे आएगा। लेकिन आपको हर वक़्त हेल्प करने की आदत डालनी होगी, ज्यादा नहीं थोड़ा सा हेल्प कर दो अगर हो सके तो। है न!

अगर कोई भिखारी आपसे पैसा मांग रहे है तो उसको उनको कुछ दे देना चाहिए अगर आपके पास है तो, मैंने कई लोगों को देखा है वह महीने का लाखों रूपए कमाते हैं लेकिन भिखारी को देने के लिए 10-20 रूपए नहीं है। भगा देते हैं भिखारी को। तो ऐसी मेंटेलिटी से देश आगे कभी नहीं बढ़ेगा।

मैं सिर्फ भिखारी का एक्साम्प्ल दे रहा हूँ, आपको हर उस जरुरतमंदो की सेवा यानी हेल्प करना चाहिए, अगर किसी बीमार इंसान को 10,00,000 रूपए की जरूरत हो तो आप तो 10 लाख रूपए नहीं दे सकते न, लेकिन अगर आपने 1000 भी दे दिया तो भी काम बन जायेगा। यानी आप जितना दे सकते हो वो आपको चाहिए, लोगों की हेल्प करनी चाहिए।

मैं तो खूब देता हूँ, किसी को भी कुछ भी जरुरत होते हैं तो मैं जितना हो सके उतना देता हूँ।

तो दोस्तों आपको आज के यह पंचतंत्र स्टोरी से क्या सीखने को मिला?

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