Rich Dad Poor Dad Book Summary in Hindi (Part – 2)

Rich Dad Poor Dad Book Summary in Hindi – Hello दोस्तों, आज मैं आपलोगों को एक ऐसी जबरदस्त बुक की समरी रिच डैड पुअर डैड – रोबर्ट टी. kiyosaki के द्वारा लिखे गए जो दुनिया की बेस्ट बुक में से एक, उसके बारे में बताने वाला हूँ।

दोस्तों ये इसका पार्ट – 2 है और अगर आपने इसके पहले पार्ट नहीं पढ़ें हैं तो नीचे उसका लिंक दिया है, आप पढ़ सकते हैं –

PART – 1 पढ़ें

Rich Dad Poor Dad Book Summary in Hindi (रिच डैड पुअर डैड बुक समरी)

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एक कर्ज में डूबा समाज, जहाँ हम रहते है:

 अपने घर को एस्सेट समझना ही वो वजह है जो हमें कर्ज के बोझ तले दबाती है। आज यही अधिकतर लोगो की सोच है। अगर सेलेरी बड़ी है तो लोग सोचते है कि अब वे बड़ा सा घर ले सकते है क्योंकि उन्हें ये अपने पैसे का सही इस्तेमाल लगता है।



 इसके बदले अगर वही पैसा सही जगह लगाया जाए तो उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल सकती है।

लेकिन ऐसा हो नहीं पाता क्योंकि उनका सारा वक्त हाड़-तोड़ मेहनत करने में चला जाता है।



 अपनी नौकरी को सेफ ज़ोन समझ कर वे उससे अलग कुछ सोच ही नहीं पाते, और साथ ही उन पर कर्ज का इतना बोझ होता है कि वे नौकरी छोड़ने का रिस्क ले ही नहीं सकते।



 अब ज़रा खुद से ये सवाल कीजिये कि आज आप नौकरी छोड़ कर बैठ जाते है तो कितने दिन आपका गुज़ारा चलेगा ? क्योंकि अगर आप फिनेंशियेली लिटरेट नहीं है, अगर आपने सारी उम्र सिर्फ सेलेरी के भरोसे ही काटी है, और एस्सेट्स के बदले आपने लाएबिलिटीज़ ली है तो यकीनन आपकी जिंदगी एक कड़ी चुनौती है।



सिर्फ नेट वर्थ के भरोसे आपका काम नहीं चल सकता। नेट वर्थ बताता है कि आपके पास वाकई में कितना पैसा है चाहे वो एक गैराज में पड़ी पुरानी कार के रूप में ही क्यों ना हो। अब भले ही वो कार कुछ काम की नहीं हो।



जबकि वेल्थ का मतलब है कि आपके पास जो पैसा है उससे आप कितना और पैसा कमा रहे है।

जैसे कि मान लीजिये आपके पास कोई एस्सेट है जिससे हर महीने मुझे 3000 डॉलर की कमाई हो जाती है, और हर महीने आपके 6000 डॉलर खर्चे है तो मै सिर्फ आधे महीने ही अपना गुज़ारा कर पाऊंगा।


तो सोल्यूशन ये होगा कि अपने एस्स्ट्स से मिलने वाला पैसा बड़ा दे। जब वो 6000 डॉलर मिलने लगेगा तो आप रातो रात अमीर नहीं हो जायेंगे मगर इस तरह आप वेल्थी होने लगेंगे।

अब अगर आप अचानक नौकरी छोड़ते भी देते है तो आपके एस्सेट्स सारा खर्च कवर कर लेंगे। आप वेल्थी तभी बन पायेंगे जब आपके खर्च आपके एस्सेट्स की ग्रोथ से कम रहे।

अपने काम से काम रखे


दुनिया की सबसे बड़ी फ़ूड चेन मैक डोनाल्ड के फाउंडर रे क्रोक ने एक एमबीए क्लास में एक स्पीच दी। ये 1947 की बात है। उनकी ये स्पीच बड़ी ही शानदार थी, लोगो को प्रेरित करने वाली।

