Personality Development in Hindi – पावर ऑफ़ पाजिटिविटी का 5 रूल

Personality Development in Hindi – अपनी ऑंखें बंद करके एक ऐसे इंसान को याद करने की कोशिश करिये जो आपको बहुत अच्छा लगता है, जो बहुत करिज़्माटिक लगता है, आपको हमेशा उनके साथ ख़ुशी महसूस होती है। और जब आप ये कर रहे हैं तो उनका सेहरा visualize करने की कोशिश कीजिये। उनके सेहरे में ऑलमोस्ट-ऑलवेज आपको एक चीज हमेशा दिखेगी – स्माइल।

 

एक ऐसी ख़ुशी जो चाहे जिंदगी में कुछ भी हो रहा हो हमेशा उनके अंदर-बाहर रहती है। आप उनकी ख़ुशी देखते हुए आप उनसे पूछते हैं की यार आप हमेशा खुश कैसे रह सकते हैं, हर बात में आपको ख़ुशी कैसे दिख जाती है, हर बात में आपको पाजिटिविटी कैसे दिखती है।

दोस्तों आज हम Power of Positivity के बारे में जानेंगे की Positivity क्या है, Positivity क्यों जरुरी है, और आपको Positivity के लिए क्या करना चाहिए ?

 

क्यूंकि essentially (अनिवार्य रूप से) तो एक चीज बहुत क्लियर है की पॉजिटिव लोग नैचुरली अट्रैक्ट करते हैं लोगों को। हम हमेशा पॉजिटिव लोगों की तरफ बढ़ने की कोशिश करते है, हम हमेशा उन लोगों की तरफ जातें हैं जो हमेशा हस रहे हों, खुश दिख रहे हों, एक ऐसे एनर्जी के साथ हों, एक ऐसे पाजिटिविटी के हों की हमें लगता है की यार इसके साथ रह के ना कुछ भी पॉसिबल है।

 

Personality Development in Hindi – Power of Positivity

 

अब दो सवाल बनते हैं –

 

  1. पॉजिटिव होने का कोई फायदा है भी या नहीं ? क्यूंकि ये सुनने में बहुत अच्छा लगता है की खुश रहो, पॉजिटिव रहो, तो क्या एक साइंटिफिक रीज़न है की पॉजिटिव क्यों रहना है ?
  2. अगर पाजिटिविटी जरुरी है भी तो अपनी जिंदगी में पॉजिटिव बने कैसे ? वो कौनसे टिप्स है जो आपको जानना जरुरी है, जिससे आप अपनी जिंदगी में पॉजिटिव एप्रोच लाना शुरू करेंगे ?

 

तो पहले सवाल का जवाब है – रिसर्च ने एक्चुअली प्रूफ किया है की पाजिटिविटी सबके अंदर है।

 

आपको याद होगा जैसे आप कुछ लोगों के साथ बैठे हुए हैं थोड़ी रात हो चुकी है किसी ने योन किया और जैसे ही पहले इंसान ने योन किया दूसरे ने भी किया, तीसरे ने भी किया, चौथे ने भी किया, सबको एक साथ ही नींद आने लगीं। वही same इम्पैक्ट पाजिटिविटी का होता है।

 

जब बहुत सारे ऐसे लोग हों जो निराश बैठे हों, दुखी बैठें हों, होपलेस बैठें हों तो सिर्फ एक ही इंसान चाहिए होता है जो खड़े होके बोले यार ये नहीं चलेगा, एक पॉजिटिव एप्रोच से इसको फिर से देखते हैं।

और सडनली (अचानक से) उस इंसान के जो एनर्जी होती है वो पुरे रूम में फैलने लगती हैं, जो भी सारा दुःख था, जो भी सारी hopelessness (निराशा) थी उसमें कुछ आशा दिखने लगती हैं, और पावर है पाजिटिविटी का।

 

पॉजिटिव एप्रोच से आपके इंटरव्यूज एक अलग लेवल पे होंगे, पॉजिटिव एप्रोच से आपकी कॉलीग बहुत ही अलग नजर से देखेंगे, पॉजिटिव एप्रोच से आपके दोस्त आपको बहुत अलग नजर से देखेंगे, पॉजिटिव एप्रोच से आप अपने आपको एक बहुत ही अलग नजर से देखेंगे।

 

तो पाजिटिविटी तो सबसे फंडामेंटल (मुलभुत) एस्पेक्ट (पहलू) है एक स्ट्रांग पर्सनालिटी का। क्यूंकि वो सारी पर्सनालिटीज जो आपको inspire करती है, जो आप बनना चाहते हैं, जो आप देखके बोलते हैं काश मैं इसके जैसा होता। वो सारे फ़ण्डामेंटली पॉजिटिव ही है। वो एक कॉमन थ्रेड है उन सबमें। और सिर्फ हसी से, मजाक से नहीं आता है, एक इनर कॉन्फिडेंस से आता है।

 

