Setting the Table Book Summary in Hindi – हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस में सक्सेस कैसे मिलेगा ?

Setting the Table Book Summary in Hindi – आपको टाइटल पढ़कर पता चल ही गया होगा कि इस किताब का नाम ‘सेटिंग द टेबल’ है. इस किताब को कई रेस्त्रां (रेस्टोरेंटस) और कैफ़े के मालिक रह चुके लेखक “Danny Meyer” ने लिखा है. इस किताब में उन्होंने बताया है कि एक बढ़िया रेस्त्रां (रेस्टोरेंट) या फिर कैफ़े का कैसे निर्माण किया जा सकता है?

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के टॉप पर रहने के बाद उन्होंने अपने एक्सपीरियंस को इस किताब के शब्दों में समेटने की कोशिश की है. अगर आप भी इस सेक्टर में कुछ करना चाहते हैं या फिर आपको भी है खाने खिलाने से प्यार है. तो फिर इस किताब की समरी को सुनने की शुरुआत कर दीजिए.

क्या आप ऐसे लोगों में से हैं जिन्हें फाइन डाइनिंग में इंटरेस्ट हो, या फिर ऐसे लोगो में है जो हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में काम कर रहे हों, या फिर अगर आपको होटल या कैफ़े की शुरुआत करना है तो ये बुक आपके लिए है।

लेखक

आपको बता दें कि इस किताब के लेखक “Danny Meyer” हैं. ये कई हाई रेटेड रेस्त्रां (रेस्टोरेंटस) और कैफ़े के को-ओनर रह चुके हैं. इन्होंने अपना ज्यादातर समय अमेरिका में बिताया है. इन्होंने इस किताब के अलावा भी कई कुक बुक्स का लेखन किया है. “सेटिंग द टेबल” लेखक की पहली बेस्ट सेलिंग किताब थी.

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Setting the Table Book Summary in Hindi – हॉस्पिटैलिटी बिज़नेस में सक्सेस कैसे मिलेगा ?

हॉस्पिटैलिटी बिजनेस में सक्सेसफुल होने के गोल्डन रूल्स

सपनों के जैसा माहौल हो, चारों तरफ लोग एन्जॉय कर रहे हों. टेबल पर वाइन्स की बोतलें लोगों का इंतज़ार कर रही हों, कौन नहीं चाहता है ऐसी जगह का मालिक बनना? सीधे शब्दों में कहें तो ज्यादातर लोग अच्छे होटल का मालिक बनना चाहते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है क्योंकि उन्हें फेल होने का डर लगता है.

ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सिर्फ फूड्स में दिलचस्पी होने की वजह से ही रेस्टोरेंट हिट नहीं हो सकता है. किसी भी बिजनेस में सफल होने के लिए, आपके पास उस बिजनेस की तकनीक होनी ही चाहिए. इस किताब की समरी सुनने या पढ़ने के बाद आपके पास भी इस सेक्टर में सफल होने का गोल्डन रूल होगा.

इस किताब के लेखक “Danny Meyer” का नाम इस सेक्टर में पूरे यूनाइटेड स्टेटस में मशहूर है. उनके अंदर फूड्स को लेकर पैशन भी था और दुनिया में छा जाने वाला हुनर भी था. अपने पैशन और हुनर को उन्होंने इस किताब की शक्ल में पेश किया है.

अगर आप भी रेस्टोरेंट्स या कैफ़े की चैन चलाना चाहते हैं तो फिर इस किताब की समरी आपको ज़रूर सुननी चाहिए.

तो चलिए शुरू करते हैं!

“Danny Meyer” ने अपने पैशन को फॉलो करते हुए खोला था खुद का पहला रेस्टोरेंट

क्या आप किसी ऐसे इंसान को जानते हैं जिसे बाहर खाना पसंद ना हो? ऐसा अगर होगा भी तो वो एक्सेप्शन ही होगा. आम तौर पर परिवार या फिर किसी चाहने वाले के साथ बाहर जाकर अच्छे रेस्त्रां (रेस्टोरेंट में खाना सभी को अच्छा लगता है. इसी के साथ ही साथ अगर वहां का खाना बढ़िया हुआ तो फिर वो यादें बन जाती हैं.

