Retire Young Retire Rich Book Summary in Hindi – आप यंग और अमीर रिटायर कैसे हो सकते है?

Retire Young Retire Rich Book Summary in Hindi – हर कोई अमीर बनना चाहता है, हर कोई पैसे कमाना चाहता है और ये बुक वो गाइड है जो हमे अमीर बनने का रास्ता दिखाती है. लोग रियल एस्टेट और स्टॉक्स मार्किट जैसे बिजनेस में इन्वेस्ट करना चाहते है लेकिन कहाँ से शुरू करना है, ये नहीं जानते. ये बुक आपको एक सक्सेसफुल बिजनेस करने का तरीका बताती है. ये बुक आपको बताएगी कि आप यंग और अमीर रिटायर कैसे हो सकते है? और इसके लिए आपको ये बुक समरी पढनी होगी.

 

किस किसको ये बुक पढनी चाहिए?

 

  • जो लोग नया बिजनेस शुरू करना चाहते है
  • स्माल बिजनेस ओनर्स
  • इंडीविजुअल इन्वेस्टर्स
  • स्टार्ट-अप फाउंडर्स

 

 

ऑथर के बारे में –

 

रोबर्ट कियोसाकी एक ऑथर और बिजनेसमेन है. कियोसाकी का अपना एक ब्लॉग है जिसके थ्रू वो लोगो को अपनी फाईनेंशियल वेल-बीइंग इम्प्रूव करने में हेल्प करते है. वो एक रेडियो शो भी चलाते है जहाँ लोगो को पैसे कमाने के बारे में टिप्स और नॉलेज दी जाती है. कियोसाकी की कंपनी लोगो को वीडियोज और बुक्स के श्री फाईनेंशियल एजुकेशन देती है. रोबर्ट कियोसाकी रिच डैड पूअर डैड सीरीज़ के प्राउड ओनर है जिसने लाखो लोगो की लाइफ चेंज की है.

 

 

Retire Young Retire Rich Book Summary in Hindi – आप यंग और अमीर रिटायर कैसे हो सकते है?

 

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इंट्रोडक्शन (Introduction)

 

क्या आपको अमीर बनने का शौक है ? क्या आप लोगो की बाते सुनकर थक चुके है कि अमीर बनने के लिए पेशंश रखना पड़ता है या लॉन्ग इन्वेस्टमेंट करनी पड़ती है ? क्या आप बहुत जल्दी ढेर सारे पैसे कमाना चाहते हो ?

 

अगर इस तरह के सवाल आपमें मन में भी उठते है तो ये बुक आपके लिए है. ये बुक एक गाइड है जो आपको अमीर बनने के लिए स्टेप बाई स्टेप हेल्प करेगी. क्योंकि आपके कैश फ्लो के लिए आपका माइंडसेट ही रीस्पोंसीबल है. इस बुक में आप सीखेंगे कि अमीर बनने की पोटेंशियल हर एक इंसान में है.

 

फर्क बस आपकी अप्रोच का है. इस बुक ने कई ऐसे लोगो को अपने अमीर बनने में हेल्प की है जिनके पास शुरुवात में एक पैसा भी नहीं था. इस बुक से आप सीखेगे कि आपके माइंड में वो पॉवर है जो आपको रिच या पूअर बना सकती है. लोग बोलते है कि इन्वेस्टिंग रिस्की है लेकिन ये बुक इस बात को एकदम रोंग प्रूव करती है और सिखाती है कि अमीर बनने का फर्स्ट स्टेप इन्वेस्टिंग ही है. क्या आप अमीर बनने का फर्स्ट स्टेप लेना चाहते है ? अगर हाँ, तो ये बुक आपको हर स्टेप पर गाइड करने को रेडी है.

 

 

हाउ टू बिकम रिच एंड रिटायर यंग (How to Become Rich and Retire Young

 

हर कोई फाईनेंशियली सर्वाइव करना चाहता है, लेकिन बहुत कम होते है जो फाईनेंशियली फ्री हो पाते है. इस दुनिया में हर इंसान को सेल्फ डाउट की प्रोब्लम है यानि हमे खुद पे ही भरोसा नहीं है. लेकिन हमें इस सेल्फ डाउट को लाइफ में आगे बढ़ने के लिए यूज़ करना है. अपनी लाइफ में वो गोल्स सेट करो जो आपकी प्रेजेंट सिचुएशन को चेंज करके रख दे. सेल्फ डाउट और आलसपन दो ऐसी चीज़े है जो हमे रोकती है. इसलिए अगर सक्सेस चाहिए तो पहले अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलो और अपने सेल्फ डाउट से फाइट करो. यंग एज में रिटायर होने थोडा इम्पॉसिबल साउंड करता है लेकिन हाँ ये पॉसिबल है. एक राईट माइंडसेट के साथ आप कुछ भी अचीव कर सकते हो.