स्पीच के बाद जब एमबीए क्लास के छात्रो ने कुछ वक्त उनके साथ बिताने की गुजारिश की तो वे उनके साथ बियर पीने चले गए।

बातो-बातो में रे क्रोक ने अचानक एक सवाल किया “क्या आप लोग जानते है कि मै किस बिजनेस में हूँ?” अब ये बात तो सबको मालूम थी कि वे हेमबर्गर बेचते थे।

इस बात पर वे हँसने लगे और बोले कि उनका असल बिजनेस तो रियल एस्टेट है। क्योंकि मैक डोनाल्ड के लिए हर लोकेशन का चुनाव सोच समझकर किया जाता है। जहाँ उसकी फ्रेंचाईजी बनाई जाती है, वो जमीन भी साथ ही बेचीं जाती है।

तो इसका सीधा मतलब है कि मैक डोनाल्ड की फ्रेंचाईजी खरीदने वाले को वो जमीन भी खरीदनी पड़ती थी। तो इस तरह से ये एक रियल एस्टेट बिजनेस भी हुआ।

यही सबक अमीर डैड ने रॉबर्ट को सिखाया कि अक्सर लोग खुद के लिए छोड़कर बाकी सबके लिए काम करते है। वे टैक्स पे करके गवेर्मेंट के लिए काम करते है, उस कम्पनी के लिए काम करते है जहाँ वे नौकरी करते है, बैंक का मोर्टेज देकर उसके लिए काम करते है, और ये सब इसलिए क्योंकि हमारा एजुकेशन सिस्टम ही ऐसा है।

स्कूल हमें employee बनना सिखाता है नाकि employer. जो आप पढ़ते है वही आप बनते है। अगर आपने साइंस पढ़ी तो डॉक्टर। मेथमेटिक्स पढ़ी तो इंजीनियर, मतलब जो आपने पढ़ा वो आप बने।

अब मुसीबत तो ये है कि इससे छात्रो का कोई भला नहीं हो पाता क्योंकि वे नौकरी और बिजनेस के बीच के फर्क में उलझ कर रह जाते है। जब कोई पूछता है कि आपका क्या बिजनेस है तो आपको ये नहीं बोलना चाहिये कि मै तो एक डॉक्टर हूँ या एक बैंकर हूँ, क्योंकि वो आपका प्रोफेशन है, बिजनेस नहीं।

कहने का मतलब है कि आप जो करते है उसे अपना बिजनेस बनाईये, नौकरी नहीं। अपनी सारी उम्र दुसरो के लिए काम करके उन्हें अमीर करने में बर्बाद ना करे बल्कि खुद की जिंदगी को खुशहाल बनाने के लिए काम करे।

बहुत से लोगो को इस बात का एहसास बड़ी देर से होता है कि उनका हाउस Loan उनकी जान ले रहा है, और फिर उन्हें लगता है कि जिसे वे एस्सेट मानने की गलती कर रहे थे दरअसल कभी एस्सेट था ही नहीं।

जैसे उन्होंने कार ली, तो उससे जुड़े तमाम खर्चे उनकी लाएबिलिटीज़ बन गए। उन्हें पूरा करने के लिए नौकरी ज़रूरी है और अगर कभी वो सेफ जॉब उनके हाथो से निकल गई तो उनकी मुसीबते शुरू हो जाती है।

इसीलिए तो हम एस्सेट कॉलम पर इतना जोर दे रहे है ना कि आपकी इनकम कॉलम पर, और फिनेंशियेली सिक्योर होने का यही एक तरीका है।

आप कितने अमीर है, ये जानने का सही तरीका नेट वर्थ इसलिए नहीं है क्योंकि जब भी आप अपने एस्सेट्स बेचते है तो उनपर भी टैक्स लगता है।

