The Power of Silence – साइलेंट लोग इतने सक्सेसफुल क्यूँ होते हैं ?

The Power of Silence – Hello दोस्तों, Usually हम सक्सेस को उन लोगो से रिलेट करते हैं जो एक्सट्रोवर्ट होते है। हर समय लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते है। लेकिन ये भी सच है कि दुनिया की बहुत सारे सक्सेस लोगों में बहुत से लोग इंट्रोवर्टस भी है और वो बहुत कम बोलते हैं, चाहे वो Bill Gates, Elon Musk, Mark Zuckerberg, Warren Buffet हो। इन लोगो में कुछ ऐसा है जो इन्हें दूसरे सक्सेसफुल लोगों से ज्यादा पैटर्न आब्जर्वर, फोकस्ड, और इन्फ्लुएन्सिएल बनाता है।

 

इसलिए आज हम इन्हीं हाइली सक्सेसफुल लोगो के इस पावर के बारे में बात करेंगे और जितना जरुरत हो सिर्फ उतना ही बोलने की एहमियत समझेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

The Power of Silence (मौन की ताकत)

 

No 1 – साइलेंट लोग अच्छे ऑब्सेर्वेर्स होते है

 

अगर एक इंसान साइलेंट हैं, तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो कुछ नहीं कर रहा, क्यूंकि साइलेंस कभी एम्प्टी नहीं होती।

साइलेंस अक्सर ऐसी चीजें होती है जो बात करने से नहीं समझी जा सकती।

जब साइलेंट लोग या इंट्रोवर्ट लोग जब किसी से बात नहीं कर रहे होते तो वो उस टाइम को वेस्ट नहीं कर रहे होते।

बल्कि वो अपने एनवायरनमेंट को ऑब्ज़र्व कर रहे होते हैं।

किसी चीज को ऑब्ज़र्व करने का मतलब है कि आप वहां से कुछ इनफार्मेशन निकाल रहे हो।

साइलेंट या इंट्रोवर्ट लोग उस इनफार्मेशन को यूज़ कर रहे होते है लोगों का बेहेवियर समझने के लिए, अपने आपको एक उचित दिशा में ले जाने के लिए और फ्यूचर को प्रेडिक्ट करने के लिए।

जब आपकी ऑब्ज़र्वेशनल स्किल स्ट्रांग होती है तब आप अपनी तरफ आते चुनौतियां और टफ सिचुएशन को प्रेडिक्ट सकते हो और उसी को दिमाग में रख कर काम कर सकते हो और यही चीज साइलेंट लोगो को ज्यादा बोलने वालों से अलग बनाती है।

 

 

No 2 – साइलेंट लोग सेल्फ-अवेयर होते हैं

 

साइलेंट लोग ज्यादातर टाइम यही सोच रहे होते है कि लोग उन्हें किस नजरिये से देख रहे हैं।

इंट्रोवर्ट लोग चाहते हैं कि उन्हें सीरियसली लें तभी वो अपने बेहेवियर, अपने वर्ड्स और अपनी बॉडी लैंग्वेज को consciously मैनेज करते हैं।

एक इंट्रोवर्ट को अच्छे से पता होता है कि उसकी स्ट्रेंथ और वीकनेस क्या है और किन एरियाज में उन्हें अपने आपको इम्प्रूव करना है।

जब एक इंसान को अपनी ताकत और कमजोरी पता होती है तभी उसपे कुछ एक्शन ले सकता है, और अपने आपको बेहतर बना सकता है।

 

 

No 3 – साइलेंट लोग ज्यादा क्रिएटिव और ओरिजिनल होते हैं

 

जहाँ एक्सट्रोवर्टस में अपने ग्रुप्स की मेनस्ट्रीम और पॉपुलर वैल्यूज को अडॉप्ट करने की इच्छा ज्यादा होती है, वही इंट्रोवर्टस में अपनी चॉइसेस को प्रेफर करने की इच्छा ज्यादा होती है।

भले ही उनका ओपिनियन, पॉपुलर ओपिनियन से अलग ही क्यूँ न हो !

ऐसा इसलिए होता क्यूंकि इंट्रोवर्टस अपने साथ ज्यादा टाइम स्पेंड करते हैं। वो अपने आइडियाज और व्यूज को रीफाइंड कर पाते हैं और वो किसी ग्रुप का हिस्सा बनने के लिए ब्लाइंडली किसी चीज को फॉलो नहीं करते।

 

एक शांत जिंदगी में मजूद स्टेबिलिटी और solitude हमारी क्रिएटिविटी को बढ़ाता है। – अल्बर्ट आइंस्टीन

 

 

No 4 – साइलेंट लोगों में सेल्फ-कण्ट्रोल ज्यादा होता है

 

साइलेंट लोगों को ये पता होता है कि सिचुएशन क्या डिमांड कर रही है और वो उसी हिसाब से एक्ट करते हैं।

उनकी इस क्वालिटी की वजह से दूसरे लोग उन पर ट्रस्ट कर पाते हैं और उनको रीलाएबल मानते हैं।

भले ही वो किसी प्लान को सीक्रेट रखना हो या अपने दोस्तों की बातों को सिर्फ अपने तक रखना हो।

साइलेंट लोगों के अंदर इतना सेल्फ कण्ट्रोल होता है कि वो कभी भी कोई ऐसी चीज नहीं करते, जिससे उसे बाद में शर्मिंदगी हो या दूसरे लोग उनसे डिसअप्पॉइंट हों।

 

 

No 5 – साइलेंट और इंट्रोवर्टेड लोग आत्मनिर्भर होते हैं

 

जहाँ एक्सट्रोवर्टस को अपनी एनर्जी दूसरों से मिलती है, वही इंट्रोवर्टस अकेले रहना ज्यादा प्रेफर्ड करते हैं।