 

एक यंग एज में रिटायर होना चाहते हो तो सपने देखना छोड़ो और एक्शन पर फोकस करो. बिजनेस की फील्ड में आपको बहुत से एक्सपीरिएंस होंगे और कई तरह के सबक सिखने को मिलेंगे. एक बिजनेस खड़ा करने से पहले अपना सेल्फ कांफिडेंस बिल्ड करना होगा. अपने गोल सेट करो, प्लान बनाओ और तुरंत उस पर काम शुरू कर दो. एक यंग एज में अमीर रिटायर होने का यही एक तरीका है. हमारा सेल्फ कांफिडेंस हमे खुद पे ही डाउट कराने लगता है और फिर सेल्फ आग्ग्यमेंट की वजह से हम फाईनेंशीयली ग्रो नहीं कर पाते है.

 

जिन्हें लाइफ में सक्सेस चाहिए उनके अंदर एक पैशन होना चाहिए. इसलिए पैशन क्रिएट करो जो आपको अपनी मंजिल तक ले जाएगा. लाइफ में कुछ अचीव करने के लिए कोई एक रीजन ढूंढो जो आपको सबसे प्यारा हो और जिसके बिना आपकी लाइफ अधूरी है. चलो हम एक एक्जाम्पल लेते है, जिससे पता चलेगा कि सेल्फ डाउट हमारी ग्रोथ को कैसे अफेक्ट करता है. एक भिखारी सड़क पर भीख मांग कर अपना गुज़ारा करता था, उसे यकीन था कि एक दिन उसकी गरीबी ज़रूर दूर होगी. हालाँकि उसे खुद पे डाउट भी था पर लेकिन वो हमेशा पोजिटिव सोचता था.

 

वही दूसरी तरफ एक अमीर आदमी था जिसे फेमिली बिजनेस विरासत में मिला था. अपने सेल्फ डाउट की वजह से वो बिजनेस में बोल्ड स्टेप लेने से डरता था. उसके इसी सेल्फ डाउट के चलते उसका बिजनेस घाटा में चल रहा था. फिर कुछ सालो बाद वो भिखारी एक दिन अमीर बन गया और वो अमीर बिजनेसमेन अपने सेल्फ डाउट के चलते अमीर से गरीब हो गया. ये स्टोरी बताती है कि अपने सेल्फ डाउट को राईट डायरेक्शन देकर गरीब भिखारी बना और अमीर बिजनेसमेन अपने सेल्फ डाउट के चलते अपना सब कुछ हार गया.

 

हर इन्सान की लाइफ में ऐसा टाइम जरूर आता है जब हम या तो टूट जाते है या फिर काफी स्ट्रोंग बन जाते है. वो मोमेंट आपको आगे भी ले जा सकते है या फिर पीछे भी धकेल सकते है. आपके साथ क्या होगा, ये डिपेंड करता है कि आप अपने सेल्फ डाउट को खुद पे कितना हावी होने दोगे.

 

यंग और रिच रीटायर होने के लिए सेल्फ डाउट और लेज़ीनेस दोनों से आपको लड़ना है. सक्सेस के लिए पैशन कितना इम्पोर्टेट है, ये आपको समझना होगा. जिनमे पैशन होता है वो टॉप तक पहुँच कर ही दम लेते है. जिनमे पैशन नहीं होता, वो पहली बार फेल होते है गिव-अप कर लेते है और फिर कभी दुबारा ट्राई नहीं करते.

 

 

रिटायर एज़ यंग एज़ यू केन (Retire As Young As You Can)

 

रिटायरमेंट की सबसे बड़ी प्रोब्लम है कि रिटायर होने के बाद करने को कुछ नही होता. पर माइंड और बॉडी को भी तो थोडा आराम चाहिए. याद रखो, इस जर्नी में आप से ज्यादा इम्पोर्टेट कुछ नहीं है इसलिए अपने लिए और अपनों के लिए टाइम निकालना बेहद जरूरी है. जिन्हें आप प्यार करते हो, उन्हें एप्रीशिएट करो, लाइफ के हर अच्छे-बुरे मोमेंट को जियो. हम सबके अंदर वो पोटेंशियल है जो हमे ग्रेट बना सकती है लेकिन ये भी सच है कि हम सब गलतियाँ करते है. जो बीत गया, उसे तो आप नही बदल सकते पर उसके बारे में ओपीनियन ज़रूर चेंज कर सकते हो. अपनी गलतियों से लर्न करना सक्सेस की राह का सबसे ज़रुरी स्टेप है.