आपको उतना पैसा नहीं मिलता जितना कि आप सोचते है। आपके बेलेंस शीट के हिसाब से आपको जितना भी पैसा मिलेगा उस पर भी आपको टैक्स देना पड़ेगा।

जो आप कर रहे है उसे एकदम मत छोडिये। ये किताब आपको कभी भी ये सलाह नहीं देगी। अपनी नौकरी करते रहिये पर साथ ही एस्सेट्स भी जमा कीजिये, और एस्सेट्स से मेरा मतलब है सही और असली मायने में एस्सेट्स।

मै ये नहीं कहूँगा कि आप कोई कार लीजिये क्योंकि वे मेरी नज़र में एस्सेट नहीं है क्योंकि जैसे ही आप उसे चलाना शुरू करते है वो अपनी कीमत का 25% खो देती है।

जितना हो सके खर्चे में कटौती करे और लाएबिलिटीज़ घटाए। अब किस तरह के एस्सेट्स खरीदे जाने चाहिए ? यहाँ हम आपको कुछ उदाहरण देते है :-

  1. ऐसा बिजनेस जहाँ आपकी मौजूदगी ज़रूरी ना हो, जो दुसरे लोग आपके लिए आपके बिज़नेस चलाए, क्योंकि आप वहां ज्यादा वक्त देंगे तो वो बिजनेस नहीं, वो नौकरी ही होगी।
  2. रियल एस्टेट में पैसा लगाये।
  3. स्टोक और बॉन्ड खरीदे।

जब एस्सेट खरीदे तो अपनी पसंद की चीजों पर पैसा लगाए, क्योंकि आपका मन होगा तभी आप उसमें ध्यान दे पायेंगे। अगर उसमे आपकी रूचि होगी तो आप उसे बेहतर समझ पायेंगे।

रॉबर्ट को रियल एस्टेट और स्टोक्स में रूचि थी खासकर छोटी कंपनियों में इन्वेस्ट करना। अपने अमीर डैड की सलाह पर उसने अपनी नौकरी कभी नहीं छोड़ी। वो जॉब करता रहा साथ ही अपने एस्सेट कॉलम को बड़ा और मज़बूत बनाता चला गया।

एक पैसा भी जो आप कमाते है उसे बेकार ना जाने दे। अपने पैसे को अपना गुलाम मान कर चलिए जो आपके लिए काम करे। आप लक्ज़री खरीदना चाहते है ? शौक से खरीदे, कोई बड़ी बात नहीं।

मगर ये ना भूले कि अमीर और मिडल क्लास में यही सोच का फर्क है। जहाँ मिडल क्लास पैसा आते ही पहले लक्ज़री में खर्च करेगा वहीँ अमीर आदमी उसे अंत में खरीदेगा।

इतना समझ लेने के बाद अब अगले चेप्टर में आप अमीर लोगो के सबसे बड़े सीक्रेट के बारे में जानेगे।

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अमीर पैसा इंवेंट करते है


अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने टेलीफोन इन्वेंट करने के बाद उसे पेटेंट कर दिया था। इनका बिजनेस बड़ा और सँभालने में मुश्किल होने लगी तो वे वेस्टर्न यूनियन गए और उन्हें अपना पेटेंट और छोटी सी कंपनी 100,000 डॉलर में बेचने की पेशकश की।

उस वक्त के वेस्टर्न यूनियन के प्रेजिडेंट ने पेशकश ठुकरा दी। उन्हें ये दाम कुछ ज्यादा लग रहे थे, और फिर उसके बाद एक बड़ी कम्पनी AT&T का जन्म हुआ।

रॉबर्ट 1984 से प्रोफेशनल तौर पर पढ़ा रहे है। एक चीज़ जो हजारो लोगो को पढ़ाने के बाद उन्होंने जानी वो ये कि उन सब लोगो में पोटेंशियल था। बल्कि हर एक इन्सान में पोटेंशियल है जो हमें महान बना सकती है।