भले ही रेस्टोरेंट्स में जाना सभी को अच्छा लगता हो, लेकिन हर कोई खुद का रेस्टोरेंट नहीं खोल सकता है. ऐसा करने के लिए एक अलग जज़्बे की ज़रूरत होती है. जो कि लेखक की कहानी में आपको देखने को मिलेगा.

डैनी मेयर को बचपन से ही इंटरनेशल फूड्स का पैशन था. इसके पीछे की कहानी कुछ ऐसी है कि मेयर के पिता जी की मशहूर इंटरनेशनल एयर लाइंस से डील थी. उस डील के तहत उन्हें पैसेंजर्स के लिए घूमने-फिरने और खाने-पीने की व्यवस्था करनी होती थी. इसी वजह से बचपन से ही डैनी मेयर को काफी ज्यादा घूमने और इंटरनेशनल फूड्स को टेस्ट करने का मौका मिला करता था.

इसमें गौर करने वाली ये बात हुआ करती थी कि ज्यादातर परिवार यूरोप घूमने जाया करते थे. वहां पर डैनी मेयर को क्यूज़ीन के साथ ही साथ हॉस्पिटैलिटी के बारे में भी सीखने को मिलता था.

यूरोप का कल्चर तो पूरे विश्व में फेमस ही है. इस किताब के लेखक ने यूरोप से कल्चर और हॉस्पिटैलिटी का ज्ञान हासिल किया है.

लेखक ने यहां ये भी बताया है कि कई बार बचपने की वजह से उन्हें काफी दिक्कत का भी सामना करना पड़ा था. बच्चे होने की वजह से कभी-कभी वो ओवर ईटिंग कर लेते थे. जिसकी वजह से उनकी तबीयत भी खराब हो जाया करती थी.

जैसा कि अब तक आपने जान ही लिया है कि लेखक का वास्ता इंटरनेशनल फूड्स से बचपन से ही पड़ता रहा है. जब भी आप किसी भी चीज़ से बचपन से जुड़े हुए रहते हैं. तो फिर आपको पता भी नहीं चलता है कि कब आपको उस चीज़ से इश्क़ हो जाता है.

इसी तरह डैनी मेयर को भी पता नहीं चला था कि कब उनको फूड्स से प्यार हो गया था. धीरे-धीरे वो इस बात को तो समझ गए थे कि उनका पैशन फूड्स ही है.

अब उनके सामने सवाल ये था कि अपने पैशन को फॉलो करने के लिए वो पहला कदम कैसे उठायें?

याद रखिए, पहला कदम ही सबसे मुश्किल होता है. इसी के साथ ही साथ आपको जिंदगी भर भी यही पहला कदम याद भी रहेगा. इसलिए पहला कदम बड़ी सावधानी से और निडरता से उठाना चाहिए.

धीरे-धीरे वो समय भी आ गया था. जब डैनी मेयर ने कॉलेज का रुख किया था. इस समय उन्होंने कई बार अपने माता-पिता से रेस्टोरेंट सेक्टर में काम करने के बारे में पूछा भी था. कई बार डिस्कशन होने के बाद भी माता-पिता को संदेह ही था. उन्हें ये लगता था कि अगर उनके बेटे का रेस्टोरेंट फ्लॉप हो गया तो क्या होगा? इसी के साथ उन्हें ये भी लगता था कि इससे उनके बेटे की इज्ज़त भी कम हो सकती है.

अब मेयर के सामने सवाल था कि वो क्या फैसला लेंगे?

फिर मेयर ने यूरोप की तर्ज़ पर बेहतरीन सर्विस वाला रेस्टोरेंट ओपन करने का फैसला किया था. उन्होंने ये भी सोचा था कि वो सिर्फ बेस्ट क्यूज़ीन ही सर्व करेंगे. इसी के साथ ही साथ उन्होंने सोचा था कि उनके रेस्टोरेंट की सर्विस बेहतरीन होगी.