 

रीटायरिंग यंग आपको अपने सपने पूरे करने की फ्रीडम देता है. वो सारे ड्रीम्स जो आप अभी पूरे करना चाहते हो नाकि ओल्ड एज में. जब आप यंग रीटायर होंगे तो आपके पास अपने लिए टाइम ही टाइम होगा. और आप एक भरपूर लाइफ जी सकेंगे. यंग रिटायरमेंट आपको फिर से अपनी लाइफ जीने का एक चांस देती है.

 

चलो, एक एक्जाम्पल से समझते है कि हमारे लिए फेमिली टाइम क्यों इम्पोर्टेट है. एक बिजनेस टाइकून के पास अपने और अपनी फेमिली के लिए ज़रा भी टाइम नहीं मिलता था. इससे उसकी मेंटल हेल्थ भी अफेक्ट हुई और फेमिली के साथ भी रिलेशनशिप खराब होने लगे. धीरे-धीरे उसके फेमिली मेम्बेर्स एक दुसरे से दूर होने लगे, जरूरत के वक्त कोई किसी के पास नहीं होता था. वर्कलोड के चलते उस बिजनेसमेन की मेंटल हेल्थ इतनी अफेक्ट हुई कि उसके काम-काज़ पर भी असर पड़ने लगा था. वही दूसरी तरफ एक स्माल बिजनेस ओनर भी था जो अपने काम के साथ-साथ फेमिली लाइफ को भी इम्पोर्टेंस देता था. उसकी लाइफ में खुशियाँ ही खुशियाँ थी. एक्चुअल में हम जो टाइम खुद के लिए निकालते है, वो कभी वेस्ट नहीं जाता. ये एक क्वालिटी टाइम होता है जो हम खुद को और अपनी फेमिली को देते है. इससे हमारी मेंटल हेल्थ भी स्ट्रोंग होती है और रिलेशनशिप भी. जब आपकी मेंटल हेल्थ अच्छी रहेगी तो आप अपने काम पर और ज्यादा फोकस कर पाओगे.

काम और फेमिली के बीच बेलेंस बनाना बहुत इम्पोर्टेट है. इससे आपको एक पीसफुल एन्वायरमेंट मिलता है जो हमारा माइंड हेल्थी रखता है.

 

यंग एज में रिटायरमेंट लेने से आप एक न्यू लाइफ स्टार्ट करते है जहाँ आपको रोज़ एक नई अपोर्चुनिटी मिलती है. रिटायर वर्ड सुनने में ईज़ी लगता है पर कई लोगो के लिए ये काफी चेलेजिंग हो सकता है. बहुत से लोग सोचते है कि रिटायर होने के बाद वो एकदम खाली बैठ जायेंगे. उनके पास करने को कुछ नहीं होगा. पर ऐसा नहीं है, आप जल्दी ही अपने आस-पास के माहौल में ढल जाओगे और आपको रोज़ एक नई अपोयूँनिटीज़ मिलेगी. एक यंग एज में रिटायरमेंट लेने से आपके पास टाइम की कोई कमी नही होगी. आप जो चाहो कर सकते हो जब तक कि बुढापा ना आ जाये. शोर्ट में बोले तो आपको एक नई लाइफ जीने का चांस मिलेगा.

 

हम सब मिस्टेक करते है, लेकीन इम्पोर्टेंट ये है कि हम उनसे कुछ लेंसन ले. जैसे एक्जाम्पल के लिए जो लोग बार-बार मिस्टेक दोहराते है, वो कभी आगे नही बढ़ पाते. आप एक पर्सन के तौर पर ग्रो नहीं कर पाओगे. हाँ, अगर आप अपनी गलती को एक लेसन की तरह लेते हो तो आप खुद का ही बैटर वर्ज़न बनते जाओगे.

 

 

हाउ आई रीटायर अर्ली ( अर्ली रीटायर होने के तरीके ) How I Retired Early

 

फाईनेंशियली फ्री होने और यंग रीटायर होने के लिए डेब्ट एक तरीका है. इसे आप कैश फ्लो फंड करने के लिए यूज़ कर सकते हो. हालाँकि बेड डेब्ट और गुड डेब्ट में काफी फर्क है. वैसे तो दोनों टाइप के डेब्ट डेंजरस है लेकिन इसे आप यूज़ कैसे करेंगे, वो ज्यादा मैटर करता है. गुड डेब्ट वो है जो आप हर मन्थ पे करते है जबकि बेड डेब्ट आपकी जेब खाली करवाता है.