इसके बावजूद जो हमें रोकता है वो है – खुद पर डाउट रखना।

स्कूल छोड़ने के बाद हमें पता चलता है कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ ग्रेड्स ही काफी नहीं होते।

जैसे सिर्फ स्मार्ट लोग ही आगे नहीं बढ़ते बल्कि वे बढ़ते है जो बोल्ड भी होते है। ये सच है कि फैनेंशियेल जीनियस होने के लिए इसकी नोलेज भी होनी चाहिए मगर साथ ही हिम्मत और बोल्डनेस भी चाहिए।

ज़्यादातर लोग पैसे के मामले में कोई रिस्क नहीं लेना चाहते मगर अमीर होने के लिए आपको रिस्क लेने ही पड़ेंगे। क्योंकि हो सकता है आने वाले सालो में एक नया बिल गेट्स पैदा हो या अगला एलेक्जेंडर ग्राहम बेल और बाकी शायद दिवालिया बनकर गरीब हो जाए।

अब ये आपकी मर्ज़ी है, आप इनमे से क्या बनना चाहते है।

अगर आप अपना फिनेंशियेल IQ बढ़ाते है तो बहुत कुछ हासिल कर सकते है, और अगर नहीं तो आने वाले साल और भी डरावने हो सकते है, क्योंकि हर पुराना जाता है तो नया आता है।

तो जो आज है वही सबसे खुशहाल वक्त है।

आज के दौर में लोग ज्यादा फिनेंशियेली स्ट्रगल कर रहे है क्योंकि उनकी सोच अभी भी पुरानी ही है। फिर वे अपनी गलती ना मानकर या तो अपने बॉस को इल्जाम देंगे या नई टेक्नोलोजी को। जो कभी कल के दौर में एस्सेट था वही आज लाएबिलिटी बन चूका है।

तो आपको अपडेट रहने की ज़रुरत है।

रॉबर्ट ने एक गेम डीजाइन किया है जिसे वे “कैश फ्लो” कहते है। ये लोगो को सीखाता है की पैसा कैसे काम करता है ? अमीर बनने की राह क्या है और रेट रेस से बाहर कैसे निकले ? ये सारी चीज़े इस गेम से समझाने की कोशिश की गयी।

एक दिन एक औरत आई। गेम खेलने के दौरान उसने एक बोट कार्ड जीता जिसका मतलब था कि उसने उस गेम में एक बोट जीती। वो औरत बड़ी खुश हुई मगर जब उसे पता चला कि बोट लेने के लिए उसे एक बड़ी रकम टैक्स भरनी होगी तो उसकी ख़ुशी गायब हो गयी।

वो बोट उसके लिए अब एस्सेट नहीं बल्कि लाएबिलिटी बन गई। उसे अब पता चला कि ऐसे तो ये बोट उसकी जान ही ले लेगी। उसे ये आइडिया समझ नहीं आया और रिफंड की मांग की। उसे उसके पैसे वापस मिल गए और वो चली गई।

मगर बाद में उसने फ़ोन करके बताया कि उसे अब गेम का आइडिया कुछ समझ आने लगा था। वो उस गेम से अपनी लाइफ को जोड़ कर देख पा रही थी। पैसा कैसे काम करता है इस बात को समझ ना पाने की वजह से उसका गुस्सा जायज था।

हम भी अक्सर यही करते है। जो बात हमारी समझ से परे होती है, उस पर हमें गुस्सा आता है और हम जिंदगी की हर परेशानी के लिए उसे ब्लेम करना शुरू कर देते है।

मगर अगर ठंडे दिमाग से सोचे तो ये तरीका एकदम गलत होगा। बेहतर होगा कि हम उन्हें समझने की कोशिश करे तो गेम ऑफ़ लाइफ जीत सकते है।

बहुत से लोग कैश फ्लो गेम में खूब पैसा जीतते है। फिर उन्हें समझ नहीं आता कि उस पैसे का क्या करे तो वे हारने लगते है। इसकी वजह है उनकी पुरानी सोच जो उनको आगे नहीं बढ़ने देती, और फिर वे बाद में सारा पैसा ही हार बैठते है।