फिर उन्होंने खुद के फैसले को बैक अप किया और एक रेस्टोरेंट की नींव भी रख दी थी. उसका नाम उन्होंने ‘यूनियन स्क्वायर कैफ़े’ रखा था.

कैफ़े के खुलते ही मेयर का सपना सकार हो गया था. लेकिन अभी बड़ा सवाल था कि बिजनेस कैसे आएगा? मेयर को भी काफी कुछ सीखना बाकी था. अभी उन्हें और ज्यादा समय की ज़रूरत थी कि वो खुद का एक बिजनेस मॉडल तैयार कर सकें.

क्यूज़ीन के मामले में हमेशा अथेंटिक रहिए, साथ ही साथ लोकल टेस्ट को शामिल करिए

जब कभी भी आप रेस्टोरेंट खोलने वाले होंगे. तब आपके दिमाग में आ सकता है कि आप अपनी विरासत के हिसाब खाना रखें. या फिर आपको फ्रेंच खाना पसंद हो तो उसे मेन्यू में रखें. लेकिन याद रखियेगा कि आपको अथेंटिक रहना ज़रूरी है.

मेयर को भी इटालियन और फ्रेंच फ़ूड काफी ज्यादा पसंद था. लेकिन वो अपने रेस्टोरेंट में यूरोप को कॉपी नहीं करना चाहते थे. वो अपने ग्राहकों के हिसाब से खाना बनाना चाहते थे.

आपको बता दें कि उनकी सक्सेस का यही राज़ था. वो न्यू यॉर्क में बस फॉरेन फ़ूड ही सर्व नहीं करना चाहते थे. वो कस्टमर के हिसाब से फ़ूड सर्व करते थे. जैसा कि उन्होंने अपने ‘तबला’ रेस्टोरेंट में किया था. उन्होंने वहां इंडियन फ़ूड सर्व किया था.

न्यू यॉर्क में इंडियन्स काफी ज्यादा रहते थे. इसलिए मेयर के रेस्टोरेंट को काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला था.

अपने रेस्टोरेंट की छोटीसे छोटी चीज़ के ऊपर मेयर ने काफी ध्यान दिया था. उन्होंने दीवारों को भी इंडियन फेब्रिक में सजाया था.

नए रेस्टोरेंट के सामने फाइनेंस और क्वालिटी दोनों को मैनेज करने का चैलेन्ज रहता है. मेयर ने इस काम को बहुत अच्छे से किया था. जिसका फायदा भी उन्हें देखने को मिला था.

अपने कस्टमर्स का बहुत ज्यादा ख्याल रखियेगा, आपको वही ज़ीरो से हीरो बनाएंगे

अच्छे रेस्टोरेंट को अपनी सर्विस पर ध्यान देना ही चाहिए. इसी के साथ फाइन डाइनिंग में आपकी सबसे बढ़िया सर्विस होनी चाहिए.

डैनी मेयर के लिए फाइन डाइनिंग बस टेबल पर खाना और वाइन सर्व करना ही नहीं था. फाइन डाइनिंग को वो बस अच्छे शेफ और वेटर से नहीं तौला करते थे. इस कांसेप्ट वो हॉस्पिटैलिटी से रिलेट करते थे.

उनका मानना था कि जब कोई गेस्ट आपके यहां खाने खाने के लिए आए. तो उसे ऐसे ट्रीट करियेगा कि कुछ देर के लिए वो खुद को राजा ही समझने लगे.

अपने कस्टमर को जितनी हो सके उतनी इज्ज़त दीजियेगा. वो आपके लिए भगवान से कम नहीं है.

इसी के साथ ही साथ लेखक ये भी बताते हैं कि अपने कस्टमर को समझने की कोशिश करियेगा. जितना आप उनको जान पाएंगे उतनी बेहतर सर्विस आप दे पायेंगे.

कंपनी पालिसी के लिए ही बस काम नहीं करिएगा, अपने दिल से खाना खिलाने के लिए काम करियेगा.

आपके थोड़े से एफर्ट्स सामने वाले का दिन बना सकते हैं. इसलिए पूरी शिद्दत से सर्व करने की कोशिश करनी चाहिए.