 

यहाँ पर हम बोरोवर या उधारी की बात नहीं कर रहे. हमारा मतलब यहाँ डेब्ट पर पैसा इन्वेस्ट करने से है. लोग अक्सर इन्वेस्टिंग को रिस्की बिजनेस मानते है क्योंकि माइंडसेट उन्हें यही यकीन दिलाता है. लेकिन रिच बनने के लिए आपको पॉवर ऑफ़ लेवरेज समझनी होगी. लेवरेज को सिंपल वर्ड्स में बोले तो कम में ज्यादा से ज्यादा काम लेना. ये स्टोरी आपको बताएगी कि कैसे ऑथर रोबेर कियोसाकी अपने टाइम से 12 साल पहले ही रीटायर हो गए थे. वो अपने मोर्टेज बैंकर्स की हेल्प से ये कर पाए थे. अपने खुद के पैसे यूज़ करने के बजाए उन्होंने डेब्ट के पैसे फंड करके अपना रीटाय प्लान किया था. ये स्टोरी आपको बताएगी कि कियोसाकी ने खुद की फंडिंग के लिए काफी डेब्ट लिया और दूसरो से जल्दी अमीर बन गए.

 

रोबर्ट ने अपना सारा पैसा रियेल एस्टेट में इन्वेस्ट किया और अपना प्लान कुछ इस तरह डिजाईन किया कि पैसा कैपिटल एप्रीशिएशन ग्रोथ के साथ उनके रिटायरमेट प्लान में बना रहे. उसने पैसे का इस्तेमाल लेवरेज की तरह करके कम इन्वेस्टमेंट से भी काफी पैसा अर्न कर लिया था. कुछ ऐसी ही स्टोरी है डेविड और गोलिअथ की भी.

 

डेविड एक छोटा आदमी था और गोलिअथ एक जाएंट. डेविड ने गोलिअथ को एक स्लिंगशॉट के साथ हराया था, इस स्लिंगशॉट को डेविड ने लेवरेज की तरह यूज़ किया था. क्योंकि डेविड लेवरेज की पॉवर जानता था और इसीलिए उसने इसका बखूबी इस्तेमाल किया. एक्जेक्टली रोबर्ट ने भी यही किया था, उसने मोर्टेज़ बैंकर्स के पैसे को रियल एस्टेट में इन्वेस्ट किया और एक फाइनेंशीयली स्टेबिलिटी अचीव की. जल्दी अमीर बनने के लिए आपको भी डिफरेंट टाइप के लेवरेज मालूम होने चाहिए और ये भी पता होना चाहिए कि उन्हें यूज़ कैसे करना है. डेब्टस लेना काफी रिस्की भी है. अगर इन्हें राईट वे में यूज़ ना किया जाए तो ये आपको बर्बाद भी कर सकते है. और आपको हमेशा प्रॉपर तरीको जैसे मोर्टेज बैंकर्स से डेब्ट लेने चाहिए. हम आपको बताते है कि डेब्ट कहाँ पर रिस्की होता है, जैसे कि रियेल एस्टेट बिजनेस में क्रेडिट कार्ड यूज़ करके इन्वेस्टमेंट करना बहुत रिस्की है. हर महीने आपको भारी-भरकम इंटरेस्ट के साथ बिल पे करना पड़ता है. और इस तरह सारा पैसा आपकी जेब से निकलता है.

 

कुल मिलाकर क्रेडिट कार्ड के थ्रू इन्वेस्टमेंट करने में कोई समझदारी नहीं है.

 

 

हाउ कैन यू रीटायर अर्ली (How Can You Retire Early)

 

जल्दी रीटायरमेंट का सीक्रेट है डू मोर विद लेस. रिच बनने का फार्मूला कम मेहनत में ज्यादा कमाई है. इसलिए हमें स्मार्टली काम करना होगा. जल्दी से जल्दी अमीर होने के लिए और यंग एज में रीटायर लेने के लिए लेवरेज की पॉवर को समझना बहुत ज़रूरी है. हमारी लाइफ में हर तरफ लेवरेज है. अमीर लोग दूसरो से बहुत ज्यादा लेवरेज लेते है. और जिनके पास ज्यादा लेवरेज है वो दूसरो को डोमिनेट करते है.