कुछ लोग कहते है कि वे हार गए क्योंकि उनके पास सही पत्ते नहीं थे। बहुत से लोग इसी तरह जिंदगी में सही मौको की तलाश में बैठे रहते है। कुछ लोगो को तो सही मौका मिलता भी है, तो उसका फायदा नहीं उठा पाते क्योंकि वे कहेंगे कि उनके पास पैसा ही नहीं था।

अब कुछ ऐसे भी होते है जिन्हें पैसा और मौका दोनों मिले फिर भी वे कुछ हासिल नहीं कर पाए क्योंकि दरअसल वे समझ ही नहीं पाए कि ये एक अपोरच्यूनिटी है।

फिनेंशियेल इंटेलीजेंस का मतलब है कि आप पैसे को लेकर कितने क्रिएटिव हो सकते है अगर आपको मौका मिलता है तो बगैर पैसे के आप क्या करेंगे, और अगर पैसा है मगर मौका नहीं तो उस सूरत में आप क्या करेंगे, ये सब आपकी फिनेंशियेल इंटेलीजेंस पर निर्भर करता है।

ज़्यादातर लोग इस बात का एक ही सोल्यूशन जानते है कि खूब मेहनत करके खूब पैसा कमाया जाए। लेकिन आपको सीखना है कि अपने लिए मौका कैसे पैदा किया जाए, ना कि उसके इंतज़ार में बैठे रहे।

सबसे ख़ास बात अमीरों की जो है वे ये कि उन्हें पता है पैसा असल चीज़ नहीं है, असल चीज़ है इसका सही मतलब जानना। ये जान लेना कि जो हमें चाहिए वो हम इससे बना सकते है।

हमारा दिमाग हमारे लिए सबसे बड़ा एस्सेट होता है। यही हमें सुपर रिच बना सकता है या सुपर पुअर, निर्भर करता है कि हम कैसे इसका इस्तेमाल करे।

जो लोग सफल है उनके साथ कदम मिलाकर चलना है तो आपको ये सीखना पड़ेगा कि पैसा बढा करने की चाहत खुद में कैसे पैदा करे। आपको अपने सबसे बड़े एस्सेट यानि आपके दिमाग को इन्वेस्ट करने की ज़रुरत है। आपको फिनेंशियेली इंटेलीजेंट होना पड़ेगा।

आइये इसको एक उदाहरण समझे –

1990 के दशक में एरिज़ोना और फोनिक्स के आर्थिक हालात बुरे चल रहे थे। वहां के लोगो को हर महीने 100 डॉलर बचाने की सलाह दी जा रही थी। बुरे वक्त के लिए पैसा बचाने का विचार कुछ हद तक सही भी है।

मगर उस पैसे का क्या फायदा जो आप जमा करते जाते है। इससे तो अच्छा है उसका कुछ हिस्सा invest किया जाए, जो आगे चलकर आपको फायदा दे।

खैर, बात करते है एरिज़ोना और फोनिक्स के लोगो की जो आर्थिक तंगी झेल रहे थे। ऐसे में इन्वेस्टर को ये एक बढ़िया मौका लगा। लोग जो अपनी प्रॉपर्टी अपने-पौने दामो में बेच रहे थे वो कई इन्वेस्टर्स ने हाथो हाथ खरीद ली।

रॉबर्ट ने भी 75,000 डॉलर की कीमत वाला एक घर सिर्फ 20,000 डॉलर में खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने अटॉर्नी के ऑफिस में एक एड दिया।

75,000 डॉलर वाला घर सिर्फ 60,000 डॉलर में लेने के लिए ग्राहक टूट पड़े। रॉबर्ट का फ़ोन बजना बंद ही नहीं हो रहा था।