और बिना किसी एक्सटर्नल सोर्स के ही खुद को रिचार्ज कर पाते हैं।

यही चीज एक इंट्रोवर्ट को सेल्फ-डिपेंडेंट बनाती है, वो कभी भी दूसरों पर डिपेंड नहीं करते, खुश, सपोर्टेड या मोटिवेटेड फील करने के लिए।

आत्मनिर्भर (सेल्फ-डिपेंडेंट) होना एक बहुत पावरफुल चीज है जो सक्सेसफुल लोगों में अक्सर देखा जाता है।

इंट्रोवर्टस जानते हैं कि लोगों पर डिपेंडेंट होना बेवकूफी है, क्यूंकि बहुत unpredictable है, यानी कभी भी कुछ भी हो सकता है। इसलिए वो बस अपने ऊपर डिपेंड होते हैं।

 

 

No 6 – इंट्रोवर्टस अपनी बातों को सीधा और मीनिंगफुल way में बोलते हैं

 

कई लोग अपनी बात को सामने रखने के लिए बहुत देर लगाते हैं और फिर भी अपने मेसेज को क्लेयरली समझा ही नहीं पाते।

वही जो लोग कम बोलते हैं वो अपनी बात सीधी और मीनिंगफुल वे में प्रेजेंट करते हैं, वो बातों को घुमाते नहीं हैं और अपने वर्ड्स को इस तरीकेसे बोलते हैं कि जैसे ही वो बात करना शुरू करते हैं वैसे ही सब चुप हो जाते हैं और उन पर अटेन्शन देने लगते हैं।

क्यूंकि जो इंसान काम बोलता है, उसके हर शब्द में ज्यादा भार होता है। इसी वजह से साइलेंट लोग अपने आपको भीड़ से अलग कर पाते हैं और दुसरो पर एक लास्टिंग इम्प्रैशन छोड़ पाते हैं।

 

 

No 7 – साइलेंट लोग अच्छे लिस्टनर्स होते हैं

 

आपने ये कहावत तो सुनी ही होगी कि हमारे पास दो कान और एक मुँह इसलिए है, ताकि हम सुने ज्यादा और बोले कम।

एक अच्छे कम्यूनिकेटर का sign होता है कि जितना passionately वो बोलता है उतने ही इंटरेस्ट के साथ वो सुनता भी है।

साइलेंट लोग नैचुरली गुड लिस्टनर्स होते हैं। क्यूंकि वो सारी एनर्जी, सिर्फ बोलने में नहीं बल्कि कुछ नया सीखने में भी लगाना चाहते हैं।

ऊपर से उन्हें ये पता होता है कि अगर वो दूसरों को अच्छे से सुनेंगे तो वो उस कन्वर्सेशन में कुछ वैल्यू भी add कर पाएंगे।

उनकी यही लिसनिंग स्किल्स उन्हें एक अच्छा कम्यूनिकेटर बनाती है और डीप रिलेशनशिप बनाने में मदद करती है।

 

 

No 8 – साइलेंट लोग बहुत फोकस्ड वे में काम करते हैं

 

इंट्रोवर्ट लोग सोसिअलाइज़िंग को एक्सट्रोवर्टस जितनी इम्पोर्टेंस नहीं देते, इसलिए उनके पास नेचुरली ज्यादा टाइम और अटेंशन होती है जिसे वो यूज़ कर पाते हैं दूसरी चीजों पर फोकस्ड करने के लिए।

उनमें ये एबिलिटी होती है कि वो चुपचाप घंटों तक सिर्फ एक चीज को अपना पूरा फोकस दे सकते हैं।

जो चीजें एक एक्सट्रोवर्ट को लुभाती है वो चीजें एक इंट्रोवर्ट के दिमाग पर हावी नहीं होती, और तभी ऐसे लोग काफी लम्बे समय तक राइटिंग, रिसर्च, रीडिंग या मेडिटेट कर पाते हैं।

 

 

No 9 – साइलेंट लोग डीप रिलेशनशिप्स बनाते हैं

 

यानी साइलेंट लोग क्वालिटी को ज्यादा और क्वांटिटी को कम प्रेफरेंस देतें हैं।

क्यूंकि जब इन्हें पता है कि इनके पास लिमिटेड सोशल एनर्जी ही है तो क्यूँ ना ये सिर्फ उन्हीं गिने-चुने लोगों को अपना समय दें, जो खुद भी क्रिएटिव और सक्सेसफुल है, पॉजिटिव माइंडेड हैं और जो एक्चुअल में इटकी परवाह करते हैं।

क्यूंकि दुनिया मेडिओकर लोगों से भरी पड़ी है, ऐसे लोगों का फ्रेंड सर्किल नैचुरली काफी छोटा होता है।

लेकिन इनके यही डीप रिलेशनशिप्स इन्हें मोटीवेट भी करते हैं और सक्सेस हासिल करने के लिए इनको opportunities ढूंढने में मदद भी करते हैं।

 

 

Recommended Books –

 

 

 

 

Conclusion

 

तो दोस्तों देखा आपने साइलेंट और इंट्रोवर्ट कितने पावरफुल होते हैं।

वैसे मैं बिलकुल वैसा ही हूँ।

आप भी वैसा बनने की कोशिश कर सकते हैं और लाइफ को बेहतर बना सकते हैं।

आप मुझे बताइये कि क्या आप पहले से ही इंट्रोवर्ट और साइलेंट इंसान है?

आपको आज का यह आर्टिकल आपको कैसा लगा ?

अगर आपके मन में कुछ भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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8 thoughts on “The Power of Silence – साइलेंट लोग इतने सक्सेसफुल क्यूँ होते हैं ?”

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