Rabindranath Tagore की सक्सेस स्टोरी | Rabindranath Tagore Biography in Hindi

Rabindranath Tagore की सक्सेस स्टोरी – Hello दोस्तों, Rabindranath Tagore को कौन नहीं जानता ? Rabindranath Tagore एक ऐसे इंसान है जिन्हें भारत का बच्चा-बच्चा जानता है, क्योंकि भारत में स्कूल की पढ़ाई की स्टार्टिंग में ही हर दिन उनके बारे में बता दिया जाता है कि भारत के राष्ट्रीय गान (जन गण मन) के रचियता गुरु Rabindranath Tagore थे।

Tagore भारत के ही नहीं बल्कि बांग्लादेश के राष्ट्रीयगान ‘Aamaar Sonar Bangla’ के भी रचियता हैं। आज हम उन्हीं महान इंसान के सक्सेस जर्नी के बारे में जानेंगे। तो चलिए शुरू करते हैं –

 

Rabindranath Tagore की सक्सेस स्टोरी | Rabindranath Tagore Biography in Hindi

 

जन्म और बचपन

 

Rabindranath Tagore का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता में हुआ था, वो अपने भाई-बहनों में सबसे छोटे थे।

 

Tagore जब 14 साल के थे तब उनकी माँ की डेथ हो गयी थी, उसके बाद उनके पिता और बड़े भाई-बहनों ने उनकी देखभाल की, वो एक सम्पन्न परिवार से बिलोंग करते थे, उनकी प्राइमरी स्कूल की एजुकेशन Saint Xavier School से हुई।

 

उनके बड़े भाई भी भारत की फ़ेमस पर्सनालिटी में शामिल है।

 

  1. उनके सबसे बड़े भाई Dwijendranath एक फिलॉसॉफ़र और कवि थे,
  2. उनके दूसरे भाई Satyendranath Tagore इंडियन सिविल सर्विस में जाने वाले पहले इंडियन थे।
  3. उनके तीसरे भाई Jyotindranath Tagore म्यूजिशियन और प्ले राइटर थे।
  4. उनकी बहन एक कवियत्री और उपन्यासकार थी।

 

इसलिए बचपन से ही उन्हें हर तरह का ज्ञान अपने बड़े भाई-बहनों से मिलता रहा।

 

 

पढाई और शादी

 

1878 में Rabindranath Tagore बैरिस्टर की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए, उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में एडमिशन तो ले लिया लेकिन वो दो साल में वापस इंडिया आ गए।

 

लंदन में रहकर उन्होंने इंग्लिश और स्कॉटिश साहित्य को बहुत गहराई से जाना और इंडिया वापस आकर 1883 में उन्होंने Mrinalini Devi से शादी की।

 

 

सक्सेस जर्नी

 

Tagore राजनीति में काफ़ी सक्रिय थे, वो एक सच्चे राष्ट्रभक्त थे और ब्रिटिश शासन के बिल्कुल खिलाफ़ थे, उन्होंने राष्ट्र हित के लिए कई कविताएं लिखी, उन्होंने देशभक्ति पर कई गीत लिखे।

 

1898 में Tagore अपनी पत्नी और बच्चों के साथ Shelaidaha (जो अभी बांग्लादेश में है) चले गए, जहाँ वो अपने पैतृक घर में रहते थे, वहाँ आकर उन्होंने ग्रामीण जीवन और ग़रीबी को करीब से स्टडी किया और 1891 से 1895 तक उन्होंने रूरल बंगाल से रिलेटेड कई स्टोरीज़ लिखी।

 

1901 में Rabindranath Tagore शांतिनिकेतन चले गए क्योंकि वो वहाँ एक आश्रम बनाना चाहते थे, जहाँ जाकर उन्होंने लाइब्रेरी, स्कूल और प्रार्थना हॉल बनाया और उसी दौरान उनकी पत्नी और उनके दो बच्चों की मौत हो गयी।

 

1905 में उनके पिता की भी मौत हो गयी।

 