ये पैसा उनको उस एस्सेट से मिलने जा रहा था जो उन्होंने प्रोमिसरी नोट के रूप में ग्राहक से लिया था, और उन्हें ये पैसा कमाने में केवल 5 घंटे लगे।

उन्होंने जो 40,000 डॉलर इन्वेंट किये वो उनके कॉलम ऑफ़ एस्सेट में क्रियेट हुए थे, और बगैर टैक्स के उन्होंने अचानक ही मिले एक मौके का फायदा उठाकर ये पैसे क्रियेट अपने इनकम कॉलम में एड कर लिए।

कुछ सालो बाद ही उनके इस बिजनेस ने इतना पैसा क्रियेट किया कि उनकी कम्पनी की कार, गेस, इंश्योरेंस, क्लाइंट्स के साथ डिनर, ट्रिप और बाकी चीज़े सब कवर हो गयी।

जब तक गवर्नमेंट उन खर्चो पर टैक्स लगाती, इनमे से ज़्यादातर चीज़े प्री टैक्स एक्स्पेंसेस में खर्च हो चुकी थी। कुछ सालो बाद ही जो घर 60,000 डॉलर में बिका था अब वो 110,000 डॉलर का था।

अभी भी उनके पास कुछ मौके थे मगर वे इतने कम थे कि उनके लिए रॉबर्ट को एक वैल्युएबल एस्सेट लगाना पड़ता और अपना वक्त भी।

तो वे आगे बड़ गए। उन्हें अब नये मौको की तलाश करनी थी। अब आप एक सवाल खुद से कीजिये। मेहनत करना भी बहुत मेहनत का काम है।

50% टैक्स भरिये और बाकी बचाइये।

अब वो सेविंग्स आपको 5% इंटरेस्ट देंगी और फिर उस पर भी आप और टैक्स भरे ? इससे तो अच्छा होगा कि अपना पैसा और टाइम अपने सबसे पावरफुल एस्सेट यानी अपने दिमाग पर इन्वेस्ट करे और फिनेंशियेली इंटेलीजेंट बने।

ये दुनिया कभी एक सी नहीं रहती। जो आज है कल नहीं होगा। कभी मंदी तो कभी तेज़ी का दौर चलता रहेगा। वक्त के साथ टेक्नोलोजी और बेहतर होती जाएगी।

आज मार्केट ऊपर है तो कल नीचे होगा खासकर स्टोक मार्केट तो हर रोज़ बदलता है मगर इससे आपको क्या फर्क पड़ेगा अगर आप फिनेंशियेल इंटेलिजेंट है तो ? क्योंकि आप तो हर हालात के लिए तैयार रहेंगे।

आपको जिंदगी में बेशुमार मौके मिलेंगे जहाँ आप अपनी फिनेशियेल इंटेलिजेंट का फायदा उठा सकते है, ज़रुरत है तो बस उन मौको को लपकने की।

अमूमन हम दो तरह इन्वेस्टर देख सकते है। पहले वो जो पैकेज इन्वेस्टमेंट खरीदते है, और ये काफी आसान और बगैर झन्झट का काम है। दुसरे इन्वेस्टर अपने लिए खुद ही इन्वेस्टमेंट क्रियेट करते है।

इनको आप प्रोफेशनल भी कह सकते है। जितना ये इन्वेस्ट करते है उससे कई गुना ज्यादा पैसा बना लेते है।

अब अगर आप इस तरह के इन्वेस्टर बनना चाहते है तो आपको खासतौर पर इन तीन स्किल्स को समझने की ज़रुरत है –

No 1 – ऐसी अपोर्च्यूनिटी ढूंढिए जो बाकी न ढूंढ सके हो :

याद रहे आपकी दिमाग वो देख सकता है जो बाकियों की आँखे भी न देख पाए।

No 2 – पैसा बड़ाइये :

जब पैसे की ज़रुरत पड़े, मिडल क्लास केवल बैंक जाता है, मगर दुसरे टाइप के इन्वेस्टर पैसा बड़ा कर केपिटल रेज करते है। उन्हें हमेशा बैंक की ज़रुरत नहीं पड़ती।