बेहतरीन सर्विस मेयर की सक्सेस के पीछे का महत्वपूर्ण पहलू है. लेकिन इसके लिए आपके पास काबिल इंसान होने ही चाहिए. वर्क फ़ोर्स टैलेंटेड रखने की कोशिश करिए.

टैलेंटेड लोगों की हायरिंग करिए, जितनी अच्छी वर्क-फ़ोर्स उतना अच्छा रेस्टोरेंट

आपके रेस्टोरेंट में भले ही कितना अच्छा फ़ूड मिलता हो? लेकिन अगर वो टाइम से नहीं मिलेगा. तो बात नहीं बन सकती है. इसलिए वर्क- फ़ोर्स का अच्छा होना बहुत ज़रूरी है.

आपको बेहतरीन स्टाफ की हायरिंग करनी ही पड़ेगी. इसके लिए मेयर भी एक स्ट्रेटजी का इस्तेमाल करते थे. जिसे उन्होंने 51 परसेंट सॉल्यूशन का नाम दिया था.

क्या है ये 51 परसेंट सॉल्यूशन स्ट्रेटजी?

इस स्ट्रेटजी के तहत किसी को हायर करने से पहले 49 परसेंट उसकी टेकनिकल स्किल को देखना चाहिए. इस स्किल पर सुधार लाया जा सकता है. बाकी बचे हुए प्रतीशत ये देखना चाहिए कि वो इंसानी तौर पर कैसा है? उसके ज़ज्बात कैसे हैं?

ये इमोशनल स्किल बहुत ज़रूरी होती हैं. इनको पास किए बिना आप किसी को भी नौकरी नहीं दे सकते हैं.

अगर आपको बेस्ट वर्क- फ़ोर्स मिल जाए तो फिर आपको उनका ध्यान भी रखना चाहिए. उन्हें उनके काम का क्रेडिट भी देना चाहिए. साथ ही साथ उन्हें अच्छी सैलरी भी पे करना चाहिए.

अगर आप अपनी वर्क- फ़ोर्स का ध्यान नहीं रखेंगे तो फिर कोई दूसरा रेस्टोरेंट उनका ध्यान रखने लगेगा.

इससे क्या होगा?

इससे आपके पास बेस्ट वर्क फ़ोर्स नहीं रहेगा. इसका सीधा असर आपके बिजनेस के ऊपर ही पड़ेगा.

कस्टमर से फीडबैक भी लेना बहुत ज़रूरी होता है. अच्छा वर्क- फ़ोर्स होने के बाद भी टीम को एक लीडर की तरह आपको ही लीड करना है. इसलिए अपनी कमर कस लीजियेगा और आगे बढ़ते रहिएगा.

विश्वास, सामर्थ्य और शक्ति के साथ आगे बढ़ेंगे तो फिर जीत आपकी ही होगी.

सक्सेसफुल रेस्टोरेंट के लिए अच्छी सर्विस टीम और उनका म्यूचवल रिस्पेक्ट से काम करना बहुत ज़रूरी है

अगर आप रेस्टोरेंट के मालिक हैं. तो फिर आप उतने ही अच्छे होंगे जितनी अच्छी आपके पास टीम होगी. इसलिए अच्छी टीम को हायर करिए और उन्हें म्यूचवल रिस्पेक्ट के साथ काम करना भी सिखाइएगा.

आपकी टीम को ये पता होना चाहिए कि सभी एक बराबर हैं. किसी को भी दूसरे को नीचा दिखाने का हक नहीं है.

डैनी मेयर ने भी इस बात को काफी एक्सपीरियंस के बाद समझा था. एक बार उन्होंने कर्मचारियों को परफेक्ट वेटर के ऊपर निबन्ध लिखने को कहा था, तब उन्होंने देखा कि एक वेट्रेस को लोगों ने वेट्रेस ऑफ़ द ईयर कहा था.

इसे सुनने के बाद से ही उस वेट्रेस ने अपने आपको औरों से ऊपर भी समझ लिया था. वो खुद स्पेशल ट्रीटमेंट चाहती थी.

इसलिए आपको इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि सभी लोग एक दूसरे की रिस्पेक्ट करें.