पिता के जाने के बाद Tagore को उनके पिता से विरासत में काफ़ी संपत्ति मिली जिससे उनकी काफ़ी इनकम हो रही थी और उनके लिटरेचर भी अब तक उन्हें रॉयल्टी देना शुरू हो गए थे क्योंकि उनके लिखे गए साहित्य (लिटरेचर) इतने फ़ेमस हुए की 14 नवंबर 1913 को उन्हें लिटरेचर में नोबेल प्राइज़ दिया गया।

 

Rabindranath Tagore पहले एशियाई थे जिन्हें नोबेल प्राइज़ से सम्मानित किया गया था।

 

एक महान कवि होने के साथ-साथ वो एक संगीतकार और एक पेंटर भी थे, उन्होंने अपने जीवन काल में लगभग 2200 से ज़्यादा गीत लिखे और 60 साल की उम्र से उन्होंने पेंटिंग करना भी शुरू कर दिया।

 

साहित्य के अलग-अलग शैलियों में महारत हासिल करने वाले Tagore ने साहित्य के हर एक क्षेत्र में पूरी मेहनत और लगन के साथ काम किया, एशिया के पहले नोबेल प्राइज़ पाने के वो हक़दार थे।

 

वो दुनिया के अकेले ऐसे इंसान थे जिनकी दो कम्पोजीशन को दो देशों के नेशनल एंथम के रूप में चुना गया। (भारत – जन गण मन, बांग्लादेश- आमार सोनार बांग्ला) उनकी फ़ेमस कम्पोजीशन गीतांजलि लोगों को इतना पसंद आई कि सिर्फ़ भारत नहीं बल्कि दूसरे देशों में भी इसकी लोकप्रियता उतनी ही थी।

 

गीतांजलि को जर्मन, फ्रेंच, जापनीज़, रसियन और भी कई भाषाओं में ट्रांसलेट किया गया था और उसी कारण से Tagore का नाम दुनिया के कोने-कोने में फैल गया।

 

उनकी लिखी कहानियाँ काबुलीवाला, मास्टर साहब, पोस्टमास्टर आज भी हमारे स्कूल के टेक्स्टबुक में मिलते है। उनके साहित्यों में देश को लेकर आजादी की चाह साफ़ नज़र आती है।

 

साहित्य में Tagore का नाम एक गहरे समुद्र की तरह था, जिसे मापा नहीं जा सकता, उनकी कहानियों और कविताओं ने पूरे विश्व में रहने वाले लोगों को एक अलग रास्ता दिखाया है, उन्होंने अपनी ज़िन्दगी के अंतिम चार साल बहुत मुश्किल और बीमारी में बिताये थे।

 

1937 के अंत में वो बिल्कुल अनकॉन्शियस हो गए थे लेकिन उस टाइम भी उन्होंने कविताएं लिखना नहीं छोड़ा।

 

7 अगस्त 1941 को Rabindranath Tagore दुनिया को अलविदा कह गए। उन्होंने साहित्य के लिए 1878 से 1932 तक लगभग 30 देशों की यात्रा की और उनकी अंतिम यात्रा श्रीलंका की थी।

 

 

Rabindranath Tagore की बुक्स

 

 

 

 

Conclusion

 

दोस्तों इसलिए Rabindranath Tagore जी को आज दुनिया अलविदा कहे इतने दिनों के बाद भी लोग याद करते हैं।

हर किसी को इंडियन नेशनल एंथम याद है, और हम सभी उनके द्वारा लिखी गयी एंथम के द्वारा उनको आज भी याद करते हैं।

सच में उनकी लाइफ काफी inspiring है।

आपको इंस्पिरेशन लेना है तो उन्हीं की सक्सेस जर्नी से लीजिये।

मैं Rabindranath Tagore की सक्सेस स्टोरी से काफी Inspire हुआ, क्या आप Inspire हुए ?

आपने Rabindranath Tagore की सक्सेस स्टोरी से क्या सीखा ? आपको आज का यह सक्सेस स्टोरी कैसा लगा ?

अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

 

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

 

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