No 3 – स्मार्ट लोगो को ओर्गेनाइज़ कीजिये :

इंटेलीजेंट लोग वे होते है जो अपने से ज्यादा स्मार्ट लोगो के साथ मिलकर काम करते है इसलिए इन्वेस्ट करने से पहले अपने इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र को चुने।

मुझे मालूम है कि ये सब आपके लिए कुछ ज्यादा है, मगर इसके रिवार्ड्स शानदार है। जिंदगी में रिस्क बहुत है लेकिन उन्हें हैंडल करना सीख कर ही आप अमीर बन पायेंगे।

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सीखने के लिए काम करे, पैसे के लिए नहीं

एक बार एक जर्नलिस्ट ने रॉबर्ट का इंटरव्यू लिया था। रॉबर्ट उसके अर्टिकल पहले भी पढ़ चुके थे और उस जर्नलिस्ट के लिखने की स्टाइल से बेहद प्रभावित थे।

इंटरव्यू जब पूरा हुआ तो उस जर्नलिस्ट ने रॉबर्ट को बताया कि वो एक मशहूर लेखिका बनकर उनकी ही तरह एक दिन फेमस होना चाहती है।

रॉबर्ट ने उससे पुछा “तो ऐसा क्या है जो उन्हें मशहूर होने से रोक रहा है?” इस सवाल के ज़वाब में उस जनर्लिस्ट ने कहा – “उनकी जॉब आगे नहीं बड पा रही”.

इस पर रॉबर्ट ने सुझाव दिया कि उस जनर्लिस्ट को कोई सेल्स क्लास ज्वाइन कर लेनी चाहिए। जर्नलिस्ट ने बताया कि उनकी एक दोस्त उन्हें पहले ही ये ऑफर दे चुकी है मगर उन्हें ये छोटा काम लगता है। वे ये भूल गयी थी कि रॉबर्ट खुद कभी सेल्स स्कूल जा चुके थे।

इस बात का पॉइंट ये है कि अगर आपके पास कोई टेलेंट है जिसके दम पर आप कुछ पैसा कमाना चाहते है, तो आपका टेलेंट काफी नहीं होगा क्योंकि उस टेलेंट को कैसे भुनाया जाए जब तक आप ये बात नहीं जानते आपका टेलेंट यूँ ही बेकार है।

जब तक आप उसे लोगो के सामने पेश करने का हुनर नहीं सीख जाते, आप कुछ नहीं कमा सकते।

तो बेचने की कला सीखने में कोई शर्म की बात नहीं है। किसी भी सेल्समेन को इसके लिए शर्मिंदा नहीं होना चाहिए। एक जो सबसे बड़ा फर्क अमीर डैड और गरीब डैड के बीच था वो ये कि गरीब डैड हमेशा नौकरी की चिंता करते थे कि जॉब हमेशा सिक्योर रहे। क्योंकि एक सेफ जॉब ही उनके लिए सब कुछ थी।

जबकि अमीर डैड हमेशा सिर्फ और सिर्फ कुछ सीखने पर जोर देते थे। अमीर बनने के लिए आपको बहुत कुछ सीखना पड़ेगा। इसके अलग पहलु को देखे तो स्कूल हमें रिवार्ड करते है किसी एक ही ख़ास चीज़ में महारत के लिए।

इसका एक उदाहरण देखिये – जब डॉक्टर मास्टर की डिग्री लेते है उसके बाद किसी एक स्पेशल फील्ड में डॉक्टरेट करते है जैसे कि पीडियाट्रिक या कुछ और। मतलब एक छोटे से विषय पर उन्हें बहुत पढ़ना पड़ता है उस फील्ड में महारत के लिए, और यही उनका रिवार्ड होता है।