किसी को प्रमोट करते समय भी आपको लीडरशिप स्किल को ज़रूर देखना है. भले ही आप टेकनिकल स्किल को नज़र अंदाज़ कर दें.

इसी के साथ आपको ये पता होना चाहिए कि परफेक्ट टीम भी गलतियाँ करती हैं. इसलिए लीडर के तौर पर टीम को साथ रखना आपकी ही ज़िम्मेदारी है.

सबसे ज़रूरी बात ये है कि आपको भी कभी भी किसी भी स्टाफ से गलत व्यवहार नहीं करना है. भले ही किसी की भी कोई भी गलती हो. बिजनेस और जिंदगी का गोल्डन रूल याद रखियेगा. दूसरे से उसी तरह पेश आइयेगा जैसा कि आप चाहते हैं कि लोग आपको ट्रीट करें.

याद रखिएगा कि एक रेस्टोरेंट के रूप में, आप केवल भोजन नहीं परोस रहे हैं, आप इंसानियत की सेवा कर रहे हैं

कोई भी रेस्टोरेंट तभी आगे जा सकता है. जब उसे लोकल्स लोग पसंद करें. ये मैटर ही नहीं करता है कि आपका रेस्टोरेंट कहाँ पर है? वहां के लोग क्या खाते हैं? आपको बस वो सर्व करना है. जो उन्हें पसंद हो, इसके ऊपर रिसर्च भी आपको या फिर आपकी टीम को ही करना पड़ेगा.

आपके रेस्टोरेंट को जितनी जल्दी वहां की कम्युनिटी प्यार करने लगेगी. उतनी ही तेजी से आप सफलता की तरफ आगे बढ़ेंगे.

लोगों को आपके यहां आकर ऐसा लगना चाहिए कि वो अपने ही दूसरे घर में बैठे हुए हैं.

जब आप कम्युनिटी और सोसाइटी से इतना कुछ कमा रहे हैं. तो फिर आपकी भी ज़िम्मेदारी है कि उनके लिए कुछ तो करिए.

आपके रेस्टोरेंट में जब कभी भी किसी की ज़रूरत हो, तो फिर आपकी कोशिश रहनी चाहिए कि वहां की कम्युनिटी में से ही किसी को काम पर रख लें.

डैनी मेयर भी जहाँ-जहाँ अपना कैफ़े या रेस्टोरेंट ओपन करते थे. उनकी कोशिश रहती थी कि ओ लोकल्स की मदद कर सकें.

अगर आपकी कंपनी लोकल्स के लिए खड़ी होगी तो फिर लोकल्स भी समय आने पर आपकी कंपनी का साथ देंगे.

डैनी मेयर के साथ ऐसा कई बार हुआ है. जब लोकल कम्युनिटी ने उनका बहुत साथ दिया है. इसलिए डैनी मेयर ने कई कैफ़े इसलिए भी खोले थे कि वहां की कम्युनिटी को काम मिल सके.

ज़रूरतमंदों की मदद करते रहिए, ऊपर वाला आपका साथ कभी नहीं छोड़ेगा.

‘प्रेस’ की मदद से भी मार्केटिंग हो सकती है, लेकिन वर्ड ऑफ़ माउथ से अच्छा कुछ भी नहीं है

आपके रेस्टोरेंट का माहौल पॉजिटिव होना चाहिए, खाना अच्छा होना चाहिए, स्टाफ बेस्ट होना चाहिए. लेकिन साख बनाने के लिए मार्केटिंग को नहीं भूलना है. आपके रेस्टोरेंट का अच्छा नाम बनाने के लिया क्या किया जा सकता है? इसके लिए आप मीडिया कवरेज का भी रुख कर सकते हैं.

प्रेस से डील करना बहुत मुश्किल होता है. ये ऐसा भी होता है जैसे आप शार्क के ऊपर समुद्र पार करने की कोशिश कर रहे हों. हो सकता है कि वो आपको खत्म कर दे. लेकिन अगर आप ऐसा नहीं करेंगे तो फिर आपका डूबना तय है. अच्छी प्रेस कवरेज के बिना सक्सेसफुल होना मुश्किल हो सकता है.

