Panchatantra Story in Hindi – संगठन की शक्ति

Panchatantra Story in Hindi – Hello दोस्तों, मुझे पता है आपको हमारा पंचतंत्र की कहानियां सीरीज पसंद आ रहा है, तो आज मैंने फिर से आपके लिए एक नए पंचतंत्र की कहानी संग्रह करके लेके आया हूँ, इसे पढ़के आप सीखेंगे कि संगठन शक्ति बडे-बडों को धूल चटा देती हैं। उम्मीद करता हूँ आज का ये स्टोरी भी आपको बहुत पसंद आएगा। और कुछ नया सीखने को मिलेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

Panchatantra Story in Hindi – संगठन की शक्ति

एक वन में बहुत बडा अजगर रहता था। वह बहुत अभिमानी और अत्यंत क्रूर था। जब वह अपने बिल से निकलता तो सब जीव उससे डरकर भाग खडे होते। उसका मुंह इतना विकराल था कि खरगोश तक को निगल जाता था।

एक बार अजगर शिकार की तलाश में घूम रहा था। सारे जीव तो उसे बिल से निकलते देखकर ही भाग चुके थे। उसे कुछ न मिला तो वह क्रोधित होकर फुफकारने लगा और इधर-उधर खाक छानने लगा। वहीं निकट में एक हिरणी अपने नवजात शिशु को पत्तियों के ढेर के नीचे छिपाकर स्वयं भोजन की तलाश में दूर निकल गई थी।

अजगर की फुफकार से सूखी पत्तियां उडने लगी और हिरणी का बच्चा नजर आने लगा। अजगर की नजर उस पर पडी हिरणी का बच्चा उस भयानक जीव को देखकर इतना डर गया कि उसके मुंह से चीख तक न निकल पाई। अजगर ने देखते-ही-देखते नवजात हिरण के बच्चे को निगल लिया। तब तक हिरणी भी लौट आई थी, पर वह क्या करती? आंखों में आंसू भर जड होकर दूर से अपने बच्चे को काल का ग्रास बनते देखती रही।

हिरणी के शोक का ठिकाना न रहा। उसने किसी-न किसी तरह अजगर से बदला लेने की ठान ली। हिरणी की एक नेवले से दोस्ती थी। शोक में डूबी हिरणी अपने मित्र नेवले के पास गई और रो-रोकर उसे अपनी दुखभरी कथा सुनाई। नेवले को भी बहुत दुख हुआ।

वह दुख-भरे स्वर में बोला “मित्र, मेरे बस में होता तो मैं वही अस नीच अजगर के सौ टुकडे कर डालता। पर क्या करें, वह छोटा-मोटा सांप नहीं हैं, जिसे मैं मार सकूं वह तो एक अजगर हैं। अपनी पूंछ की फटकार से ही मुझे अधमरा कर देगा। लेकिन यहां पास में ही चीटिंयों की एक बांबी हैं। वहां की रानी मेरी मित्र हैं। उससे सहायता मांगनी चाहिए।”

हिरणी निराश स्वर में विलाप किया “पर जब तुम्हारे जितना बडा जीव उस अजगर का कुछ बिगाडने में समर्थ नहीं हैं तो वह छोटी-सी चींटी क्या कर लेगी?”

नेवले ने कहा “ऐसा मत सोचो। उसके पास चींटियों की बहुत बडी सेना हैं। संगठन में बडी शक्ति होती हैं।”

हिरणी को कुछ आशा की किरण नजर आई। नेवला हिरणी को लेकर चींटी रानी के पास गया और उसे सारी कहानी सुनाई। चींटी रानी ने सोच-विचारकर कहा “हम तुम्हारी सहायता करेंगे। हमारी बांबी के पास एक संकरीला नुकीले पत्थरों भरा रास्ता हैं। तुम किसी तरह उस अजगर को उस रास्ते से आने पर मजबूर करो। बाकी काम मेरी सेना पर छोड दो।”

नेवले को अपनी मित्र चींटी रानी पर पूरा विश्वास था इसलिए वह अपनी जान जोखिम में डालने पर तैयार हो गया। दूसरे दिन नेवला जाकर सांप के बिल के पास अपनी बोली बोलने लगा। अपने शत्रु की बोली सुनते ही अजगर क्रोध में भरकर अपने बिल से बाहर आया।

नेवला उसी संकरे रास्ते वाली दिशा में दौडा। अजगर ने पीछा किया। अजगर रुकता तो नेवला मुडकर फुफकारता और अजगर को गुस्सा दिलाकर फिर पीछा करने पर मजबूर करता। इसी प्रकार नेवले ने उसे संकरीले रास्ते से गुजरने पर मजबूर कर दिया। नुकीले पत्थरों से उसका शरीर छीलने लगा। जब तक अजगर उस रास्ते से बाहर आया तब तक उसका काफी शरीर छिल गया था और जगह-जगह से खून टपक रहा था।

उसी समय चींटियों की सेना ने उस पर हमला कर दिया। चींटियां उसके शरीर पर चढकर छिले स्थानों के नंगे मांस को काटने लगीं। अजगर तडप उठा। अपना शरीर पटकने लगा जिससे और मांस छिलने लगा और चींटियों को आक्रमण के लिए नए-नए स्थान मिलने लगे। अजगर चींटियों का क्या बिगाडता? वे हजारों की गिनती में उस पर टूट पड रही थी। कुछ ही देर में क्रूर अजगर ने तडप-तडपकर दम तोड दिया।

सीखः संगठन शक्ति बडे-बडों को धूल चटा देती हैं।

Conclusion

तो आपने देखा न कि कैसे चींटियों की संगठन ने एक खतरनाक अजगर को ख़त्म कर दिया। अगर संगठन रहेगा तो सब कुछ बरक़रार रहेगा, अकेले सब कुछ विध्वंस होने लगता है।

जैसे एक कहानी में था कि एक बांस की लकड़ी आसानी से थोड़ा जा सकता है लेकिन अगर 5-6 बांस की लकड़ी थोड़ा जाना दोनों हाथो से संभव नहीं है या कई हाथ लगाकर भी संभव नहीं है। यही है संगठन की शक्ति।

अकेले कुछ करने से अच्छा, कुछ पाने से अच्छा है की कुछ लोग साथ मिलकर करे और साथ मिलकर पाए, हो सकता है अकेले ज्यादा काम करना पड़े और ज्यादा फल भी मिले लेकिन साथ मिलकर उससे भी ज्यादा फल पाया जा सकता है और काम भी ज्यादा न करना पड़ेगा। यही है संगठन की शक्ति। जिसको हमें पहचानना पड़ेगा और साथ मिलकर काम करने की आदत डालनी पड़ेगी।

तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह Panchatantra Story in Hindi – संगठन की शक्ति” कैसा लगा ?

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