दूसरे सवाल का जवाब –

 

तो अगर पाजिटिविटी जरुरी है तो ऐसी कौनसी चीजें हैं जो आप अपनी जिंदगी में आज से ही शुरू कर सकते हैं, जिससे आप एक पॉजिटिव एप्रोच अपनी जिंदगी में लाएंगे –

 

 

पहला – क्लियर अबाउट थॉट्स

 

पॉजिटिव लोग बहुत क्लियर होते हैं, की उनको उस वक़्त अपनी जिंदगी से, अपने आप से क्या चाहिए ! बहुत क्लियर होते हैं indecisive (दुविधा में पड़ा हुआ) नहीं होतें। वो ये नहीं सोच रहे होते हैं की ये भी कर सकते हैं, वो भी कर सकते हैं, ये भी हो सकता है, वो भी हो सकता है, यहाँ भी जा सकता हूँ, वहां भी जा सकता हूँ। उनको पता होता है की उनको क्या चाहिए और वो बहुत clearly उसकी ऊपर फोकस करते हैं।

 

जब आप फोकस करते हैं तो आपकी एनर्जी कंसन्ट्रेट होती है और उन कंसंट्रेशन से आपकी जो पॉजिटिव इन्फ्लुएंस हैं वो स्ट्रांग होती है।

 

 

दूसरा – फाइंड सलूशन

 

पॉजिटिव लोग नेगेटिव सिचुएशन में भी कुछ पॉजिटिव ढूंढते हैं। वो हमेशा मुश्किल चीजों में भी कोई ऐसी चीज ढूंढते हैं जिससे चीजें आसान हो सकते हैं या हो सकती है की नहीं।

 

 

एक कहानी है –

 

एक पिता जी थे। वो जूतों की फैक्ट्री चलाते थे, वो अपने दो बेटों को एक नए मार्किट में भेजते हैं।

ये एनालाइज करने के लिए की पोटेंशियल है भी इस मार्किट में या नहीं !

तो एक बेटा जाता है और एक दिन बाद वापस आता है और बोलता है – “पिताजी, यहाँ कुछ नहीं हो पायेगा, यहाँ कोई भी जूते नहीं पहनता, सब चप्पल पहनके घूमते हैं।”

दूसरा बेटा जाता है और वो भी एक दिन बाद आता है और बोलता है – “पिताजी, यहाँ तो बहुत ही मजा आने वाला है क्यूंकि यहाँ कोई भी जूते नहीं पहनता है, सब सिर्फ चप्पल ही पहनता है। इन सभी को हम जूते बेच पाएंगे।”

 

एक देखने का ढंग है। एक ग्लास एम्प्टी, ग्लास फुल वाला एप्रोच है। लेकिन ये सबसे फर्स्ट स्टेप है, सबसे फंडामेंटल स्टेप है, एक स्ट्रांग पर्सनालिटी का और एक पॉजिटिव पर्सनालिटी का। की मुश्किल चीजों में भी आप हमेशा डरेंगे नहीं, लेकिन वो एक छोटा सा सलूशन ढूंढेंगे जिससे आप को कहीं से आशा मिलें।

 

क्यूंकि उलटिमेटली जिंदगी तो मुश्किल है ही। और अगर आप उसी मुश्किल में दब गए तो आपको वो ख़ुशी नहीं मिलेगी, वो पाजिटिविटी नहीं मिलेगी और इन्फ्लुएंस नहीं मिलेगा, जिसकी वजह से दूसरे लोग आपसे अट्रैक्ट होंगे।

 

ये एक ही दिन में नहीं बदलेगा और सोचियेगा भी मत की अगर आज मैं ऐसे पॉजिटिव फील करता हूँ, कल भी नहीं करता, परसों भी नहीं करता तो मैं कैसे करूँगा। क्यूंकि दिनों की बात नहीं हैं, ये हफ़्तों और महीनों की बात है। और ये आपको आपकी जिंदगी का कमिटमेंट बनाना पड़ेगा।

 

जब कभी भी आप कोई भी मुश्किल चीज देखेंगे आप मुश्किल से डरेंगे नहीं, उसका सलूशन निकलने की कोशिश करेंगे, बाकि लोगों की भी हेल्प ले सकते हैं।

 

 

तीसरा – पॉजिटिव लोगों के साथ समय बिताये

 

सिंपल चीज है लेकिन हममें से बहुत कम लोग करते हैं की पॉजिटिव लोग पॉजिटिव लोगों के साथ ही hangout (अड्डा) करते हैं। क्यूंकि याद रखियेगा पाजिटिविटी contagious (संक्रामक) होती है।

 

आप अगर नेगेटिव लोगों के साथ हैं, वो लोग जो हमेशा रोते रहते हैं, वो लोग जो हमेशा बोलते रहते हैं, मेरे साथ कभी जिंदगी में अच्छा नहीं होता, मैं तो ऐसी ही हूँ, मैं तो वैसा ही हूँ, मेरे को ये नहीं अच्छे लगते, मुझे वो नहीं अच्छा लगता है तो आप हमेशा उस बोझ के तले दब जायेंगे।