याद रखियेगा कि रेस्टोरेंट के लिए, सबसे अधिक शक्ति रखने वाला व्यक्ति रेस्टोरेंट का आलोचक होता है. जिसे फूड क्रिटिक भी कहते हैं.

लेकिन फिर भी क्रिटिक से डरने की ज़रूरत नहीं है. अगर खराब रिव्यु हो भी जाता है. तो कोई बड़ी बात नहीं है. आप अडिग रहिएगा और काम करते रहिएगा.

प्रेस कवरेज खराब हो भी जाए तो कोई बात नहीं है. लेकिन ग्राहकों का रिव्यु सही रहना चाहिए. वर्ड ऑफ़ माउथ अच्छा होगा तो उससे सभी पाप धुल जाएंगे.

आपको इस बात का पता होना बहुत ज़रूरी है कि इस सेक्टर में वर्ड ऑफ़ माउथ से बड़ी पब्लिसिटी नहीं हो सकती है. इसलिए गेस्ट को भगवान मानते हुए उनकी सेवा में लगे रहिएगा.

गेस्ट से उनका रिव्यु और फीडबैक लेना भी नहीं भूलियेगा.

अंत में गेस्ट को ही आपके रेस्टोरेंट की सर्विस याद रखनी है. वही अपने परिवार और दोस्तों को आपकी सर्विस के बारे में बताएंगे. इसलिए आपके आगे के कस्टमर भी इसी लिंक से जुड़े हुए हैं.

जिस तरह हर एक फ्रेंड ज़रूरी होता है. उसी तरह आपके लिए हर एक कस्टमर ज़रूरी है. भले ही वो सिंगल हो या फिर परिवार के साथ आपके रेस्टोरेंट में आया हो.

क्या है रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में लॉन्ग टर्म सक्सेस पाने का गोल्डन रूल ?

अगर आप अच्छी डाइनिंग सर्विस देते हैं. तो हो सकता है कि कुछ समय के लिए आपको सक्सेस मिल जाए. लेकिन इस इंडस्ट्री में लंबी रेस का घोड़ा बनना इतना आसान भी नहीं है. उसके लिए काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.

पहला गोल्डन रूल है कि पहले दीजिए और खूब ज्यादा दीजिए’

भले ही इसमें कॉस्टिंग ज्यादा लगे, लेकिन शुरुआत में आपको ये करना ही चाहिए. लेखक न्यू यॉर्क का किस्सा शेयर कर रहे हैं.

वो बताते हैं कि एक दौर था जब वहां तीन टाइम का खाना किसी रेस्टोरेंट में 20 डॉलर में मिल जाता था.

उस समय ज्यादातर रेस्टोरेंट्स सस्ती डिशेज़ मेन्यू में रखने लगे थे. लेकिन मेयर ने उस समय जस्ट अपोजिट काम किया था.

उन्होंने अपने रेस्टोरेंट में 20 डॉलर में सबसे महंगी डिश सर्व करने की शुरुआत कर दी थी.

इसकी कॉस्टिंग काफी ज्यादा पड़ती थी. ऐसा भी होता था कि उन्हें फायदा नहीं होता था. लेकिन मेयर को इसका लंबे समय के लिए फायदा मिला था.

इससे उनका एक तगड़ा कस्टमर बेस तैयार हो चुका था.

दूसरा गोल्डन रूल है कि अपने बिजनेस के एथिक्स को हमेशा याद रखिएगा’

याद रखिएगा कि कस्टमर और स्टाफ किसी भी इन्वेस्टर से ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं. कस्टमर ही भगवान है और स्टाफ ही आपकी शक्ति हैं.

आपकी पहली प्राथमिकता क्या है? आपके स्टाफ और गेस्ट ही आपकी पहली प्राथमिकता हैं. उनका ख्याल रखने की कोशिश करिए, वो आपके बिजनेस का ख्याल रख लेंगे.

रेस्टोरेंट सेक्टर में भी टाइमिंग का महत्त्व बहुत ज्यादा है, इसके बिना सक्सेस मुश्किल है

एक सफल रेस्टोरेंट व्यवसाय स्थापित करने के बाद, आपका सबसे कठिन निर्णय होगा कि इसका विस्तार कैसे और कब करना है?