ऐसे ही बहुत कुछ जानने के लिए जो थोडा बहुत आप सीखते है वो नॉलेज तभी आएगी जब आप अलग-अलग कंपनीयों के लिए काम करेंगे, दुनिया की अलग-अलग चीजों को जानेंगे, चीजें कैसे काम करती है ये सभी बाते अनुभव करेंगे तभी आपकी नॉलेज बड़ेगी।

शायद यही वजह थी कि अमीर डैड छोटे रॉबर्ट और माइक को अपने साथ लेकर जाते थे जब वे अपने डॉक्टर, एकाउंटेंट्स, लॉयर या किसी प्रोफेशनल से मिलने जाते।

जब रॉबर्ट ने मेरिन कोर्प्स ज्वाइन करने के लिए अपनी हाई पेईंग जॉब छोड़ी तो उसके गरीब मगर पढ़े-लिखे पिता समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर रॉबर्ट ने ऐसी शानदार नौकरी क्यों छोड़ी। वे एक तरह से इस फैसले से सख्त निराश हुए।

रॉबर्ट ने उन्हें समझाने की हरमुमकिन कोशिश की कि उनका ऐसा करना क्यों ज़रूरी था मगर उन्हें ये बात हज़म नहीं हो रही थी।

रॉबर्ट ने उन्हें कहा कि वे सीखना चाहते है कि खुले आसमान में कैसे उड़े। उन्हें जानना था कि वर्कर्स की टीम को कैसे हैंडल किया जाए, किसी भी कम्पनी को अपने बलबूते पर चलाना कितना मुश्किल काम है, रॉबर्ट ये सब सीखना चाहते थे।

वियतनाम से लौटने के बाद रॉबर्ट ने अपनी जॉब से रिजाइन कर दिया और Xerox कोर्प्स को ज्वाइन कर लिया। उन्हें ये नौकरी किसी फायदे के लिए नहीं चाहिए थी। वो इतने शर्मीले थे कि किसी को कुछ भी बेचने के ख्याल से ही उन्हें पसीना आ जाता।

अपनी इसी कमी को दूर करने के लिए उन्होंने Xerox के सेल्स ट्रेनिंग प्रोग्राम की शिक्षा ली। इसके बाद रॉबर्ट ने खुद अपनी कंपनी की शुरुवात की और अपना पहला शिपमेंट भेजा। वे अगर इसमें नाकामयाब रहते तो पक्का दिवालिया हो जाते।

लेकिन उन्होंने ये रिस्क लिया और अपने अमीर डैड की सीख को याद रखा कि बेशक आप 30 की उम्र से पहले दिवालिया होने का रिस्क ले सकते हो क्योंकि इस उम्र में आपको रिकवर होने का मौका भी मिल जाता है।

ज्यादातर एम्प्लोयी अपने वर्कर्स को इतना तो पे करते है कि वे काम छोड़ कर ना जाए और ज्यादातर वर्कर भी जी फाड़ कर इसलिए मेहनत करते है कि वे काम से निकाले ना जाए। इसलिए तो उन्हें सिर्फ अपनी सेलेरी और कंपनी से मिलने वाले फायदों से ही मतलब होता है।

इस सोच के साथ उनके कुछ साल तो बढ़िया गुज़रते है मगर ये लम्बे समय तक काम नहीं करता। तो क्यों ना आप वो सब कुछ अभी सीखे जो आप सीखना चाहते है इससे पहले कि आप कोई एक ख़ास प्रोफेशन अपने लिए चुने क्योंकि अगर एक बार आपने अपना प्रोफेशन चुन लिया तो आप हमेशा के लिए उसी से बंध कर रह जायेंगे।

Robert Kiyosaki के बारे में –

 रॉबर्ट कियोसाकी वास्तव में एक बहु-प्रतिभाशाली व्यक्तित्व है। वह एक उद्यमी, निवेशक, प्रेरक वक्ता, लेखक और वित्तीय ज्ञान कार्यकर्ता भी हैं। वह एक जापानी अमेरिकी है जिसका जन्म हिलो, हवाई में हुआ था।

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