 

आज के मॉडर्न वर्ल्ड में डिफरेंट टाइप्स के लेवरेज टूल्स अवलेबल है जैसे कि कंप्यूटर, इंटरनेट और लेटेस्ट टेक्नोलोजी, इसलिए आपको हर नई चीज़ सीखनी होगी जो ट्रेंड में है ताकि आप भी लेवरेज टूल्स का ज्यादा से ज्यादा यूज़ करके अपने गोल्स अचीव कर सके. इसलिए पैसे कमाने से ज्यादा डिफरेंट लेवरेज टूल्स सीखने पर फोकस करो. अमीर बनने के लिए डिफरेंट टाइप के एस्सेट्स भी काफी मैटर करते है जैसे कि हेल्थ, एजुकेशन, टाइम, रिलेशनशिप और बाकि कई और चीज़े. लोग अक्सर इसलिए अपने गोल्स पूरे नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें डिफरेंट लेवरेज टूल्स यूज़ करने नही आते. गरीब और मिडल क्लास लोग लेवरेज के फाईनेंशियल टूल्स का रिस्क लेने में डरते है. और उनकी यही सोच उन्हें अमीर नहीं बनने देती.

 

पुराने टाइम में इंसान जानवरों की तरह फ़ास्ट नहीं चल पाता था पर टाइम बदला और आज टेक्नोलोजी की वजह से हम इन्सान जानवरों से कही ज्यादा फास्ट ट्रेवल कर सकते है. इन्सान ने स्मार्टली काम किया और ऐसे व्हीकल्स इन्वेंट किये जिनकी वजह से वो जानवरों को पीछे छोड़ सकता है. इसीलिए इंसान जानवरों से कम मेहनत करके भी बहुत ज्यादा अचीव कर सकता है.

 

ऊपरवाले ने बर्ड्स को उड़ने के लिए पंख दिए है. इन्सान के पास पंख नहीं थे तो उसने अपने ब्रेन-पॉवर से ऐरोप्लेन्स और हेलीकॉप्टर का इन्वेंट किया और अपना उड़ने का सपना पूरा कर लिया. तो इसे हम कम मेहनत में ज्यादा अचीवमेंट ही कहेंगे. ये दो एक्जाम्पल शो करते है कि ज्यादा फ़ास्ट और एफिशिएंट बनने के लिए स्मार्ट वर्क जरूरी है. ताकि हम अपने सपने भी जल्द से जल्द पूरे कर सके. चलो देखते है कि लेवरेज के बाकि फॉर्स जैसे हेल्थ, टाइम, एजुकेशन और टेक्नोलोजी हमारे लिए क्यों जरूरी है. जैसा कि एक कहावत है” हेल्थ इज वेल्थ”. लेकिन जब तक लोग बीमार ना पड़ जाए, हेल्थ की इम्पोर्टेंस नहीं समझ पाते.

 

टाइम बहुत कीमती चीज़ है. और जो लोग टाइम से पीछे रह जाते है, लाइफ में कुछ अचीव नहीं कर पाते. किसी भी स्कसेस फुल बिजनेस को चलाने के लिए टाइम मैनेजमेंट बहुत इम्पोर्टेट चीज़ है. अगर कोई लाइफ में पीछे है तो उसके सामने खड़ी अपोच्च्यूनिटी ग्रेब करने का भी उसके पास टाइम नही होगा.

 

एजुकेशन एक इम्पोर्टेट लेवरेज है. मान लो अगर कोई आदमी कॉलेज से बहुत कम फाईनेंशियल एजुकेशन के साथ ग्रेजुएट होता है तो वो उस इन्सान से कहीं ज्यादा पीछे रह जाएगा जो फाईनेंशियली वेल एजुकेटेड है.

 

 

द लेवरेज ऑफ़ योर माइंड (The Leverage of Your Mind)

 

“व्हट यू थिंक इज़ रियल इज़ योर रियेलिटी” यानी “जो तुम सच रियल मानते हो, वही तुम्हारी रियेलिटी बन जाती है” इस चैप्टर का आईडिया यही है. अमीर होने के लिए यही माइंडसेट आपके काम आएगा. अगर आप मानते है कि आप अपने सपनो को सच कर सकते हो, तो बेशक आप कर सकते हो.