मेयर के लिए भी ये फैसला लेना काफी ज्यादा मुश्किल था. इसके पीछे कारण ये था कि जब उनके पिता जी ने अपने बिजनेस का विस्तार किया था. तो वो बिजनेस फेल हो गया था. इसलिए मेयर के मन में भी ये डर बैठ गया था कि कहीं जल्दी-जल्दी विस्तार करने से उनका बिजनेस भी ठप्प तो नहीं हो जायेगा?

इसलिए लेखक यहां सलाह देना चाहते हैं कि शुरूआती 3 सालों में तो रेस्टोरेंट के विस्तार के बारे में ना सोचें. इस समय सिर्फ अपनी स्किल्स के ऊपर ही काम करते रहें.

अपनी सर्विस को बेस्ट करते रहिए. इस समय आपका फोकस होना चाहिए कि ब्रांड कैसे बनाया जाए?

उस दिशा में मेहनत करते रहिएगा.

सही अवसर की तलाश करिए, जब आप रेडी हो जाएंगे तो फिर आपको अपने आप ही पता भी चल जाएगा.

अपने रेस्टोरेंट का विस्तार करने से पहले अपने स्टाफ से बात भी ज़रूर करियेगा. जो लोग आपके लिए काम कर रहे हैं. उनका ओपिनियन भी काफी ज्यादा मैटर करता है.

कभी भी ये ख्याल मत ले आइयेगा कि- “ये तो मेरे लिए काम करता है, इसे क्या ही मालुम होगा?” याद रखियेगा कि ज्ञान कहीं भी हो सकता है. आईडिया किसी का भी काम कर सकता है.

बिजनेस को विस्तार करने के लिए सही समय का ध्यान रखियेगा. अगर आप सही टाइम पर चौका मारेंगे तो फिर आपकी टीम भी ज़रूर जीतेगी.

फ़ूड के प्रति पैशन और लोगों के प्रति प्यार और सम्मान ही आपको इस बिजनेस में आगे लेकर जाएगा. इसलिए बड़ा सोचते रहिए, दूसरों का सम्मान करते रहिए और अपने काम से प्यार भी करते रहिए.

मेयर ने भी अपने काम को स्ट्रेटजी के साथ आगे बढ़ाया था. वो कहते हैं कि काम का विस्तार आपको काफी ज्यादा आगे लेकर जा सकता है. बशर्ते, आप उसको प्लानिंग और स्ट्रेटजी के साथ करने की कोशिश करें.

इसलिए विस्तार के लिए भी अच्छी टीम को हायर करना मत भूलिएगा.

Conclusion

आपको फ़ूड इंडस्ट्री में बिना हॉस्पिटैलिटी स्किल के लंबे समय तक सफलता नहीं मिल सकती है. इसलिए इस सेक्टर में आने से पहले काफी जगह घूमने का प्रयास भी करिएगा. जितनी जगह आप घूमने जाएंगे, उतनी जगह का कल्चर भी अपने साथ लेकर आएंगे. कल्चर से खाने की शुरुआत होती है और शुरुआत अच्छी होना बहुत ज़रूरी है.

क्या करें?

आप अपने रेस्टोरेंट में सबसे पहले जिन लोगों के साथ जाते हैं, वे आपके कर्मचारी होते हैं. यदि आपके कर्मचारी खुश हैं, तो वो लोग आपके गेस्ट को भी खुश रखेंगे.

याद रखिए कि आपको शुरुआत ज़मीनी स्तर से ही करनी चाहिए. इसी के साथ ही साथ सफलता मिलने के बाद भी आपके पाँव ज़मीन पर ही रहना चाहिए.

अपना ख्याल रखिए और खुश रहिए.

तो दोस्तों आपको आज का हमारा यह Setting the Table Book Summary in Hindi कैसा लगा ?

आज आपने क्या सीखा ?

अगर आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव है तो मुझे नीचे कमेंट करके जरूर बताये।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए दिल से धन्यवाद,

Wish You All The Very Best.

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