क्यूंकि इमोशंस बहुत ही स्ट्रांग चीज होती हैं। और बहुत ही हार्ड होता है की दूसरे की इमोशंस को अपने इमोशंस के साथ इन्फ्लुएंस ना करने देना।

 

तो ये बहुत जरुरी है की आप पॉजिटिव लोगों के साथ हैंगऑउट करें क्यूंकि उनकी पाजिटिविटी, आपकी पाजिटिविटी को amplify करेगी, बहुत स्ट्रांग बनाएगी।

 

 

चौथा – कचरा कंटेंट consume ना करे

 

पॉजिटिव कंपनी के साथ पॉजिटिव एनवायरनमेंट भी होना बहुत जरुरी है। और आजकल की दुनिया में प्रॉब्लम यही है की न्यूज़, सोशल मीडिया, फेसबुक, इंस्टाग्राम, etc. ये सारी चीजें आपको सिर्फ कचरा या गंदगी ही बता रहे हैं। वो सारी चीजें जो दुनिया में गलत है सिर्फ उन्हीं की बारे में बातें हो रहीं हैं।

 

और हाँ वो बातें सच्ची है। मैं ये नहीं कह रहा हूँ की उन बातों की वजह से आप अपने ऑंखें बंद कर दें या उसको इग्नोर करें। लेकिन जब तक आप ये सारा मीडिया consume करते रहेंगे, आपके दिमाग में वही जंक फ़ूड जाता रहेगा।

 

क्यूंकि ऐसा तो नहीं है ना की आप रोज पिज़्ज़ा खा सकते है और तब भी सोचेंगे की आप हेल्थी और फिट रहेंगे। तो वो सारा कंटेंट है वो आपके दिमाग का जंक फ़ूड है। और वो consume कर सकते है हफ्ते में एक-दो बार, लेकिन आप हर रोज वही नेगेटिव न्यूज़, वही कचरा, consume करेंगे तो आपकी बॉडी, आपका ऐटिटूड, आपका लैंग्वेज सिर्फ उसी चीज को रिफ्लेक्ट करेगा।

 

 

पांचवा – बी थैंकफुल & ग्रेटफुल

 

ये सबसे इम्पोर्टेन्ट चीज है। आपको ये समझना बहुत जरुरी है, ये realize करना बहुत जरुरी है की हम बहुत लकी है की हमारे पास एक ऐसा प्लेटफार्म है जहाँ से हम एक दूसरे से बातें कर सकते हैं। हमारे पास वो upbringing हैं जिससे की हम एक दूसरे की बात समझ सकते हैं।

हम एक ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहाँ हमे प्यार मिला, केयर मिली, एजुकेशन मिला और उसकी वजह हम उन सारी opportunities पे बैठते हैं जो बहुत को इस पुरे देश और पूरी दुनिया में कभी भी एक दिन के लिए भी नहीं मिला।

 

इस चीज के लिए ग्रेटफुल-थैंकफुल होना बहुत जरुरी है क्यूंकि हम बहुत ही लकी है और जब तक हम हर रोज रुक के ये एहसास नहीं करेंगे की हमें जिंदगी में इतना कुछ मिला है जो बहुत सारे लोगों को नहीं मिला हम कभी पॉजिटिव नहीं बन पाएंगे।

 

क्यूंकि बहुत आसान है मुकेश अंबानी से अपने आपको compare करना और बोलना की मैं गरीब हूँ। लेकिन असलियत यही है की आप जहाँ भी हैं, जो भी हैं आप बहुत सारे लोगों से बहुत अमीर हैं। और ये बिलकुल सच है।

लेकिन वो एप्रोच और वो ऐटिटूड लाना बहुत जरुरी है ग्रेटिटूड का, ग्रेटफुलनेस का। एक ऐसा नजरिया जहाँ आप हमेशा बोलेंगे की “नहीं यार मुझे जिंदगी बहुत सारे लोगों से बहुत ज्यादा मिला है और उसकी वजह से जिस opportunities पे मैं बैठा हूँ, उससे मैं आगे ही जाऊंगा”

 

 

Conclusion –

 

ये सारी चीजें अगर आप एक एक करके अपने दिल में, अपनी जिंदगी में लाने की कोशिश करेंगे आप सबसे पहला स्टेप और सबसे important कदम लेंगे एक स्ट्रांग पर्सनालिटी की तरफ, एक पॉजिटिव और कॉंफिडेंट पर्सनालिटी की तरफ।

 

 

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तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह Personality Development in Hindi – Power of Positivity कैसा लगा और क्या आप भी पॉजिटिव रहने कोशिश करते हैं या नहीं मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये और इस Personality Development in Hindi – Power of Positivity को अपने दोस्तों के साथ शेयर जरूर करें।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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