 

आप ये भी सीखेंगे कि हर बिजनेस का एक इम्पोर्टेट पार्ट फेलर भी होता है. फेल होना एकदम नॉर्मल चीज़ है. सबके साथ होता है पर इम्पोर्टेट ये है कि हर फेलर के बाद आप फिर से उठ के खड़े जाओ. लोग कहते है इन्वेस्टिंग रिस्की है. सच तो ये है कि ये उनका डर है जबकि इन्वेस्टिंग उतना रिस्की बिजनेस नहीं है. दो लोगो के सेम पर्सपेक्टिव नहीं होते. एक को लगता है कि अमीर बनना मुश्किल है तो दुसरे लगता है कि वो अमीर बन सकता है. दोनों अपनी जगह सही है क्योंकि आपकी थिंकिंग ही आपका प्रजेंट बदल सकती है.

 

एक एक्जाम्पल से समझते है कि फेलर हमारी ग्रोथ के लिए क्यों इम्पोर्टेंट है. एक आदमी ने नया बिजनेस स्टार्ट किया. लेकिन कुछ साल बाद ही बिजनेस फेल हो गया. उसे लगा कि अब वो कभी अमीर नहीं बन पायेगा, और इस तरह उसने फर्स्ट ट्राई के बाद ही गिव अप कर लिया.

 

वही दूसरी तरफ एक और आदमी था, उसने भी नया बिजनेस स्टार्ट किया. वो भी बुरी तरह फेल हो गया. पर उसने गिव अप नहीं किया. वो तब तक ट्राई करता गया जब तक कि उसे सक्सेस नहीं मिल गयी. क्योंकि उसमे अपने काम को लेकर एक पैशन था. और यही उसकी सक्सेस का सीक्रेट भी था.

 

ये एक्जाम्पल शो करता है कि आपका माइंडसेट अमीर बनने के लिए क्यों इम्पोर्टेट है. इन्वेस्टिंग में भी सेम रिस्क है जैसे हमारी डे टू डे लाइफ एक्टिविटीज़ में है. जैसे रोड क्रोस रिस्की है, जैसे मोटरसाइकल चलाना रिस्की है. लेकिन हमे इन सब कामो में ज्यादा रिस्क नजर नहीं आता. यानी ह्यूमन माइंड सिर्फ इन्वेस्टिंग को ही रिस्की मानता है जबकि इन्वेस्टिंग रिस्की नहीं है.

 

 

व्हाट डू यू थिंक इज़ रिस्की? आपको क्या रिस्की लगता है ? What Do You Think Is Risky?

 

अमीर और गरीब आदमी के बीच थिंकिंग का फर्क है. अमीर लोग ग्रोथ के बारे में सोचते है जबकि गरीब लोग जॉब सिक्योरिटी देखते है. आपका फ्यूचर इस बात पे डिपेंड है कि आपको क्या रिस्की और स्मार्ट लगता है. गरीब और अमीर लोगो के डिफरेंट माइंडसेट होते है. गरीब लोग सोचते है इन्वेस्टिंग रिस्की है जबकि अमीर लोगो को ये बिलकुल भी रिस्की नहीं लगता.

 

गरीब लोग अमीरों को लालची समझते है लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है. अमीर और गरीब की थिंकिग का फर्क समझने के लिए यहाँ एक और एक्जाम्पल लेते है. एक कपल था जो अपना सारा टाइम पैसे बचाने में लगा रहता था. ये लोग सेल में खाना- कपड़े खरीदते थे.

 

उन्हें लगता था कि डेली यूज़ के आइटम्स में पैसे बचा कर वो लोग अमीर हो जायेंगे. हालाँकि लोंग रन में इस तरह की सेविंग कोई मैटर नहीं करती. क्योंकि उन्हें स्टॉक्स में या मार्केट में किसी भी टाइप की इन्वेस्ट रिस्की लगती थी. इस तरह की छोटी-मोटी सेविंग के बावजूद वो लोग कभी अमीर नहीं बन पाए.

 

दूसरी तरफ एक आदमी जो स्टॉक्स मे, रियल एस्टेट, बांड्स और बाकि चीजों में इन्वेस्ट करता था, उसकी सेविंग ने उसे एक पोर्टफोलियो इनकम बिल्ड करने में हेल्प की. और अल्टीमेटली वो एक दिन अमीर बन ही गया. इन दोनों केसेस में सेविंग मेन गोल था. लेकिन सेविंग के एरियाज़ बिल्कुल डिफरेंट थे. गरीब लोग सोचते है इन्वेस्टिंग रिस्की है और यही सोच उन्हें कभी अमीर नहीं बनने देती.

 

अमीर और गरीब के थिंकिंग पैटर्न में काफी बड़ा फर्क होता है. गरीब लोग अमीरों को लालची समझते है. और अमीर एकदम इसका उल्टा सोचते है. हेनरी फोर्ड ने दुनिया को अफोर्डेबल प्राइस पर कार प्रोवाइड कराई. ये फोर्ड की दरियादिली थी जो उन्होंने इस कांसेप्ट को चेंज कर दिया था कि सिर्फ अमीर लोग ही कार अफोर्ड कर सकते है.

 

 

हाउ टू वर्क लेस एंड अर्न मोर (How to Work Less and Earn More)

 

ज़्यादातर लोग बेड डेब्ट में फंसकर अपना सारा पैसा खो देते है. लेकिन अगर आप एक यंग और अमीर रीटायर होने का ड्रीम देखते हो तो आपको राईट इन्कम पर काम करना होगा. तीन टाइप की इनकम्स होती है, ओर्डीनेरी, पैसिव और पोर्टफोलियो इनकम. आपको जिंदगी भर ओर्डीनेरी इनकम के लिए जॉब नहीं करना है बल्कि पैसिव या पोर्टफोलियो इनकम पर फोकस करना है.

 

पैसिव और पोर्टफोलियो इनकम के टैक्स ओर्डीनेरी इनकम से कम होते है. सबसे ज्यादा टैक्स भरने के बावजूद ओर्डीनेरी इनकम वालो का अपने टैक्सेस पर ना के बराबर कण्ट्रोल होता है. यही रीजन है कि हम आपसे ओर्डीनेरी इनकम के बजाए पोर्टफोलियो या पैसिव इनकम पर ज्यादा फोकस करने को बोल रहे है.

 

एक एम्प्लोई हार्ड वर्क करता है ताकि उसे प्रोमोशन मिले या सेलरी बढे क्योंकि वो एक ओर्डीनेरी इनकम पर काम करता है. जबकि पोर्टफोलियो इनकम पर काम करने वाला इन्सान स्टॉक्स, बांड्स और म्यूचवल फंड्स पर इन्वेस्ट करके पैसे कमाता है. ऐसे लोग ही ग्रेट और रिच बिजनेसमेन बनते है. पैसिव इनकम के लिए काम करने वाला टैक्स पेमेंट अवॉयड करके रियल एस्टेट या इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टीज़ जैसे बुक्स, सोंग्स वगैरह की फील्ड में काम करते है… ओर्डीनेरी इनकम वाले सबसे ज्यादा हार्ड वर्क करते है और सबसे कम पैसे कमाते है जबकि पैसिव और पोर्टफोलियो इनकम वाले कम मेहनत में ज्यादा कमाते है. तो अमीर बनना है तो पैसिव या पोर्टफोलियो इनकम के बारे में सोचो. इन तीनो इनकम में से पैसिव इनकम टॉप पे आती है क्योंकि इसमें सबसे कम एफर्ट लगता है और ये लंबे टाइम तक मैक्सिमम अर्निंग देता है.

 

 

द फास्टेस्ट वे टू गेट रिच (अमीर होने का सबसे फ़ास्ट रास्ता) The Fastest Way to Get Rich

 

अगर आप यंग और रिच रीटायर होने की सोच रहे हो तो जॉब के बजाए बिजनेस में फोकस करो. अमीर होने का सबसे फ़ास्ट मेथड है अपना माइंड सेट चेंज करना. ज्यादातर लोग अपने कम्फर्ट जोन से बाहर नहीं निकलना चाहते. पर सक्सेस उन्ही को मिलती है जो लीक से हट कर चलते है.

 

एक कमज़ोर माइंडसेट हमे कभी अमीर नहीं बना सकता. अमीर बनने के लिए अपनी मनी हैंडलिंग पॉवर को इनक्रीज करे. ये बुक आपको सिखाती है कि जॉब से ज्यादा बिजनेस को इम्पोर्टेंस दो. गुड एजुकेशन का मतलब ये नहीं है कि हम अपनी पूरी लाइफ 9 टू 5 वाली जॉब करते रहे.

 

हम यहाँ एक एक्जाम्पल लेंगे कि एम्प्लॉयमेंट से ज्यादा अनएम्प्लॉयमेंट पर फोकस करके रिच बनने में कैसे हेल्प मिल सकती है.

 

हर एम्प्लोई का मेन फोकस रहता है कि जॉब बनी रहे. इसलिए उसे ग्रो करने का ज्यादा चांस नहीं मिलता. क्योंकि उसे बस अपनी सेलरी से मतलब है इसलिए वो कोई रिस्क भी नही लेता. वही दूसरी तरफ जो बिजनेसमेन जॉब छोडकर मार्किट से पैसे उधार लेकर रियल एस्टेट में इन्वेस्ट करता है उसके ग्रोथ करने के और अमीर होने के चांसेस कहीं ज्यादा है.

 

एक एम्प्लोई सारी लाइफ हार्ड वर्क करके सेविंग करता है जबकि एक बिजनेसमेन अपने बिजनेस को एक्सपेंड करके खूब सारा पैसा कमाता है और यंग एज में अमीर बनके रीटायर होता है. जैसा कि लोग बोलते है “कम्फर्ट ज़ोन एक अच्छी जगह है पर यहाँ कुछ भी ग्रो नहीं होता”

 

आपको अपनी रियेलिटीज को चेंज करना होगा और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आना होगा तभी आप एक पर्सन के तौर पर ग्रो कर पाओगे और डिफरेंट स्किल्स सीख पाओगे.

 

 

कनक्ल्यूजन (Conclusion)

 

इस बुक में आपने पढ़ा कि सेल्फ डाउट्स क्या होते है और ये हमारी ग्रोथ को कैसे रेस्ट्रिक्ट करते है यानी रोकते है. सेल्फ डाउट्स और लेज़िनेस दो ऐसी चीज़े है जो आपको आगे बढ़ने से रोकती है. लेकीन अगर आप में पैशन है और आप खुद पे यकीन करते हो तो कोई भी आपको अपने गोल्स अचीव करने से रोक नही सकता. आपकी सक्सेस और आपके बीच में बस आपका माइंडसेट है.

 

इस बुक में आपने पढ़ा कि हमे अपने काम से टाइम निकाल कर चीज़े डिस्कवर करनी चाहिए. काम या जॉब के बीच में ब्रेक लेने से एक बैटर वर्किंग पैटर्न बना रहता है जो आपको ग्रो करने में हेल्प करेगा. इस बुक में आपने पढ़ा कि पॉवर ऑफ़ लेवरेज किस तरह से हमारी बिजनेस ग्रोथ को अफेक्ट करता है.

 

पॉवर ऑफ़ लेवरेज़ आपके फेवर में भी हो सकता है और आपके खिलाफ भी. थोड़े में ज्यादा काम लेने की टेक्नीक को लेवरेजेस बोलते है. आपने पढ़ा कि डेब्टस यानी कर्जो को स्मार्टली यूज़ करके रिटायरमेंट प्लान फंड किया जा सकता है. गुड डेब्ट की हेल्प से आप मार्किट में डिफरेंट टाइप के इन्वेस्टमेंट प्लान ले सकते है और जल्दी अमीर बन सकते है. आपने लेवरेज के उन डिफरेंट टूल्स के बारे में पढ़ा जो आपकी बिजनेस डेवलेपमेंट में हेल्प करते है. अपने बिजनेस को प्रोमोट करने के लिए ये डिफरेंट टूल्स जैसेकि इंटरनेट, कंप्यूटर और न्यू टेक्नोलोज़ी आपके बड़े काम आएंगे.

 

लेकिन सबसे पहले अपनी एबिलिटीज पर भरोसा रखो. आपकी हर मिस्टेक आपको कुछ ना कुछ सिखाती है. फेल होना कोई बुरी बात नहीं है, बस आप में फिर से खड़े होने की हिम्मत होनी चाहिए. फेलियर्स हमारी सक्सेस जर्नी का एक पार्ट है और हमे ये एक्सेप्ट करना ही होगा. जो आज फेल हुआ, वो कल स्कसेसफुल ज़रूर होगा.

 

इस बुक से आपने सीखा कि अमीर और गरीब की थिंकिंग में क्या फर्क होता है. अमीर लोग रिस्क का आईडिया क्रिएट ही नही करते जबकि गरीब लोग रिस्क के डर से कभी भी नए आईडिया एक्सप्लोर नहीं करते है.

 

आपको राइट इनकम पर फोकस करना है जोकि पैसिव या पोर्टफोलियो इनकम है. अमीर बनने का सीक्रेट यही है कि आपको ओर्डीनेरी इन्कम से अपना ध्यान हटाकर अमीर बनने के बारे में सोचना होगा. अपन आज को बदलने का सबसे फ़ास्ट तरीका यही है कि अपना माइंडसेट चेंज करो. अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकल कर कुछ डिफरेंट और नए आईडियाज सोचो. एक बार अपना माइंडसेट चेंज करके देखो, सक्सेस आपके इंतज़ार में खड़ी मिलेगी.

 

 

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